क्या यूक्रेन को मिलेगी EU की सदस्यता ?
यह लेख UPSC/BPSC सहित अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अमेरिका-रूस वर्तमान संबंध और भारत की विदेश नीति को समझने में महत्त्वपूर्ण है. इस लेख का संबंध जहाँ UPSC में GS-2 से है वहीं BPSC में इसका जुड़ाव GS-1 के खण्ड ख से है.
चर्चा में क्यों ?
यूरोपीय संघ (European Union—EU) ने यूक्रेन की सदस्यता के लिए बातचीत के नए चरण खोले हैं। यह यूक्रेन के EU में शामिल होने की लंबी प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
इस सन्दर्भ में तीन मुख्य बातें महत्त्वपूर्ण हैं:
- यूक्रेन की EU सदस्यता के लिए बातचीत आगे बढ़ी है।
- यूक्रेन ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा से संबंधित कानून में बदलाव किया है।
- EU अब यूक्रेन के साथ आंतरिक बाजार, प्रतिस्पर्धा और समावेशी विकास जैसे विषयों पर बातचीत आगे बढ़ा रहा है।
आगे बढ़ने से पहले जान लें कि यूरोपीय संघ (EU) क्या है?
यह यूरोप के देशों का एक राजनीतिक और आर्थिक समूह है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना, शांति बनाए रखना और साझा नियमों के जरिये व्यापार को आसान बनाना है।
EU की कुछ प्रमुख विशेषताएँ:
- एकल बाजार (Single Market): वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी और लोगों की आवाजाही को आसान बनाना।
- साझा नियम: व्यापार, पर्यावरण, उपभोक्ता अधिकार और अन्य क्षेत्रों में साझा मानक।
- संस्थागत व्यवस्था: यूरोपीय संसद, यूरोपीय आयोग और यूरोपीय परिषद जैसी संस्थाएँ।
- साझा मुद्रा: यूरो कई EU देशों की मुद्रा है, लेकिन सभी सदस्य देश यूरो का उपयोग नहीं करते।
यूक्रेन की EU सदस्यता का मामला क्या है?
यूक्रेन पूर्वी यूरोपीय देश है। वह लंबे समय से यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंध मजबूत करना चाहता है।
इस प्रक्रिया में प्रमुख घटनाएँ:
- फरवरी 2022: रूस के सैन्य आक्रमण के बाद यूक्रेन ने EU सदस्यता के लिए आवेदन किया।
- जून 2022: EU ने यूक्रेन को उम्मीदवार देश (Candidate Country) का दर्जा दिया।
- जून 2024: EU और यूक्रेन के बीच औपचारिक सदस्यता वार्ता शुरू हुई।
- जून 2026: सदस्यता वार्ता का पहला समूह शुरू
- जुलाई 2026: छठा समूह शुरू
- 13 अक्टूबर 2026: दूसरे और तीसरे समूह पर भी बातचीत शुरू हुई। इस प्रकार वार्ता के छह में से चार समूह खोले जा चुके हैं।
यूक्रेन को यूरोपीय संघ (EU) का सदस्य बनने के लिए अपने कानून, अर्थव्यवस्था और प्रशासन में सुधार करने होंगे। इस काम को आसान बनाने के लिए EU ने सदस्यता वार्ता को 6 बड़े समूहों (Clusters) में बाँटा है। यूक्रेन को EU की सदस्यता के लिए 6 क्षेत्रों में जरूरी शर्तें पूरी करनी हैं।
EU के 6 समूह
1. पहला समूह — Fundamentals (बुनियादी सुधार)
इसमें देखा जाता है कि देश में लोकतंत्र, न्यायपालिका, कानून का शासन और मानवाधिकार कितने मजबूत हैं।
उदाहरण: भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, अदालतों को स्वतंत्र बनाना और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना।
2. दूसरा समूह — Internal Market (आंतरिक बाजार)
इसका उद्देश्य यूक्रेन के बाजार और व्यापारिक नियमों को EU के नियमों के अनुकूल बनाना है।
उदाहरण: यूक्रेन की कोई कंपनी फ्रांस या जर्मनी में सामान बेचना चाहे, तो उसे गुणवत्ता, उपभोक्ता सुरक्षा और व्यापार के साझा नियमों का पालन करना होगा।
3. तीसरा समूह — Competitiveness and Inclusive Growth (प्रतिस्पर्धा और समावेशी विकास)
इसमें अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, रोजगार बढ़ाना, उद्योगों का विकास, कर व्यवस्था, शिक्षा, शोध और डिजिटल विकास जैसे विषय आते हैं।
उदाहरण: यूक्रेन में उद्योगों को इस तरह विकसित करना कि वे EU के उद्योगों के साथ निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा कर सकें और विकास का लाभ समाज के अधिक लोगों तक पहुँचे।
4. चौथा समूह — Green Agenda and Sustainable Connectivity (हरित एजेंडा)
पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटना और टिकाऊ परिवहन व संपर्क व्यवस्था विकसित करना।
उदाहरण: प्रदूषण कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना।
5. पाँचवाँ समूह — Resources, Agriculture and Cohesion (संसाधन, कृषि और क्षेत्रीय विकास)
कृषि, खाद्य सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों और अलग-अलग क्षेत्रों के विकास से जुड़े नियम।
उदाहरण: किसानों के लिए नियमों का तालमेल बनाना और पिछड़े क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा देना।
6. छठा समूह — External Relations (बाहरी संबंध)
दूसरे देशों के साथ व्यापार, विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े EU के नियम।
उदाहरण: यूक्रेन की विदेश और व्यापार नीति को EU के साझा दृष्टिकोण के साथ तालमेल में लाना।
पहले, छठे, दूसरे और तीसरे समूह की चर्चा
पहला समूह: लोकतंत्र, न्यायपालिका, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार जैसे बुनियादी सुधार।
छठा समूह: विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बाहरी संबंध।
दूसरा समूह: EU के साझा बाजार में व्यापार करने के नियम।
यूक्रेन की सदस्यता वार्ता में दूसरे और तीसरे समूह पर बातचीत आगे बढ़ी। इसका मतलब है कि चर्चा अब बाजार और आर्थिक विकास से जुड़े क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही है। इस पूरी चर्चा का अर्थ है कि यूक्रेन सदस्यता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी वह EU का पूर्ण सदस्य नहीं बना है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के अधिकार महत्त्वपूर्ण क्यों हैं?
