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नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी

राष्ट्रीय डिजिटल यूनिवर्सिटी, NDU प्लेटफॉर्म, NEP 2020, SWAYAM Plus, डिजिटल शिक्षा और BPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण जानकारी।

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Written by Akhilesh Anand
Published: 18 August 20266 min read
नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी
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नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी

हाल ही में शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में बताया कि सरकार प्रौद्योगिकी-सक्षम और लचीली शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म बनाने पर विचार कर रही है। इस दिशा में कदम पहले ही 2022-23 के केंद्रीय बजट में उठाया जा चुका है, जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति - NEP 2020 को लागू करने पर विशेष जोर दिया गया था। उसी बजट में राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा भी की गई।

नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी के बारे में

केंद्र सरकार "विश्वस्तरीय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा" को हर छात्र तक पहुंचाने के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में कोविड के कारण स्कूल बंद रहने से जो ‘Learning Loss’ हुआ है, उसे पूरा करने के लिए PM e-Vidya योजना के तहत ‘One Class One TV Channel’ का भी विस्तार किया गया है। इसलिए नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी जैसे प्रयास उसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों की अगली कड़ी मालुम होता है।

इसका फोकस सिर्फ डिग्री देना नहीं, बल्कि विभिन्न भारतीय भाषाओं में ऑनलाइन लर्निंग को बढ़ावा देना भी है। इससे भाषा की बाधा हटेगी और ग्रामीण व दूर-दराज के छात्र भी घर बैठे बेहतर कोर्स कर सकेंगे।

 मुख्य उद्देश्य

इस विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सीटों की कमी की समस्या को हल करना है। डिजिटल माध्यम से पढ़ाई उपलब्ध कराकर यह ज्यादा से ज्यादा छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच देगा।

साथ ही देशभर के विभिन्न संस्थानों के कोर्स को एक ही मंच पर लाकर छात्रों को बेहतर विकल्प भी मिलेंगे। कुल मिलाकर, भारत सरकार का विज़न स्पष्ट है - NEP 2020 के जरिए शिक्षा को छात्र-केंद्रित और तकनीक-आधारित बनाना, ताकि हर छात्र तक सुलभ और लचीली शिक्षा पहुंच सके।

NIELIT डिजिटल यूनिवर्सिटी - NDU प्लेटफॉर्म

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत NIELIT ने अक्टूबर 2025 में “NIELIT डिजिटल यूनिवर्सिटी - NDU प्लेटफॉर्म” लॉन्च किया। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण, दूर-दराज और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराना है।

NDU प्लेटफॉर्म पर AI, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंडस्ट्री 4.0 जैसे भविष्य के टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में ऑनलाइन और हाइब्रिड, स्किल-बेस्ड कोर्स कराए जाते हैं।

आज NDU देश के 750 से अधिक जिलों तक पहुंच चुका है और 2.70 लाख से ज्यादा छात्र इसमें पंजीकृत हैं। यह 100 से अधिक पाठ्यक्रम देता है। रोजगार से जोड़ने के लिए NDU ने एक पूर्व छात्र-सह-प्लेसमेंट पोर्टल भी बनाया है। अक्टूबर 2025 से अब तक 35,000 से ज्यादा छात्र और 190 से अधिक कंपनियां इस पोर्टल से जुड़ चुकी हैं।

NMEICT के तहत SWAYAM Plus

NEP 2020 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शिक्षा मंत्रालय NMEICT योजना के माध्यम से शिक्षा में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।इसी कड़ी में SWAYAM Plus प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इसका फोकस उद्योग-अकादमिक संबंध मजबूत करना और छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाना है।

SWAYAM Plus के कोर्स IT, AI, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सहित 15 क्षेत्रों के 80 से ज्यादा उद्योग साझेदारों के साथ मिलकर तैयार किए गए हैं। अब तक 6 लाख से अधिक छात्रों ने स्किल बढ़ाने के लिए SWAYAM Plus पर नामांकन किया है।

