‘नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन’ (NeVA)
चर्चा में क्यों है?
हाल ही में संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर देते हुए ‘नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन’ (NeVA) के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) लागू करने के लिए 33 राज्य विधानसभाओं ने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से 21 विधानसभाओं को नेवा प्रोजेक्ट के तहत डिजिटल विधानसभाओं में रूपांतरित कर दिया गया है। इसमें केन्द्र शासित प्रदेश भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि देश में कुल 37 राज्य/केन्द्र प्रशासित विधानमंडल हैं। उन्होंने बताया है कि नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन ने डिजिटाइजेशन के जरिए विधायी कामकाज की कार्यक्षमता में सुधार किया है।
नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के बारे में
NeVA, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत 44 मिशन मोड परियोजनाओं में से एक है।
इसका उद्देश्य सभी राज्य विधानसभाओं को डिजिटल हाउस में बदलकर सदन का कामकाज कागज रहित बनाना है। विधायी निकायों से संबंधित सभी कार्यों और डाटा को ऑनलाइन उपलब्ध कराना है। सदन के अध्यक्ष को कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने और विधायी कार्यों को कागज रहित करने में सहायता देना है।
इसमें एक वेबसाइट और एक मोबाइल ऐप शामिल है।
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कार्यान्वयन के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय नोडल मंत्रालय है।
नीति आयोग ने NeVA का मध्यावधि मूल्यांकन किया है। मूल्यांकन में कागज के उपयोग में कमी और विधायी कार्यप्रवाह में सुधार जैसे सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया गया है।
एप्लिकेशन को सुरक्षित NIC मेघराज 2.0 क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर पर स्थानांतरित किया गया है।
भाषाई सुगमता के लिए ‘भाषिणी’ के साथ एकीकरण से सार्वजनिक पोर्टल की सामग्री का शब्दशः अनुवाद संभव हुआ है।

वित्तीय अनुदान
नेवा प्रोजेक्ट को सीएसएस पैटर्न के तहत फंड किया जाता है, जिसका कुल खर्च 673.94 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 423.60 करोड़ रुपये है। आंध्र प्रदेश विधानसभा के दोनों सदनों में नेवा प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए 23,58,20,600 रुपये की मंज़ूरी दी गई है। आंध्र प्रदेश समेत इसमें शामिल सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं को सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (सीपीएमयू) के जरिए क्षमता-निर्माण पहलों के रूप में आवश्यक तकनीकी सहायता दी जाती है।
डिजिटाइजेशन और इसके सकारात्मक परिणाम
नेवा प्रोजेक्ट के मध्यकालिक मूल्यांकन के अनुसार, नेवा ने विधायी प्रक्रियाओं के डिजिटाइजेशन के माध्यम से विधायी कामकाम की दक्षता में सुधार किया है, कागज आधारित कार्यवाहियों पर निर्भता कम की है, विधायी काम का त्वरित प्रसंस्करण और प्रसार किया है और विधायी जानकारी की सुगम्यता बेहतर की है। इससे दस्तावेजों की प्रिंटिंग, हैंडलिंग और भंडारण में भी बचत हुई है।
क्रियान्वयन:- राज्य/केंद्रशासित विधानसभाएं स्वायत्तशासी संस्थाएं हैं। इसलिए, नेवा प्रोजेक्ट को संबंधित राज्य विधानसभाओं के परामर्श के साथ उनकी तैयारी के आधार पर कार्यान्वित किया गया है।
चुनौतियां
वर्तमान में वैश्विक स्तर पर जिस तरह के सायबर अपराध देखे जा रहे हैं, वह चिंतित करने वाला है। दरअसल इसके समक्ष मौजूद कई चुनौतियां हैं जिन्हें दूर किए जाने की आवश्यकता है।
डिजिटल साक्षरता अभाव और अपर्याप्त क्षमता निर्माण,
साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता,
तकनीकी बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी का अपेक्षित विस्तार का न हो जाना,
निरंतर उन्नयन और रखरखाव की कमी
आगे की राह
- तकनीकी बुनियादी ढांचा :- दूरदराज के क्षेत्रों सहित सभी विधानसभाओं में विश्वसनीय और उच्च गति इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा आवश्यक तकनीकी ढांचे को सुनिश्चित करना।
- स्थायी मॉडल का विकास :- उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया के आधार पर NeVA एप्लिकेशन का नियमित उन्नयन और रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी वित्तीय और तकनीकी मॉडल बनाना।
- अनुभव साझाकरण मंच :- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक मंच स्थापित करना, ताकि कार्यान्वयन की चुनौतियों का समाधान हो सके।
- भाषाई समावेशन :- भाषिणी जैसी पहलों के साथ एकीकरण को और मजबूत करना, ताकि अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में विधायी जानकारी उपलब्ध हो सके।
निष्कर्ष
यह ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही को बढ़ाना है। जाहिर है, साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल को लगातार मजबूत करना और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए नवीनतम तकनीकों को अपनाने के बाद ही सतत और टिकाऊ डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) का संबंध विधायी प्रक्रिया के डिजिटाइजेशन और ई-गवर्नेंस से जुड़ा हुआ है जो मुख्य रूप से BPSC की मुख्य परीक्षा (Mains) के GS Paper-II के अंतर्गत आता है।
Reference:
What is the National e-Vidhan Application (NeVA)?
NeVA is one of 44 Mission Mode Projects under the Digital India programme, aimed at converting all state legislatures into paperless digital houses and making legislative work and data available online, and includes both a website and a mobile app.
How many state assemblies have signed on to NeVA and how many have gone digital?
As per the government's reply in the Rajya Sabha, 33 state assemblies have signed MoUs to implement NeVA, and of these, 21 assemblies, including union territories, have been converted into digital assemblies.
How many state and union territory legislatures does India have in total?
According to the article, there are a total of 37 state or union territory legislatures in the country.
Which ministry is the nodal ministry for implementing NeVA?
The Ministry of Parliamentary Affairs is the nodal ministry for implementing NeVA across states and union territories.
What is the total cost of the NeVA project and the central government's share?
NeVA is funded under a Centrally Sponsored Scheme pattern with total expenditure of ₹673.94 crore, of which the central government's share is ₹423.60 crore.
How much funding was approved for implementing NeVA in the Andhra Pradesh Assembly?
₹23,58,20,600 was approved for implementing the NeVA project in both houses of the Andhra Pradesh Legislature.
What cloud infrastructure does NeVA run on?
The application has been migrated to the secure NIC MeghRaj 2.0 cloud infrastructure.
How does NeVA support linguistic accessibility?
Integration with 'Bhashini' enables verbatim translation of the public portal's content, improving linguistic accessibility of legislative information.
What did NITI Aayog's mid-term evaluation of NeVA find?
NITI Aayog's mid-term evaluation highlighted positive impacts such as reduced paper usage and improvements in the legislative workflow.
Which GS paper covers NeVA for BPSC Mains?
NeVA relates to the digitization of the legislative process and e-governance, which mainly comes under GS Paper-II of the BPSC Mains examination, consistent with its Polity category.






