विकसित भारत@2047
हाल ही में नीति आयोग में एक खास रिपोर्ट लॉन्च हुई है - "विकसित भारत@2047 में देखभाल करने वालों को सशक्त बनाने के लिए देखभाल रणनीतियों की पुनर्कल्पना"। इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें देखभाल करने वालों को ही देखभाल व्यवस्था के केन्द्र में रखा जाएगा। अब देखभाल को सिर्फ "काम" नहीं, बल्कि एक कुशल, सम्मानजनक और मूल्यवान पेशा के तौर पर देखा जाएगा।
रिपोर्ट में 5 चीजों पर खास जोर दिया गया है:
| 1. | गुणवत्ता वाली देखभाल हर परिवार तक पहुंचे |
| 2. | देखभालकर्ताओं को पेशेवर पहचान और इज्जत मिले |
| 3 | उनके अपने स्वास्थ्य और कल्याण का भी ध्यान रखा जाए |
| 4 | सरकार, संस्थान और समुदाय मिलकर काम करें |
| 5 | परिवारों को भरोसेमंद और सस्ती देखभाल सेवाएं मिलें |
साथ ही रिपोर्ट कहती है कि आने वाले समय में बुजुर्गों, बच्चों और बीमारों की देखभाल की मांग बहुत बढ़ेगी। इसके लिए हमें ट्रेनिंग प्राप्त देखभालकर्ताओं की एक पूरी फौज तैयार करनी होगी। अच्छी खबर ये भी है कि भारतीय देखभालकर्ता पेशेवरों के लिए दुनिया भर में रोजगार के बड़े मौके खुल रहे हैं।
"देखभाल रणनीतियों की पुनर्कल्पना" रिपोर्ट के बारे में –
नीति आयोग के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता प्रभाग ने ये रिपोर्ट तैयार की है। इसे बनाने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों से बात की गई, दूसरे देशों के मॉडल देखे गए, सर्वे किए गए और जमीन पर जाकर हालात समझे गए।
रिपोर्ट का मकसद साफ है - भारत को देखभाल सेवाओं में दुनिया का लीडर बनाना और इस क्षेत्र में मौजूद बड़े मौके पहचानना।
रिपोर्ट मानती है कि देखभाल सिर्फ सेवा नहीं है। ये भारत के सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नींव है। "विकसित भारत@2047" का सफर बिना समावेशी और टिकाऊ देखभाल के पूरा नहीं हो सकता।
रणनीतिक स्तंभों पर फोकस:- सारी सिफारिशें 6 बड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द हैं जैसे नीति निर्माण, देखभालकर्ताओं को पेशेवर दर्जा, स्किल्ड वर्कफोर्स बनाना, वैश्विक सहयोग, सामाजिक सुरक्षा, और परिवार-समुदाय आधारित देखभाल।
इस रिपोर्ट में एक्शन प्लान का भी जिक्र किया गया है। इसमें राष्ट्रीय देखभाल नीति बनाने और राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद स्थापित करने की बात कही गई है। ताकि देखभाल का काम असंगठित और अनौपचारिक न रहे, बल्कि एक संगठित और पेशेवर व्यवस्था बन सके।
विकसित भारत @2047 क्या है?
