UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट: भारत की स्कूली शिक्षा का हाल
चर्चा में क्यों है?
हाल ही में जारी हुई UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट ने भारत की स्कूली शिक्षा का एक पूरा आईना हमारे सामने रख दिया है। इस रिपोर्ट में देश भर के 14.67 लाख स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और 24.72 करोड़ छात्र शामिल हैं। इतने बड़े आंकड़े खुद बताते हैं कि भारत का स्कूली तंत्र कितना विशाल है।
UDISE+ का मतलब है Unified District Information System for Education Plus । ये शिक्षा मंत्रालय का डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे 2018-19 में पूरे देश के स्कूलों का डेटा इकट्ठा करने के लिए बनाया गया था। आज ये सिर्फ भारत की ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की सबसे बड़ी स्कूल शिक्षा से जुड़ी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम में से एक बन चुकी है। UDISE+ की सबसे बड़ी ताकत यही है कि ये हमें रियल-टाइम और भरोसेमंद डेटा देता है। पहले योजनाएं बनाने के लिए पुराने आंकड़ों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब शिक्षा मंत्रालय को हर जिले, हर स्कूल की ताजा जानकारी तुरंत मिल जाती है। इसी डेटा के सहारे NEP 2020 और समग्र शिक्षा जैसे बड़े कार्यक्रमों की योजना बनती है।
रिपोर्ट में क्या है?
रिपोर्ट की सबसे अच्छी बात ये है कि अब सिर्फ दाखिले ही नहीं बढ़े हैं, बल्कि बच्चे स्कूल में टिक भी रहे हैं। सकल नामांकन अनुपात, शिक्षकों की उपलब्धता, छात्र-शिक्षक अनुपात और एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाने की दर में साफ सुधार दिखा है। वहीं बीच में पढ़ाई छोड़ने यानी ड्रॉपआउट की दर में भी गिरावट आई है।
इसका मतलब है अब शिक्षा सिर्फ कागज पर नहीं, जमीन पर भी आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही स्कूलों की स्थिति भी पहले से बेहतर हुई है। डिजिटल और भौतिक सुविधाओं में इजाफा हुआ है, यानी अब ज्यादा स्कूलों में कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी चीजें मिल रही हैं।
महिला शिक्षकों की भागीदारी बढ़ी है जिससे लड़कियों को भी पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन मिला है। रिपोर्ट में लैंगिक समानता और सामाजिक समावेशन पर भी जोर है। SC, ST, OBC समेत सभी वर्गों के बच्चों की पहुंच स्कूलों तक बेहतर हुई है। कुल मिलाकर ये रिपोर्ट NEP 2020 के लक्ष्यों को जमीन पर उतारने की दिशा में अग्रसर प्रतीत होता हुआ दिख रहा है। अब फैसले अंदाजे से नहीं, बल्कि असली डेटा के आधार पर लिए जा रहे हैं। और यही "साक्ष्य-आधारित योजना" आगे चलकर भारत की शिक्षा को और मजबूत बनाएगी।
भारत के स्कूल तंत्र का आकार और बुनियादी आंकड़े
भारत का स्कूली तंत्र दुनिया में सबसे बड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार औसतन एक स्कूल में अब 7 शिक्षक और 169 छात्र हैं। सबसे अहम बात छात्र-शिक्षक अनुपात है जो 24:1 पर बना हुआ है। NEP 2020 ने इसे 30:1 रखने का लक्ष्य दिया था, तो हम उससे बेहतर स्थिति में हैं। इसका मतलब है कि अब शिक्षक हर बच्चे पर ध्यान दे सकते हैं। साथ ही संसाधनों के बंटवारे में भी सुधार हुआ है। एक-शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या 3% घटकर 1,00,843 और बिना छात्र वाले स्कूल 29% घटकर 5,663 रह गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि सरकार अब शिक्षकों को जरूरत के हिसाब से तैनात कर रही है।

पहुंच और नामांकन में विस्तार
शिक्षा तक पहुंच के मामले में ग्राफ ऊपर गया है। सेकंडरी स्तर पर सकल नामांकन अनुपात GER बढ़कर 71.7% हो गया है और मिडिल स्तर पर ये 89.6% पर स्थिर है। नामांकन का वितरण भी अब ज्यादा संतुलित है। कुल नामांकन में फाउंडेशन 21.66%, प्रेपरेटरी 25.60%, मिडिल 25.58% और सेकंडरी 27.16% है। पहले शुरुआती कक्षाओं के बाद बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते थे, लेकिन अब हर स्तर पर लगभग बराबर भागीदारी दिख रही है। ये NEP 2020 के "12 साल की स्कूली शिक्षा" वाले विजन को मजबूती देता है।

