'SMILE' योजना: हाशिये से मुख्यधारा तक
हाल ही में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने स्माइल योजना के बारे में जानकारी दी है। अब तक आधिकारिक SMILE-बेगरी पोर्टल के अनुसार 42,589 लोगों की पहचान और सर्वे किया जा चुका है, और 12,710 लोगों का पुनर्वास हो चुका है।
SMILE है क्या?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही SMILE योजना का पूरा नाम है - Support for Marginalised Individuals for Livelihood and Enterprise इसका मकसद उन लोगों को सहारा देना है जो समाज के सबसे हाशिये पर हैं। SMILE योजना कोई बिल्कुल नई शुरुआत नहीं है। यह भिखारियों और ट्रांसजेंडरों के लिए चल रही अलग-अलग योजनाओं को मिलाकर बनाई गई एक समग्र योजना है।
SMILE योजना का मूल उद्देश्य और क्रियान्वयन
इसका मूल उद्देश्य हाशिये पर रह रहे लोगों को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लायक बनाना है। इस योजना के केंद्र में बड़े पैमाने पर पुनर्वास रखा गया है। इसके साथ ही लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधाएं, मनोवैज्ञानिक परामर्श, शिक्षा और कौशल विकास जैसी सेवाएं दी जाएंगी ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। योजना में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि लोगों के पास आधार, पहचान पत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज हों, जिससे वे सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।
क्रियान्वयन के मामले में SMILE योजना पूरी तरह से सहयोग पर आधारित है। इसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें, स्थानीय शहरी निकाय, स्वैच्छिक संगठन, समुदाय आधारित संगठन और अन्य संस्थान मिलकर चलाएंगे।
इस समन्वय का मकसद यह है कि पुनर्वास का काम सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू हो और जरूरतमंद लोगों तक सीधे पहुंचे।
पुनर्वास की सुविधा
इसका लक्ष्य संसाधनों को बिखरने से रोकना और एकीकृत तरीके से पुनर्वास करना है। भिक्षावृत्ति में लगे लोगों के पुनर्वास के लिए सरकार ने "मौजूदा आश्रय गृहों" को ही इस्तेमाल करने का फैसला किया है। यानी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और शहरी स्थानीय निकायों के पास जो शेल्टर होम, रैन बसेरा या वृद्धाश्रम पहले से हैं, उन्हें ही इस योजना के तहत उपयोग में लाया जाएगा।
लेकिन जहाँ ऐसे आश्रय गृह उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ कार्यान्वयन एजेंसियां नए समर्पित आश्रय गृह बनाएंगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि देश के किसी भी हिस्से में पुनर्वास का काम संसाधनों की कमी से न रुके।
ये योजना दो सबसे कमजोर वर्गों पर फोकस करती है - भिक्षावृत्ति में लगे लोग और ट्रांसजेंडर समुदाय। लक्ष्य सिर्फ मदद करना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान, कौशल और आत्मनिर्भरता के साथ समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है।
| घटक 1: | भिक्षावृत्ति में लगे लोगों का पुनर्वासये उप-योजना 12 फरवरी 2022 को "भिक्षावृत्ति मुक्त भारत" के लक्ष्य के साथ शुरू हुई। सरकार का नजरिया सजा देने का नहीं, बल्कि पुनर्वास का है। अब तक आधिकारिक SMILE-बेगरी पोर्टल के अनुसार 42,589 लोगों की पहचान और सर्वे किया जा चुका है, और 12,710 लोगों का पुनर्वास हो चुका है। पुनर्वास के पैकेज में मेडिकल सुविधा, काउंसलिंग, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका के अवसर शामिल हैं। इसे राज्य सरकारें, जिला प्रशासन, नगर निगम और NGOs के साथ मिलकर लागू किया जा रहा है। सोच ये है कि किसी को सड़क से हटाने के बजाय उसे इस लायक बनाना कि उसे दोबारा भीख मांगने की जरूरत ही न पड़े। |
