BS-7 मानक : 2029 तक लागू करने का लक्ष्य
खबरों में क्यों है?
सरकार, नई कारों और स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) के लिए उत्सर्जन मानक बीएस 7 को अप्रैल 2029 से लागू करने की योजना बना रही है। इसके बाद अप्रैल, 2030 से छोटे मालवाहक एवं पिकअप वैन जबकि अप्रैल, 2031 से भारी वाहनों के लिए भी ये मानक लागू किए जाएंगे। खबरों के मुताबिक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नए उत्सर्जन मानकों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के संबंध में प्रस्तावित दिशा निर्देशों को मंजूरी दे दी है।
भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक क्या है?
भारत स्टेज मानक सरकार द्वारा तय कानूनी नियम हैं जो गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण को कंट्रोल करते हैं। ये मानक पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) बनाता है और CPCB लागू करता है। ये यूरोपीय यूरो मानकों पर आधारित हैं। इनका मकसद है - CO, HC, NOx और PM जैसे हानिकारक गैसों और कणों पर सख्त लिमिट लगाना, ताकि कंपनियां साफ ईंधन, बेहतर इंजन और एडवांस तकनीक इस्तेमाल करें।
माशेलकर समिति (2002) ने ही BS मानकों को देश भर में चरणबद्ध तरीके से लागू करने का रोडमैप दिया था।
BS मानकों का विकास:
1999: सुप्रीम कोर्ट ने कहा सभी वाहनों को यूरो I / BS I (इंडिया 2000) मानना अनिवार्य है।2000 से 2017: भारत BS I से BS IV तक पहुंचा।
2020: बड़ा कदम लेते हुए BS V को स्किप करके सीधे अप्रैल 2020 से BS VI लागू किया गया, जिससे उत्सर्जन मानक काफी ज्यादा सख्त हो गए।
BS मानकों के नए अपडेट:
BS VI फेज-II (अप्रैल 2023 से): अब RDE टेस्ट(Real Driving Emissions Test) अनिवार्य है, यानी लैब में नहीं, असली सड़क पर चलाकर देखा जाता है कि गाड़ी सच में मानक फॉलो कर रही है या नहीं।
दिल्ली का केस: दिल्ली में हमेशा मानक पहले लागू हुए। BS II - 2001 में, BS III - 2005 में, BS IV - 2010 में।
BS VI में क्या बदला: पेट्रोल गाड़ियों को NOx में 25% कमी करनी है। डीजल गाड़ियों को HC+NOx में 43%, NOx में 68% और PM में 82% तक कमी करनी है। ईंधन में सल्फर 50 mg/kg (BS IV) से घटाकर 10 mg/kg (BS VI) कर दिया गया, जिससे एडवांस तकनीक लगाना आसान हुआ।
उल्लेखनीय है कि भारत में अप्रैल, 2020 से बीएस-6 मानक लागू हैं। प्रदूषण नियंत्रण में तेजी लाने के लिए भारत ने बीएस-4 के बाद सीधे बीएस-6 मानक अपनाए थे। बीएस-6 वाहन के लिए कम सल्फर वाले ईंधन का इस्तेमाल जरूरी है।
बीएस-7 के बारे में
उत्सर्जन मानक भारत चरण-7 यानी बीएस-7 पूरी तरह यूरो-7 मानकों के अनुरूप होंगे। इसके बारे में मसौदा संबंधी अधिसूचना इस सप्ताह जारी होने की उम्मीद है। बीएस उत्सर्जन मानक वाहनों से निकलने वाले कार्बन मोनोआक्साइड, नाइट्रोजन आक्रराइड, हाइड्रोकार्बन और नुकसानदेह कणों जैसे प्रदूषकों की मात्रा की सीमा तय करते हैं। इनका उद्देश्य अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की धीरे-धीरे हटाना है।
पुराने वाहन ज्यादा प्रदूषण क्यों करते हैं?
| एडवांस तकनीक का अभाव: | BS IV से पहले की गाड़ियों में DPF और SCR जैसी मॉडर्न तकनीक नहीं होती, जो धुएं और हानिकारक गैसों को फिल्टर करती है। |
| कमजोर एग्जॉस्ट सिस्टम: | पुरानी गाड़ियां सिर्फ साधारण ऑक्सीडेशन कैटेलिस्ट पर चलती हैं, जो PM और NOx को ठीक से रोक नहीं पाता। |
| इंजन का घिसना: | समय के साथ इंजन घिस जाता है, ईंधन-हवा का मिश्रण बिगड़ता है, जलना अधूरा रहता है और धुआं ज्यादा निकलता है। |
| असल सड़क पर और ज्यादा प्रदूषण: | रिसर्च बताती है कि गाड़ी जितनी पुरानी, उसका CO और PM उत्सर्जन उतना ही ज्यादा बढ़ जाता है। |
| खराब रखरखाव: | ज्यादा किलोमीटर चलने और सही सर्विस न होने से पुरानी गाड़ियां नई BS VI गाड़ियों के मुकाबले कई गुना ज्यादा प्रदूषण करती हैं। |
अप्रैल 2029 से लागू करने की तैयारी क्यों?
सरकार इन मानकों को अप्रैल 2029 से लागू करने की तैयारी कर रही है, ताकि वाहन उद्योग को तकनीकी बदलावों के लिए पर्याप्त समय मिल सके। नए मानकों के अनुरूप वाहनों का विकास, परीक्षण और उत्पादन करने के लिए कंपनियों को अपनी मौजूदा व्यवस्थाओं में बदलाव करना होगा। इसके साथ ही, उत्सर्जन नियंत्रण से जुड़ी तकनीकों और प्रणालियों को भी अधिक प्रभावी बनाना होगा।
वाहन उद्योग के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
नए उत्सर्जन मानकों को अपनाने के लिए वाहन कंपनियों को अनुसंधान, तकनीकी विकास और परीक्षण पर अधिक निवेश करना पड़ सकता है। उन्नत उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली अपनाने से वाहनों की उत्पादन लागत पर भी असर पड़ने की संभावना है। ऐसे में कंपनियों के लिए पर्यावरणीय जरूरतों और ग्राहकों की कीमत संबंधी अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा।
भारत में स्वच्छ परिवहन की दिशा में अगला कदम
भारत में प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए उत्सर्जन मानकों को लगातार बेहतर बनाना महत्वपूर्ण है। यदि बीएमएस-7 मानकों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे वाहन उद्योग में तकनीकी सुधार और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को गति मिल सकती है। हालांकि, इनके वास्तविक प्रभाव का आकलन लागू होने वाले अंतिम नियमों और तकनीकी आवश्यकताओं के आधार पर ही किया जा सकेगा।
निष्कर्ष:
बीएमएस-7 मानकों को अप्रैल 2029 से लागू करने की तैयारी वाहन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकती है। इसके लिए सरकार, वाहन निर्माताओं और तकनीकी क्षेत्र को समय रहते तैयारी करनी होगी, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र की जरूरतों का भी ध्यान रखा जा सके।
Reference:





