BIMSTEC Adopts Delhi Declaration on Terrorism
यह लेख UPSC/BPSC सहित अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अमेरिका-रूस वर्तमान संबंध और भारत की विदेश नीति को समझने में महत्त्वपूर्ण है. इस लेख का संबंध जहाँ UPSC में GS-2 से है वहीं BPSC में इसका जुड़ाव GS-1 के खण्ड ख से है.
चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारत ने BIMSTEC देशों के गृह मंत्रियों की पहली बैठक की मेजबानी की. इस बैठक में सदस्य देशों ने आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों की भर्ती जैसी समस्याओं से निपटने के लिए ‘दिल्ली घोषणा’ (Delhi Declaration) को अपनाया।
इस बैठक में भारत की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क्षेत्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
इस घोषणा का मुख्य उद्देश्य है:
- आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद को रोकना।
- आतंकवादियों को मिलने वाले धन और अवैध वित्तीय सहायता पर रोक लगाना।
- नई तकनीकों के आतंकवादी दुरुपयोग को रोकना।
- सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करना।
इसमें दो राय नहीं कि आतंकवादी किसी एक देश में रहकर दूसरे देश में हमला करने की योजना बना सकते हैं। इसलिए केवल एक देश की पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। सभी संबंधित देशों को मिलकर काम करना होगा।
BIMSTEC क्या है?
इसका पूरा नाम है: Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation
हिंदी में इसे बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल कहा जाता है। यह बंगाल की खाड़ी के आसपास के देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग का एक संगठन है। इसके सात सदस्य देश हैं: भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड
BIMSTEC की स्थापना कब हुई?
- स्थापना: 6 जून 1997
- प्रारंभिक नाम: BIST-EC
- प्रारंभिक सदस्य: बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड।
- म्यांमार 1997 में शामिल हुआ।
- नेपाल और भूटान 2004 में शामिल हुए।
- वर्तमान नाम BIMSTEC अपनाया गया, जिसमें सभी सात सदस्य शामिल हैं।
- सचिवालय: ढाका, बांग्लादेश।
BIMSTEC का भारत के लिए महत्व
भारत की विदेश नीति में BIMSTEC महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला मंच है।
इसके माध्यम से भारत को इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलता है:
- सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग।
- व्यापार और आर्थिक विकास।
- समुद्री सुरक्षा।
- परिवहन और क्षेत्रीय संपर्क।
- ऊर्जा और तकनीकी सहयोग।
दिल्ली घोषणा के बारे में
दिल्ली घोषणा सदस्य देशों की एक साझा प्रतिबद्धता है, जिसका उद्देश्य आतंकवाद और उससे जुड़े अपराधों के विरुद्ध सहयोग मजबूत करना है। बैठक के दौरान सदस्य देशों ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की सभी स्थितियों की निंदा की है तथा आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
घोषणा में संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के अनुरूप आतंकवाद का मुकाबला करने पर जोर दिया गया है।
इसमें जोर दिया गया है कि आतंकवादी हमलों के दोषियों को संबंधित घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।
हालाँकि, यह सदस्य देशों की राजनीतिक और नीतिगत प्रतिबद्धता है। इसे स्वतः कोई नई बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि नहीं मानना चाहिए।
आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग के पाँच प्रमुख क्षेत्र
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस दिशा में निम्नलिखित पक्षों पर बल दिया है
1. आतंकवाद का वित्तपोषण रोकना
आतंकवादी संगठनों को हथियार, प्रशिक्षण, यात्रा और हमलों की योजना बनाने के लिए धन की जरुरत होती है. बैंकिंग व्यवस्था, संदिग्ध लेन-देन और अवैध वित्तीय नेटवर्क की निगरानी करके इस धन पर लगाम लगाई जा सकती है।
