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पीएम सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)

जानें प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY), 5000 MW फ्लोटिंग सोलर, ऊर्जा भंडारण, लाभ, उद्देश्य, चुनौतियां व BPSC महत्व।

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Written by Akhilesh Anand
Published: 3 August 202610 min read
पीएम सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)
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पीएम सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)

हाल ही में केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा को सुदृढ़ करना है और इसके लिए ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ESS) के साथ 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (FSPV) परियोजनाओं का समर्थन करना है।

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) के बारे में

यह योजना राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) द्वारा किए गए आकलन पर आधारित है। इस आकलन के अनुसार, भारत के जलाशयों और उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों में लगभग 102.18 GWp की फ्लोटिंग सौर क्षमता की संभावना है।
5,070 करोड़ के बजट अनुमान के साथ, इस योजना को वित्त वर्ष 2026–27 से वित्त वर्ष 2030–31 तक लागू किया जाएगा।
मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का उपयोग करके यह योजना दुर्लभ भू-संसाधनों पर दबाव को कम करेगी। यह एकीकृत ऊर्जा भंडारण के माध्यम से ग्रिड विश्वसनीयता में भी सुधार करेगी।
कम से कम दो घंटे (10,000 मेगावाट) की भंडारण क्षमता वाली ESS राज्यों को पीक डिमांड (चरम मांग) प्रबंधन में और सहायता करेगी।
इस योजना से  लगभग 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में वार्षिक कमी आने की उम्मीद है। यह 16,000–17,000 पूर्णकालिक समतुल्य रोजगार सृजित करेगी।
साथ ही, यह फ्लोटेशन सिस्टम, PV सेल, मॉड्यूल और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के घरेलू विनिर्माण को भी बढ़ावा देगी। इस योजना के माध्यम से सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश लाभान्वित होने के पात्र होंगे।
इस पहल से भारत की फ्लोटिंग सौर क्षमता वर्तमान लगभग 700 मेगावाट से बढ़कर 5,000 मेगावाट तक पहुंच जाएगी।

वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा, जिसमें सौर और गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई।

भारत ने 44.61 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में जोड़ी गई 23.83 गीगावाट की लगभग दोगुनी है। सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 2014 में 2.3 गीगावाट से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक लगभग 172 गीगावाट हो गई। कुल गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुंच गई, जिसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता शामिल है।

गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि 55.29 गीगावाट दर्ज की गई।

29 जुलाई 2025 को, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों ने भारत की बिजली मांग का 51.5% पूरा किया, जो अब तक दर्ज किया गया सबसे अधिक मासिक हिस्सा है।

भारत में सौर ऊर्जा के विकास की पृष्ठभूमि

यह परिवर्तन नीतिगत समर्थन, अवसंरचना विकास, विनिर्माण विस्तार और नागरिक भागीदारी से प्रेरित है। सौर पार्क, रूफटॉप प्रणाली और सौरीकृत कृषि पंप जैसे पहल देशभर में इसकी तैनाती को तेज कर रही हैं। सौर वृद्धि के लिए नवीनतम प्रमुख पहल नई मंजूर की गई प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) है।

एक दशक पहले, भारत के बिजली मिश्रण में सौर ऊर्जा का हिस्सा बहुत छोटा था। आज, यह देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा बनाती है।वर्ष 2014 में  लगभग 3 गीगावाट की स्थापित क्षमता से, इस क्षेत्र का विस्तार पचास गुना से भी अधिक हुआ है, और यह 30 जून 2026 तक 162.15 गीगावाट तक पहुंच गया है। 

यह समन्वित गतिशीलता हमारे समक्ष मापने योग्य परिणाम लेकर आई  है। देश ने 2025 में 37 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जिससे यह वार्षिक वृद्धि में संयुक्त राज्य अमेरिका से आगे निकल गया। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सौर विकास बाजार बनकर भी उभरा है, जो वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

सौर विस्तार का एक दशक

भारत के सौर विस्तार की नींव एक मजबूत नीतिगत ढांचे ने रखी। प्रमुख प्रयासों में राष्ट्रीय सौर मिशन (2010), सोलर पार्क योजना, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर कार्यक्रम, और प्रतिस्पर्धी बोली शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर बड़े पैमाने पर सौर तैनाती को गति दी।

भारत भर में सौर क्षमता

सौर तैनाती विविध भौगोलिक और जलवायु क्षेत्रों में फैली हुई है। राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र स्थापित क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रखते हैं। बड़ी सौर परियोजनाएं 118.79 गीगावाट स्थापित क्षमता का योगदान करती हैं।

