पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन
चर्चा में क्यों है?
हाल ही में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में बताया कि सरकार ने 'पोषण ट्रैकर' नाम का एक डिजिटल ऐप शुरू किया है। इस ऐप का उद्देश्य मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और मिशन पोषण 2.0 की निगरानी करना है।
इस एप्लीकेशन के माध्यम से 5 साल से कम उम्र के बच्चों में बौनापन, कमजोरी और कम वजन आदि ट्रैक किया जाता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को सही समय पर सेवाएं मिल रही हैं या नहीं, इस बात का भी ट्रैकिंग करना आसान हो गया है।
पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन के बारे में
रियल-टाइम रिपोर्टिंग:-आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने स्मार्टफोन से रोज़ का डेटा डालती हैं - जैसे केंद्र खुला या नहीं, कितने बच्चे आए, ECCE यानी खेल-खेल में पढ़ाई हुई या नहीं, बच्चों का वजन-ऊंचाई नापा गया या नहीं, गर्म खाना और THR का वितरण हुआ या नहीं। अब सब कुछ कागज की जगह ऐप पर।
गलतियों पर तुरंत नजर:-ऐप में एक 'सपोर्टिव सुपरविजन' वाला हिस्सा भी है। इससे सुपरवाइज़र, CDPO और DPO लेवल के अधिकारी तुरंत देख पाते हैं कि कहां काम रुका है और फीडबैक दे पाते हैं। ताकि समय पर मदद पहुंच सके।
बेहतर सुविधाएं:-मिशन पोषण 2.0 के तहत पिछले 5 साल में 1,29,415 आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी' बनाया गया है। साथ ही हर केंद्र को बच्चों का सही वजन-ऊंचाई नापने के लिए 4 ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस दिए गए हैं - इन्फैंटोमीटर, स्टैडियोमीटर, बेबी वेट मशीन और मां-बच्चे की वजन मशीन। इनके लिए केंद्र सरकार राज्यों को पैसा भी देती है।
डेटा और कनेक्टिविटी:-कार्यकर्ताओं को डेटा डालने के लिए स्मार्टफोन के साथ डेटा रिचार्ज की सुविधा भी मिलती है, ताकि नेटवर्क की वजह से काम न रुके।
पहले रिपोर्ट महीनों बाद पहुंचती थी। अब पोषण ट्रैकर की वजह से सरकार को तुरंत पता चल जाता है कि किस बच्चे को पोषण मिला, किसे नहीं। डेटा सही होगा तो योजना का असर भी सीधे जमीन पर दिखेगा।
इसकी विशेषताएं और लाभ
आधार-आधारित सत्यापन:-अब फर्जी नाम और राशन की लीकेज पर रोक। लाभार्थी का आधार से वेरिफिकेशन होता है, ताकि मदद सही व्यक्ति तक ही पहुंचे।
फेसियल रिकग्निशन सिस्टम:-आंगनवाड़ी में बच्चा आया या खाना मिला, इसका सबूत अब सेल्फी से। ये फेस-रिकग्निशन वाला फीचर आखिरी स्तर तक सेवा पहुंचने की पक्की गारंटी देता है।
होम विज़िट शेड्यूलर:-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ऐप में ही टूर प्लान बन जाता है। किस घर कब जाना है, किस गर्भवती या कुपोषित बच्चे से मिलना है - सब IT से तय और ट्रैक होता है। कोई छूटता नहीं है।
पोषण कैलकुलेटर:- ऐप में WHO के बच्चों के विकास वाले मानक लगे हैं। बच्चा कुपोषित है या सही वजन पर है, ये तुरंत कैलकुलेट हो जाता है। समय पर एक्शन लिया जा सकता है।
ECCE लर्निंग मटेरियल:- 3 से 6 साल के बच्चों के लिए ऐप में ही खेल-खेल में सीखने वाली सामग्री है, ताकि आंगनवाड़ी सिर्फ खाना ही नहीं, पढ़ाई का भी केंद्र बने।
पोषण ट्रैकर को मिली पहचान सरकार
ये ऐप सिर्फ भारत में ही नहीं, दुनिया भर में सराहा गया है:
WHO और UNICEF जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने पोषण ट्रैकर की तारीफ की है। उन्होंने इसे बच्चों के पोषण और निगरानी के लिए एक अच्छा डिजिटल मॉडल माना।
2023 में G20 महिला सशक्तीकरण मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में इसे दुनिया के सामने दिखाया गया था। 2024 में इसे ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय स्वर्ण पदक मिला।
सबसे बड़ी बात - अप्रैल 2025 में इसे लोक प्रशासन में प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पोषण अभियान क्या है?
