NASA का Perseverance Rover: मंगल ग्रह पर सबसे लंबी दूरी तय करने वाला रोवर
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चर्चा में क्यों है? NASA का Perseverance Rover मंगल ग्रह पर लगभग 45.2 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पृथ्वी से बाहर किसी दूसरे खगोलीय पिंड पर सबसे लंबी दूरी तय करने वाले रोवर के रूप में चर्चा में आया है।
दोस्तों, इस संदर्भ में आधारभूत स्तर पर निम्न शब्दावलियों को समझना जरूरी है. रोवर (Rover): ऐसा वाहन जो किसी दूसरे ग्रह या खगोलीय पिंड की सतह पर चलकर अध्ययन करता है। मंगल ग्रह (Mars): सौर मंडल का चौथा ग्रह, जिस पर वैज्ञानिक प्राचीन जीवन के संभावित संकेतों की खोज कर रहे हैं। वैज्ञानिक महत्त्व: मंगल की सतह, चट्टानों, मिट्टी और प्राचीन पर्यावरण का अध्ययन करना तथा भविष्य के मानव मिशनों के लिए जानकारी जुटाना।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह मंगल पर किसी एक दिन में तय की गई दूरी नहीं, बल्कि रोवर की यात्रा की कुल दूरी है।
Perseverance Rover क्या है?
प्रमुख तथ्य अंतरिक्ष एजेंसी: NASA (अमेरिका) मिशन: Mars 2020 लॉन्च: 30 जुलाई 2020 मंगल पर लैंडिंग: 18 फरवरी 2021 लैंडिंग स्थल: Jezero Crater रोवर का प्रकार: छह पहियों वाला रोबोटिक वाहन मुख्य उद्देश्य: प्राचीन सूक्ष्मजीवी जीवन के संभावित संकेतों की खोज और मंगल के भूविज्ञान का अध्ययन।
जैसे वैज्ञानिक पृथ्वी पर किसी पुराने तालाब या नदी के आसपास की मिट्टी और चट्टानों का अध्ययन करके पता लगाते हैं कि वहाँ पहले जीवन था या नहीं, वैसे ही Perseverance मंगल ग्रह की पुरानी चट्टानों और मिट्टी का अध्ययन करता है। यह रोवर मनुष्य द्वारा नियंत्रित हर गतिविधि के लिए पृथ्वी से लगातार निर्देश मिलने का इंतजार नहीं करता। यह कुछ परिस्थितियों में अपने कैमरों, कंप्यूटर और नेविगेशन प्रणाली की मदद से स्वयं रास्ता चुन सकता है। 45.2 किलोमीटर की दूरी का रिकॉर्ड क्यों महत्त्वपूर्ण है? NASA के अनुसार, 11 अक्टूबर 2026 को Perseverance ने लगभग 45.22 किलोमीटर की कुल यात्रा पूरी करके पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इससे पहले NASA के ही Opportunity Rover के नाम लगभग 45.16 किलोमीटर का रिकॉर्ड था। इसमें सबसे बड़ी बात केवल दूरी नहीं है। Perseverance ने लगभग साढ़े पाँच साल में यह रिकॉर्ड बनाया, जबकि Opportunity को अपना पुराना रिकॉर्ड बनाने में लगभग 15 साल लगे थे। हालिया उपलब्धि से वैज्ञानिकों को मंगल के अधिक क्षेत्रों तक पहुँचने, अधिक चट्टानों का अध्ययन करने और मंगल ग्रह के इतिहास को बेहतर समझने का अवसर मिलता है।
Jezero Crater क्या है और यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
Jezero Crater मंगल ग्रह पर स्थित एक प्राचीन Impact Crater है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यहाँ अरबों साल पहले एक झील और उससे जुड़ी नदी-डेल्टा जैसी व्यवस्था मौजूद थी। दोस्तों, जैसे नदी अपने साथ मिट्टी, रेत और खनिज लाती है, फिर वह किसी झील में मिलती है, वहाँ ये पदार्थ जमा हो सकते हैं और डेल्टा बनाते हैं। ऐसे स्थानों पर प्राचीन पर्यावरण और संभावित जैविक संकेत सुरक्षित रहने की संभावना हो सकती है। इसी कारण Jezero Crater वैज्ञानिकों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। Perseverance का उद्देश्य यह साबित करना नहीं है कि मंगल पर जीवन निश्चित रूप से मौजूद था, बल्कि यह जाँचना है कि क्या वहाँ कभी सूक्ष्मजीवी जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ थीं और क्या चट्टानों में उसके संकेत सुरक्षित हैं।
Perseverance Rover के प्रमुख वैज्ञानिक उद्देश्य
1. प्राचीन जीवन के संकेत खोजना मंगल की चट्टानों में ऐसे रासायनिक, खनिजीय या संरचनात्मक बनावट का अध्ययन करना जो प्राचीन सूक्ष्मजीवी जीवन की ओर संकेत कर सकते हैं।
2. चट्टानों और मिट्टी के नमूने एकत्र करना रोवर चट्टानों के छोटे नमूने इकट्ठा करके विशेष ट्यूबों में रखता है। भविष्य में उन्हें पृथ्वी पर लाने की योजना वैज्ञानिक अध्ययन को और गहरा कर सकती है।
3. मंगल के भूवैज्ञानिक इतिहास को समझना चट्टानों की बनावट और रासायनिक संरचना से पानी, ज्वालामुखीय गतिविधियों और ग्रह के प्राचीन पर्यावरण के बारे में जानकारी मिल सकती है।
4. भविष्य के मानव मिशनों के लिए तकनीक विकसित करना इस मिशन ने मंगल के वातावरण से ऑक्सीजन बनाने के प्रयोग जैसी तकनीकों का परीक्षण भी किया है। इसका उपकरण MOXIE था। NASA की रिपोर्ट के अनुसार, Perseverance अब तक 29 चट्टान और रेगोलिथ (ढीली सतही मिट्टी व चट्टानी पदार्थ) के नमूने इकट्ठा कर चुका है। AutoNav तकनीक क्या है? रोवर स्वयं रास्ता कैसे चुनता है?