गुणवत्ता का आधार: बेहतर PTR, रिटेंशन और कम ड्रॉपआउट
किसी भी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता PTR से तय होती है। 2025-26 में फाउंडेशन में PTR 10:1, प्रेपरेटरी में 12:1, मिडिल में 17:1 और सेकंडरी में 21:1 है। कम PTR से क्लासरूम में व्यक्तिगत ध्यान बढ़ता है और सीखने के नतीजे सुधरते हैं। इसी का असर रिटेंशन और ड्रॉपआउट में दिख रहा है। प्रेपरेटरी में ड्रॉपआउट घटकर 1.8% और सेकंडरी में 7.0% रह गया है। रिटेंशन रेट भी अच्छा है - फाउंडेशन में 98.5% और सेकंडरी में 51.9%। एक स्तर से दूसरे में जाने की दर भी ऊंची है, फाउंडेशन से प्रेपरेटरी 99.2% और सेकंडरी तक 88.3%। हां, मिडिल स्तर पर ड्रॉपआउट 3.6% थोड़ा बढ़ा है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।

लैंगिक और सामाजिक समावेशन में प्रगति
रिपोर्ट समावेशी शिक्षा की दिशा में सकारात्मक बदलाव दिखाती है। कुल नामांकन में लड़कियों की हिस्सेदारी 48.4% है और शिक्षकों में महिलाओं का प्रतिशत 54.9% है। ये दोनों आंकड़े बताते हैं कि स्कूल अब सबके लिए बराबर जगह बन रहे हैं। सामाजिक वर्गों में OBC की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 44.9% है, फिर सामान्य वर्ग में 27.5%, अनुसूचित जाति में 17.7% और अनुसूचित जनजाति 10% हैं। SC और ST मिलाकर 27.7% होते हैं। विशेष जरूरत वाले बच्चों CWSN में भी 42.84% लड़कियां हैं। ये डेटा साबित करता है कि सरकारी योजनाएं अब वंचित वर्गों तक पहुंच रही हैं।

डिजिटल और भौतिक अवसंरचना का विकास
21वीं सदी की शिक्षा के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है और इस मोर्चे पर भी प्रगति हुई है। 69.9% स्कूलों में कंप्यूटर और 67.4% में इंटरनेट की सुविधा है। बुनियादी सुविधाएं भी बेहतर हुई हैं - 95% स्कूलों में बिजली, 99.5% में पीने का पानी, 98.5% में लड़कियों के लिए और 97.2% में लड़कों के लिए शौचालय। लाइब्रेरी 90.5% स्कूलों में है और 58.2% में दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप बनाए गए हैं। हालांकि 30% स्कूलों में अभी भी कंप्यूटर नहीं हैं, जो "डिजिटल डिवाइड" की चुनौती को दर्शाता है।

