EDU TERIA Logo
Sign InEnroll Now

मातृभाषा-आधारित शिक्षा को बढ़ावा

मातृभाषा-आधारित शिक्षा क्या है? जानें NEP 2020, अनुच्छेद 350A, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, NCERT, DIKSHA, बहुभाषी शिक्षा, लाभ, चुनौतियां एवं BPSC/UPSC.

school
Written by Akhilesh Anand
Published: 3 August 202611 min read
मातृभाषा-आधारित शिक्षा को बढ़ावा
Progress
0%
Aa

मातृभाषा-आधारित शिक्षा को बढ़ावा

शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 29(2)(एफ) में प्रावधान है कि “शिक्षण का माध्यम, जहां तक संभव हो, बच्चे की मातृभाषा में होना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के पैरा 4.11 में कहा गया है कि यह सर्वविदित है कि छोटे बच्चे अपने घर की भाषा/मातृभाषा में कठिन अवधारणाओं को जल्दी सीखते और समझते हैं। राज्यसभा में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने एक लिखित उत्तर में जानकारियां दी है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350ए के अनुसार, “हर राज्य और राज्य के भीतर हर स्थानीय प्राधिकरण का प्रयास होगा कि भाषाई अल्पसंख्यक समूहों के बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर मातृभाषा में शिक्षण की पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएं।

घर की भाषा आमतौर पर वही भाषा होती है, जो मातृभाषा होती है या जिसे स्थानीय समुदाय बोलते हैं। जहां भी संभव हो, कम से कम कक्षा 5 तक, लेकिन बेहतर होगा कि कक्षा 8 और उसके बाद तक भी, पढ़ाई का माध्यम घर की भाषा/मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा होनी चाहिए।

सरकारी और निजी दोनों स्कूलों पर लागू

यह नियम सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में लागू होगा। इसके बाद, घर/स्थानीय भाषा को जहां संभव हो, भाषा के रूप में पढ़ाया जाना घरेलू भाषाओं/मातृभाषाओं में, विज्ञान सहित, उच्च गुणवत्ता वाली किताबें उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जिन मामलों में घर की भाषा/मातृभाषा की किताबें उपलब्ध नहीं हैं, वहां भी शिक्षकों और छात्रों के बीच बातचीत की भाषा, जहां तक संभव हो, घर की भाषा/मातृभाषा ही होनी चाहिए।

शिक्षकों को द्विभाषी तरीका अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिसमें द्विभाषी शिक्षण-ज्ञान प्राप्ति सामग्री भी शामिल है, उन छात्रों के लिए जिनकी घर की भाषा पढ़ाई के माध्यम की भाषा से अलग है। सभी भाषाओं को सभी छात्रों के लिए उच्च गुणवत्ता के साथ पढ़ाया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 और एससीईआरटी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने नीति की दृष्टि और सिफारिशों के अनुसार स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा (एनसीएफ-एसई), 2023 तैयार की है। एनसीएफ-एसई 2023 के अनुसार, एससीईआरटी ने कक्षा 1 से 9 तक के लिए नयी पाठ्यपुस्तकें तैयार की और पेश की हैं।

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए, एससीईआरटी ने कक्षा 1, 2, 3 और 6 की पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में किया है, और इन्हें डिजिटल रूप से उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा, कक्षा 4, 5, 7 और 8 की 460 पाठ्यपुस्तकों में से कुल 368 का अनुवाद पहले ही किया जा चुका है और इन्हें डिजिटल रूप से उपलब्ध कराया गया है।

शैक्षणिक समर्थन और प्रशिक्षण

एनसीईआरटी राज्यों, केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस), नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस), आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (एडब्ल्यूईएस) और अन्य स्कूल प्रणालियों को पाठ्यक्रम विकास, नए पाठ्य पुस्तकों और डिजिटल तकनीक पर शिक्षक प्रशिक्षण, टीएलएम, शिक्षण और समग्र मूल्यांकन के संबंध में शैक्षणिक समर्थन और प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।

