भारत-थाईलैंड संबंध
हाल ही में भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री’ के 15वें संस्करण (2026) में भाग लेने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी थाईलैंड रवाना हुई। यह अभ्यास 18 से 31 अगस्त 2026 तक थाईलैंड के सूरत थानी स्थित विभावादी रंगसिट कैंप में आयोजित किया जा रहा है। इस अभ्यास का पिछला संस्करण सितंबर 2025 में मेघालय के उमरोई में आयोजित किया गया था।

ऐतिहासिक और राजनयिक संबंध
भारत और थाईलैंड के संबंध 2000 साल से भी पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक जुड़ाव पर आधारित हैं। औपचारिक राजनयिक संबंध 1947 से स्थापित हैं। भारत की 'लुक ईस्ट' नीति 1993 और अब 'एक्ट ईस्ट' नीति, तथा थाईलैंड की 'लुक वेस्ट 1996' और अब 'एक्ट वेस्ट' नीति ने इन संबंधों को नई गति दी है। दोनों देश एक-दूसरे को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सेतु के रूप में देखते हैं।
आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध
आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के संबंधों की रीढ़ है। जनवरी 2010 से लागू आसियान-भारत FTA के तहत थाई सामानों को टैरिफ में छूट मिली है। आंकड़े बताते हैं कि द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ा है। 2019 में यह 12.12 बिलियन डॉलर था, जो 2021-22 में बढ़कर 15 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। 2018 में थाईलैंड ने भारत को 7.60 बिलियन डॉलर का निर्यात किया जबकि भारत ने 4.86 बिलियन डॉलर का निर्यात किया। आसियान में थाईलैंड भारत का 5वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है - सिंगापुर, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया के बाद।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंध काफी गहरे हुए हैं। इसमें रक्षा संवाद, उच्च स्तरीय दौरे, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण शामिल हैं।
संयुक्त सैन्य अभ्यास: अभ्यास मैत्री - थल सेना, सियाम भारत अभ्यास - वायु सेना, भारत-थाईलैंड समन्वित गश्ती - नौसेना ये अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोध में सहयोग बढ़ाते हैं।
- अभ्यास मैत्री :- वर्ष 2006 में शुरू हुआ मैत्री अभ्यास भारत और थाईलैंड के बीच सैन्य सहयोग को सुदृढ़ बनाने और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण मंच है। यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय सात के अन्तर्गत जंगल और शहरी वातावरण में उग्रवाद और आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त अभियानों को अंजाम देने में दोनों देशों की क्षमताओं को बढ़ाएगा।
- कनेक्टिविटी और पर्यटन:- कनेक्टिविटी और पर्यटन लोगों के बीच संपर्क बहुत मजबूत है। 2019 में लगभग 19 लाख भारतीय पर्यटक थाईलैंड गए, जबकि 1.6 लाख थाई पर्यटक बौद्ध तीर्थ स्थलों के लिए भारत आए। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए दोनों देश BIMSTEC के तहत काम कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण परियोजना भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग है। बनने पर यह भारत के पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ेगा और दक्षिण-दक्षिणपूर्व एशिया का पहला सीमा पार सुविधा समझौता बनेगा।
- सांस्कृतिक सहयोग: - सांस्कृतिक धागा सबसे पुराना है। बैंकॉक में 2009 में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किया गया। नियमित रूप से भारतीय सांस्कृतिक मंडल और त्योहारों का आदान-प्रदान होता है। गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती बैंकॉक में नगर कीर्तन के साथ मनाई गई। हाल में भारत के संविधान का थाई भाषा में अनुवाद भी शुरू किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के साझा सम्मान को दर्शाता है।
आगे की राह:
भारत-थाईलैंड साझेदारी को और मजबूत करना
- भारत और थाईलैंड के संबंध मजबूत आधार पर खड़े हैं, लेकिन इनकी पूरी क्षमता अभी बाकी है। आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले व्यापार बाधाओं को दूर करना जरूरी है। दोनों देशों को द्विपक्षीय अनुबंधों के जरिए आयात शुल्क कम करना चाहिए ताकि व्यापार और निवेश का विस्तार हो सके।
- वर्तमान में आसियान-भारत FTA के बाद भी कई गैर-टैरिफ बाधाएं बची हैं, जिन्हें सुलझाने से 15 बिलियन डॉलर के व्यापार को और ऊपर ले जाया जा सकता है। दूसरा बड़ा क्षेत्र आर्थिक सहयोग के नए आयाम हैं।
- भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्ट-अप पारितंत्र और थाईलैंड के डिजिटल इकोनॉमी व टूरिज्म सेक्टर के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। फिनटेक, हेल्थटेक और ग्रीन एनर्जी में साझेदारी दोनों के लिए फायदे का सौदा होगी।
- साथ ही दोनों देश एक-दूसरे के बाजारों में निवेश करके आपूर्ति श्रृंखला के अंतराल को कम कर सकते हैं, जिससे चीन+1 रणनीति के तहत विकल्प भी मजबूत होंगे।
- रणनीतिक मोर्चे पर भी सहयोग गहरा करने की जरूरत है। रक्षा अनुबंध, सैन्य अधिकारियों का आदान-प्रदान और मैत्री व सियाम भारत जैसे संयुक्त अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ाकर हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
निष्कर्ष
भारत-थाईलैंड संबंध व्यापार, सुरक्षा, संस्कृति और कनेक्टिविटी के चार स्तंभों पर खड़े हैं। 'एक्ट ईस्ट' और 'एक्ट वेस्ट' नीतियों के कारण ये संबंध अब सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता के लिए भी जरूरी हो गए हैं।