भारत ने अब 2047 को अपनी डेडलाइन तय कर ली है - यानी आजादी की 100वीं सालगिरह पर खुद को एक विकसित राष्ट्र के रूप में देखना।‘विकसित भारत @ 2047’ का सपना सिर्फ बड़े-बड़े आंकड़े नहीं है। इसका मतलब है लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, हर व्यक्ति की आय 20,000 से 25,000 डॉलर के बीच, गरीबी न्यूनतम और जीवन-स्तर ऊंचा। लेकिन असली बात ये है कि ये विकास सिर्फ तेज़ी से नहीं, सबको साथ लेकर होना चाहिए। यानी समावेशी हो, पर्यावरण के लिए टिकाऊ हो और तकनीक से चलने वाला हो।
विकसित भारत 2047 : प्रमुख लक्ष्य
विकसित भारत @ 2047 सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि 100 साल की आजादी पर देश के लिए तय किया गया रोडमैप है। इसके मुख्य लक्ष्य सीधे-सीधे आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं:
| अर्थव्यवस्था | भारत को लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना। |
| आय | विकसित देशों जैसी उच्च प्रति व्यक्ति आय हासिल करना। |
| गरीबी | गरीबी को 1% से भी कम लाना। |
| महिलाएं | महिला कार्यबल की भागीदारी को 50-70% तक बढ़ाना। निर्यात: कुल निर्यात को 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना। |
| ऊर्जा | 1500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता खड़ी करना। |
| शिक्षा | देश में 100% साक्षरता सुनिश्चित करना। |
भारत की वर्तमान स्थिति
अभी हकीकत ये है कि विश्व बैंक के हिसाब से भारत एक निम्न-मध्यम आय वाला देश है। हमारी प्रति व्यक्ति आय करीब 2,612 डॉलर ही है। विकसित राष्ट्र बनने के लिए हमें अपनी प्रति व्यक्ति GNI में लगभग 6 गुना की बढ़ोतरी करनी होगी। ये कोई छोटी छलांग नहीं है। इसके लिए अगले 20 सालों तक लगातार 8% या उससे ज्यादा की आर्थिक ग्रोथ बनाए रखनी पड़ेगी। यानी हर साल बिना रुके, बिना लड़खड़ाए आगे बढ़ना होगा।
सीधे शब्दों में कहें तो "विकसित भारत 2047" का सपना बहुत महत्वाकांक्षी है। इसे पाने के लिए खेती, उद्योग, शिक्षा, तकनीक और गांव-शहर सबको एक साथ तेज़ी से दौड़ना होगा। चुनौती बड़ी है, पर अगर सही दिशा और मेहनत रही तो ये छलांग मुमकिन भी है।
विकसित राष्ट्र बनने की प्रमुख चुनौतियाँ
"विकसित भारत 2047" तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है। सबसे बड़ी अड़चन है ग्रोथ की रफ्तार। अभी हम 6.3% - 6.8% की ग्रोथ कर रहे हैं, लेकिन 2047 का लक्ष्य पाने के लिए इसे 8% से ऊपर लगातार रखना होगा।
दूसरी चुनौती है "मध्य-आय जाल"। यानी सस्ते मजदूर वाले कामों से निकलकर हाई-टेक और उच्च-मूल्य वाले उद्योगों में न जा पाना। अगर ऐसा हुआ तो हम बीच में ही फंस सकते हैं।
संरचना की गड़बड़ी भी है। आज भी 46% लोग खेती पर निर्भर हैं, जबकि GDP में खेती का हिस्सा सिर्फ 18% है। इसका मतलब है ज्यादा लोग कम उत्पादन कर रहे हैं। रोजगार और कौशल एक और बड़ा मुद्दा है। सिर्फ 4.4% युवाओं को ही औपचारिक ट्रेनिंग मिली है और 51% ग्रेजुएट ही नौकरी के लायक माने जाते हैं।
ऊपर से निवेश की कमी है। हमारी GDP का ज्यादातर हिस्सा खर्च पर चला जाता है। निजी निवेश और बॉन्ड मार्केट अभी उतने मजबूत नहीं हैं जितने चाहिए।
सीधे शब्दों में कहें तो तेज ग्रोथ, बेहतर कौशल, कृषि से उद्योग तक शिफ्ट और ज्यादा निवेश की जरूरत है। इन चार मोर्चों पर अगर हम छलांग लगा पाए, तभी 2047 का सपना हकीकत बनेगा।
निष्कर्ष
विकसित भारत @ 2047’ सिर्फ GDP और डॉलर का खेल नहीं है। ये 100 साल की आजादी पर भारत के सभ्यतागत पुनर्जन्म का सपना है। इस लक्ष्य तक हम तभी पहुंचेंगे जब तेज ग्रोथ के साथ-साथ 4 चीजों को बराबर तवज्जो मिले - समावेशिता यानी सबको साथ लेकर चलना, स्थिरता यानी पर्यावरण का ध्यान, तकनीकी नवाचार और इंसान-केंद्रित विकास। अगर नीति आयोग जैसे संस्थान मजबूत हों, निजी क्षेत्र पूरी ताकत से जुड़े और हम हरित औद्योगीकरण को अपनाएं, तो भारत सिर्फ एक आर्थिक महाशक्ति ही नहीं बनेगा। बल्कि ये "विकास का भारतीय मॉडल" बनकर ग्लोबल साउथ के लिए भी रास्ता दिखा सकता है।
विकसित भारत @ 2047’ जैसे टॉपिक बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के Mains GS Paper 2 (भारतीय राजव्यवस्था/अर्थव्यवस्था और भूगोल) और निबंध के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।









