श्वेत क्रांति 2.0
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में श्वेत क्रांति 2.0 के कार्यान्वयन के संदर्भ में जानकारियों को साझा किया है। उन्होंने बताया है कि इस पहल के अंतर्गत, सहकारिता मंत्रालय ने आच्छादित न किए गए पंचायतों/गांवों में 75,000 नई दुग्ध सहकारी समितियों (डीसीएस) के गठन तथा 46,422 विद्यमान दुग्ध सहकारी समितियों (डीसीएस) को सुदृढ़ करने की परिकल्पना की है। अब तक, 24097 नई डीसीएस का गठन किया गया है और 31, 394 मौजूदा डीसीएस को सशक्त किया गया है। केवल बिहार में 2985 डीसीएस का गठन किया गया है।
श्वेत क्रांति 2.0 की प्रगति की समीक्षा नियमित रूप से सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित मासिक राज्य समीक्षा बैठकों तथा त्रैमासिक राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलनों के दौरान की जाती है।
इसके अतिरिक्त, श्वेत क्रांति 2.0 की प्रगति की समीक्षा पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के समन्वय से आयोजित वार्षिक क्षेत्रीय कार्यशालाओं में भी की जाती है।
मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदम
मंत्रालय ने नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन और मौजूदा डेयरी सहकारी समितियों को सशक्त करने के लिए पहल के अंतर्गत दुग्ध के प्रापण और डेयरी अवसंरचना को बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, जिसमें बल्क मिल्क कूलर, स्वचालित दुग्ध संग्रह इकाइयों, दुग्ध परीक्षण और गुणवत्ता उपस्कर, प्रसंस्करण और शीतलन अवसंरचना, और डेयरी सहकारी समितियों को कार्यशील पूंजी और तकनीकी सहायता के लिए वित्त पोषण सहायता शामिल है।
श्वेत क्रांति 2.0 क्या है?
सहकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2024 में श्वेत क्रांति 2.0 का शुभारंभ किया गया है।
इसका प्रमुख उद्देश्य महिला सशक्तीकरण, कुपोषण दूर करना और दुग्ध उत्पादन बढ़ाना है। यह 1970 की "ऑपरेशन फ्लड" यानी श्वेत क्रांति के मॉडल पर आधारित है।
इसका प्रमुख लक्ष्य 5 साल में सहकारी समितियों द्वारा दुग्ध खरीद को 660 लाख लीटर/दिन से बढ़ाकर 1000 लाख लीटर/दिन करना है। रोजाना 100 मिलियन किलो दूध की खरीद करना है।
इसके क्रियान्वयन के लिए 2 लाख नई MPACS यानी बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियाँ बनाई जाएंगी। इसका फोकस उन पंचायतों पर जहाँ अभी कृषि/डेयरी/मत्स्य की सहकारी समिति नहीं है। क्रियान्वयन के लिए SOP सहकारिता मंत्रालय ने NABARD + NDDB के साथ मिलकर बनाई।
डेयरी में बड़ी संख्या में महिलाएँ काम करती हैं। गुजरात में ही डेयरी का कारोबार 60,000 करोड़ है। इस पहल से महिलाओं को औपचारिक रोजगार और आय मिलेगी। दूध की उपलब्धता बढ़ने से गरीब और कुपोषित बच्चों को सीधा फायदा होगा। पोषण सुरक्षा मजबूत होगी।
श्वेत क्रांति 2.0 के प्रमुख घटक
रुपे किसान क्रेडिट कार्ड:- डेयरी किसानों के लिए पूरे देश में रुपे किसान क्रेडिट कार्ड शुरू किया गया है। इससे किसानों को आसान ऋण और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच मिलती है।किसान इससे अपने वित्त का कुशल प्रबंधन कर सकते हैं।
