बिहार का भूजल रिचार्ज मिशन
खबरों में क्यों है?
बिहार में लगातार गिरते भूजल स्तर और अनियमित बारिश के बीच सरकार ने भूजल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) ने राज्य के 14 जिलों की 1,171 पंचायतों में रिचार्ज शॉफ्ट बनाने का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाकर भूजल स्तर को रिचार्ज करना और भविष्य में पानी की उपलब्धता को बेहतर बनाना है।
क्या है रिचार्ज शॉफ्ट?
रिचार्ज शॉफ्ट जमीन के अंदर पानी पहुंचाने की एक संरचना है। बारिश के दौरान जमा होने वाले पानी को फिल्टर करके इसे जमीन की गहरी परतों तक पहुंचाया जाता है।
आमतौर पर इसके लिए:
- बारिश के पानी को एकत्र किया जाता है।
- पानी को रेत, बजरी और जाली जैसे फिल्टर से गुजारा जाता है।
- इसके बाद साफ पानी को जमीन के अंदर भेजा जाता है।
- करीब 30–40 मीटर तक गहरी बोरिंग के माध्यम से पानी को उन परतों तक पहुंचाया जाता है, जहां से भूजल का पुनर्भरण हो सके।
इस तरह बारिश का पानी सीधे बहकर बर्बाद होने के बजाय भूजल भंडार को बढ़ाने में मदद करता है।
किन जिलों में बनेगा रिचार्ज शॉफ्ट?
पहले चरण में दक्षिण बिहार के बांका, गया, जमुई, नवादा और भागलपुर को योजना में शामिल किया गया है।
इन जिलों में प्रत्येक पंचायत के लिए लगभग तीन रिचार्ज शॉफ्ट बनाने की योजना है। आगे चलकर दक्षिण बिहार के 14 जिलों की सभी 1,171 पंचायतों में कुल 3,513 रिचार्ज शॉफ्ट बनाए जाने का लक्ष्य है।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| लक्षित पंचायतें | 1,171 |
| कुल प्रस्तावित रिचार्ज शॉफ्ट | 3,513 |
| पहले चरण के जिले | बांका, गया, जमुई, नवादा और भागलपुर |
| प्रति पंचायत | लगभग 3 रिचार्ज शॉफ्ट |
| अनुमानित खर्च | प्रति शॉफ्ट लगभग ₹1 लाख |
| जारी राशि | ₹13.57 लाख का प्रारंभिक आवंटन |
| लक्ष्य | भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण |
बिहार में भूजल संकट क्यों बढ़ रहा है?
जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून और बारिश के पैटर्न में बदलाव के कारण कई इलाकों में भूजल स्तर लगातार प्रभावित हो रहा है। पटना के अलावा गया, नवादा, नालंदा, बांका, जमुई, औरंगाबाद, बक्सर, भागलपुर, कैमूर, जहानाबाद, लखीसराय और अरवल जैसे जिलों में पानी की समस्या सामने आती रही है।
ऐसे में केवल बारिश पर निर्भर रहने के बजाय बारिश के पानी को संरक्षित करके जमीन के अंदर पहुंचाना जरूरी हो जाता है।
कब तक पूरा होगा काम?
विभाग के अनुसार योजना को लगभग दो महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद दक्षिण बिहार के अन्य जिलों में भी रिचार्ज शॉफ्ट का निर्माण किया जाएगा।
सरकार की यह पहल जल-जीवन-हरियाली अभियान और भूजल संरक्षण के व्यापक प्रयासों से भी जुड़ी हुई है।
महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से भी लिया गया अनुभव
अधिकारियों के अनुसार देश के कुछ अन्य राज्यों में रिचार्ज शॉफ्ट का प्रयोग सफल रहा है। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए बिहार में भी इस तकनीक को अपनाया जा रहा है।
विभाग का लक्ष्य है कि 2026–27 में रिचार्ज शॉफ्ट के निर्माण को और विस्तार दिया जाए।
बिहार में बढ़ता जल संकट
- हाल ही में विश्व पर्यापरण दिवस के अवसर पर एक ऑनलाइन सेमिनार आयोजित की गई थी जिसमें बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सह महावीर कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र के शोध प्रमुख डॉ. अशोक घोष ने कहा कि हालिया अध्ययनों के हवाले अपनी बातें रखी हैं।
- पटना मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक आशीष कुमार ने जलवायु परिवर्तन की मानवीय लागत पर प्रकाश डाला, जिसमें हीटवेव और बिजली गिरने से होने वाली मौतें शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों में बिजली गिरने से 1500 लोगों की मौत हुई है। हिमालय की तलहटी में बसे मधुबनी, पूर्णिया और किशनगंज सहित उत्तर बिहार के जिलों में भी हीटवेव देखी जा रही है। पिछले पांच वर्षों से बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत और विदाई में देरी हो रही है। जिसके कारण बारिश के दिनों की संख्या कम हो रही हैं।
- बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधांशु कुमार ने बताया कि आर्थिक विकास और जलवायु भेद्यता एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
जल संकट और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि, रोजगार, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए विकास की योजनाओं में जलवायु जोखिम को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार के अधिकांश हिस्सों, खासकर दक्षिण बिहार के जिलों में 2030 तक गंभीर जल संकट की स्थिति बन सकती है। पटना सहित कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट देखी जा रही है, जिससे भविष्य में पीने योग्य पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। यहां तक कि उत्तर बिहार के दरभंगा जैसे जिलों में भी भूजल स्तर में कमी दर्ज की जा रही है।
मुख्य बिंदु
- 2030 तक बिहार के कई हिस्सों, खासकर दक्षिणी जिलों में गंभीर जल संकट की आशंका जताई गई है।
- पटना समेत कई जिलों में भूजल स्तर गिर रहा है, जिससे पीने के पानी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
- उत्तर बिहार के दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया और किशनगंज जैसे जिलों में भी जलवायु और जल संकट के संकेत दिख रहे हैं।
- पिछले तीन वर्षों में बिजली गिरने से करीब 1,500 लोगों की मौत हुई है।
- पिछले पांच वर्षों से बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन और वापसी में देरी देखी जा रही है, जिससे बारिश के दिनों में कमी आई है।
- जल प्रदूषण से संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ रहा है।
- विशेषज्ञों ने जल संकट से निपटने के लिए सरकारी नीतियों, जनभागीदारी और वैज्ञानिक अनुसंधान पर जोर दिया।
निष्कर्ष
बिहार में 1,171 पंचायतों में रिचार्ज शॉफ्ट का निर्माण भूजल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसका फोकस केवल पानी बचाने पर नहीं, बल्कि बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाकर भविष्य के लिए जल भंडार मजबूत करने पर है। अगर यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे जल संकट से प्रभावित इलाकों में भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिल सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।