डिजिटल विश्वविद्यालय के पक्ष में तर्क

  • मौजूदा मॉडल की सीमाएँ दूर होंगी: आज का पारंपरिक विश्वविद्यालय मॉडल काफी कठोर हो गया है। यह हर छात्र की अलग-अलग जरूरत, रुचि, वित्तीय स्थिति और सीखने की क्षमता को ध्यान में रखकर शिक्षा नहीं दे पाता। डिजिटल विश्वविद्यालय इस कमी को पूरा कर "कभी भी, कहीं भी" वाली लचीली शिक्षा देगा। छात्र अपनी सुविधा के अनुसार, अपनी गति से सीख सकेंगे।
  • आर्थिक विकास को बढ़ावा: डिजिटल शिक्षा से ज्यादा लोगों तक गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा पहुंचेगी। जब बड़ी संख्या में युवा स्किल्ड होंगे तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था को व्यापक आकार देने में मदद करेगा। इससे प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी और देश की ग्रोथ तेज होगी।
  • बदलती टेक्नोलॉजी के साथ तालमेल: आज की सूचना और AI-आधारित अर्थव्यवस्था में लोगों को लगातार नए कौशल सीखने पड़ रहे हैं। पारंपरिक डिग्री मॉडल इतनी तेजी से अपडेट नहीं हो पाता। डिजिटल यूनिवर्सिटी ऑनलाइन, शॉर्ट-टर्म और स्किल-बेस्ड कोर्स के जरिए लोगों को समय-समय पर अपस्किल और री-स्किल करने का मौका देगी, जिससे वे बदलती नौकरियों के लिए तैयार रहें।
  • विज्ञान और तकनीक में आगे बढ़ने का अवसर : प्रस्तावित डिजिटल यूनिवर्सिटी ‘हब-स्पोक मॉडल’ पर काम करेगी। इसमें टॉप संस्थान ‘हब’ बनकर कंटेंट देंगे और कॉलेज ‘स्पोक’ बनकर उसे छात्रों तक पहुंचाएंगे। इस मॉडल से AI, मशीन लर्निंग, VR, AR और ब्लॉकचेन जैसी उभरती तकनीकों का इस्तेमाल करके अत्याधुनिक ICT प्लेटफॉर्म और डिजिटल कंटेंट बनाए जा सकेंगे। इससे भारत वैज्ञानिक प्रगति और इनोवेशन में भी आगे बढ़ेगा।

डिजिटल विश्वविद्यालयों के विपक्ष में तर्क

  • हाशिये के छात्रों तक सीमित पहुंच : ऑनलाइन शिक्षा से सबकी पहुंच बढ़ेगी, ये जरूरी नहीं। पहली पीढ़ी के छात्र, ग्रामीण, आदिवासी और गरीब परिवारों के पास अक्सर सांस्कृतिक मार्गदर्शन और सपोर्ट सिस्टम नहीं होता जो कॉलेज जाकर मिलता है। साथ ही ये छात्र डिजिटल डिवाइड के दूसरी तरफ खड़े हैं। अगर शिक्षा का मुख्य आधार ही डिजिटल बना दिया गया तो इन्हें "दोहरी मार" झेलनी पड़ेगी - न कॉलेज का माहौल मिलेगा, न ऑनलाइन की सुविधा।
  • व्यक्तिगत शिक्षण का विकल्प नहीं: ऑनलाइन क्लास स्कूल बंद होने पर थोड़ी संलग्नता तो दे सकती है, लेकिन इसे सार्थक शिक्षा - Meaningful Education का पूरा विकल्प नहीं माना जा सकता।कक्षा में शिक्षक-छात्र का संवाद, समूह में सीखना, लैब-प्रैक्टिकल और कैंपस का अनुभव ऑनलाइन से नहीं मिल पाता। शैक्षणिक और सामाजिक विकास के लिहाज से In-Person Learning अब भी बेहतर विकल्प है।
  • बुनियादी चुनौतियां और सामाजिक-आर्थिक बाधाएं; डिजिटल लर्निंग कई जमीनी समस्याओं से जुड़ी है:
    इंटरनेट और बिजली: बार-बार कनेक्टिविटी जाना और पावर कट होना पढ़ाई में बाधा डालता है
    आर्थिक बोझ:हाई-स्पीड इंटरनेट और लैपटॉप/स्मार्टफोन खरीदना हर परिवार के बस की बात नहीं
    डिजिटल साक्षरता की कमी:देश के कई कॉलेज जाने वाले छात्रों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चलाने तक की जानकारी नहीं है
    उपकरणों तक सीमित पहुंच:एक फोन पर पूरे परिवार की पढ़ाई-ऑफिस निर्भर हो जाती है

निष्कर्ष

डिजिटल विश्वविद्यालय NEP 2020 के विज़न को आगे बढ़ाने वाला एक बड़ा कदम है। यह शिक्षा को सुलभ, लचीला और स्किल-आधारित बनाकर "सीटों की कमी" और "Learning Loss" जैसी समस्याओं का समाधान दे सकता है। AI, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी जैसे नए क्षेत्रों के कोर्स और भारतीय भाषाओं में कंटेंट से यह युवाओं की रोजगार क्षमता भी बढ़ाएगा। लेकिन साथ ही हमें डिजिटल डिवाइड, इंटरनेट-बिजली की समस्या और डिजिटल साक्षरता जैसी जमीनी हकीकतों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऑनलाइन शिक्षा व्यक्तिगत कक्षा और कैंपस अनुभव का पूरा विकल्प नहीं बन सकती।इसलिए रास्ता यही है कि डिजिटल + पारंपरिक शिक्षा का हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाए। सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों को मिलकर इंफ्रास्ट्रक्चर, कंटेंट और सपोर्ट सिस्टम मजबूत करना होगा। तभी डिजिटल विश्वविद्यालय सचमुच "हर किसी के लिए, हर भाषा में शिक्षा" के लक्ष्य को हासिल कर पाएगा और भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा।

राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय (NDU), BPSC प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम में करेंट अफेयर्स के अंतर्गत आता है और BPSC मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र II में शासन, शिक्षा नीति और डिजिटल पहल के अंतर्गत आता है।

Reference:-
  1. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2298432&reg=48&lang=2

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