डेयरी सहकारी समितियों में माइक्रो-ATM:- डेयरी सहकारी समितियों में माइक्रो-ATM लगाए जाएंगे। इससे बैंकिंग सेवाएं सीधे किसानों के दरवाजे तक पहुंचेंगी।यह कदम वित्तीय समावेशन और सुविधा को बढ़ाता है।
PACS का कम्प्यूटरीकरण:- प्राथमिक कृषि ऋण समितियों - PACS के कम्प्यूटरीकरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया - SOP जारी की गई है। इस डिजिटल बदलाव से प्रक्रियाएं सुव्यवस्थित होंगी। ऋण और सहकारी गतिविधियों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
प्रमुख चुनौतियाँ
सहकारिता का असमान विस्तार- गुजरात, केरल में मजबूत सहकारी नेटवर्क हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड में कवरेज 10% से भी कम है। इससे पूरे देश में उत्पादन समान रूप से नहीं बढ़ पा रहा।
उत्पादन वृद्धि में गिरावट- दूध उत्पादन की वार्षिक दर 2018-19 में 6.47% थी जो 2022-23 में घटकर 3.83% रह गई।
क्षेत्रीय असमानता- उपज और प्रति व्यक्ति उपलब्धता में बड़ा अंतर है। उदा: पंजाब में प्रति पशु 13.49 किग्रा/दिन, जबकि पश्चिम बंगाल में सिर्फ 6.30 किग्रा/दिन।
कम पशु उत्पादकता- भारत में औसत उत्पादकता 1777 किग्रा/पशु/वर्ष है, जबकि विश्व औसत 2699 किग्रा/पशु/वर्ष है।
बीमारियों का बढ़ता प्रकोप- LSD, FMD, ब्लैक क्वार्टर जैसी संक्रामक बीमारियों से मवेशियों की उत्पादकता घट रही है।
चारा संकट- ICAR के अनुसार 12% हरा चारा, 23% सूखा चारा और 30% दाना की कमी है।
नीति और वित्तीय समर्थन की कमी- बजट में डेयरी को बहुत कम हिस्सा। 2023-24 में पशुपालन बजट ₹4,328 करोड़, जबकि कृषि सब्सिडी ₹4 लाख करोड़+ कुल कृषि ऋण में पशुधन का हिस्सा सिर्फ 4% दूध के लिए MSP/FCI जैसी सरकारी खरीद प्रणाली नहीं
अन्य चुनौतियाँ
विपणन समर्थन का अभाव: दूध उत्पादों के लिए निश्चित मूल्य तंत्र नहीं, पर्यावरणीय मुद्दा: डेयरी क्षेत्र मीथेन उत्सर्जन में बड़ा योगदानकर्ता, तकनीक की कमी: कम AI, घटिया जर्मप्लाज्म और तकनीकी स्टाफ की कमी से उन्नत नस्ल विकास धीमा होना।
निष्कर्ष
श्वेत क्रांति 2.0 का लक्ष्य उत्पादन, पोषण और महिला सशक्तीकरण तीनों को एक साथ साधना है। लेकिन इस लक्ष्य तक पहुँचने में कई बाधाएँ हैं। असमान सहकारी नेटवर्क, गिरती उत्पादकता, चारे की कमी, बीमारियाँ और नीति-वित्तीय समर्थन का अभाव सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। साथ ही क्षेत्रीय असंतुलन और तकनीक की कमी उत्पादन वृद्धि को धीमा कर रही है। यदि सरकार, सहकारी समितियों और किसानों के बीच समन्वय बढ़ाकर चारा सुरक्षा, पशु स्वास्थ्य, डिजिटल अवसंरचना और वित्तीय मदद पर काम किया जाए, तो भारत न केवल दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा को भी मजबूत कर सकता है।
श्वेत क्रांति 2.0 का कार्यान्वयन मुख्य रूप से BPSC मुख्य परीक्षा (Mains) के सामान्य अध्ययन प्रपत्र- 2 के अर्थव्यवस्था और भूगोल अनुभाग के अंतर्गत आता है। इसके अलावा यह प्रारंभिक परीक्षा और निबंध के पेपर के लिए अत्यंत उपयोगी है।
Reference :