यूक्रेन की संसद ने ऐसा कानून पारित किया है जिससे राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा में शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार की सुरक्षा मजबूत हुई है । इसके बाद हंगरी की आपत्तियाँ दूर करने में मदद मिली और सदस्यता वार्ता आगे बढ़ सकी।
यूक्रेन के पश्चिमी हिस्से में हंगेरियन भाषा बोलने वाला समुदाय रहता है। हंगरी ने इस समुदाय के भाषा और शिक्षा संबंधी अधिकारों को लेकर यूक्रेन की सदस्यता पर आपत्ति जताई थी।
इसे ऐसे समझ सकते हैं-
मान लीजिए किसी देश में अधिकांश लोग एक भाषा बोलते हैं, लेकिन सीमा के पास रहने वाला एक समुदाय दूसरी भाषा बोलता है। यदि उस समुदाय के बच्चों को अपनी भाषा में शिक्षा प्राप्त करने का उचित अवसर नहीं मिलता, तो उनके अधिकारों का सवाल उठ सकता है।
EU सदस्यता में सर्वसम्मति (Unanimity) जरूरी है
EU में नए सदस्य को स्वीकार करने के लिए सदस्य देशों की आवश्यक सहमति प्राप्त करनी होती है। इसलिए किसी एक सदस्य देश की आपत्ति भी प्रक्रिया को धीमा कर सकती है।
इससे पता चलता है कि EU विस्तार केवल उम्मीदवार देश के सुधारों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि वर्तमान सदस्य देशों की राजनीतिक सहमति भी महत्त्वपूर्ण होती है।
यूक्रेन EU में क्यों शामिल होना चाहता है?
संभावित लाभ
- आर्थिक विकास: EU के बड़े बाजार तक बेहतर पहुँच और निवेश की संभावनाएँ।
- व्यापार में वृद्धि: यूरोपीय देशों के साथ व्यापारिक नियमों का तालमेल।
- संस्थागत सुधार: न्यायपालिका, प्रशासन और भ्रष्टाचार-निरोधक संस्थाओं को मजबूत करने का प्रोत्साहन।
- राजनीतिक एकीकरण: यूरोपीय संस्थाओं के साथ निकट सहयोग।
- युद्ध के बाद पुनर्निर्माण: निवेश और आर्थिक सहयोग से पुनर्निर्माण में सहायता मिलने की संभावना।
हालाँकि, इन लाभों का मिलना स्वतः सुनिश्चित नहीं है। यह यूक्रेन के सुधारों, युद्ध की स्थिति और EU की नीतियों पर निर्भर करेगा।
यूक्रेन की सदस्यता में प्रमुख चुनौतियाँ
1. रूस-यूक्रेन युद्ध
युद्ध के कारण बुनियादी ढाँचे, अर्थव्यवस्था और प्रशासन पर दबाव है। पुनर्निर्माण के लिए बड़े संसाधनों की आवश्यकता होगी।
2. कानून का शासन और भ्रष्टाचार
न्यायपालिका की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में सुधारों को लागू करना जरूरी है।
3. कृषि और आर्थिक प्रतिस्पर्धा
यूक्रेन के बड़े कृषि क्षेत्र और आर्थिक ढाँचे का EU के साझा नियमों के साथ तालमेल बनाना जटिल हो सकता है।
4. सदस्य देशों की सहमति
सदस्यता की प्रक्रिया में सभी सदस्य देशों की आवश्यक मंजूरी और राजनीतिक समर्थन महत्त्वपूर्ण है।
भारत के लिए इस खबर का महत्त्व
रणनीतिक स्वायत्तता: भारत, रूस और पश्चिमी देशों दोनों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार संबंध बनाए रखने की कोशिश करता है।
- वैश्विक व्यवस्था: यूरोप की सुरक्षा स्थिति का प्रभाव वैश्विक राजनीति और भारत की विदेश नीति पर पड़ सकता है।
- खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा: रूस-यूक्रेन युद्ध ने अनाज, ऊर्जा और उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति पर दबाव के जोखिम को उजागर किया है।
- बहुपक्षीय कूटनीति: भारत के लिए संवाद, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून जैसे सिद्धांतों के बीच संतुलन महत्त्वपूर्ण है।
- यूरोपीय बाजार: EU के विस्तार और आर्थिक एकीकरण में बदलाव भारत-यूरोप व्यापार और निवेश के लिए नए अवसरों तथा चुनौतियों को जन्म दे सकते हैं।
निष्कर्ष:
इस प्रकार स्पष्ट होता है कि यूक्रेन की EU सदस्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। लेकिन वास्तविक सदस्यता के लिए उसे EU के नियमों के अनुरूप सुधार लागू करने होंगे और सदस्य देशों की आवश्यक मंजूरी प्राप्त करनी होगी।
Reference: The Hindu






