कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2026
हाल ही में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया है कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2026 का मसौदा तैयार कर लिया गया है। यह नया विधेयक कीटनाशक अधिनियम, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 को प्रतिस्थापित करेगा विधेयक का उद्देश्य किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना है, जिससे जीवन सुगमता एवं व्यापार सुगमता को बढ़ावा मिले।
उन्होंने बताया है कि किसानों को बेहतर बाजार, भंडारण और मूल्य दिलाने के लिए ई-नाम, एफपीओ, वेयरहाउस और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी योजनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2026 को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्तमान आवश्यकताओं के साथ-साथ जन विश्वास अधिनियम के अनुरूप तैयार कर दिया गया है।
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक का मसौदा दिनांक 30.12.2025 को सभी मंत्रालयों/विभागों और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को टिप्पणियों के लिए भेजा गया था तथा तत्पश्चात दिनांक 07.01.2026 को कीटनाशक निर्माताओं और डीलरों/खुदरा विक्रेताओं सहित आम जनता और हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित करने के लिए इसे सार्वजनिक डोमेन में रखा गया।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और मंत्रालयों/विभागों, कीटनाशक निर्माता संघों, कीटनाशक डीलरों, व्यक्तिगत कीटनाशक निर्माताओं, किसानों, गैर सरकारी संगठनों आदि से कीटनाशक प्रबंधन और विनियमन के विभिन्न पहलुओं, जिनमें डेटा संरक्षण भी शामिल है, पर बड़ी संख्या में सुझाव/टिप्पणियां प्राप्त हुई हैं।
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2026 के मुख्य प्रावधान
नियामक ढांचे का आधुनिकीकरण :- वास्तविक आवेदकों और सत्यापित विनिर्माण सुविधाओं को ही पंजीकरण मिलेगा। इससे गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता वाले कीटनाशकों का ही उत्पादन सुनिश्चित होगा।
एकीकृत केंद्रीय नियंत्रण:- खण्डित राज्य-स्तरीय प्रणालियों को खत्म करके कीटनाशक विनियमन को "संघ सूची" का विषय बनाया गया है। अब पूरे देश में एक जैसे नियम लागू होंगे।
दो-स्तरीय संस्थागत ढांचा
केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड:- नीति, सुरक्षा मानकों और वैज्ञानिक सलाह के लिए शीर्ष सलाहकार निकाय।
पंजीकरण समिति: कीटनाशकों का पंजीकरण देना, समीक्षा करना, निलंबित या रद्द करने के लिए कार्यकारी तकनीकी निकाय।
गुणवत्ता आश्वासन:- परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए अनिवार्य प्रत्यायन। उद्देश्य: किसानों तक केवल मानक और गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक पहुंचाना।
स्थानीय स्तर पर प्रवर्तन:- राज्य स्तरीय अधिकारी अपराधों का शमन कर सकेंगे और दंड तय कर सकेंगे। इससे जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत होगी।
संतुलन और जीवन सरलता:- विधेयक का उद्देश्य है - उद्योग के लिए "व्यापार सुगमता" और किसानों के लिए "जीवन सुगमता"। डिजिटल रजिस्टर, ट्रैकिंग और पारदर्शिता से सेवा वितरण बेहतर होगा।
डिजिटल समावेशन और किसान-केंद्रित नीति : सभी प्रक्रियाएं डिजिटल होंगी। इससे आवेदनों में देरी कम होगी और किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिलेंगे।
मुद्दे और चिंताएं
इंस्पेक्टर-राज का डर- उद्योग को लाइसेंस-आधारित सख्त व्यवस्था और बार-बार निरीक्षण की आशंका है।
नियामक डेटा सुरक्षा का अभाव- नए शोध पर खर्च किए गए डेटा को सुरक्षा न मिलने से कंपनियां नवाचार में निवेश से बचेंगी। 2008 के मसौदे में 5 साल की डेटा सुरक्षा का प्रावधान था, जिसे अब दोहराया जाना चाहिए।
मूल्य नियंत्रण नहीं- विधेयक में कीमतों पर कोई नियंत्रण नहीं है। उत्पाद की लागत और बिक्री मूल्य पूरी तरह कंपनियों पर निर्भर रहेगा।
अपराधीकरण- लेबलिंग या दस्तावेजीकरण जैसी छोटी प्रक्रियात्मक गलतियों को भी अपराध माना जा सकता है। इन्हें डी-क्रीमनलाइज करके सिर्फ आर्थिक दंड/प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित रखा जाना चाहिए। आपराधिक दंड केवल नकली, मिलावटी या अपंजीकृत कीटनाशकों तक ही सीमित हो।
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2026 के उद्देश्यों को जमीन पर उतारने के लिए निम्न कदम उठाए जाने चाहिए
मजबूत नियामक तंत्र- विधेयक के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक सशक्त केंद्रीय निगरानी और अनुपालन तंत्र स्थापित किया जाए।
किसान जागरूकता- खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए सुरक्षित, उचित और जिम्मेदार कीटनाशक उपयोग पर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
सख्त प्रवर्तन- नकली और अवैध कीटनाशकों के उत्पादन, वितरण व बिक्री पर रोक के लिए प्रवर्तन को कड़ा किया जाए और सीमा/राज्य स्तर पर निगरानी मजबूत की जाए।
डेटा सुरक्षा- कीटनाशक उद्योग से जुड़े अनुसंधान डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल बनाए जाएं, ताकि कंपनियां नवाचार में निवेश कर सकें।
अनुसंधान एवं मूल्यांकन- कीटनाशकों के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों की नियमित निगरानी और मूल्यांकन के लिए R&D को बढ़ावा दिया जाए।
टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा- जैविक खेती और एकीकृत कीट प्रबंधन - IPM जैसी टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि कीटनाशकों पर निर्भरता घटे।
केंद्र-राज्य समन्वय- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए, जिससे विधेयक का कार्यान्वयन पूरे देश में समान और सुचारू रूप से हो।
BPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) में करेंट अफेयर्स और बीपीएससी मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन- 2 (भारतीय अर्थव्यवस्था और भूगोल) के लिए भी यह टॉपिक प्रासंगिक है। इसके अलावा वैकल्पिक विषय ‘कृषि‘ और संबंधित निबंध के संदर्भ में भी यह अत्यंत उपयोगी है।
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