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तूफान अर्नब या सिर्फ डीप डिप्रेशन?

Deep Depression in the Bay of Bengal, Cyclone Arnab, IMD alerts, cyclone naming, wind speeds, heavy rainfall and coastal risks explained.

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Written by Akhilesh Anand
Published: 28 September 2026•7 min read
तूफान अर्नब या सिर्फ डीप डिप्रेशन?
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तूफान अर्नब या सिर्फ डीप डिप्रेशन?

चर्चा में क्यों है?

सितंबर 2026 में बंगाल की खाड़ी में बने एक डीप डिप्रेशन ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में मौसम की चिंता बढ़ा दी। भारतीय मौसम विभाग ने भारी बारिश, तेज हवाओं और खराब समुद्री परिस्थितियों को लेकर चेतावनी जारी की।

इस मौसम प्रणाली के मजबूत होने के दौरान ‘अर्नब’ नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई, क्योंकि यह नाम उत्तर हिंद महासागर के लिए तैयार की गई आधिकारिक चक्रवात नामकरण सूची में शामिल है। हालांकि, बाद में स्पष्ट हुआ कि यह प्रणाली चक्रवाती तूफान बनने की निर्धारित तीव्रता तक नहीं पहुंची और गहरे अवदाब के रूप में ही आंध्र प्रदेश के तट को पार कर गई। इसलिए इसे आधिकारिक रूप से ‘चक्रवात अर्नब’ नाम नहीं दिया गया।

डीप डिप्रेशन क्या होता है?

डीप डिप्रेशन समुद्र के ऊपर बनने वाली एक शक्तिशाली मौसम प्रणाली है। यह सामान्य डिप्रेशन से अधिक मजबूत होता है और इसमें हवाओं की गति बढ़ जाती है। इसके कारण भारी बारिश, तेज हवाएं और समुद्र में खराब परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

भारतीय मौसम विभाग मौसम प्रणालियों को उनकी तीन मिनट की औसत अधिकतम निरंतर हवा की गति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखता है।

मौसम प्रणालियों की प्रमुख श्रेणियां

मौसम प्रणालीहवा की गति
डिप्रशन31–50 किमी प्रति घंटा
डीप डिप्रेशन51–62 किमी प्रति घंटा
चक्रवाती तूफान63–88 किमी प्रति घंटा
गंभीर चक्रवाती तूफान89–117 किमी प्रति घंटा
अति गंभीर चक्रवाती तूफान118–165 किमी प्रति घंटा
अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान166–220 किमी प्रति घंटा
सुपर चक्रवाती तूफान221 किमी प्रति घंटा या अधिक

इससे स्पष्ट है कि डीप डिप्रेशन और चक्रवाती तूफान एक ही चीज नहीं हैं। डीप डिप्रेशन को चक्रवाती तूफान बनने के लिए निर्धारित हवा की गति तक पहुंचना जरूरी होता है।

मौसम प्रणाली चक्रवात में कैसे बदलती है?

समुद्र के ऊपर बनने वाली हर मौसम प्रणाली चक्रवात नहीं बनती। जैसे-जैसे उसकी तीव्रता बढ़ती है, वह अलग-अलग चरणों से गुजर सकती है।

सामान्य क्रम इस प्रकार समझा जा सकता है: निम्न दबाव क्षेत्र → डीप्रेशन → डीप डिप्रेशन → चक्रवाती तूफान → गंभीर चक्रवाती तूफान → अति गंभीर चक्रवाती तूफान → अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान → सुपर चक्रवाती तूफान, हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर प्रणाली इस पूरे क्रम से गुजरे। कई बार कोई प्रणाली डीप डिप्रेशन के स्तर पर ही कमजोर पड़ जाती है।

चक्रवात बनने के लिए सिर्फ तेज हवा पर्याप्त नहीं

किसी मौसम प्रणाली के चक्रवात में बदलने के पीछे कई समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां काम करती हैं।

इसके विकास को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं:

