EDU TERIA Logo
Sign InEnroll Now

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)

CAQM के निर्देश, दिल्ली-NCR वायु प्रदूषण, AQI, प्रदूषण नियंत्रण उपाय और BPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण पर्यावरण करंट अफेयर्स जानें।

school
Written by Akhilesh Anand
Published: 21 August 20267 min read
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)
Progress
0%
Aa

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)

चर्चा में क्यों है?

हाल ही में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग(CAQM) ने दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए।

निर्देश 102:हल्के मालवाहक वाहन (LGV) प्रदूषण का बड़ा स्रोत हैं। ये कुल वाहनों का सिर्फ 1.2% हैं पर PM उत्सर्जन में 3.3% योगदान देते हैं। इसलिए N-1 श्रेणी के डीजल, पेट्रोल, CNG LGV के नए पंजीकरण पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगेगा। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली, 1 जुलाई 2027 से गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद जैसे 5 जिले, और 1 जनवरी 2028 से NCR के बाकी जिले। N-2 श्रेणी पर प्रतिबंध 2028-2029 से लागू होगा।
निर्देश 103: स्टोन क्रशिंग इकाइयों में धूल नियंत्रण के लिए CPCB 2023 के दिशानिर्देश अनिवार्य। वीडियो निगरानी, PM2.5/PM10 सेंसर और व्हील वॉशिंग जैसी तकनीक से निगरानी होगी।
बंद इकाइयों को दोबारा खोलना: अब इकाइयों को सुधारात्मक उपायों के दस्तावेज, साक्ष्य और शपथ पत्र देने होंगे। SPCB और DPCC जांच करेंगे और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। CPCB की टीम औचक जांच भी कर सकती है।

अन्य प्रमुख बिंदु: 

R&D: सड़क की धूल, यांत्रिक सफाई, पराली जलाने की पूर्वानुमान प्रणाली जैसी 4 परियोजनाओं को 2 साल के लिए 3.25 करोड़ रुपये की मंजूरी।
ईंधन छूट: मध्य-पूर्व संघर्ष के कारण 13 सितंबर 2026 तक उद्योगों, होटल-रेस्तरां को गैस की जगह वैकल्पिक ईंधन की अस्थायी अनुमति - निर्देश 65।
समयसीमा विस्तार: उद्योगों में संशोधित PM उत्सर्जन मानक अब 1 अक्टूबर 2026 तक लागू होंगे - निर्देश 98।
प्रवर्तन: 10 अगस्त 2026 तक 1,816 इकाइयां बंद। 1,461 में अनुपालन के बाद दोबारा शुरू करने पर विचार।
बायोमास सह-दहन:लक्ष्य न पूरा करने वाले 6 थर्मल प्लांटों पर 61.85 करोड़ रुपये का जुर्माना, जिसमें से 30.92 करोड़ वसूल हुए।
हरित क्षेत्र: 2026-27 में 4.60 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य, 4 अगस्त 2026 तक 2.53 करोड़ लग चुके हैं।

भारत में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों की प्रभावशीलता में बाधाएँ

