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Frontier Nagaland Territorial Authority (FNTA) को राष्ट्रपति की मंजूरी

Understand why the Frontier Nagaland Territorial Authority (FNTA) Bill, 2026 required Presidential assent, its constitutional basis, Article 371A.

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Written by Dilip Kumar
Published: 28 October 2026•6 min read
Frontier Nagaland Territorial Authority (FNTA) को राष्ट्रपति की मंजूरी
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Frontier Nagaland Territorial Authority (FNTA) को राष्ट्रपति की मंजूरी 

यह लेख क्रमशः UPSC एवं अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में भारतीय राजव्यवस्था विषय के संदर्भ में उपयोगी होगा. 

बीते दिनों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नागालैंड में Frontier Nagaland Territorial Authority (FNTA) के गठन से संबंधित विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है. इसका मकसद नागालैंड के पूर्वी हिस्से में रहने वाले जनजातीय समुदायों की लंबे समय से चली आ रही स्वायत्तता, विकास और प्रशासनिक भागीदारी की मांग को पूरा करना है। इस ब्लॉग में हमलोग इसी विषय से जुड़े सभी आयामों को समझने की कोशिश करेंगे. 

इसके लिए हमलोग इन आयामों को प्रश्नों की कड़ी में पिरोते हैं. तब एक-एक कर इन सबका उत्तर देखते हैं. पहला सवाल यह कि FNTA को लेकर मांग क्यों शुरू हुई? दूसरा सवाल यह कि इस संबंध में राष्ट्रपति की मंजूरी की जरुरत क्यों पड़ी? तीसरा यह कि FNTA में क्या ऐसे विशेष प्रावधान होंगे जिससे नागालैंड के पूर्वी हिस्से को अपेक्षित स्वायत्तता मिलेगी? और अंत में यह कि आंतरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह कदम कितना लाभकारी है?

FNTA को लेकर मांग क्यों शुरू हुई?

इसे समझने के लिए आजादी के पहले की तस्वीर देखना जरूरी होगा. भारत की आजादी से पहले  ब्रिटिश प्रशासन के तहत नागालैंड की इन पहाड़ियों को एक गैर-प्रशासित सीमांत क्षेत्र के रूप में छोड़ दिया गया था। शासन के इस अभाव ने एक "विकासात्मक असमानता" को जन्म दिया, जिसे आजादी के बाद के भारत को पाटने में काफी संघर्ष करना पड़ा। 

1963 में असम से अलग होकर नागालैंड राज्य बनने के बाद, पूर्वी छह जिलों में रहने वाली आठ नागा जनजातियाँ राजनीतिक और आर्थिक रूप से उपेक्षित महसूस करने लगीं। यह असंतोष ‘पश्चिमी नागा जनजातियों के कथित प्रशासनिक वर्चस्व से स्वतंत्रता’ के आंदोलन में तब्दील हो गया।

इन्हीं परिस्थितियों में ENPO यानी ईस्टर्न नागालैंड पीपल्स आर्गेनाईजेशन ने नागालैंड से अलग एक स्वतंत्र राज्य का गठन करने की मांग शुरू कर दी थी । 'फ्रंटियर नागालैंड' की अपनी मांग के मद्देनजर इस संगठन ने 2010 में केंद्र सरकार को एक ज्ञापन भी सौंपा। गौरतलब है कि ENPO पूर्वी नागालैंड के आठ मान्यता प्राप्त नागा जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक प्रमुख संगठन है। यह संगठन पूर्वी नागालैंड के लोगों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मांगों को सामने रखता रहा है।

आखिरकार 5 फरवरी,2026 को केंद्र सरकार ने नागालैंड सरकार और ENPO  के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करके FNTA  के गठन को लेकर सहमती दी । "विकेंद्रीकरणकारी स्वायत्तता" के एक प्रयोग के रूप में, FNTA पूर्वी क्षेत्र के छह पिछड़े जिलों - किपहिरे, लोंगलेन्ग, मोन, नोकलक, शमाटोर और तुएनसांग को उच्च स्तरीय प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करता है।

इस संबंध में राष्ट्रपति की मंजूरी की जरुरत क्यों पड़ी?