एनसीईआरटी ने भाषा शिक्षा के लिए शिक्षण-सीखने की सामग्री विकसित की है, जिसमें पाठ्यपुस्तकें शामिल हैं जो एनसीएफ-एसई 2023 में दिए गए पाठ्यक्रम लक्ष्य, क्षमता और सीखने के परिणामों के अनुरूप हैं, ताकि भारतीय भाषाओं में शिक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाया जा सके।

बालवाटिका

बालवाटिका 1, 2 और 3 के लिए, एनसीईआरटी ने शिक्षण-ज्ञान प्राप्ति सामग्री जैसे जादुई पिटारा और ई-जादुई पिटारा विकसित की हैं, जो विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध हैं।

एनईपी, 2020 और आधारभूत चरण के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एफएस) 2022 के अनुरूप, एनसीईआरटी ने आधारभूत ज्ञान-प्राप्ति संसाधन जैसे आनंद (बालवाटिका कार्य पुस्तिका) और उन्मुख (शिक्षक प्रशिक्षक मार्गदर्शिका) विकसित किए हैं, जो 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं।

इसके अलावा, बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने और भारत की भाषाई विविधता को संरक्षित करने के लिए, एनसीईआरटी ने एनईपी 2020 के अनुरूप, तकनीक-सक्षम समाधानों के समर्थन से, विशेष रूप से तकनीक और ए आई के उपयोग और एकीकरण के माध्यम से पाठ्यक्रम संसाधनों के अनुवाद में, निम्नलिखित पहलों को अपनाया है:

दीक्षा

ज्ञान साझा करने के लिए डिजिटल अवसंरचना (दीक्षा) स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जो 'एक राष्ट्र, एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म' विज़न के तहत सभी कक्षाओं में उच्च-गुणवत्ता वाले डिजिटल ज्ञान-प्राप्ति संसाधन और क्यूआर-कोड युक्त पाठ्यपुस्तक (ईटीबी) प्रदान करता है।

दीक्षा को सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ केंद्रीय स्वायत्त निकायों और स्कूल शिक्षा बोर्डों, जिनमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) शामिल हैं, ने अपनाया है।

पूरे देश के शिक्षार्थी और शिक्षक दीक्षा प्लेटफार्म पर पहुँच सकते हैं और वर्तमान में यह 135 भाषाओं का समर्थन करता है, जिसमें 128 भारतीय भाषाएँ और 7 विदेशी भाषाएँ शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्कूल प्रमुख और शिक्षक समग्र उन्नति पहल (निष्ठा):

शिक्षा मंत्रालय ने निष्ठा की शुरूआत की है, यह एक बड़े पैमाने का समग्र कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य देश भर के शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों की पेशेवर दक्षताओं को बढ़ाना है ताकि स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

यह कार्यक्रम सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आमने-सामने, ऑनलाइन और मिश्रित प्रशिक्षण मोड के माध्यम से लागू किया जाता है। ऑनलाइन कोर्स दीक्षा प्लेटफॉर्म पर आयोजित किए जाते हैं और कार्यक्रम के आधार पर 11 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं।

भारतीय भाषाओं में प्रारंभिक पुस्तकें विकसित करना:

केंद्रीय विश्वविद्यालय, कोरापुट, ओडिशा व केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल), मैसूर के सहयोग से एनसीईआरटी ने अनुसूचित और गैर-अनुसूचित भारतीय भाषाओं में आधारभूत साक्षरता के लिए प्रारंभिक पुस्तकें विकसित की हैं।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा कुल 121 प्रारंभिक पुस्तकें लॉन्च की गई हैं और ये एनसीईआरटी वेबसाइट और दीक्षा पर उपलब्ध हैं।

शैक्षिक मॉड्यूल्स का अनुवाद:

एनसीईआरटी ने एआई-सक्षम अनुवाद तकनीकों का उपयोग करके नवचेतना, नए आपराधिक कानून, चंद्रयान मॉड्यूल्स का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया है और इन्हें डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से व्यापक रूप से सुलभ बनाया गया है।

दीक्षा पर भाषा संगम:

दीक्षा पर समर्पित भाषा संगम पेज, जो 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में सीखने-सिखाने के लिए वीडियो और बुनियादी संवादात्मक वाक्यांशों के रूप में बहुभाषी शिक्षण संसाधन प्रदान करता है।

