केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) : बिहार में भूजल संरक्षण के प्रयास
हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने राज्यसभा में देश की भूजल स्थिति की जानकारी दी है। 'सक्रिय भूजल संसाधन आकलन, 2025' के अनुसार पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, तमिलनाडु सहित 9 राज्य और 281 जिले ऐसे हैं जहां भूजल निष्कर्षण राष्ट्रीय औसत से अधिक है। वहीं 'वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट, 2025' के अनुसार बिहार में 584 भूजल नमूनों में से कुछ इलाकों में पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं मिली है।
5 नमूनों में लवणता, 39 में फ्लोराइड और 78 नमूनों में नाइट्रेट की मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई गई। इसके अलावा केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2021 में भारत में प्रति व्यक्ति औसत जल उपलब्धता 1573.19 क्यूबिक मीटर आंकी गई। कुल मिलाकर देश में पानी की कमी नहीं है, लेकिन असंतुलित निकासी और कुछ क्षेत्रों में प्रदूषण चिंता का विषय बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 449 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जबकि कुल निष्कर्षण 247 BCM है। इसका मतलब है कि हम उपलब्ध भूजल का लगभग 60.63% उपयोग कर रहे हैं। सबसे अधिक 87% पानी सिंचाई में, 11% घरेलू और पीने के लिए, और 2% उद्योगों में खर्च होता है।
'सक्रिय भूजल संसाधन आकलन, 2025' से जुड़े अन्य प्रमुख तथ्य
'वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट, 2025' के अनुसार देश में भूजल सामान्य तौर पर पीने योग्य है। रिपोर्ट बताती है कि लगभग 99% निगरानी स्टेशनों पर भूजल की गुणवत्ता सिंचाई के लिए पूरी तरह उपयुक्त पाई गई है। हालांकि अलग-अलग प्रदूषकों की मौजूदगी और उनका फैलाव हर जगह अलग-अलग है। इसलिए केंद्रीय भूजल बोर्ड यानी CGWB किसी राज्य या जिले को "सबसे खराब भूजल गुणवत्ता" के आधार पर रैंक या वर्गीकृत नहीं करता। इसका मतलब ये है कि कुछ स्थानीय इलाकों में फ्लोराइड, नाइट्रेट या लवणता जैसी समस्याएं मिल सकती हैं, लेकिन पूरे देश के स्तर पर भूजल की स्थिति चिंताजनक नहीं है।
केंद्रीय जल आयोग यानी CWC की 'भारत के जल संसाधनों का आकलन, 2024' रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में भारत में औसत वार्षिक प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1,573.19 क्यूबिक मीटर थी।
बिहार समेत पूरे देश के लिए केंद्र ने कई बड़े कदम उठाए हैं:-
चूंकि जल राज्य का विषय है, इसलिए भूजल की गुणवत्ता सुधारने, उसके प्रबंधन, पुनर्भरण और संरक्षण की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों की है। लेकिन भारत सरकार वैज्ञानिक मदद, तकनीकी मार्गदर्शन, नीति और पैसों से राज्यों की मदद करती है।
प्रमुख पहल इस प्रकार हैं:
| निगरानी और डेटा: | CGWB पूरे देश में भूजल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी करता है। हर साल रिपोर्ट, बुलेटिन और हर 15 दिन में GWQAS अलर्ट जारी होते हैं। इस डेटा को राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाता है ताकि प्रदूषित इलाकों की पहचान कर तुरंत कदम उठाए जा सकें। |
| जलभृत मानचित्रण - NAQUIM: | NAQUIM 1.0 के तहत देश के 25 लाख वर्ग किमी का मानचित्र बन चुका है, जिसमें बिहार के 90,567 वर्ग किमी शामिल हैं। NAQUIM 2.0 में बिहार के 5 जिलों में 3,202 वर्ग किमी का हाई-रिज़ॉल्यूशन सर्वे हो रहा है, खासकर पानी की कमी और गुणवत्ता वाले क्षेत्रों में। |
| नई तकनीक: | आर्सेनिक वाले इलाकों के लिए CGWB ने सीमेंट-सीलिंग तकनीक बनाई है। इसके जरिए 525 आर्सेनिक-मुक्त कुएं खोदे गए हैं, जिनमें बिहार के 40 कुएं हैं। |
| जल जीवन मिशन: | हर ग्रामीण घर को नल का पानी देने का लक्ष्य है। अब तक देश के 82% यानी 15.90 करोड़ घरों को कनेक्शन मिला है। बिहार में 95.71% यानी 1.60 करोड़ परिवार कवर हो चुके हैं। |
