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‘समुद्र मंथन’ योजना की मंजूरी

समुद्र मंथन योजना 2026, राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण, ऊर्जा सुरक्षा, ऑफशोर एक्सप्लोरेशन, BPSC, UPSC हेतु संपूर्ण जानकारी।

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Written by Akhilesh Anand
Published: 3 August 20268 min read
‘समुद्र मंथन’ योजना की मंजूरी
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समुद्र मंथन’ (राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना) को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी है। यह योजना प्रधानमंत्री के उस विजन को साकार करती है, जिसे उन्होंने 2025 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से आधुनिक ‘समुद्र मंथन’ के रूप में पेश किया था ताकि भारत की विशाल अपतटीय ऊर्जा क्षमता का लाभ उठाया जा सके।

समुद्र मंथन’ (राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना) के बारे में

यह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है और इसके लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक कार्यान्वयन हेतु 84,084 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है।

इस योजना के अंतर्गत अपतटीय अन्वेषण (ऑफशोर एक्सप्लोरेशन) की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में विभिन्न तरह के उपाय शामिल हैं।

  • इसमें डिजिटल कार्यक्रम प्रबंधन, क्षमता विकास, तकनीक को अपनाने, हितधारकों को शामिल करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क बढ़ाने के विशेष प्रावधानों का भी समावेश है ताकि देश में अपतटीय अन्वेषण एवं उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जा सके और एक एकीकृत इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।
  • यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, घरेलू स्तर पर अन्वेषण एवं उत्पादन को तेज करने, तकनीकी नेतृत्व को बढ़ावा देने और ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।
  • इसमें उच्च गुणवत्ता वाले भूकंपीय (सिस्मिक) डेटा को बड़े पैमाने पर एकत्रित करना, उसका विश्लेषण एवं व्याख्या करना जैसे कार्य शामिल हैं।
  • गहरे पानी व बहुत गहरे पानी में तेजी से अन्वेषण करने वाली ड्रिलिंग करना और नए एवं कम खोजे गए बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग करना।
  • अपतटीय उत्पादन एवं निकासी हेतु साझा बुनियादी ढांचा विकसित करना; और एक एकीकृत तेल एवं गैस मैन्यूफैक्चरिंग तथा सेवा परिक्षेत्र की स्थापना करना शामिल है।

इससे होने वाले लाभ

  • ‘समुद्र मंथन’ से 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (एमएमटीओई) से अधिक का भंडार जमा होने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
  • इससे अपतटीय अन्वेषण की गतिविधियों में काफी वृद्धि होगी, घरेलू तेल एवं गैस के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग सुदृढ़ होगी और अपतटीय प्रौद्योगिकी एवं सेवाओं का एक ऐसा इकोसिस्टम बनेगा जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होगा।
  • इस योजना से अन्वेषण एवं उत्पादन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में व्यापक निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे उद्योग, नवाचार और आर्थिक विकास से संबंधित दीर्घकालिक अवसर पैदा होंगे।

आर्थिक महत्व

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती:- यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी। इससे कच्चे तेल और गैस के आयात पर निर्भरता घटेगी, जिसके परिणामस्वरूप देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

आर्थिक संवृद्धि को गति:- घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन में वृद्धि से आर्थिक विकास को बल मिलेगा। उद्योगों को सस्ती और निरंतर ऊर्जा उपलब्ध होने से विनिर्माण लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

निवेश और रोजगार के अवसर:- अपतटीय अन्वेषण गतिविधियों में बड़े पैमाने पर निवेश से उद्योग, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र में दीर्घकालिक आर्थिक अवसर सृजित होंगे। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

सामरिक महत्व

ऊर्जा स्वतंत्रता की ओर कदम:- यह पहल भारत को ऊर्जा स्वतंत्रता के लक्ष्य के करीब ले जाएगी। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भू-राजनीतिक दबावों के प्रति हमारी संवेदनशीलता कम होगी।

विकसित भारत’ के विजन से जुड़ाव:- किसी भी विकसित राष्ट्र की नींव ऊर्जा सुरक्षा पर टिकी होती है। यह योजना ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को साकार करने में सहायक होगी।