FNTA विधेयक के मामले में सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दा यह था कि क्या नागालैंड विधानसभा द्वारा बनाए गए कानून के माध्यम से एक क्षेत्रीय प्राधिकरण(FNTA) को विधायी अधिकार (Legislative Powers) दिए जा सकते हैं। नागालैंड सरकार द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार:

  1. 5 फरवरी 2026 के समझौते को लागू करने के लिए नागालैंड सरकार ने विधेयक तैयार किया।
  2. विधेयक में FNTA को कुछ विधायी अधिकार देने का प्रश्न उठा।
  3. नागालैंड के महाधिवक्ता (Advocate General) से इस विषय पर कानूनी राय ली गई।
  4. महाधिवक्ता की राय में यह संवैधानिक प्रश्न उठाया गया कि राज्य के कानून के माध्यम से FNTA को विधायी शक्तियाँ देना संविधान के अंतर्गत संभव है या नहीं।
  5. इस प्रश्न पर केंद्र के गृह मंत्रालय से विचार-विमर्श किया गया।

    गृह मंत्रालय ने मार्च 2026 में इस विषय पर आगे विचार करने के लिए कहा था। इसके बाद विधेयक की संवैधानिक वैधता और अधिकारों के स्वरूप पर पुनर्विचार किया गया। FNTA विधेयक में यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि नई क्षेत्रीय व्यवस्था नागालैंड के मौजूदा संवैधानिक संरक्षण को कमजोर न करे। 

    FNTA विधेयक का पहला स्वरुप मार्च, 2026 में विधानसभा में पेश किया गया था। लेकिन FNTA को विधायी शक्तियाँ देने की संवैधानिक वैधता पर प्रश्न उठने के कारण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले पुनर्विचार किया गया।

    इसके बाद विधेयक को संशोधित रूप में आगे बढ़ाया गया। 3 सितंबर 2026 को नागालैंड विधानसभा ने  विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया। बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 अक्टूबर 2026 को इसे मंजूरी दी। उल्लेखनीय है कि FNTA एक सांविधिक स्वायत्त कार्यकारी और विधायी ढांचा स्थापित करता है जो भारत में विशेष संवैधानिक और प्रशासनिक संरचनाओं को संशोधित करता है, FNTA के मामले में मूल संवैधानिक चुनौती क्षेत्रीय प्राधिकरण को विधायी शक्तियाँ देने की वैधता थी .  ऐसे में यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया. 

FNTA में विशेष प्रावधान 

इसमें 62 सदस्य होंगे: 40 सीधे निर्वाचित प्रतिनिधि, जिनमें से एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी; फ्रंटियर नागालैंड टेरिटरी (एफएनटी) के अंतर्गत आने वाले निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 20 विधायक, जो पदेन सदस्य होंगे और उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा; और राज्यपाल द्वारा मान्यता प्राप्त जनजातियों से मनोनीत दो सदस्य होंगे . निर्वाचित और मनोनीत सदस्य आमतौर पर पांच साल के कार्यकाल के लिए चुने जाएंगे।

FNTA, 46 विशिष्ट विषयों पर विधायी और कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करेगा। यह शक्ति हस्तांतरण स्थानीय नेताओं को भूमि उपयोग, कृषि, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे से संबंधित निर्णय लेने की अनुमति देता है, जो उनकी जनजातियों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप हों। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सुविधा संविधान के अनुच्छेद 371(A) को निरस्त या परिवर्तित किए बिना हासिल हो सकेगी . गौरतलब है कि इस अनुच्छेद से नागा पहचान के विशिष्ट परंपरागत कानूनों और सामाजिक रीति-रिवाजों का संरक्षण होता है।

FNTA के लिए एक मिनी-सचिवालय का प्रावधान भी किया गया है, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव करेंगे, और पूर्वी नागालैंड क्षेत्र के लिए विकास व्यय का बंटवारा जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुपात में होगा। अतः FNTA से क्षेत्रीय असमानता में कमी, स्थानीय लोगों की भागीदारी, जनजातीय पहचान का संरक्षण, उग्रवाद और असंतोष में कमी की संभावना, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा और पूर्वोत्तर में शांति प्रक्रिया को प्रोत्साहन को महत्त्व मिलेगा.

आंतरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह कदम कितना लाभकारी ?

नागालैंड के इस क्षेत्र की जनजातीय जनता को  निराश छोड़ना एक बड़ा सुरक्षा जोखिम था, खासकर तब जब सीमा के उस पार यानी म्यांमार में सशस्त्र चरमपंथी समूह सक्रिय हैं। ऐसे में FNTA को एक शांति उपाय के रूप में देखा जा रहा है ताकि सीमा पर स्थिरता रहे और यह राष्ट्रीय हितों के अनुरूप बनी रहे।

Reference:

  1. News on AIR
  2. The Hindu
  3. The Indian Express

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