Perseverance की सफलता में AutoNav (Autonomous Navigation) की अहम भूमिका है। यह ऐसी तकनीक है, जिसकी मदद से रोवर अपने आसपास के रास्ते का आकलन करके सुरक्षित मार्ग चुन सकता है। इसकी कार्यप्रणाली को चार चरणों में समझा जा सकता है. चरण 1: कैमरों से तस्वीरें लेना रोवर अपने आगे के रास्ते की तस्वीरें लेता है।
चरण 2: रुकावटों की पहचान कंप्यूटर चट्टानों, गड्ढों और खतरनाक सतहों का आकलन करता है।
चरण 3: सुरक्षित रास्ता चुनना रोवर निर्धारित गंतव्य तक पहुँचने के लिए उपयुक्त मार्ग बनाता है।
चरण 4: आगे बढ़ना रोवर रास्ते का आकलन करते हुए अपनी यात्रा जारी रखता है।
NASA के अनुसार, Perseverance ने अपनी कुल यात्रा का 90% से अधिक हिस्सा AutoNav की मदद से तय किया है। इसकी तुलना में शुरुआती मंगल रोवरों में इस तरह की स्वायत्त नेविगेशन क्षमता का उपयोग बहुत कम था। मान लीजिए किसी सड़क पर पत्थर और गड्ढे हैं। सामान्य वाहन का चालक उन्हें देखकर रास्ता बदलता है। Perseverance भी कैमरों और कंप्यूटर की सहायता से कुछ इसी प्रकार बाधाओं से बचने का प्रयास करता है। हालाँकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि रोवर हर निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र रूप से लेता है। वैज्ञानिक पृथ्वी से गंतव्य और मिशन संबंधी निर्देश देते हैं।
मंगल ग्रह पर रोवर चलाना कठिन क्यों है? दूरस्थ नियंत्रण: पृथ्वी से निर्देश भेजने और जवाब प्राप्त करने में समय लगता है। असमान सतह: चट्टानें, ढलान, रेत और गड्ढे रोवर को नुकसान पहुँचा सकते हैं। सीमित ऊर्जा: रोवर के उपकरणों, कंप्यूटर और पहियों को चलाने के लिए ऊर्जा का प्रबंधन आवश्यक है। तापमान और धूल: मंगल का कठोर वातावरण उपकरणों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। कैमरों पर सूर्य के प्रकाश का प्रभाव: तेज चमक से रास्ते की तस्वीरें प्रभावित हो सकती हैं और यात्रा का समय सीमित करना पड़ सकता है।
मंगल के अन्य प्रमुख रोवरों से तुलना रोवर मंगल पर लैंडिंग मुख्य विशेषता Sojourner 1997 NASA का पहला सफल मंगल रोवर
Spirit 2004 मंगल की चट्टानों /भूविज्ञान का
अध्ययन
Opportunity 2004 लंबे समय तक काम किया
Curiosity 2012 Gale Crater में मंगल के पर्यावरण और भूविज्ञान का अध्ययन
Perseverane 2021 प्राचीन जीवन के संभावित संकेत
और नमूनों का संग्रह
एक महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि Perseverance ने Opportunity का रिकॉर्ड तोड़ा है, Curiosity का नहीं। Curiosity भी मंगल पर सक्रिय वैज्ञानिक मिशन है, लेकिन 12 अक्टूबर 2026 की NASA रिपोर्ट में उसकी कुल यात्रा Perseverance से कम बताई गई है।
मंगल ग्रह पर संभावित जीवन के संकेत क्या हैं?
