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Unit8

At a Glance

शब्दावली

शारीरिक भाषा (बॉडी लैंग्वेज) : बह तरीका जिससे लोग कपड़े पहनते, बात करते, चलते, अंग संचालन, अंत: क्रिया करते और अपने आप को किस प्रकार रखते हैं।

वाणिज्यिकीकरण : किसी वस्तु का एक उत्पाद के रूप में रूपांतरण करना, ऐसी सेवा या क्रियाकलाप जिसका आर्थिक मूल्य हो और जिसका बाज्ञार में व्यापार हो सकता है।

संस्कृति : संस्कृति को ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता, कानून, प्रथा और मनुष्य की अन्य क्षमताओं से और आदतों से समझा जा सकता है जिन्हें बह एक समाज का सदस्य होने के नाते सीखता है।

विकेंद्रीकरण : धीमे-धीमे हस्तांतरण की प्रक्रिया अथवा प्रकार्य साधनों और निर्णय लेने की शक्ति को निचले स्तर की जनतांत्रिक, निर्वाचित शक्ति को हस्तांतरित करना।

अंकीकरण (डिजीटलाईजेशन) : इस प्रक्रिया में सूचना को किसी सार्वत्रिक अंकीय कोड के रूप में परिवर्तित किया जाता है। इस रूप में सूचना को आसानी से भंडारण एवं संशोधित कर तीत्रता से विभिन्न संचारीय तकनीकी, जैसे- इंटरनेट, उपग्रहों, संचरण, दूरभाष, प्रकाशीय तंतु लाइनों (फाइबर ऑप्टिक लाइंस) आदि में भेजा जा सकता है।

विनिवेश : सार्वजनिक क्षेत्र अथवा सरकारी कंपनियों का निजीकरण है।

श्रम विभाजन : विभिन्न लक्ष्यों (टास्क) का इस तरह विशेषीकरण जिससे कुछ आवृत किए हुए अवसरों का बहिष्करण हो सकता है यहाँ से रोजगार में पाए जाने वाले मञ्जदूरों के अवसरों का समापन हो जाता है (अथवा जेंडर के द्वारा)।

विपणन (डाइवर्सिफिकेशन) : जोखिम को कम करने के लिए विभिन्न प्रकार के आर्थिक क्रियाकलापों में निवेश को फैलाकर लगाना।

फोर्डवाद : 20वीं शताब्दी में अमेरिकन उद्योगपति द्वारा लोकप्रिय की गई उत्पादन व्यवस्था। उसने कारों का उत्पादन बड़ी मात्रा में करने के लिए पुर्जे जोड़ने की पढ़ति को लोकप्रिय बनाया। इस काल में भी उद्योगपतियों एवं राज्य दोनों के द्वारा कामगार को बेहतर दिहाड़ी और समाज के लिए कल्याणकारी नीतियों को लागू किया गया।

वृहद एवं लघु परंपरा : लोक परंपरा लोक के द्वारा या अनपढ़ किसानों के द्वारा संस्थापित होती है और वृहत परंपरा अभिजात अथवा कुछ ही लोगों द्वारा बनती है। लघु परंपरा हमेशा स्थानीय होती है जबकि वृहद परंपरा में फैलने की प्रवृत्ति होती है। हालॉँकि भारतीय त्योहारों के अध्ययन से पता चलता है कि सांस्कृतिक कृत्यों (वृहद परंपरा) से बिना स्थानांतरण किए जोड़ देते हैं।

पहचान राजनीति : राजनीतिक क्रियाकलापों से संदर्भित होना जो कि किसी विशिष्ट सीमांत समूह के अनुभवों को साझा करते हैं, जैसे- जेंडर, प्रजाति, संजाति समूह इत्यादि।

आयात-स्थानापन्न विकास रणनीति : आयात स्थानापन्न में बाहर पैदा होने वाली वस्तुओं और सेवाओं विशेषकर मौलिक आवश्यकताओं वाली, जैसे- भोजन, पानी, शक्ति इत्यादि को स्थानापन्न करते है। आयात स्थानापन्न का विचार 1950 एवं 1960 में विकासशील देशों के विकास और आर्थिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करने को लेकर लोकप्रिय हुआ।

औद्योगीकरण : यह आधुनिक प्रकार के उद्योगों, कारखानों द्वारा मशीन से बड़ी मात्रा में उत्पादन करने की प्रक्रिया है। आधुनिकीकरण पिछली दो शताब्दियों से संसार के सामाजिक कार्यों को प्रभावित करने वाली प्रक्रियाओं में सबसे महत्वपूर्ण बन गई है।

उत्पादन के साधन : जहाँ उत्पादित हुई भौतिक वस्तुओं को एक समाज में पहुँचाया जाता है, इसमें केवल प्रौद्योगिकी ही नहीं वरन् उत्पादनकर्ति के सामाजिक संबंधों को भी शामिल किया जाता है।

सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक्स : घटकों एवं परिपथ के सूक्ष्मीकरण के साथ संबढ़ इलेक्ट्रॉनिक्स की एक शाखा। सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में एक वृहद कदम उठाया गया जब एक अभियंता के द्वारा एक माइक्रोप्रोसेसर का अविष्कार किया गया जिसे कंप्यूटर चिप कहा जाता है, 1971 में 2300 ट्रांजिस्टर (विद्युत के प्रवाह को निर्यंत्रित करने वाली युक्ति) को ऑंगौठे के आकार की चिप में समाहित कर दिया गया। 1993 में 35 मिलियन ट्रांजिस्टर थे, इसकी तुलना पहले के इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर से करने पर जिसका वजन 300 किग्रा था जो कि एक धातु के 9 मीटर ऊँचे स्टैंड पर निर्मित किया गया, यह एक जिमनेजियम के क्षेत्र के बराबर जगह घेरता था।