भारतीय भाषा उत्सव को बढ़ावा:

क्षेत्रीय भाषाओं और तकनीक के इस्तेमाल से भाषा सीखने और सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सितंबर से दिसंबर 2023 तक पूरे देश में 75 दिन का भारतीय भाषा उत्सव आयोजित किया गया।

भारतीय भाषा ग्रीष्म शिविर:

शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में भारतीय भाषा ग्रीष्म शिविर पिछले दो वर्षों से आयोजित किया जा रहा है और 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस आयोजन में छात्रों, शिक्षकों और समुदाय की बड़ी संख्या में भागीदारी होती है।

ये पहलें इस बात को प्रतिबिंबित करती हैं कि भारत सरकार/एनसीईआरटी मातृभाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक शिक्षार्थियों की समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, साथ ही तकनीक और एआई का इस्तेमाल करके पूरे देश में बहुभाषी शैक्षिक सामग्री को बढ़ावा देने की कोशिश भी की जा रही है।

इसके अलावा, चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची के तहत आती है, इसलिए संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) सरकारें और उनकी एजेंसियां स्थानीय जरूरतों और मांगों के अनुसार क्षेत्रीय भाषाओं में उपयुक्त पाठ्यक्रम विकसित कर सकती हैं, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना और सिफारिशों के अनुरूप हो।

भारत के लिए मातृभाषा-आधारित शिक्षा क्यों जरूरी है?

शिक्षण संकट का समाधान :- NCERT 2022 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 44% बच्चे स्कूल में ऐसी भाषा से पढ़ाई शुरू करते हैं जो उनकी मातृभाषा नहीं है। इससे सीखना कठिन हो जाता है।

बेहतर सीखना और समझ :- मातृभाषा में पढ़ने से संज्ञानात्मक बोझ घटता है। इससे बुनियादी साक्षरता, आलोचनात्मक सोच और शैक्षणिक प्रदर्शन बेहतर होते हैं।

संस्कृति और पहचान की रक्षा :- मातृभाषा ज्ञान और परंपरा की वाहक है। यह आत्म-सम्मान बढ़ाती है और लुप्त हो रही भाषाओं को बचाने में मदद करती है।

सामाजिक समानता :- यह "अंग्रेजी अभिजात वर्ग" के एकाधिकार को तोड़ती है। आदिवासी और हाशिये के बच्चों के लिए यह स्कूल छोड़ने की दर कम करने का जरिया है।

NEP 2020 के अनुरूप :- NEP 2020 कक्षा 5 तक, और संभव हो तो कक्षा 8 तक, घर की भाषा में शिक्षा पर जोर देता है। यह औपनिवेशिक सोच से बदलाव का प्रतीक है।

भारत में  मातृभाषा-आधारित शिक्षा लागू करने की प्रमुख चुनौतियाँ

भाषा का बेमेल होना :- खासकर जनजातीय क्षेत्रों में बच्चे घर की भाषा से अलग भाषा में स्कूल शुरू करते हैं। इससे उनकी शुरुआती समझ और भागीदारी प्रभावित होती है।

सामग्री की कमी होना :- बच्चों की मातृभाषाओं में पाठ्यपुस्तकें और टीचिंग मैटेरियल बहुत कम हैं। कई भाषाओं की लिपि भी अभी विकसित हो रही है।

शिक्षक प्रशिक्षण का अभाव :-अधिकांश शिक्षक एकभाषी तरीके से पढ़ाते हैं। 'ट्रांसलैंग्वेजिंग' और 'बहुभाषी शिक्षाशास्त्र' को B.Ed और सेवा-कालीन प्रशिक्षण में शामिल नहीं किया जाता, इसलिए शिक्षक बहुभाषी कक्षा संभालने में तैयार नहीं होते।

जल्दी भाषा बदलना :- मातृभाषा में नींव मजबूत होने से पहले ही बच्चों को क्षेत्रीय/अंग्रेजी माध्यम में शिफ्ट कर दिया जाता है, जिससे सीखना बाधित होता है।