शहरी कार्यान्वयन क्षमता की कमी:-NCAP के तहत लक्ष्य तय होने के बावजूद कई शहरों में प्रशिक्षित कर्मचारी, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की कमी है। MoEFCC की रिपोर्ट के अनुसार कई शहर केंद्रीय निधि का पूरा उपयोग नहीं कर पाते, जिससे मशीनीकृत सफाई और स्रोत अध्ययन जैसे काम लटक जाते हैं। नतीजा: 3-15% वार्षिक PM कमी का लक्ष्य अक्सर पूरा नहीं होता।
खंडित शासन और समन्वय का अभाव:- वायु प्रदूषण सीमा नहीं देखता, लेकिन नियमन राज्यों और एजेंसियों में बंटा है। दिल्ली की सर्दियों का स्मॉग पड़ोसी राज्यों के उत्सर्जन से बढ़ता है, पर प्रवर्तन की जिम्मेदारी असमान है। CPCB मुख्यतः समन्वयक है, इसलिए GRAP जैसी क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं कम असरदार रहती हैं।
मौसमी और आकस्मिक चरम प्रदूषण:-अक्टूबर-दिसंबर में तापमान व्युत्क्रमण + पराली + उत्सर्जन से NCR में PM2.5 लगभग दोगुना हो जाता है। नवंबर 2024-25 में AQI कई दिन 400 के पार रहा। निर्माण रोक जैसे आपात उपाय तात्कालिक राहत देते हैं, पर संरचनात्मक कारण हल नहीं करते।
निगरानी बनाम प्रवर्तन का अंतर:- देश में 900+ निरंतर निगरानी स्टेशन हैं, पर प्रवर्तन क्षमता उतनी नहीं बढ़ी। दिल्ली में नो PUC, नो फ्यूल अभियान के एक दिन में PUC मांग 46% बढ़ी और सिस्टम जाम हो गया। डेटा तो तेज बनता है, पर कार्रवाई धीमी है।
आर्थिक और आजीविका की बाधाएँ:-पराली प्रबंधन पर 2,000-3,000/हेक्टेयर खर्च आता है, पर बाजार की गारंटी नहीं। इससे सब्सिडी के बाद भी पराली जलती है। पुराने वाहनों पर प्रतिबंध अनौपचारिक मजदूरों को सीधे मारता है। लागत और रोजगार का डर अनुपालन घटाता है।
व्यवहार परिवर्तन और औद्योगिक डेटा की कमी:-निजी वाहन, कचरा जलाना, पटाखे जैसे व्यवहार PM में 40%+ योगदान देते हैं, पर सिर्फ जागरूकता से बदलाव नहीं आया। उद्योगों में OCEMS अनिवार्य है, पर CEEW के अनुसार 81% चिमनियों का डेटा साल में 1000 घंटे से ज्यादा गायब रहता है। इसे कोर्ट में सबूत के रूप में मान्यता भी नहीं, इसलिए SPCB अब भी मैनुअल जांच पर निर्भर हैं।

भारत में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आवश्यक उपाय

शहरों की कार्यान्वयन क्षमता बनाना:- नगर निगमों में समर्पित वायु गुणवत्ता प्रकोष्ठ AQC बनें - इंजीनियर, GIS विश्लेषक, प्रोजेक्ट मैनेजर के साथ। NCAP/XVFC फंड से स्थायी पदों के लिए पैसा हो, तदर्थ भर्ती नहीं। मानकीकृत टेम्पलेट और खरीद पैकेज से फंड का तेज इस्तेमाल हो। छोटे शहरों को क्षमता-निर्माण वाउचर और DPR/खरीद में मदद के लिए सलाहकार मिलें।
क्षेत्रीय और अंतर-राज्यीय समन्वय:-NCR जैसे क्षेत्रों के लिए बाध्यकारी अंतर-राज्यीय समझौते हों - उत्सर्जन सूची और साझा लक्ष्य के साथ। CAQM जैसी संस्था के पास सशर्त फंड बांटने का कानूनी अधिकार हो। एक क्षेत्रीय डेटा प्लेटफॉर्म और संयुक्त GRAP ट्रिगर बनें ताकि एक राज्य का हॉटस्पॉट दूसरे राज्य में भी ऑटोमैटिक कार्रवाई शुरू करे।
मौसमी चरम को रोकना:-शीतकाल से पहले तैयारी: सड़क सफाईकर्मी पहले से तैनात, सार्वजनिक परिवहन की अतिरिक्त क्षमता, AQI बढ़ने पर मुफ्त सार्वजनिक परिवहन दिवस। पराली के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर, हैप्पी-सीडर, बायोमास एकत्रीकरण का विस्तार कटाई से पहले ही हो।
निगरानी-प्रवर्तन का अंतर पाटना:-रियल-टाइम मॉनिटर, PUC डेटाबेस, OCEMS को सीधे जुर्माना और नोटिस सिस्टम से जोड़ें। 24-72 घंटे में जांच हो। मोबाइल प्रवर्तन टीम और PUC वैन प्रदूषण वाले महीनों में तैनात हों। IT सिस्टम को स्केलेबल बनाएं ताकि नो-PUC, नो-फ्यूल जैसी मुहिम से सिस्टम क्रैश न हो।
आर्थिक-आजीविका समाधान:-किसानों के पास बायोगैस, पेलेट, बायो-रिफाइनरी को पूंजी अनुदान + खरीद गारंटी मिले ताकि पराली कचरा न रहे। पुराने वाहन मालिकों को रिटायरमेंट वाउचर, 3-पहिया रेट्रोफिट पर सब्सिडी, EV में जाने वाले चालकों को अस्थायी वित्तीय मदद।
व्यवहार परिवर्तन:- भीड़-भाड़ शुल्क, पार्किंग सुधार, कचरा जलाने पर भारी जुर्माना, स्वच्छ कुकस्टोव पर सब्सिडी। स्कूल, आशा वर्कर, नगर निकाय वार्ड स्तर पर जागरूकता चलाएं। मोबाइल ऐप और डिस्प्ले बोर्ड पर दैनिक सलाह - जैसे "आज AQI ज्यादा है, सार्वजनिक परिवहन लें"।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के बारे में