2. आतंकवाद-रोधी कार्रवाई
सदस्य देश आतंकवादी नेटवर्क की पहचान करने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जाँच में सहयोग करने के लिए अपनी सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ा सकते हैं।
3. कानूनी सहयोग और अपराधियों का प्रत्यर्पण
यदि किसी देश में अपराध करने का आरोपी दूसरे देश में भाग जाता है, तो संबंधित देशों के कानूनों और समझौतों के अनुसार उसे वापस लाने की प्रक्रिया में सहयोग किया जा सकता है।
4. साइबर सुरक्षा और साइबर अपराध की जांच
आज के तेजी से बदलते तकनीकी दौर में आतंकवादी और संगठित अपराधी इंटरनेट, एन्क्रिप्टेड संचार और डार्क वेब का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में डिजिटल साक्ष्य जुटाने और ऑनलाइन नेटवर्क की
5. खुफिया जानकारी और सीमा प्रबंधन
संदिग्ध व्यक्तियों, आतंकवादी नेटवर्क, अवैध हथियारों और सीमा पार अपराधों से संबंधित जानकारी समय पर साझा करने से हमलों को रोकने में मदद मिल सकती है।
आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद में अंतर
ये दोनों शब्द संबंधित हैं, लेकिन इनका अर्थ एक जैसा नहीं है। इसे विस्तार से समझते हैं: आतंकवाद में भय फैलाने और राजनीतिक या वैचारिक उद्देश्य प्राप्त करने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया जाता है. जबकि हिंसक उग्रवाद, चरम विचारधारा के आधार पर हिंसा को उचित मानता है या उसका समर्थन करता है. इसके अलावा आतंकवाद का मकसद सरकार या समाज पर दबाव डालना, भय पैदा करना या राजनीतिक लक्ष्य पाना होता है. जबकि हिंसक उग्रवाद अपने विचारों को हिंसक तरीके से लागू करने या विरोधियों को दबाने की कोशिश करता है.
आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग का संबंध
आतंकवाद का वित्तपोषण (Terror Financing) का अर्थ आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराना है।
मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का अर्थ अपराध से प्राप्त धन के अवैध स्रोत को छिपाकर उसे वैध आय के रूप में दिखाने की कोशिश करना है।
उदाहरण के लिए, कोई आपराधिक नेटवर्क अवैध कारोबार से कमाए गए धन को कई खातों और फर्जी कंपनियों के जरिए छिपा सकता है। इस धन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाए, तो वित्तीय जाँच अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
FATF
FATF का पूरा नाम Financial Action Task Force है। यह मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण और संबंधित वित्तीय जोखिमों से मुकाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय करने वाला निकाय है।
- FATF एक अंतर-सरकारी निकाय है।
- इसकी स्थापना 1989 में हुई थी।
- इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है।
- यह आतंकवाद के वित्तपोषण और अवैध वित्तीय नेटवर्क पर रोक लगाने के लिए देशों को मानकों और नीतिगत सिफारिशों के माध्यम से सहयोग देता है।
आतंकवाद में नई तकनीकों का दुरुपयोग क्यों बढ़ती चिंता है?
आज अपराधी अब केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं हैं। वे तकनीकी बदलावों का इस्तेमाल करके अपनी गतिविधियों को छिपाने और नए लोगों की भर्ती करने का प्रयास करते हैं।
| तकनीक | संभावित दुरुपयोग |
| एन्क्रिप्टेड संचार | संदेशों को अनधिकृत व्यक्तियों से सुरक्षित रखने के कारण जाँच में कठिनाई |
| सोशल मीडिया | प्रचार, भर्ती और कट्टरपंथी विचार फैलाना |
| ड्रोन | निगरानी या कुछ परिस्थितियों में हमले |
| क्रिप्टोकरेंसी | कुछ मामलों में संदिग्ध धन हस्तांतरण |
| डार्क वेब | अवैध बाजार और छिपी ऑनलाइन गतिविधियाँ |
डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है जिसे सामान्य सर्च इंजन से सीधे नहीं खोजा जा सकता और जिसे एक्सेस करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर या कॉन्फिगरेशन की जरूरत हो सकती है। इसका हर उपयोग अवैध नहीं होता, लेकिन अपराधी इसका दुरुपयोग भी कर सकते हैं।
भारत के लिए इसका क्या महत्व है?