एकल फसल अवधि : विस्तृत क्षेत्र में एक फसल अथवा एक प्रकार के बीज का रोपण।

मानक : लोकप्रचलित आदर्शात्मक आयाम, लोकाचार, रीति-रिवाज, परंपराएँ और नियमा यह ऐसे मूल्य या नियम हैं जो विभिन्न संदभों में सामाजिक व्यवहार को निर्देशित करते हैं। हम लोग प्रायः सामाजिक मानकों का पालन करते हैं क्योंकि, इसे हम समाजीकरण के व्यवहार के रूप में प्रयोग करते हैं। सभी सामाजिक मानकों में उस तरह के अनुशासन होते हैं जो कि समरूपता को प्रोत्साहित करती हैं जबकि मानकों में नियम अंतर्निहित होते हैं। अधिनियमों में कानून सुनिश्चित होते हैं।

प्रकाशीय तंतु (ऑष्टिक फाइबर) : एक पतली शीशे की लड़ी जो प्रकाश का संचरण कर सके। एक अकेला बाल के समान तंतु प्रति सेकेंड में ट्रिलियन बाईट्स सूचनाओं को संचरित करने की क्षमता रखता है जबकि एक पतला ताँबे का तार जो पहले प्रयोग किया जाता था केवल 144000 बाईट्स सूचनाओं का संचरण कर सकता था।

बाह्यस्त्रोत : बाहर से किसी अन्य कंपनी द्वारा अपना काम कराना।

पितृवंशीय : एक व्यवस्था जिसमें पिता के वंश या परिवार से संबंध रहता है।

नग आधारित मज्जदूरी : उत्पादित वस्तु के नग के आधार पर दी जाने वाली मज्जदूरी।

पोस्ट-फोर्डिज्म : यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपनायी गई लचीली उत्पादन पढ़ति से संबंधित है, जो अपनी उत्पादन इकाइयों को लीक से हटकर अथवा बाह्मस्रोतों द्वारा उत्पादन की समस्त प्रक्रिया तथा वितरण को सस्ते श्रम की उपलब्धता के कारण तीसरी दुनिया के देशों को प्रदान करती है। इस समयावधि को वित्तीय तथा सांस्कृतिक विकास के रूप में भी जाना जाता है। शहरों में अवकाश जनित औद्योगिक घटनाओं का आर्विभाव जो शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल, मनोरंजन पार्क तथा टीवी चैनलों के विकास के संदर्भ में भी देखा जाता है।

रैयतवाड़ी व्यवस्था : कर वसूली की एक पद्धति जो औपनिवेशिक भारत में प्रचलित थी। इसमें सरकार द्वारा सीधे किसानों से करों की वसूली कर ली जाती थी।

संदर्भ समूह : वह सामाजिक समूह जिसे व्यक्ति या समूह पसंद करता है तत्पश्चात् उस जैसा बनने के लिए उसके रहन-सहन और व्यवहार के तरीकों को अपनाता हौ। सामान्यत: संदर्भ समूहों का समाज में प्रभुत्व रहता हौ।

संसेक्स या निफ्टी सूचकांक : यह महत्वपूर्ण संसेक्स कंपनियों के शेयरों के उतार-चढ़ाव का सूचक है। संसेक्स मुंबई स्टॉक एक्सचेंज पर आधारित महत्वपूर्ण कंपनियों के शेयरों का सूचक है, जबकि निफ्टी नयी दिल्ली स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर आधारित कंपनियों का सूचक है।

सामाजिक तथ्य : ये सामाजिक जीवन के उन पक्षों से संबढ़ है जो कि एक व्यक्ति के रूप में हमारी क्रियाओं को एक आकार देते हैं।

संप्रभुता : राजा, नेता अथवा सरकार की एक निश्चित भू-भाग में सीमांकित सर्वोच्च शक्ति का अधिकार।

संरचना : मोटे तौर पर संरचना अंतःक्रियाओं का जाल है, जो कि नियमित और पुनरावर्तक दोनों हैं।

टायलरिज्म : व्यवस्थापन नियंत्रण के अंतर्गत किए जाने वाले कार्य को छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटना। इसकी खोज टायलर ने की थी।

मूल्य : मनुष्य अथवा समूहों द्वारा यह विचार रखना कि क्या वांछित है, ठीक है, अच्छा या बुरा है। मूल्यों की विभिन्नता मानवीय संस्कृति के रूपांतरण के मूलभृत पक्षों को दर्शाती है। व्यक्तियों के मूल्य उस विशिष्ट संस्कृति जिसमें वे रहते हैं, से पूर्ण रूप से प्रभावित होते है।

नगरीकरण : कस्बों और शहरों का विकास और आजीविका के लिए कृषि पर निर्भगता में गिरावट।

जर्मींदारी व्यवस्था : औपनिवेशिक भारत में कर-वसूली की एक व्यवस्था, जिसमें जर्मींदार अपनी भूमि के करों को वसूल करके उस राजस्व को ब्रिटिश अधिकारियों को सौप देता था (अपने लिए एक हिस्सा रखकर)।