कुछ प्रमुख बड़ी सौर परियोजनाओं में शामिल हैं भड़ला सोलर पार्क (राजस्थान), पावागड़ा सोलर पार्क (कर्नाटक), और रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क (मध्य प्रदेश) । बिजली ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप सौर प्रणालियां एक और 27.88 गीगावाट का योगदान करती हैं।

शेष क्षमता हाइब्रिड सौर परियोजनाओं और ऑफ-ग्रिड सौर प्रणालियों से आती है। हाइब्रिड परियोजनाएं सौर ऊर्जा को बैटरी भंडारण या अन्य ऊर्जा स्रोतों के साथ जोड़ती हैं, जबकि ऑफ-ग्रिड प्रणालियां उन क्षेत्रों में बिजली प्रदान करती हैं जो ग्रिड से जुड़े नहीं हैं।

सौर विस्तार के पीछे की नीतिगत संरचना

एक स्थिर नीतिगत ढांचे, प्रतिस्पर्धी बोली तंत्र, और दीर्घकालिक लक्ष्यों ने बड़े पैमाने पर सौर तैनाती के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद की है। परस्पर सुदृढ़ करने वाले उपायों के एक समूह ने भारत के सौर विस्तार को समर्थन दिया है। इन्हें व्यापक रूप से पांच स्तंभों में विभाजित किया जा सकता है:

जलवायु प्रतिबद्धताएं और दीर्घकालिक लक्ष्य

ग्लासगो में COP26 में, भारत ने पंचामृत लक्ष्यों की घोषणा की, जिनमें 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन शामिल है।

ये प्रतिबद्धताएं पेरिस समझौते के तहत भारत के अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) में परिलक्षित हुईं।

इन प्रयासों को पूरक बनाते हुए, मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) सतत उपभोग को बढ़ावा देता है और नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक प्रथाएं अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

विनिर्माण को समर्थन

सरकार ने घरेलू सौर विनिर्माण को मजबूत करने और आयात निर्भरता कम करने के लिए उपाय शुरू किए हैं।

उच्च-दक्षता सौर पीवी मॉड्यूल के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना

वर्ष 2021 में 4,500 करोड़ के प्रारंभिक परिव्यय के साथ शुरू की गई, उच्च-दक्षता सौर पीवी मॉड्यूल के लिए PLI योजना को 2022 में अतिरिक्त 19,500 करोड़ के साथ विस्तारित किया गया।

यह योजना घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देती है, आयात निर्भरता कम करती है, और सौर मूल्य श्रृंखला में मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित करती है। अक्टूबर 2024 तक, इस योजना ने लगभग 35,000 करोड़ का निवेश आकर्षित किया था।

इसने लगभग 10,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी दिया था।

अनुमोदित मॉडल और निर्माताओं की सूची (ALMM),

वर्ष 2019 में शुरू किया गया, ALMM सौर पीवी मॉड्यूल और सेल के लिए एक गुणवत्तापूर्ण आश्वासन ढांचा है। यह सुनिश्चित करता है कि पात्र परियोजनाओं में उपयोग किए जाने वाले सौर उपकरण निर्दिष्ट गुणवत्ता और प्रदर्शन मानकों को पूरा करें। केवल अनुमोदित सूचियों में शामिल निर्माता और मॉडल ही निर्दिष्ट सरकार-समर्थित और प्रतिस्पर्धी रूप से बोली लगाई गई सौर परियोजनाओं के लिए पात्र हैं। साथ मिलकर, PLI योजना और ALMM ने भारत के घरेलू सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है।

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना

13 फरवरी 2024 को 75,021 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू की गई, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना देशभर के घरों तक सीधे रूफटॉप सौर लाभ पहुंचाती है। यह विश्व का सबसे बड़ा घरेलू रूफटॉप सौर कार्यक्रम है। पात्र परिवारों को रूफटॉप सौर स्थापना के लिए सब्सिडी मिलती है, जबकि जमानत-मुक्त ऋण अपनाने की सुविधा देते हैं। यह योजना एक समर्पित राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से क्रियान्वित की जाती है, जो निर्बाध पंजीकरण, स्थापना और सब्सिडी वितरण को सक्षम बनाती है।

      प्रमुख उपलब्धियां

  •  जून 2026 तक 43 लाख परिवारों को सौरीकृत किया जा चुका है।
  • दिसंबर 2025 तक 14,771.82 करोड़  केंद्रीय वित्तीय सहायता के रूप में वितरित किए गए।
  • 09 दिसंबर 2025 तक 7.7 लाख से अधिक परिवारों को शून्य बिजली बिल प्राप्त हुए।