  • समुद्र की सतह का तापमान
  • वातावरण में मौजूद नमी
  • ऊपरी वायुमंडल में हवाओं की स्थिति
  • वायुमंडलीय परिसंचरण
  • ऊर्ध्वाधर पवन कर्तन

मौसम वैज्ञानिक इन परिस्थितियों की जानकारी के लिए उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों, वायुमंडलीय आंकड़ों और मौसम पूर्वानुमान मॉडल सहित कई स्रोतों का विश्लेषण करते हैं।

सितंबर 2026 में क्या हुआ? समझें पूरी समयरेखा

22 सितंबर 2026

बंगाल की खाड़ी में मौजूद डिप्रेशन अगले 24 घंटों में गहरे अवदाब में बदलने की संभावना जताई गई थी। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई।

23 सितंबर 2026

यह प्रणाली डीप डिप्रेशन में बदल गई और उत्तर आंध्र प्रदेश तथा दक्षिणी ओडिशा के तट की ओर बढ़ने लगी।

23–24 सितंबर की रात

डीप डिप्रेशन ने कलिंगपट्टनम के दक्षिण-पश्चिम के पास उत्तर आंध्र प्रदेश के तट को पार किया।

इस दौरान अधिकतम निरंतर हवाओं की गति लगभग 55–65 किमी प्रति घंटा रही, जबकि हवा के तेज झोंकों की गति 75 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई।

24 सितंबर के बाद

तट पार करने के बाद मौसम प्रणाली धीरे-धीरे कमजोर होने लगी और आगे चलकर अवदाब तथा फिर कमजोर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की दिशा में बढ़ी।

आंध्र प्रदेश और ओडिशा में क्या असर पड़ा?

डीप डिप्रेशन प्रभाव केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहा। तटीय और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश, तेज हवाओं और जलभराव जैसी परिस्थितियां देखने को मिलीं।

ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। कोरापुट के सेमिलीगुड़ा में 24 घंटे में 193.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई।

यह घटना बताती है कि किसी मौसम प्रणाली का चक्रवाती तूफान में तब्दील न होना यह नहीं दर्शाता कि उसका प्रभाव कमजोर ही होगा।

क्या डीप डिप्रेशन खतरनाक हो सकता है?

हां। किसी मौसम प्रणाली को चक्रवात का नाम नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि वह खतरनाक नहीं है।

डीप डिप्रेशन के कारण:

  • बहुत भारी बारिश हो सकती है।
  • नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है।
  • निचले क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बन सकती है।
  • सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
  • समुद्र में ऊंची लहरें और तेज हवाएं चल सकती हैं।
  • मछुआरों के लिए समुद्री परिस्थितियां खतरनाक हो सकती हैं।
  • बिजली और संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
  • फसलों और स्थानीय बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।

‘अर्नब’ नाम कहां से आया?

‘अर्नब’ कोई मीडिया द्वारा दिया गया नाम नहीं था। यह उत्तर हिंद महासागर के लिए तैयार की गई आधिकारिक चक्रवात नामकरण सूची में शामिल नाम है। इसे बांग्लादेश ने प्रस्तावित किया था।

जब सितंबर 2026 में बंगाल की खाड़ी में यह मौसम प्रणाली मजबूत हुई, तो संभावित चक्रवात के नाम को लेकर चर्चा शुरू हो गई। लेकिन यह समझना जरूरी है कि किसी नाम का सूची में होना और उस नाम से चक्रवात का आधिकारिक रूप से नामकरण होना दो अलग बातें हैं।

उत्तर हिंद महासागर में चक्रवातों के नाम कौन रखता है?

