पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआई)
हाल ही में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में बताया कि सरकार ने पंचायतों के कामकाज को मापने के लिए पंचायत डेव्लपमेंट इंडेक्स (PDI) को अब पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) का नाम दिया है। पीएआई एक तरह का "रिपोर्ट कार्ड" है। इसके स्कोरकार्ड और डैशबोर्ड से हर पंचायत को 9 विषयों पर अलग-अलग और कुल मिलाकर नंबर मिलते हैं। इससे साफ पता चल जाता है कि कहां पंचायत मजबूत है, कहां कमी है और किस पर खास ध्यान देना है।
वित्त वर्ष 2023-24 में PAI 2.0 के तहत 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 2.59 लाख ग्राम पंचायतें इस सिस्टम से जुड़ चुकी हैं। सीधे शब्दों में, PAI का मकसद है गांवों की प्रगति को कागजों से निकालकर डेटा में लाना, ताकि हर पंचायत अपनी कमजोरी सुधार सके और SDG के लक्ष्यों को जमीन पर हासिल कर सके।
पीएआई 2.0
PAI 2.0 के तहत "बाल-अनुकूल गांव" या "जल-पर्याप्त पंचायत" जैसी फ्रंटरनर पंचायतों के लिए 2026-27 के बजट में अभी कोई अलग से विशेष प्रोत्साहन निधि नहीं बनाई गई है।
लेकिन सरकार पंचायतों को मजबूत करने के लिए आरजीएसए योजना चला रही है। 2022-23 से अब तक इसके जरिए 36.81 लाख से ज्यादा पंचायत प्रतिनिधियों और दूसरे हितधारकों को SDG के 9 विषयों पर ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इसमें बुनियादी प्रशिक्षण, विषयगत ट्रेनिंग और पंचायत विकास योजना बनाने की मदद शामिल है।
मंत्रालय पंचायतों को GPDP बनाने में भी मदद करता है। इसके लिए गांवों को पहले अपनी प्राथमिकता तय करनी होती है जिसे "संकल्प" कहा जाता है।
जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों से संबंधित क्षेत्र जैसे ड्रिप सिंचाई और छिड़काव (स्प्रिंकलर) प्रणाली के माध्यम से कुशल जल प्रबंधन, वाटरशेड विकास, कृषि वानिकी और अन्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को विषय 4: जल पर्याप्त पंचायत और विषय 5: स्वच्छ और हरित पंचायत के तहत एकीकृत किया गया है।
29 जुलाई 2026 तक 1,56,019 पंचायतों ने GPDP बनाने का संकल्प लिया है। इनमें से 31,789 पंचायतों ने पानी को और 32,806 पंचायतों ने स्वच्छता-हरियाली को अपनी मुख्य प्राथमिकता चुना है।
पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स PAI के बारे में
एक ऐसा पैमाना है जो यह मापता है कि हमारी पंचायतें सतत् विकास लक्ष्यों यानी SDG को जमीन पर उतारने में कितना अच्छा काम कर रही हैं। यह सिर्फ नंबर नहीं देता, बल्कि हर पंचायत की ताकत और कमजोरी को सबूत के साथ सामने रखता है।
इसका उद्देश्य पंचायतों और लोगों में SDG को लेकर जागरूकता बढ़ाना, ताकि गांव खुद अपनी प्रगति का हिसाब रख सकें। इसके लिए पंचायतों को अच्छी प्रथाएं अपनाने और एक-दूसरे से सीखने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाता है।
इसमें पंचायतों को उनके कुल स्कोर के आधार पर जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर रैंक दी जाती है। ग्रेड भी तय हैं - D 40% से कम, C 40-60%, B 60-75%, A 75-90% और A+ 90% से ऊपर।
पीएआई (PAI) 9 बड़े विषयों पर पंचायतों को परखता है: गरीबी मुक्त आजीविका, स्वस्थ गांव, बाल-सुलभ गांव, जल-पर्याप्त गांव, स्वच्छ-हरित गांव, मजबूत बुनियादी ढांचा, सामाजिक न्याय-सुरक्षा, सुशासन और महिला-अनुकूल गांव।
अनुप्रयोग, लाभ और मुख्य बातें
PAI का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये अंदाजे से नहीं, बल्कि डेटा और सबूत के आधार पर पंचायतों का काम देखने में मदद करता है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसका इस्तेमाल पंचायती राज पुरस्कार देने और ये तय करने के लिए कर सकते हैं कि विकास के पैसे कहां सबसे ज्यादा जरूरत हैं।
ये सिर्फ रैंकिंग का टूल नहीं है। पंचायतें और दूसरे विभाग इससे अपनी योजनाएं बना सकते हैं, बीच में निगरानी कर सकते हैं और आखिर में नतीजा भी जांच सकते हैं। साथ ही जो पंचायतें अच्छा कर रही हैं, उनके मॉडल को दूसरी पंचायतें सीखकर अपना सकती हैं। इस तरह अनुभव और ज्ञान साझा करना आसान हो जाता है।
पायलट प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के 4 जिलों - पुणे, सांगली, सतारा और सोलापुर में चला था। वहां के डेटा से बनी रिपोर्ट बताती है कि 70% पंचायतें C ग्रेड में और 27% पंचायतें B ग्रेड में हैं। इससे साफ है कि अभी बहुत काम बाकी है। रिपोर्ट यही कहती है कि विकास के लिए पैसा और मेहनत उसी जगह लगनी चाहिए जहां कमी है। तभी "सबका साथ, सबका विकास" वाला सपना गांव-गांव तक पहुंचेगा।
निष्कर्ष
PAI 2.0 साफ तौर पर दिखाता है कि सरकार अब पंचायतों की प्रगति को सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि डेटा और ट्रेनिंग के जरिए जमीन पर उतारना चाहती है। 2.59 लाख पंचायतें इस सिस्टम से जुड़ चुकी हैं, 36 लाख से ज्यादा प्रतिनिधियों को SDG पर प्रशिक्षित किया गया है और 1.5 लाख से ज्यादा पंचायतों ने अपनी GPDP के लिए "संकल्प" भी लिया है। सबसे अच्छी बात ये है कि पानी और स्वच्छता जैसे मुद्दे अब गांवों की पहली प्राथमिकता बन रहे हैं। फिलहाल फ्रंटरनर पंचायतों के लिए अलग से फंड नहीं है और UNDP जैसी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भी नहीं हुई है, लेकिन आरजीएसए और GPDP के जरिए नींव रखी जा चुकी है। अगर पंचायतें, राज्य सरकार और केंद्र मिलकर इन आंकड़ों को असल बदलाव में बदलें, तो "जल-पर्याप्त, स्वच्छ-हरित और बाल-अनुकूल गांव" का सपना दूर नहीं है।
पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के Mains GS Paper 2 (भारतीय राजव्यवस्था/अर्थव्यवस्था और भूगोल) और Prelims (करेंट अफेयर्स व पंचायती राज) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।