    यह योजना परिवारों को अपनी स्वयं की बिजली उत्पन्न करने में सक्षम बनाती है। यह बिजली बिलों को कम करती है और रूफटॉप सौर को अपनाने को बढ़ावा देती है। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिला है, जिसमें विश्व बैंक ने भारत में आवासीय रूफटॉप सौर को बढ़ाने के लिए वित्तपोषण को मंजूरी दी है।

प्रधानमंत्री-किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम)

2019 में शुरू की गई, पीएम-कुसुम का उद्देश्य कृषि में सौर ऊर्जा के उपयोग का विस्तार करना है। यह योजना विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों, स्टैंडअलोन सौर कृषि पंपों, और ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों के सौरीकरण की स्थापना का समर्थन करती है। इसका उद्देश्य सिंचाई के लिए विश्वसनीय दिन के समय बिजली प्रदान करना, डीजल पर निर्भरता कम करना, और किसानों के लिए आय के अवसर बढ़ाना है।                                                                                                                        

प्रमुख उपलब्धियां

  • लगभग 11.49 लाख ऑफ-ग्रिड सौर पंप कृषि उपयोग के लिए स्थापित किए गए।
  • इससे अधिक 15.89 लाख कृषि पंप फीडर-स्तरीय सौरीकरण के माध्यम से कवर किए गए हैं।
  • लगभग 1,726 मेगावाट विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा क्षमता किसानों की भूमि पर चालू की गई।
  • इससे अधिक 21.77 लाख किसानों को देशभर में लाभ मिला।

दोनों योजनाएं भारत के वितरित सौर ऊर्जा परिदृश्य के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरी हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में, वितरित सौर समाधानों ने वर्ष के दौरान जोड़ी गई 16.3 गीगावाट अर्थात 36% का योगदान दिया, जो 44.61 गीगावाट सौर क्षमता का हिस्सा है। इसमें से 7.6 गीगावाट पीएम-कुसुम से और 8.7 गीगावाट रूफटॉप सौर से आया।

वैश्विक सौर सहयोग में भारत का बढ़ता नेतृत्व

सौर ऊर्जा में भारत का नेतृत्व अपनी सीमाओं से परे भी फैला है। देश अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान, और क्षमता निर्माण को मजबूत कर रहा है।

  • अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): 2015 में पेरिस में COP21 में भारत और फ्रांस द्वारा सह-स्थापित, ISA वैश्विक सौर सहयोग के लिए एक प्रमुख मंच बनकर उभरा है। यह गठबंधन मालदीव, ग्रीस, जर्मनी, इटली, भूटान, लक्जमबर्ग और अर्जेंटीना सहित देशों को सौर तैनाती में तेजी लाने और ज्ञान व प्रौद्योगिकी साझा करने के लिए एक साथ लाता है। ISA सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में विकसित हुआ है।
  • वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG): 2018 में भारत द्वारा प्रस्तावित, OSOWOG एक परस्पर जुड़े वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा नेटवर्क की परिकल्पना है। इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए, भारत और यूनाइटेड किंगडम ने 2021 में COP26 में ग्रीन ग्रिड्स इनिशिएटिव–वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (GGI–OSOWOG) शुरू किया। इस पहल को ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका, और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का समर्थन प्राप्त है। यह परस्पर जुड़े बिजली ग्रिडों के माध्यम से सीमा-पार नवीकरणीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ावा देती है, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में तेजी लाती है।

ISA और अन्य साझेदारियों के माध्यम से, भारत ने वैश्विक दक्षिण में नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत किया है। अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान, भारत ने 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने पर सहमति बनाने में भी मदद की।

निष्कर्ष

भारत में सौर ऊर्जा का विकास एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र को प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजन (PM-SSY) के अनुमोदन के साथ एक बड़ा बढ़ावा मिला है। इस योजना का उद्देश्य ऊर्जा भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) के समर्थन वाले  5,000 मेगावाट की फ्लोटिंग सौर क्षमता का विकास करना है। सौर ऊर्जा भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के सबसे मजबूत प्रेरकों में से एक बन गई है। क्षमता, विनिर्माण और उपभोक्ता अपनाने में वृद्धि यह दर्शाती है कि समन्वित नीतिगत समर्थन किस प्रकार एक उभरती तकनीक को मुख्यधारा के ऊर्जा स्रोत में बदल सकता है। यह क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, आर्थिक विकास को गति देता है, जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाता है, और भारत को एक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा नेता के रूप में स्थापित करता है।

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) मुख्य रूप से सामान्य अध्ययन पेपर-2 (GS Paper-2) के विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science and Technology) खंड का हिस्सा है।

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