| घटक 2: | ट्रांसजेंडर समुदाय का सशक्तिकरणट्रांसजेंडर लोगों के लिए सरकार ने 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 23 "गरिमा गृह" बनाए हैं। ये बेसहारा लोगों को आश्रय देते हैं। पिछले 3 सालों में 1,041 लोगों को यहां सहारा मिला। पहचान के लिए राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल से अब तक 33,303 पहचान पत्र जारी हुए हैं। स्वास्थ्य के लिए आयुष्मान भारत के साथ MOU करके 147 AB PM-JAY ट्रांसजेंडर कार्ड दिए गए। आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 725 लोगों को कौशल प्रशिक्षण, 150 को उद्यमिता प्रशिक्षण और 3 राष्ट्रीय रोजगार मेले लगाए गए जिससे 223 लोग लाभान्वित हुए। सुरक्षा के लिए 27 राज्यों में संरक्षण सेल और 30 राज्यों में कल्याण बोर्ड भी बने हैं। |
योजना की विशेषताएं और महत्व
SMILE की सबसे बड़ी ताकत इसका समन्वय वाला मॉडल है। केंद्र, राज्य और स्थानीय संस्थाएं सब साथ काम करती हैं। 2025 में NIRDPR हैदराबाद ने इसका थर्ड-पार्टी मूल्यांकन किया और उसकी सिफारिशें 16वें वित्त आयोग 2026-31 के लिए शामिल की गई हैं। ये योजना सीधे SDG-1, SDG-8 और SDG-10 से जुड़ती है और समावेशी विकास का उदाहरण है।
भारत में भिक्षावृत्ति की स्थिति: आंकड़े और चुनौतियां
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में भिक्षावृत्ति करने वाले लोगों की कुल संख्या 4,13,670 है। इसमें 2,21,673 पुरुष और 1,91,997 महिलाएं शामिल हैं। पिछली जनगणना की तुलना में इस संख्या में वृद्धि देखी गई है, जो गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता की गहरी समस्या को दर्शाती है।
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल में भिखारियों की संख्या सबसे अधिक है। इसके बाद दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश और तीसरे पर बिहार है। पूर्वोत्तर में असम 22,116 भिखारियों के साथ सबसे ऊपर है, जबकि मिजोरम में यह संख्या केवल 53 है। केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली में 2,187 भिखारी सबसे अधिक हैं और चंडीगढ़ में 121 हैं। वहीं लक्षद्वीप में यह संख्या सिर्फ 2 है, जो सबसे कम है।
भिक्षावृत्ति को लेकर कानूनी स्थिति भी बदल रही है। अधिकांश राज्यों में भिक्षावृत्ति रोकथाम अधिनियम के तहत इसे अपराध माना जाता है। लेकिन वर्ष 2025 में सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि किसी भी तरह के विनियमन गरीबी को अपराध की नजर से नहीं देख सकता है। इस संबंध में दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे।
अदालत का मानना है कि गरीबी और मजबूरी में की जाने वाली भिक्षावृत्ति को दंड के बजाय पुनर्वास से जोड़ा जाना चाहिए। यही वजह है कि SMILE जैसी योजनाएं अब सजा की जगह कौशल, शिक्षा और आजीविका पर जोर दे रही हैं, ताकि आंकड़ों को घटाने के साथ-साथ लोगों का जीवन भी सुधारा जा सके।
निष्कर्ष
SMILE योजना हमें याद दिलाती है कि विकास का असली मतलब है किसी को पीछे न छोड़ना। भिक्षावृत्ति करने वाले को भिखारी की नजर से नहीं, बल्कि एक संभावित नागरिक की नजर से देखना। ट्रांसजेंडर को हाशिये से उठाकर अवसर देना। कुलमिलाकर SMILE का लक्ष्य भीख नहीं, भविष्य देना है।
यह टॉपिक बीपीएससी (BPSC) की प्रारंभिक (PT) और मुख्य (MAINS) दोनों परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा निबंध और वैकल्पिक विषय (श्रम और समाज कल्याण) के संदर्भ में ही अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।