  • CAQM एक वैधानिक निकाय है जिसका गठन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत किया गया। इसका काम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR और आसपास के क्षेत्र - पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में वायु गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं का प्रबंधन करना है।
  • NCR और आसपास के क्षेत्रों में AQI से जुड़ी समस्याओं का बेहतर समन्वय, अनुसंधान, पहचान और समाधान करना। साथ ही इससे संबंधित अन्य मामलों को देखना।
  • आयोग की संरचना में एक अध्यक्ष, केंद्र सरकार के दो संयुक्त सचिव, वायु प्रदूषण के तीन स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ और तीन गैर-सरकारी सदस्य शामिल हैं।
  • CAQM का काम राज्य सरकारों की कार्रवाइयों में समन्वय करना, प्रदूषण रोकथाम की योजनाएं बनाना और लागू करना, प्रदूषकों की पहचान के लिए रूपरेखा देना, तकनीकी संस्थानों के साथ R&D करना, विशेष कार्यबल तैयार करना और वृक्षारोपण व पराली प्रबंधन जैसी कार्य योजनाएं बनाना है।
  • आयोग को वायु गुणवत्ता प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने, दिशानिर्देश जारी करने और बाध्यकारी निर्देश देने की शक्ति प्राप्त है। इसके आदेशों का उल्लंघन करने पर 5 साल तक का कारावास या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन के मामलों में CAQM का निर्णय राज्य सरकारों, CPCB और SPCB के आदेशों पर सर्वोपरि होगा।

निष्कर्ष

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) NCR और आसपास के राज्यों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक समन्वित और अधिकार-संपन्न वैधानिक मंच है। इसका गठन यह दर्शाता है कि वायु प्रदूषण अब केवल राज्य-स्तरीय समस्या नहीं, बल्कि एक क्षेत्रीय चुनौती है जिसके लिए एकीकृत दृष्टिकोण जरूरी है। बाध्यकारी निर्देश जारी करने, उल्लंघन पर दंड लगाने और सभी एजेंसियों पर सर्वोपरि होने की शक्तियों के साथ CAQM नीति, प्रवर्तन और अनुसंधान को एक सूत्र में जोड़ सकता है। हालांकि इसकी सफलता अंततः राज्यों के सहयोग, कार्यान्वयन क्षमता और नागरिक भागीदारी पर निर्भर करेगी। यदि CAQM योजनाओं को कागजों से निकालकर जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू कर सके, तो यह दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता में दीर्घकालिक और सतत सुधार लाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) BPSC परीक्षा के मुख्य परीक्षा (Mains) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 और समसामयिक घटनाक्रम के अंतर्गत पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी भाग से संबंधित है। इसके अलावा यह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में राष्ट्रीय स्तर के करंट अफेयर्स और पर्यावरण प्रदूषण से जुड़े सवालों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

Reference:-
  1. https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2301368&reg=48&lang=2

Comments

Loading comments...

Related Articles

Suggested Courses

Trending
Titan Plus Batch 2
BPSC CCE

Titan Plus Batch 2

Trending
Titan Batch 2
BPSC CCE

Titan Batch 2

Must Buy
BSSC CGL-04 TEST SERIES 2.0
Test Series Prelims

BSSC CGL-04 TEST SERIES 2.0

Bestseller
जुनून सीरीज 2.0 (72nd BPSC Prelims)
Test Series Prelims

जुनून सीरीज 2.0 (72nd BPSC Prelims)