घरेलू क्षमता का विकास:- घरेलू विनिर्माण और अपतटीय प्रौद्योगिकी के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे भारत वैश्विक अपतटीय सेवाओं और तकनीक के क्षेत्र में एक प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी बन सकेगा।

पर्यावरणीय महत्व

उत्सर्जन में संभावित कमी:- यद्यपि यह जीवाश्म ईंधन आधारित योजना है, परंतु घरेलू उत्पादन बढ़ने से लंबी दूरी के आयात और परिवहन में कमी आएगी। यदि कुशल निष्कर्षण तकनीकों का उपयोग हो तो कुल कार्बन उत्सर्जन घट सकता है।

तकनीक-आधारित दक्षता:- योजना में डिजिटल कार्यक्रम प्रबंधन और उन्नत तकनीकों पर बल दिया गया है। इससे अन्वेषण और उत्पादन प्रक्रिया अधिक कुशल, सुरक्षित और अपेक्षाकृत कम पर्यावरणीय प्रभाव वाली बन सकेगी।

चुनौतियाँ

तकनीकी चुनौतियाँ:- गहरे पानी और अल्ट्रा-डीप वाटर में अन्वेषण एवं ड्रिलिंग के लिए अत्याधुनिक तकनीक, विशेष उपकरण और विशेषज्ञ मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया अत्यधिक महंगी और जटिल है। साथ ही, भूकंपीय डेटा का संग्रहण, 3D मॉडलिंग और उसकी सटीक व्याख्या के लिए उन्नत सॉफ्टवेयर और उच्च तकनीकी दक्षता अनिवार्य है।

पर्यावरणीय चिंताएँ:- अपतटीय अन्वेषण और उत्पादन से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। तेल रिसाव, ड्रिलिंग अपशिष्ट और ध्वनि प्रदूषण समुद्री जैव विविधता के लिए खतरा बनते हैं। तटीय समुदायों की आजीविका और समुद्री जीवन पर इन गतिविधियों के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन व शमन करना एक बड़ी चुनौती है।

उच्च पूंजीगत लागत:- अपतटीय परियोजनाओं में भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए इस योजना का अनुमानित परिव्यय 84,084 करोड़ रुपये है। परियोजनाओं की उच्च लागत और लंबी परिपक्वता अवधि के कारण वित्तीय जोखिम बढ़ जाते हैं, जिससे निजी निवेशकों को आकर्षित करना कठिन हो सकता है।

भू-वैज्ञानिक अनिश्चितताएँ:- नए और कम खोजे गए बेसिनों में हाइड्रोकार्बन की उपस्थिति के बारे में अनिश्चितता अधिक होती है। इससे सफल खोज की संभावना घट जाती है। भंडार की सटीक मात्रा, गुणवत्ता और व्यावसायिक व्यवहार्यता का अनुमान लगाना तकनीकी और वित्तीय दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है।

आगे की राह

तकनीकी क्षमता का विकास 

गहरे और अल्ट्रा-डीप वाटर अन्वेषण के लिए स्वदेशी तकनीक और R&D को बढ़ावा देना।

ONGC, निजी कंपनियों और विदेशी फर्मों के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और JV को प्रोत्साहित करना।

डेटा एनालिसिस के लिए AI और मशीन लर्निंग आधारित भूकंपीय व्याख्या सॉफ्टवेयर अपनाना।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय

अन्वेषण से पहले EIA और समुद्री जैव विविधता आकलन को अनिवार्य बनाना।

तेल रिसाव रोकथाम के लिए आपदा प्रबंधन योजना और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करना।

ग्रीन ड्रिलिंग तकनीकों और शून्य-उत्सर्जन मानकों को अपनाना।

वित्तीय जोखिम कम करना राजस्व साझाकरण मॉडल के तहत जोखिम को सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बाँटना।

सूक्ष्म, मध्यम परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग और कर प्रोत्साहन देना।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से दीर्घकालिक वित्त जुटाना।

भू-वैज्ञानिक डेटा का सुदृढ़ीकरण 

National Data Repository को और मजबूत कर सभी भूकंपीय और कुओं का डेटा पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराना।