Biosignature (जैव-संकेत): ऐसा रासायनिक, भौतिक या संरचनात्मक संकेत जो जीवन की मौजूदगी या पूर्व मौजूदगी की संभावना दर्शा सकता है। Microbial life (सूक्ष्मजीवी जीवन): बैक्टीरिया जैसे बहुत छोटे जीवों के समान जीवन। Regolith (रेगोलिथ): किसी ग्रह या चंद्रमा की सतह पर मौजूद ढीली मिट्टी, धूल और टूटे हुए चट्टानी पदार्थ। Hydrothermal system (जल-तापीय तंत्र): ऐसा भूवैज्ञानिक तंत्र जिसमें गर्म पानी चट्टानों के साथ क्रिया करता है। पृथ्वी पर कुछ ऐसे वातावरण सूक्ष्मजीवों के लिए अनुकूल होते हैं। NASA ने Perseverance द्वारा अध्ययन की गई Cheyava Falls नामक चट्टान में संभावित जैव-संकेतों की पहचान की है। लेकिन संभावित जैव-संकेत का मिलना प्राचीन जीवन का निर्णायक प्रमाण नहीं है। इसकी पुष्टि के लिए और वैज्ञानिक जाँच आवश्यक है।
भारत के लिए इसका क्या महत्त्व है?
भारत के लिए मंगल अन्वेषण का अध्ययन विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि भारत ने भी अपने मंगल मिशन के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
मंगलयान (Mars Orbiter Mission — MOM) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का मंगल मिशन। प्रक्षेपण: 5 नवंबर 2013। मंगल की कक्षा में प्रवेश: 24 सितंबर 2014। भारत अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला पहला देश बना था। उल्लेखनीय है कि मंगलयान एक ऑर्बिटर था, जबकि Perseverance एक रोवर है। दोनों की भूमिका अलग-अलग है। ऑर्बिटर ग्रह की कक्षा में घूमकर उसका अध्ययन करता है, जबकि रोवर ग्रह की सतह पर चलकर चट्टानों और मिट्टी की जाँच कर सकता है। भारत के लिए ऐसे मिशन ग्रहों के भूविज्ञान, अंतरिक्ष संचार, स्वायत्त प्रणालियों और वैज्ञानिक उपकरणों के विकास में उपयोगी हैं।
अभ्यास प्रश्न
1. Perseverance Rover किस ग्रह की सतह पर कार्य कर रहा है? A. शुक्र B. मंगल C. बृहस्पति D. बुध
उत्तर: B
2. Perseverance Rover का प्रमुख वैज्ञानिक उद्देश्य क्या है? A. मंगल पर मानव बस्ती बनाना B. मंगल के छल्लों का अध्ययन C. प्राचीन जीवन के संभावित संकेतों और भूविज्ञान का अध्ययन D. मंगल को पृथ्वी की कक्षा में लाना
उत्तर: C
3. Jezero Crater का वैज्ञानिक महत्त्व किससे जुड़ा है? A. प्राचीन झील और नदी-डेल्टा के संभावित अवशेष B. मंगल के वलयों से C. सूर्य के धब्बों से D. बृहस्पति के उपग्रहों से
उत्तर: A
4. मंगलयान और Perseverance के संबंध में कौन-सा कथन सही है? A. दोनों केवल चंद्रमा पर कार्य करते हैं B. मंगलयान ऑर्बिटर था, Perseverance सतही रोवर है C. दोनों मानवयुक्त मिशन थे D. Perseverance ISRO का मिशन है
उत्तर: B
5. निम्नलिखित पर विचार करें: Spirit Opportunity Curiosity Perseverance ये हैं: रोबोट अंतरिक्ष मिशन रोवर अंतरिक्ष दूरबीन
उत्तर: C
6. ISRO द्वारा प्रमोचित मंगलयान
1. को मार्स ऑर्बिटर मिशन भी कहा जाता है
2. ने भारत को, USA के बाद, मंगल के चारों ओर अंतरिक्ष यान को चक्रमण कराने वाला दूसरा देश बना दिया है
3. ने भारत को एकमात्र ऐसा देश बना दिया है, जिसने अपने अंतरिक्ष यान को मंगल के चारों ओर चक्रमण कराने में पहली बार में ही सफलता प्राप्त कर ली
उपर्युक्त. कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3 (IAS Pre, 2016)
उत्तर: C
निष्कर्ष Perseverance Rover का 45.2 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने का रिकॉर्ड अंतरिक्ष अन्वेषण में स्वायत्त नेविगेशन और रोबोटिक तकनीक की प्रगति को दिखाता है। इसका असली महत्त्व मंगल के प्राचीन पर्यावरण, पानी के इतिहास और संभावित सूक्ष्मजीवी जीवन के संकेतों का अध्ययन करना है।
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