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर सहित उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नामकरण की जिम्मेदारी क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली की है, जो भारतीय मौसम विभाग के अंतर्गत काम करता है।

नामकरण सूची में 13 सदस्य देशों ने नाम दिए हैं। प्रत्येक देश ने 13 नाम प्रस्तावित किए हैं, जिससे कुल 169 नामों की सूची तैयार हुई है।

इन देशों में शामिल हैं: बांग्लादेश,भारत,ईरान,मालदीव,म्यांमार,ओमान,पाकिस्तान,कतर,सऊदी अरब,श्रीलंका,थाईलैंड,संयुक्त अरब अमीरात और यमन।

अर्नब के बाद कौन-सा नाम है?

वर्तमान नामकरण क्रम में बांग्लादेश द्वारा प्रस्तावित ‘अर्नब’ के बाद भारत द्वारा प्रस्तावित ‘मुरासु’ नाम आता है।

यदि संबंधित मौसम प्रणाली चक्रवाती तूफान की निर्धारित तीव्रता तक पहुंचती और नामकरण की स्थिति बनती, तो क्रम के अनुसार उसे ‘अर्नब’ नाम दिया जाता।

लेकिन सितंबर 2026 का यह सिस्टम चक्रवाती तूफान की श्रेणी तक नहीं पहुंचा। इसलिए ‘अर्नब’ नाम का आधिकारिक इस्तेमाल नहीं हुआ।

अर्नब के बाद कौन-सा नाम है?

वर्तमान नामकरण क्रम में बांग्लादेश द्वारा प्रस्तावित ‘अर्नब’ के बाद भारत द्वारा प्रस्तावित ‘मुरासु’ नाम आता है।

यदि संबंधित मौसम प्रणाली चक्रवाती तूफान की निर्धारित तीव्रता तक पहुंचती और नामकरण की स्थिति बनती, तो क्रम के अनुसार उसे ‘अर्नब’ नाम दिया जाता।

लेकिन सितंबर 2026 का यह सिस्टम चक्रवाती तूफान की श्रेणी तक नहीं पहुंचा। इसलिए ‘अर्नब’ नाम का आधिकारिक इस्तेमाल नहीं हुआ।

क्या बिना नाम वाला मौसम सिस्टम भी तट पार कर सकता है?

हां, तट पार करने की प्रक्रिया केवल नामित चक्रवातों तक सीमित नहीं है। यदि समुद्र के ऊपर बनी कोई मौसम प्रणाली तट से आगे बढ़कर जमीन में प्रवेश करती है, तो उसके तट पार करने की घटना को दर्ज किया जा सकता है।

सितंबर 2026 में गहरे अवदाब ने कलिंगपट्टनम के पास उत्तर आंध्र प्रदेश के तट को पार किया, जबकि वह चक्रवाती तूफान में परिवर्तित नहीं हुआ था।

चक्रवात और डीप डिप्रेशन में क्या अंतर है?

दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी तीव्रता और हवा की गति का है।

डीप डिप्रेशन : 51–62 किमी प्रति घंटा चक्रवाती तूफान: 63–88 किमी प्रति घंटा

जब मौसम प्रणाली की तीन मिनट की औसत अधिकतम निरंतर हवा की गति निर्धारित सीमा तक पहुंचती है, तब वह चक्रवाती तूफान की श्रेणी में आती है और उसके लिए नामकरण की प्रक्रिया लागू होती है।

निष्कर्ष

सितंबर 2026 का यह घटनाक्रम बताता है कि किसी मौसम प्रणाली की गंभीरता को केवल उसके नाम से नहीं समझा जा सकता। बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम चक्रवाती तूफान की निर्धारित तीव्रता तक नहीं पहुंचा, इसलिए उसे ‘अर्नब’ नाम नहीं दिया गया। इसके बावजूद गहरे अवदाब ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश, तेज हवाओं और जलभराव जैसी परिस्थितियां पैदा कीं। इसलिए मौसम संबंधी किसी भी खतरे का आकलन करते समय केवल संभावित चक्रवात के नाम पर ध्यान देने के बजाय भारतीय मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों, पूर्वानुमानों और प्रभाव संबंधी सूचनाओं को प्राथमिकता देना जरूरी है।

Reference:
  1. TV9

 

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