डिजिटल बहिष्कार :- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जनजातीय और अल्पसंख्यक भाषाओं की सामग्री न के बराबर है। दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट और उपकरणों की पहुंच भी कम है।

खंडित योजना और डेटा :-विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय नहीं है और भाषा-आधारित अलग डेटा उपलब्ध नहीं है, जिससे नीति बनाना और लागू करना मुश्किल होता है।

निष्कर्ष

मातृभाषा में शिक्षा कोई नई बात नहीं है। दुनिया के कई देशों ने इसे पहले ही अपनाया है। उदाहरण के लिए सोवियत संघ जहां 20वीं सदी की शुरुआत में मूलनिवासीकरण नीति के तहत विभिन्न जातीय समूहों को मातृभाषा में पढ़ाया गया।  चीन जहां, 1950 का दशक में जातीय अल्पसंख्यकों के लिए मातृभाषा शिक्षा को बढ़ावा दिया गया। बहुभाषावाद सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं है, यह समावेशिता और विविधता के प्रति प्रतिबद्धता है। अगर भारत अपनी शिक्षा प्रणाली में मातृभाषा को प्राथमिकता दे, तो हम ऐसे नागरिक तैयार कर सकते हैं जो शैक्षणिक रूप से कुशल, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और वैश्विक रूप से सक्षम हों।

मातृभाषा-आधारित शिक्षा BPSC मुख्य परीक्षा (Mains) के सामान्य अध्ययन-2 (भारतीय अर्थव्यवस्था और राजव्यवस्था) का हिस्सा है। यह टॉपिक शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), संवैधानिक प्रावधानों और सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ है।

Reference :

  1. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2291496&reg=48&lang=2
What does Section 29(2)(f) of the RTE Act, 2009 say about the medium of instruction?

It states that the medium of instruction should, as far as possible, be in the child's mother tongue.

What does Article 350A of the Constitution provide regarding mother-tongue education?

It requires every state and local authority to endeavor to provide adequate facilities for instruction in the mother tongue at the primary education stage for children of linguistic minority groups.

Until which class does NEP 2020 recommend mother tongue as the medium of instruction?

NEP 2020 recommends the home language or mother tongue as the medium of instruction at least until Class 5, and preferably until Class 8 and beyond, in both government and private schools.

What is DIKSHA and how many languages does it support?

DIKSHA is the national digital platform for school education under the 'One Nation, One Digital Platform' vision. It has been adopted by all 36 states and UTs plus bodies like CBSE and NIOS, and currently supports 135 languages, including 128 Indian languages and 7 foreign languages.

What is NISHTHA?

NISHTHA is a large-scale programme by the Ministry of Education to enhance the professional competencies of teachers and school heads across the country, delivered through in-person, online and blended modes, with online courses available on DIKSHA in 11 Indian languages.

How many foundational literacy primers has the Ministry of Education launched?

A total of 121 primers have been launched, developed with Central University Koraput, Odisha and the Central Institute of Indian Languages, Mysore, and are available on the NCERT website and DIKSHA.

What percentage of Indian children start school in a language other than their mother tongue?

According to an NCERT 2022 report, 44% of children in India begin school in a language that is not their mother tongue, which makes learning harder.

How much progress has SCERT made translating textbooks into scheduled languages?

SCERT has translated the Class 1, 2, 3 and 6 textbooks into all 22 scheduled languages and made them digitally available. Of 460 textbooks for classes 4, 5, 7 and 8, 368 have already been translated.

What are the key challenges in implementing mother-tongue-based education in India?

The article lists language mismatch in tribal areas, a shortage of teaching materials and undeveloped scripts, lack of teacher training in bilingual and multilingual pedagogy, premature shifting to regional or English medium, and digital exclusion of tribal and minority languages.

Is mother-tongue-based education relevant to the BPSC/UPSC syllabus?

Yes, since its category is Polity it maps mainly to General Studies Paper II. The article itself also notes it is part of BPSC Mains GS-2, linked to education policy, NEP 2020, constitutional provisions and social justice.

Comments

Loading comments...

Related Articles

Suggested Courses

Trending
Titan Plus Batch 2
BPSC CCE

Titan Plus Batch 2

Trending
Titan Batch 2
BPSC CCE

Titan Batch 2