कम खोजे गए बेसिनों में फ्रंटियर अन्वेषण के लिए सरकारी वित्तपोषण बढ़ाना।

शैक्षणिक संस्थानों और भू-वैज्ञानिक एजेंसियों को अनुसंधान में जोड़ना।

समन्वय और नीतिगत समर्थन

राज्यों, तटीय समुदायों और उद्योग के बीच समन्वय सुनिश्चित करना। ‘

एकल-खिड़की मंजूरी प्रणाली से परियोजनाओं की समयबद्ध स्वीकृति देना।

निष्कर्ष

अब जबकि भारत एक विकसित देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ‘समुद्र मंथन’ एक ऐसी परिवर्तनकारी राष्ट्रीय पहल है जो देश के अपतटीय ऊर्जा संसाधनों का लाभ उठाएगी, दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी, तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाएगी और अर्थव्यवस्था व भावी पीढ़ियों के लिए स्थायी मूल्य का निर्माण करेगी। पिछले दशक में, सरकार ने अपस्ट्रीम सेक्टर में व्यापक परिवर्तनकारी सुधार किए हैं। इनमें अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) हेतु लगभग पूरे अपतटीय इलाके को खोलना, विधायी एवं अनुबंध  से संबंधित ढांचे को आधुनिक बनाना और राष्ट्रीय डेटा रिपॉजिटरी को सुदृढ़ करना शामिल है। इन्हीं सुधारों को आगे बढ़ाते हुए, ‘समुद्र मंथन’ रणनीतिक सार्वजनिक निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के जरिए तेजी से अपतटीय अन्वेषण के एक नए दौर की शुरुआत करेगा। 

समुद्र मंथन' (राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना) का संबंध BPSC परीक्षा के सामान्य अध्ययन से है। सामान्य अध्ययन पेपर-II (मुख्य परीक्षा) में शामिल भारतीय अर्थव्यवस्था और भूगोल से जुड़े भारत के अपतटीय क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा (तेल और गैस) से है।

Reference:

  1. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2292563&reg=48&lang=2
  2. https://www.pmindia.gov.in/hi/news_updates/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A5%87-84084/
What is the 'Samudra Manthan' scheme?

Samudra Manthan is the National Offshore Exploration Mission approved by the Union Cabinet under PM Modi's chairmanship to tap India's offshore energy potential.

Which ministry runs Samudra Manthan and what is its budget?

It is a central sector scheme of the Ministry of Petroleum and Natural Gas, with 84,084 crore rupees approved for implementation up to FY 2030-31.

When was the vision behind this scheme first announced?

PM Modi first presented the vision of a modern 'Samudra Manthan' from the Red Fort on Independence Day in 2025.

What reserve accumulation does Samudra Manthan aim to accelerate?

The scheme is expected to accelerate accumulation of more than 600 million metric tonnes of oil equivalent (MMTOE) in reserves.

What activities does the scheme cover?

It covers the full offshore exploration value chain, including large-scale collection and analysis of high-quality seismic data, deepwater and ultra-deepwater drilling, and scientific drilling in new and underexplored basins.

How does Samudra Manthan support India's energy security?

By boosting domestic oil and gas exploration and production, the scheme aims to reduce dependence on crude oil and gas imports, saving foreign exchange and strengthening energy security.

What are the main challenges facing this scheme?

Challenges include the high cost and complexity of deepwater and ultra-deepwater drilling technology, environmental concerns such as oil spills and threats to marine biodiversity, high capital costs, and geological uncertainty in underexplored basins.

What environmental safeguards are proposed under the scheme?

The way forward includes making environmental impact assessments and marine biodiversity assessments mandatory before exploration, developing an oil spill disaster management plan, and adopting green drilling technologies.

How is financial risk proposed to be managed?

The plan proposes sharing risk between the government and private sector through a revenue-sharing model, along with viability gap funding and tax incentives for smaller projects.

Is Samudra Manthan relevant to the BPSC syllabus?

Yes, the article links it to General Studies Paper-II of the Mains examination, covering the Indian economy and geography as related to energy security in India's offshore areas.

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