भारत की स्कूली शिक्षा की मुख्य चुनौतियाँ
UDISE+ के आंकड़े भले ही प्रगति दिखाते हों, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी कई बड़ी चुनौतियां बाकी हैं।
| माध्यमिक स्तर पर "ड्रॉप ऑफ क्लिफ":- | प्रारंभिक स्तर पर रिटेंशन 98.5% है, लेकिन जैसे ही बच्चे माध्यमिक में पहुंचते हैं ये घटकर 51.9% रह जाता है। यानी हर 2 में से 1 बच्चा 12वीं से पहले ही स्कूल छोड़ देता है। जो बच्चा कक्षा 3 तक ठीक से पढ़ नहीं पाता, उसके आगे पढ़ाई छोड़ने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं। इसे ही "अधिगम गरीबी" कहते हैं। |
| बुनियाद कमजोर :- | अगर फाउंडेशन में बच्चों को FLN यानी पढ़ने-लिखने और गणित की बेसिक समझ नहीं मिली, तो वो आगे के विषय समझ ही नहीं पाते। नतीजा - अरुचि और स्कूल छोड़ना। |
| एक-शिक्षक वाले स्कूल:- | आज भी 1 लाख से ज्यादा स्कूल सिर्फ 1 शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। उन पर पढ़ाई और कागजी काम दोनों का बोझ होता है, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता गिरती है। |
| समावेशिता की कमी:- | 40% से ज्यादा स्कूलों में CWSN यानी विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए रैंप, टॉयलेट जैसी सुविधाएं नहीं हैं। इसका मतलब है दिव्यांग बच्चों को अभी भी बराबर के मौके नहीं मिल रहे। |
| क्षेत्रीय असमानता:- | चंडीगढ़ और मेघालय के प्रदर्शन में 31% का अंतर है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में शिक्षकों की कमी, फंड का सही इस्तेमाल न होना और कमजोर स्कूल प्रबंधन अब भी बड़ी समस्या है। |
| पैसा और क्षमता की कमी:- | आकांक्षी जिलों के पास NEP 2020 के टार्गेट - जैसे शिक्षकों की ट्रेनिंग और स्मार्ट क्लास - लागू करने के लिए न पैसे हैं न प्रशासनिक क्षमता। |
भारत में स्कूली शिक्षा को मजबूत करने के उपाय
UDISE+ की रिपोर्ट बताती है कि अब सिर्फ स्कूल बनाना काफी नहीं है। गुणवत्ता, समावेश और जवाबदेही पर काम करना होगा। इसके लिए 5 बड़े कदम जरूरी हैं:
| संरचना और शासन में सुधार:- | एक-शिक्षक और कम छात्रों वाले स्कूलों को पास के स्कूलों के साथ मिलाकर "क्लस्टर स्कूल" बनाना होगा। इससे शिक्षक और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा। APAAR ID से हर बच्चे की ट्रैकिंग आसान होगी। साथ ही स्कूल प्रबंधन समितियों SMC को मजबूत करके अभिभावकों को जोड़ना होगा ताकि पारदर्शिता और RTE का सही क्रियान्वयन हो। |
| पढ़ाई और मूल्यांकन का तरीका बदलना:- | सबसे पहले "निपुण भारत मिशन" से कक्षा 3 तक हर बच्चे को पढ़ना-लिखना और गणित सिखाना होगा। PARAKH के जरिए रटने की जगह समझ और सोच पर आधारित परीक्षा लानी होगी। और NEP 2020 के अनुसार शुरुआती कक्षाओं में मातृभाषा में पढ़ाई से बच्चे की नींव मजबूत होगी और ड्रॉपआउट घटेगा। |
| शिक्षकों को मजबूत करना:- | खाली पड़े शिक्षकों के पद मिशन मोड में भरने होंगे। ITEP जैसे 4 साल के इंटीग्रेटेड कोर्स और DIKSHA ऐप के जरिए शिक्षकों को लगातार ट्रेनिंग देनी होगी ताकि वो NEP के नए तरीकों से पढ़ा सकें। |
| समानता और बच्चों को रोकना:- | कक्षा 6 से स्किल और व्यावसायिक शिक्षा जोड़नी होगी ताकि बच्चे पढ़ाई से न भागें। CWSN बच्चों के लिए रैंप, टॉयलेट जैसी सुविधाएं बढ़ानी होंगी। और PM पोषण योजना को और बेहतर करके गरीब बच्चों को स्कूल से जोड़े रखना होगा। |
| नतीजों की स्वतंत्र जांच:- | UDISE+ के सरकारी आंकड़ों के साथ-साथ पंचायत स्तर पर बाहर के लोगों से "सोशल ऑडिट" कराना होगा। स्कूल का फंड उसी आधार पर मिले कि बच्चों ने वास्तव में कितना सीखा। |
निष्कर्ष :
अंत में, UDISE+ 2025-26 की रिपोर्ट NEP 2020 के लिए एक रिपोर्ट कार्ड की तरह है। ये कहती है कि पहुंच बढ़ी है, ड्रॉपआउट घटा है, शिक्षक बेहतर उपलब्ध हैं और समावेशिता सुधरी है। लेकिन चुनौतियां भी हैं। सेकंडरी स्तर पर रिटेंशन अभी 51.9% ही है और 30% स्कूलों में डिजिटल सुविधा नहीं पहुंची। कुल मिलाकर रिपोर्ट ये संदेश देती है कि भारत की स्कूली शिक्षा अब सिर्फ संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता, समावेशिता और तकनीक पर फोकस कर रही है। शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान केन्द्रित करना होगा।
यूडीआईएसई+ (UDISE+) 2025-26 रिपोर्ट मुख्य रूप से बीपीएससी (BPSC) मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (भारतीय अर्थव्यवस्था और भूगोल खंड) तथा प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के समसामयिक घटनाक्रम पाठ्यक्रम का हिस्सा है।
Reference:







