सूर्यपथ तिरंगा: तिरंगा का ऐतिहासिक वैश्विक रिले
चर्चा में क्यों है?
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में तिरंगा लहराया। इसके लिए केंद्र सरकार ने ‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान के तहत एक खास पहल की - ‘सूर्यपथ तिरंगा’। यह एक 19 घंटे लंबी वैश्विक रिले थी, जिसमें भारत के 54 राजनयिक मिशनों ने हिस्सा लिया। सूरज जिस दिशा में बढ़ता है, उसी दिशा में तिरंगे ने भी यात्रा की। फिजी से शुरू होकर यह रिले अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में खत्म हुई। इस पहल ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत का गौरव अब भौगोलिक सीमाओं से बंधा नहीं है।
क्या था ‘सूर्यपथ तिरंगा’?
सरल शब्दों में समझें तो यह "सूर्य के पथ पर तिरंगे की यात्रा" थी। सूर्यपथ तिरंगा एक तरह से तिरंगे का ग्लोबल रिले जैसा था। यह भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दुनिया भर में अनूठे ढंग से उत्सव मनाने की पहल थी, जिसमें तिरंगा उगते सूरज की दिशा में विश्व की यात्रा कर रहा था। संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि हर मिशन और दूतावास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जिससे अलग-अलग समय क्षेत्रों और महाद्वीपों में तिरंगे की एक निरंतर दृश्य यात्रा देखने को मिली। भारतीय दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों और दुनियाभर में लोगों के उत्साह और भागीदारी ने इस यात्रा को विशेष बना दिया है।
कब और कैसे हुई?
15 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार रात 1:30 बजे फिजी के सुवा से इसकी शुरुआत हुई। इसके बाद यह रिले पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ी और रात 8:30 बजे सैन फ्रांसिस्को में संपन्न हुई। कुल 19 घंटे से ज्यादा चली इस श्रृंखला में दुनिया के 5 महाद्वीप कवर हुए।
किन-किन देशों से गुजरा तिरंगा?
रिले को 4 हिस्सों में समझ सकते हैं:
1. एशिया-प्रशांत: फिजी → न्यूजीलैंड → ऑस्ट्रेलिया → जापान → कोरिया → चीन → ASEAN देश → दक्षिण एशिया के सभी पड़ोसी देश
2. मध्य-पश्चिम एशिया और अफ्रीका: उज्बेकिस्तान → खाड़ी देश → इथियोपिया → केन्या → इजरायल → मिस्र → दक्षिण अफ्रीका
3. यूरोप: रूस → लातविया → जर्मनी → फ्रांस → UK → स्पेन → आइसलैंड → मोरक्को
4. अमेरिका: ब्राजील → कैरेबियन देश → कनाडा → USA → मैक्सिको। अंतिम पड़ाव सैन फ्रांसिस्को था।
हर मिशन में तिरंगा फहराने के साथ ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन हुआ। खास बात ये कि इस साल ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल भी पूरे हो रहे हैं, इसलिए इसका महत्व और बढ़ गया।
इस पहल का महत्व
| डायस्पोरा कूटनीति: | यह पहल विदेशों में बसे 3.5 करोड़ भारतीयों को भारत से जोड़ने का सबसे बड़ा सांस्कृतिक प्रयास है। इससे पता चलता है कि भारत अब अपने प्रवासी समुदाय को 'सॉफ्ट पावर' के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। |
| राष्ट्रीय एकता और गौरव: | एक ही दिन में 54 देशों में एक साथ तिरंगा फहराना, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को दर्शाता है। |
| भारत की वैश्विक छवि: | प्रशांत से लेकर अटलांटिक तक तिरंगे की यात्रा ने दुनिया को भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति और कूटनीतिक पहुंच दिखाई। |
| सरकारी योजनाओं से लिंक: | यह ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का विस्तार है। इससे पहले भी 2022 और 2023 में यह अभियान चला था, लेकिन 2026 का संस्करण सबसे बड़ा और वैश्विक था। |
निष्कर्ष
सूर्यपथ तिरंगा’ सिर्फ एक इवेंट नहीं था। यह एक संदेश था - कि भारत का सूरज अब सिर्फ पूरब में नहीं उगता, बल्कि दुनिया के हर कोने में भारत की पहचान के साथ चमकता है।
'सूर्यपथ तिरंगा' का ऐतिहासिक वैश्विक रिले बीपीएससी (BPSC) पाठ्यक्रम के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएँ भाग के अंतर्गत आता है। यह विषय प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) और मुख्य परीक्षा (Mains) दोनों के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-I के समसामयिक खंड में महत्वपूर्ण है।