पोषण अभियान महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एक बड़ी फ्लैगशिप योजना है। इसे 8 मार्च 2018 को झुंझुनू, राजस्थान से शुरू किया गया था।
इसका मकसद है एक साथ मिलकर काम करना - ताकि किशोरियों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 0-6 साल के बच्चों को सही पोषण समय पर मिले।
इसका मुख्य उद्देश्य हर हाल में बौनापन 2% कम करना और अल्पपोषण 2% कम करना है।
एनीमिया को बच्चों, महिलाओं और किशोरियों में 3% कम करना और जन्म के समय कम वजन - 2% कम करना है। दरअसल पोषण अभियान सिर्फ खाना देने का प्रोग्राम नहीं है।
ये "सही पोषण, पहले 1000 दिन" पर फोकस करता है। यानी गर्भ से लेकर 2 साल तक के बच्चे की सेहत पर सबसे ज्यादा ध्यान देना है। इसी अभियान को आगे बढ़ाने के लिए ही मिशन पोषण 2.0 और पोषण ट्रैकर ऐप बनाए गए हैं, ताकि काम जमीन पर दिखे।
मिशन पोषण 2.0
मिशन पोषण 2.0 जिसे मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के नाम से भी जाना जाता है, भारत सरकार का एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम है। इसे बजट 2021-22 में पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाओं और किशोरी बालिका योजना को एक साथ जोड़कर शुरू किया गया था।
इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय करता है। इसका मुख्य उद्देश्य कुपोषण को कम करना और बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, कल्याण और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाना है।
इसके तहत पोषण सहायता के साथ-साथ 0-3 साल के बच्चों के लिए अर्ली स्टिमुलेशन और 3-6 साल के बच्चों के लिए ECCE यानी प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा पर भी जोर दिया गया है।
इस मिशन की एक खास पहल "सक्षम आंगनवाड़ी" है। इसके अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों को LED स्क्रीन, वॉटर प्यूरिफायर, स्मार्ट शिक्षण उपकरण, पोषण वाटिका और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, ताकि बच्चों को स्वस्थ माहौल के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण सीखने का अवसर भी मिल सके।
निष्कर्ष
पोषण ट्रैकर कल्याणकारी योजनाओं के चलाने के तरीके में एक बड़ा बदलाव है। पहले जहां रिपोर्ट कागज पर और देर से पहुंचती थी, अब वहां रियल-टाइम और डेटा पर आधारित निगरानी हो रही है। लेकिन इसकी कामयाबी इस बात पर टिकी है कि डेटा कितना सही है, गोपनीयता कितनी सुरक्षित है, हर कार्यकर्ता तक डिजिटल सुविधा पहुंच रही है या नहीं, और आंगनवाड़ी बहनों को पूरा सहयोग मिल रहा है या नहीं। अगर ये सब सही रहा, तो जन-केंद्रित और टेक्नोलॉजी से जुड़ा ये पोषण मॉडल सुपोषित और स्वस्थ भारत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
BPSC मुख्य परीक्षा (Mains) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (GS Paper-2) का हिस्सा है। यह एप्लिकेशन महिला एवं बाल विकास और डिजिटल गवर्नेंस (E-Governance) से जुड़े विषयों को कवर करता है।