यदि किसी आतंकवादी नेटवर्क के सदस्य अलग-अलग देशों में मौजूद हों, तो एक देश की जाँच एजेंसी के पास पूरी जानकारी नहीं होगी।
इसलिए जरूरी है कि:
- रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा की जाए।
- डिजिटल साक्ष्यों की जाँच में सहयोग हो।
- संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता लगाया जाए।
- सीमा पार अपराधों के लिए संयुक्त रणनीति बनाई जाए।
- कानून के अनुरूप निजता और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा की जाए।
दिल्ली घोषणा में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका
घोषणा में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया है। गौरतलब है कि सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख निकाय है। परिषद् की 1267 प्रतिबंध समिति संयुक्त राष्ट्र की उस प्रतिबंध व्यवस्था से जुड़ी है जो ISIS, अल-कायदा और उनसे संबंधित व्यक्तियों, समूहों और संस्थाओं को लक्षित करती है।
इसके अंतर्गत संबंधित सूचीबद्ध व्यक्तियों और संस्थाओं पर संपत्ति फ्रीज करने, यात्रा प्रतिबंध और हथियार प्रतिबंध जैसे उपाय लागू होते हैं।
BIMSTEC आतंकवादरोधी सहयोग क्यों जरूरी ?
बंगाल की खाड़ी क्षेत्र भारत की सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में समुद्री व्यापार, बंदरगाह, ऊर्जा मार्ग और सीमा पार संपर्क शामिल हैं।
क्षेत्रीय सहयोग के प्रमुख कारण हैं:
- सीमा पार आतंकवाद: आतंकवादी नेटवर्क कई देशों में फैले हो सकते हैं।
- अवैध वित्तीय गतिविधियाँ: संदिग्ध धन कई देशों की वित्तीय व्यवस्था से गुजर सकता है।
- मानव तस्करी: लोगों को अवैध रूप से एक देश से दूसरे देश ले जाना संगठित अपराध का महत्वपूर्ण रूप है।
- साइबर अपराध: अपराधी इंटरनेट के जरिए विभिन्न देशों में बैठे लोगों को निशाना बना सकते हैं।
- समुद्री सुरक्षा: बंगाल की खाड़ी में सुरक्षित व्यापार और परिवहन बनाए रखना जरूरी है।
घोषणा में मानव तस्करी और साइबर दासता (cyber slavery) को भी गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। साइबर दासता में लोगों को धोखाधड़ी से फँसाकर ऑनलाइन ठगी या अन्य जबरन गतिविधियों में शामिल कराया जा सकता है।
भारत के लिए दिल्ली घोषणा का महत्व
भारत BIMSTEC में एक प्रमुख सदस्य है। आतंकवाद-रोधी सहयोग से भारत को निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं:
- पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा समन्वय बेहतर करना।
- आतंकवादी वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने में सहायता प्राप्त करना।
- सीमा पार अपराध और मानव तस्करी रोकने के प्रयास मजबूत करना।
- साइबर अपराध तथा डिजिटल कट्टरपंथ से निपटने की क्षमता बढ़ाना।
- क्षेत्रीय स्थिरता के माध्यम से व्यापार और संपर्क को सुरक्षित बनाना।
भारत के लिए यह उसकी Neighbourhood First (पड़ोस प्रथम) और Act East नीतियों से भी जुड़ता है।
- Neighbourhood First: पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और संबंधों को प्राथमिकता देना।
- Act East: दक्षिण-पूर्व एशिया और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक तथा रणनीतिक संबंध बढ़ाना।
BIMSTEC इन दोनों नीतियों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है।
BIMSTEC के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
दिल्ली घोषणा अपनाना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ हो सकती हैं।
- सदस्य देशों की कानून-व्यवस्थाएँ और जाँच प्रक्रियाएँ अलग-अलग हैं।
- खुफिया जानकारी साझा करने में गोपनीयता और भरोसे की समस्या हो सकती है।
- तकनीकी और संस्थागत क्षमताओं में अंतर है।
- राजनीतिक अस्थिरता और क्षेत्रीय तनाव सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं।
- साइबर अपराध और डिजिटल तकनीक तेजी से बदल रहे हैं।
इसलिए केवल घोषणा जारी करना पर्याप्त नहीं है। नियमित बैठकें, प्रशिक्षण, कानूनी सहयोग, तकनीकी सहायता और जवाबदेही भी जरूरी हैं।
कुल मिलाकर , दिल्ली घोषणा का मूल संदेश है कि आतंकवाद से मुकाबला केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि वित्तीय निगरानी, खुफिया सहयोग, कानूनी समन्वय, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारी से भी किया जाना चाहिए।
Reference: The Hindu






