MLC चुनाव में EVM की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल क्यों ?
यह टॉपिक UPSC एवं अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में भारतीय राजव्यवस्था के अंतर्गत राज्य विधान परिषद् चुनाव के बारे में समझ विकसित करने में सहायक होगा.
चर्चा में क्यों?
दोस्तों, भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में आमतौर पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन जब विधान परिषद यानी State Legislative Council के सदस्यों का चुनाव होता है, तो उसमें कागज के मतपत्र (Ballot Paper) का उपयोग किया जाता है।
अक्टूबर 2026 में बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद की सीटों पर हुए चुनावों ने इस विषय को फिर से चर्चा में ला दिया है। इन चुनावों की एक खास बात यह है कि इनमें मतदाता केवल एक उम्मीदवार को चुनने के बजाय उम्मीदवारों को अपनी पसंद के क्रम में प्राथमिकता दे सकते हैं। यही इस मतदान प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है।
आपके मन में सवाल आ सकता है कि जब EVM से चुनाव कराना संभव है, तो विधान परिषद के चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल क्यों किया जाता है? इसका जवाब हमलोग आगे की चर्चा में देखेंगे.
सबसे पहले कुछ बेसिक टर्म्स को समझ लेते है.
क. MLC क्या होता है?
MLC का पूरा नाम Member of Legislative Council है। हिंदी में इसे विधान परिषद का सदस्य कहते हैं।
भारत के कुछ राज्यों में विधानमंडल के दो सदन होते हैं:
- विधानसभा (Legislative Assembly): यह राज्य का निचला सदन है। इसके सदस्य MLA कहलाते हैं।
- विधान परिषद (Legislative Council): यह राज्य का ऊपरी सदन है। इसके सदस्य MLC कहलाते हैं।
भारत के विधान परिषद् से जुड़ी पूरी चर्चा(गठन, संरचना आदि) पहले के एक ब्लॉग में की गई है. उसे आप इस लिंक से देख सकते हैं.
विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव कौन करता है?
MLC का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार, विधान परिषद के सदस्यों की संरचना मोटे तौर पर इस प्रकार होती है:
| सदस्यता का प्रकार | लगभग कितना हिस्सा | चुनाव या चयन कौन करता है? |
| स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र | एक-तिहाई | नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों तथा अन्य निर्दिष्ट स्थानीय निकायों के सदस्य |
| विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र | एक-तिहाई | विधानसभा के निर्वाचित विधायक |
| स्नातक निर्वाचन क्षेत्र | एक-बारहवाँ | निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता |
| शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र | एक-बारहवाँ | निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले पंजीकृत शिक्षक मतदाता |
| राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्य | शेष लगभग एक-छठा | राज्यपाल |
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में वोट देने के लिए केवल स्नातक होना पर्याप्त नहीं है। निर्धारित शर्तों के साथ मतदाता सूची में नाम दर्ज होना भी आवश्यक है। इसी तरह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी निर्धारित पात्रता और पंजीकरण की शर्तें पूरी करनी होती हैं।
अब मुख्य प्रश्न: MLC चुनाव में बैलेट पेपर का इस्तेमाल क्यों होता है?
इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण है एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote—STV)।
विधान परिषद की निर्वाचित सीटों के लिए संविधान में आनुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की गई है। इसमें मतदाता उम्मीदवारों के प्रति अपनी प्राथमिकता दर्ज करते हैं।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और चुनाव संचालन नियम दोनों में MLC चुनावों में मतपत्र द्वारा मतदान का प्रावधान है। EVM में परिवर्तन के लिए चुनाव आयोग द्वारा अनुमोदित नई तकनीक के साथ-साथ कानून में भी बदलाव की आवश्यकता होगी।
अनुच्छेद 171(4) में कहा गया है कि ये चुनाव "एकल हस्तांतरणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार" आयोजित किए जाएंगे।
नोट: अनुच्छेद 80(4) विधायकों द्वारा राज्यसभा चुनावों के लिए समान प्रणाली प्रदान करता है, और अनुच्छेद 54 और 55 राष्ट्रपति चुनाव के लिए इसका उपयोग करते हैं।
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए।
मान लीजिए, किसी निर्वाचन क्षेत्र में चार उम्मीदवार हैं:
- उम्मीदवार A
- उम्मीदवार B
- उम्मीदवार C
- उम्मीदवार D
आपको उम्मीदवार A सबसे अच्छा लगता है, उम्मीदवार C दूसरा अच्छा लगता है और उम्मीदवार B तीसरा।
ऐसी स्थिति में आप मतपत्र पर इस तरह प्राथमिकता दर्ज कर सकते हैं:
| उम्मीदवार | आपकी प्राथमिकता |
| उम्मीदवार A | 1 |
| उम्मीदवार C | 2 |
| उम्मीदवार B | 3 |
| उम्मीदवार D | 4 |
यहाँ संख्या लिखकर आप बताते हैं कि आपकी पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी पसंद कौन है।
पहली प्राथमिकता यानी '1' दर्ज करना आवश्यक होता है। आगे की प्राथमिकताएँ दर्ज करने के नियम संबंधित चुनाव की प्रक्रिया के अनुसार लागू होते हैं।
सामान्य EVM में समस्या क्या है?
लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाता सामान्यतः अपने पसंदीदा उम्मीदवार के सामने लगा बटन दबाता है। इस प्रक्रिया में वह एक उम्मीदवार को अपना वोट देता है।
लेकिन STV प्रणाली में उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में रखना होता है। जरूरत पड़ने पर किसी उम्मीदवार के मतपत्र पर दर्ज अगली प्राथमिकता के आधार पर वोट को दूसरे उम्मीदवार के खाते में स्थानांतरित किया जा सकता है।
वर्तमान मतदान व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली सामान्य EVM और MLC चुनाव की इस प्राथमिकता-आधारित प्रक्रिया के बीच यही प्रमुख व्यावहारिक अंतर है।
इसलिए इन चुनावों में बैलेट पेपर का उपयोग किया जाता है, जिस पर मतदाता अपनी प्राथमिकताएँ लिख सकता है।
अब मान लीजिए, पहली प्राथमिकता की गिनती में किसी उम्मीदवार को जीत के लिए आवश्यक मत नहीं मिलते।
ऐसी स्थिति में लागू नियमों के अनुसार सबसे कम मत पाने वाले उम्मीदवार को बाहर किया जा सकता है। उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली वैध प्राथमिकताओं को देखा जाता है और मतों को शेष उम्मीदवारों के बीच स्थानांतरित किया जाता है।
इस प्रक्रिया में एक उम्मीदवार के बाहर होने के बाद भी मतदाता की अगली पसंद का उपयोग किया जा सकता है। यही STV प्रणाली की विशेषता है।
Single Transferable Vote (STV) प्रणाली क्या है?
STV का अर्थ है एकल संक्रमणीय मत प्रणाली।
इस प्रणाली में मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार प्राथमिकता देता है। यदि उसकी पहली पसंद का उम्मीदवार निर्धारित शर्तों के अनुसार चुनाव जीतने में सफल नहीं होता या मतगणना से बाहर हो जाता है, तो उसके मतपत्र पर दर्ज अगली वैध प्राथमिकता का उपयोग किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि :
- मतदाता उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में रखता है।
- मतगणना में केवल पहली पसंद के वोट ही हमेशा निर्णायक नहीं होते।
- नियमों के अनुसार अगली प्राथमिकताओं के आधार पर मतों का हस्तांतरण हो सकता है।
विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था समझना थोड़ा मुश्किल होता है. इसलिए इसे एक काल्पनिक उदाहरण से समझते हैं
मान लीजिए कि किसी चुनाव में 100 वैध मतपत्र हैं और तीन उम्मीदवार हैं।
पहली प्राथमिकता के वोट इस प्रकार मिलते हैं:
| उम्मीदवार | पहली प्राथमिकता के वोट |
| A | 40 |
| B | 35 |
| C | 25 |
| कुल | 100 |
मान लीजिए कि इस चुनाव में जीत के लिए 51 मतों की आवश्यकता है।
इस स्थिति में किसी भी उम्मीदवार को पहली गिनती में 51 मत नहीं मिले।
अब लागू मतगणना नियमों के अनुसार सबसे कम मत पाने वाले उम्मीदवार C को बाहर किया जा सकता है। उसके मतपत्रों पर दर्ज दूसरी प्राथमिकताओं को देखा जाएगा।
मान लीजिए, C के 25 मतपत्रों में से 15 पर पहली प्राथमिकता A और 10 पर B है।
अब गणना होगी:
- A = 40 + 15 = 55
- B = 35 + 10 = 45
इस उदाहरण में A को 55 मत मिल जाते हैं और वह आवश्यक 51 मत प्राप्त कर लेता है। अब आपके लिए इस व्यवस्था को समझना आसान हो गया होगा.
यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि कई बार कई चरणों में गणना के बाद परिणाम निकलता है. ऐसे में इस बहु-चरणीय प्रक्रिया में प्रत्येक मतपत्र पर वरीयता डेटा की आवश्यकता होती है, और इसलिए कागजी मतपत्रों की आवश्यकता होती है क्योंकि मानक EVM और VVPAT प्रणाली इसे दर्ज करने में सहायक नहीं होती है।
MLC चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल के फायदे
बैलेट पेपर के इस्तेमाल से मतदाता अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्ज कर सकता है।
इसके प्रमुख फायदे हैं:
1. प्राथमिकता दर्ज करने की सुविधा
मतदाता उम्मीदवारों के सामने 1, 2, 3 आदि लिखकर अपनी पसंद का क्रम बता सकता है।
2. मतों के हस्तांतरण में सुविधा
जब कोई उम्मीदवार मतगणना से बाहर होता है, तो उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली वैध प्राथमिकताओं के अनुसार मतों का हस्तांतरण किया जा सकता है।
3. मतपत्र की जाँच
मतगणना के दौरान मतपत्र पर दर्ज प्राथमिकताओं की जाँच की जा सकती है। हालाँकि, गलत तरीके से प्राथमिकताएँ दर्ज करने पर मतपत्र अमान्य भी हो सकता है।
हालाँकि बैलेट पेपर प्रणाली की चुनौतियाँ भी हैं
बैलेट पेपर के इस्तेमाल से कुछ व्यावहारिक समस्याएँ भी सामने आती हैं जैसे
(क) मतगणना में अधिक समय
सामान्य चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार के वोटों की गिनती करके परिणाम निकाला जा सकता है। लेकिन MLC चुनाव में कई बार प्राथमिकताओं के आधार पर मतों का हस्तांतरण करना पड़ता है।
इस कारण मतगणना में अधिक समय लग सकता है।
(ख) मतपत्र अमान्य होने की संभावना
यदि मतदाता निर्धारित नियमों के अनुसार प्राथमिकताएँ दर्ज नहीं करता, तो उसका मतपत्र अमान्य हो सकता है।
(ग) अधिक मानवीय श्रम
मतपत्रों को अलग-अलग करना, उनकी वैधता की जाँच करना और कई चरणों में मतगणना करना श्रमसाध्य हो सकता है।
(घ) पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने की आवश्यकता
मतगणना की प्रक्रिया जटिल होने के कारण चुनाव अधिकारियों को प्रत्येक चरण में नियमों का पालन करना पड़ता है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि परिणाम सही ढंग से निकाला गया है।
क्या भविष्य में MLC चुनाव EVM से हो सकते हैं?
सैद्धांतिक रूप से ऐसी तकनीक विकसित की जा सकती है जो उम्मीदवारों की प्राथमिकताओं को दर्ज करने और मतों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को संभाल सके।
लेकिन इसके लिए मशीन और चुनावी प्रक्रिया को संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होना होगा।
ऐसी व्यवस्था में यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि:
- मतदाता अपनी प्राथमिकताएँ सही ढंग से दर्ज कर सके।
- प्रत्येक मत की गणना निर्धारित नियमों के अनुसार हो।
- मतों के हस्तांतरण की प्रक्रिया सही हो।
- मतदान की गोपनीयता सुरक्षित रहे।
- मतगणना और परिणामों का सत्यापन किया जा सके।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि EVM से STV प्रणाली का चुनाव कराना तकनीकी रूप से हमेशा असंभव है। वर्तमान व्यवस्था में बैलेट पेपर का इस्तेमाल प्राथमिकता-आधारित मतदान की प्रक्रिया के अनुरूप किया जाता है।
ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के अधिकांश चुनाव मतपत्रों के माध्यम से ही होते हैं। केवल केरल, सिक्किम, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ही ग्राम पंचायत चुनाव EVM के जरिये होते हैं।
निष्कर्ष:
स्पष्टतः विधान परिषद के चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल भारतीय चुनावी व्यवस्था की एक विशेष आवश्यकता से जुड़ा है। यहाँ मतदाता उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में रखते हैं और आवश्यकता पड़ने पर मतों को अगली वैध प्राथमिकताओं के अनुसार स्थानांतरित किया जाता है।
Reference: The Hindu