| जल शक्ति अभियान: | हर साल चलने वाले इस अभियान में देशभर में 2 करोड़ से ज्यादा जल संरक्षण और रिचार्ज के काम हुए हैं। बिहार में अकेले 5.75 लाख काम हुए हैं। जिलों में 'जल शक्ति केंद्र' तकनीकी मदद भी दे रहे हैं। |
| जन भागीदारी: | 2024 में 'जल संचय जन भागीदारी' शुरू हुई। अब तक 1.55 करोड़ रिचार्ज काम हुए हैं, जिनमें बिहार में 7.26 लाख शामिल हैं। 2026 में 'कैच द रेन' भी जोड़ा गया। |
| अमृत सरोवर: | हर जिले में 75 तालाब बनाने का लक्ष्य है। अब तक 69,000 सरोवर बन चुके हैं, जिनमें बिहार के 2,613 सरोवर हैं। इससे भंडारण और भूजल रिचार्ज बढ़ा है। |
| PMKSY और PDMC: | सिंचाई की पहुंच बढ़ाने और पानी की बचत के लिए PMKSY चल रही है। इसके तहत पुराने तालाबों की मरम्मत और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि खेतों में पानी की दक्षता बेहतर हो। |
केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के बारे में
केंद्रीय भूजल बोर्ड यानी CGWB जल संसाधन मंत्रालय के तहत भारत में भूजल संसाधनों का सर्वोच्च राष्ट्रीय निकाय है। इसका काम भूजल का अन्वेषण, निगरानी, मूल्यांकन, प्रबंधन और विनियमन करना है।
- इसकी स्थापना 1970 में हुई थी। पहले इसे "अन्वेषणात्मक नलकूप संगठन" कहा जाता था। 1972 में इसे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के भूजल विंग के साथ मिला दिया गया।
- वहीं भूजल के विकास को रेगुलेट करने के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत "केंद्रीय भूजल प्राधिकरण - CGWA" बनाया गया।
- इसका मुख्यालय फरीदाबाद, हरियाणा में स्थित है।
CGWB के प्रमुख कार्य
वैज्ञानिक सहायता: भूजल की खोज, निगरानी और जल गुणवत्ता का आकलन करना।
पुनर्भरण योजनाएं: भूजल स्तर बढ़ाने के लिए कृत्रिम पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन की योजनाएं चलाना।
रिपोर्ट और डेटा: राज्य और जिला स्तर की जल-भूवैज्ञानिक रिपोर्ट, भूजल वर्ष पुस्तकें और एटलस जारी करना।
केंद्रीय भूजल बोर्ड यानी CGWB, राज्य सरकारों के साथ मिलकर देश के भूजल संसाधनों का आकलन करता है। इसमें ये देखा जाता है कि हर साल जमीन में कितना पानी वापस जुड़ रहा है, कितना पानी निकाला जा सकता है, और सिंचाई, घरेलू व उद्योगों में कितना इस्तेमाल हो रहा है। CGWB प्रति-व्यक्ति खपत नहीं गिनता, बल्कि ये बताता है कि उपलब्ध पानी का कितना प्रतिशत निकाला जा रहा है।
साथ ही CGWB अपने निगरानी कार्यक्रम और वैज्ञानिक सर्वे के जरिए भूजल की गुणवत्ता का डेटा भी तैयार करता है। खासकर संवेदनशील इलाकों में ज्यादा सैंपल लिए जाते हैं। ध्यान देने वाली बात है कि भूजल की गुणवत्ता जगह और समय के हिसाब से बदलती रहती है।
निष्कर्ष
भारत में जल एक राज्य सूचि का विषय है, इसलिए भूजल की गुणवत्ता सुधारने, प्रबंधन, पुनर्भरण और संरक्षण की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार CGWB और अन्य योजनाओं के जरिए वैज्ञानिक डेटा, तकनीकी मदद और वित्तीय सहयोग देकर इस काम में सहयोग करती है। नियमित निगरानी, NAQUIM जैसे जलभृत मानचित्रण, आर्सेनिक-मुक्त तकनीक, जल जीवन मिशन, जल शक्ति अभियान, अमृत सरोवर और PMKSY जैसी योजनाओं से भूजल संसाधनों को बचाने और हर घर तक सुरक्षित पानी पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। बिहार में भी इन योजनाओं का बड़ा असर दिख रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि अगर डेटा-आधारित योजना, जन-भागीदारी और सतत उपयोग को मिलाकर काम किया जाए, तो देश में भूजल को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) द्वारा जारी 'सक्रिय भूजल संसाधन आकलन, 2025' बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के पाठ्यक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।यह रिपोर्ट मुख्य रूप से जल सुरक्षा, पर्यावरण और कृषि से जुड़ी है और इसके अलावा मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रपत्र-2 में शामिल भारतीय अर्थव्यवस्था और भूगोल के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौधोगिकी से भी जुड़ा हुआ है।












