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प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी नई परियोजना के लिए कार्य शुरू करने से पहले पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) अनिवार्य होगी।

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Written by Akhilesh Anand
Published: 3 August 20264 min read
प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य
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प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण सरंक्षण की दिशा में एक बड़ा फैसला लेते हुए केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को खारिज कर दिया है जिसमें पहले परियोजना शुरू कर बाद में पर्यावरण मंजूरी (EX-post facto clearance) लेने की बात कही गई थी। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जहां काम शुरू हो चुका है उसपर कोई रोक नहीं होगी लेकिन अब से नई परियोजना शुरू करने से पहले पर्यावरण मंजूरी आवश्यक होगी।

पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम और 2006 की ईआईए ( पर्यावरण प्रभाव आकलन) अधिसूचना के तहत किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले पर्यावरण मंजूरी लेना अनिवार्य है। लेकिन केंद्र सरकार ने 2021 के ऑफिस मेमोरेंडम से बिना मंजूरी शुरू हुई परियोजनाओं को बाद में पर्यावरण मंजूरी देने का रास्ता खोल दिया। मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर रोक लगा दी थी, लेकिन नवंबर 2025 में तीन जजों की सुप्रीम कर्ट की बेंच ने 20,000 करोड़ रुपये की सार्वजनिक प्रोजेक्ट को बचाने के लिए 2:1 बहुमत से उस फैसले को पलट दिया।

इस फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका दायर हुई और अब इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 2021 का ओएम रद्द कर दिया, हालांकि पहले दी गई मंजूरियों को सुरक्षित रखा है। अदालत की खंडपीठ ने सर्वसम्मति से कहा कि पर्यावरणीय कानूनों के तहत किसी भी परियोजना के लिए पूर्व पर्यावरण मंजूरी ही मूल नियम है। कोई भी परियोजना पहले शुरू कर बाद में मंजूरी लेने की सामान्य व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती।

संविधान के अनुच्छेद 142

अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट उपयुक्त मामलों में परियोजनाओं को बाद में पर्यावरणीय मंजूरी (पोस्ट-फैक्टो ईसी) देने का आदेश दे सकता है।

यह फैसला उन याचिकाओं और पुनर्विचार याचिकाओं पर आया है, जिनमें पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कर शुरू की गई परियोजनाओं को पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) पर्यावरणीय मंजूरी देने की व्यवस्था को चुनौती दी गई थी।

पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986

कोर्ट ने साफ कहा कि केंद्र सरकार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-3 के तहत वैधानिक अधिसूचना जारी कर तो पोस्ट-फैक्टो पर्यावरण मंजूरी का प्रावधान कर सकती है, लेकिन महज एक प्रशासनिक आदेश या ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए ऐसा नहीं किया जा सकता है।

हालांकि अदालत ने फैसले को भविष्य में लागू (प्रॉस्पेक्टिव) करने का निर्देश दिया। यानी 2021 के ओएम के तहत पहले ही दी जा चुकी पर्यावरण मंजूरियां फिलहाल प्रभावी रहेंगी और इन परियोजनाओं पर ध्वस्तीकरण या अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि 2006 की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना के तहत पूर्व पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य नियम है। इसलिए कोई भी परियोजना पहले शुरू करके बाद में मंजूरी लेने की सामान्य व्यवस्था नहीं बनाई जा सकती। अदालत ने कहा कि 2021 का ऑफिस मेमोरेंडम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के विपरीत (अल्ट्रा वायर्स) है।

पर्यावरण प्रभाव आकलन – EIA क्या है?

इसकी  शुरुआत 1970 के दशक के अंत में नदी घाटी परियोजनाओं के आकलन से हुई थी।  1994 में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत पहली EIA अधिसूचना जारी की गई थी। वर्ष 2006 में 1994 की अधिसूचना को नई 2006 की EIA अधिसूचना से बदल दिया गया।

इसका उद्देश्य किसी प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन करना है। इसमें सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और इसका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक व नकारात्मक दोनों प्रभाव शामिल हैं। परियोजनाओं का वर्गीकरण

श्रेणी A: मंजूरी केंद्र सरकार देती है। इन बड़ी और अत्यधिक प्रदूषणकारी परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा दी जाती है

श्रेणी B: मंजूरी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का SEIAA देता है। मध्यम और छोटे आकार की परियोजनाओं को मंजूरी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश स्तर का पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) देता है

श्रेणी B परियोजनाओं को आगे दो भागों (B1 और B2) में बांटा जाता है । B1 परियोजनाओं के लिए विस्तृत EIA अध्ययन की आवश्यकता होती है, जबकि B2 परियोजनाओं को इससे छूट प्राप्त होती है।

यह विषय सीधे तौर पर BPSC की प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा (Mains) के सामान्य अध्ययन पाठ्यक्रम के अंतर्गत आता है। इसका संबंध न केवल पर्यावरणीय प्रदूषण, क्षरण  और पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) से है, बल्कि यह विषय न्यायिक समीक्षा, न्यायिक सक्रियता और मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21 - स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार) से सीधी तौर पर जुड़ा हुआ है।

Reference :
  1. https://navbharattimes.indiatimes.com/legal/supreme-courts-big-decision-projects-without-environmental-clearance-will-not-get-relief-now-old-clearances-safe/articleshow/132714817.cms
  2. https://www.jansatta.com/national/supreme-court-environmental-clearance-before-project-centre-order-quashed/4640121/
  3. https://www.aajtak.in/india/news/story/supreme-court-makes-environmental-clearance-compulsory-bans-ex-post-facto-ntc-acwi-rptc-2611023-2026-07-29
  4. https://www.jagran.com/news/national-sc-quashes-retrospective-environmental-clearance-memo-40323381.html

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