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किगाली संशोधन के 10 साल पूरे

Understand the Kigali Amendment 2016, its objective of phasing down HFCs, its link with the Montreal Protocol, and India’s HFC reduction targets.

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Written by Dilip Kumar
Published: 15 October 2026•10 min read
किगाली संशोधन के 10 साल पूरे
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किगाली संशोधन के 10 साल पूरे

यह लेख जलवायु परिवर्तन, ओजोन परत संरक्षण, रेफ्रिजरेंट गैसों, ऊर्जा दक्षता और भारत की बढ़ती कूलिंग जरूरतों से संबंधित है। UPSC और BPSC के दृष्टिकोण से इसे पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौते और सतत विकास के अंतर्गत अध्ययन करना चाहिए।

चर्चा में क्यों ?

दोस्तों, 2016 में  मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत किगाली संशोधन (Kigali Amendment) को अपनाया गया था। इस संशोधन के दस वर्ष पूरे हो गये हैं. इस संशोधन का उद्देश्य हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से कम करना है।

HFCs का उपयोग मुख्य रूप से एयर कंडीशनर, फ्रिज और अन्य कूलिंग उपकरणों में किया जाता है। ये ओजोन परत को सीधे नष्ट करने वाले प्रमुख रसायन नहीं हैं, लेकिन इनमें से कई गैसें शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं, जो ग्लोबल वार्मिंग में योगदान करती हैं.

प्रमुख बिंदु:

  • किगाली संशोधन को अपनाए जाने के दस वर्ष पूरे 
  •  लक्ष्य:  HFCs के उपयोग को नियंत्रित करके भविष्य में होने वाली ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करना 
  • भारत में गर्मी और एयर कंडीशनिंग की माँग बढ़ने के कारण इस मुद्दे का विशेष महत्त्व
  • रेफ्रिजरेंट बदलने के साथ-साथ कूलिंग उपकरणों की ऊर्जा दक्षता बढ़ाना भी जरूरी 
  • विकासशील देशों को नई तकनीक अपनाने में मदद देने के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था महत्त्वपूर्ण है।

नोट: किगाली संशोधन का उद्देश्य केवल एक गैस को दूसरी गैस से बदलना नहीं, बल्कि जलवायु के अनुकूल कूलिंग व्यवस्था की ओर बढ़ना है।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल क्या है?

यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौता है, जिसका मकसद ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों के उत्पादन और खपत को नियंत्रित करना है।

  • स्वीकार किया गया: 1987
  • लागू हुआ: 1989
  • मुख्य उद्देश्य: ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना।
  • महत्त्व: यह ओजोन परत की रक्षा के लिए दुनिया के सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौतों में से एक माना जाता है।

क्या है ओजोन परत ?

पृथ्वी के समतापमंडल (Stratosphere) में मौजूद यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी-B (UV-B) किरणों के बड़े हिस्से को अवशोषित करती है।

यदि ओजोन परत को नुकसान पहुँचता है, तो पृथ्वी की सतह तक अधिक UV-B विकिरण पहुँच सकता है। इससे त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव का खतरा बढ़ता है।

CFCs और ओजोन परत का संबंध

CFCs यानी क्लोरोफ्लोरोकार्बन का उपयोग पहले फ्रिज, एयर कंडीशनर और एयरोसोल जैसे उत्पादों में किया जाता था। ये गैसें समतापमंडल में पहुँचकर क्लोरीन मुक्त कर सकती हैं, जो ओजोन अणुओं को तोड़ती है।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत CFCs सहित अनेक ओजोन-क्षयकारी पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की दिशा में काम किया गया।

किगाली संशोधन (Kigali Amendment) क्या है?

किगाली संशोधन, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में किया गया एक महत्त्वपूर्ण संशोधन है। इसे 15 अक्टूबर 2016 को किगाली, रवांडा में अपनाया गया था। किगाली संशोधन का लक्ष्य 2040 के दशक के अंत तक हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) के उत्पादन और खपत में 80% से 85% की कमी लाना है।

वहीं भारत का लक्ष्य 2047 तक हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) को उनके बेसलाइन स्तर से 85% तक कम करना है। किगाली संशोधन 1 जनवरी 2019 को लागू हुआ। 

यह हस्ताक्षरकर्ताओं के बीच एक कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता है। और, इसके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए नियमों का पालन न होने की स्थिति में कार्रवाई के प्रावधान भी हैं। यह देशों के विकास के स्तर, उनकी अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक रुकावटों, और उनकी तकनीकी व वैज्ञानिक क्षमताओं के आधार पर उनके लिए अलग-अलग लक्ष्य तय करता है।

इसका मुख्य उद्देश्य HFCs (Hydrofluorocarbons) के उत्पादन और खपत को धीरे-धीरे कम करना है। HFCs का इस्तेमाल CFCs और अन्य ओजोन-क्षयकारी रसायनों के विकल्प के रूप में बढ़ा था। लेकिन बाद में पता चला कि HFCs में से कई गैसें ग्लोबल वार्मिंग को बहुत अधिक बढ़ाती हैं। 

इसे ऐसे समझ सकते हैं:

मान लीजिए, पहले एक फ्रिज में ऐसी गैस इस्तेमाल होती थी जो ओजोन परत को नुकसान पहुँचाती थी। उसके स्थान पर नई गैस का इस्तेमाल शुरू किया गया, जो ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुँचाती थी, लेकिन वातावरण में गर्मी बढ़ाती थी।

अब समस्या के दो पहलू हैं:

  • पुरानी समस्या: ओजोन परत को नुकसान।
  • नई समस्या: ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि।

किगाली संशोधन का उद्देश्य इस दूसरी समस्या को नियंत्रित करना है।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और किगाली संशोधन में अंतर

किगाली संशोधन ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को प्रतिस्थापित नहीं किया, बल्कि उसके दायरे में HFCs पर नियंत्रण की व्यवस्था जोड़ी गई

HFCs क्या हैं और ये जलवायु परिवर्तन क्यों बढ़ाती हैं?

HFCs का पूरा नाम Hydrofluorocarbons यानी हाइड्रोफ्लोरोकार्बन है। ये मानव निर्मित रसायन हैं, जिनका इस्तेमाल मुख्यतः इन क्षेत्रों में होता है:

  • एयर कंडीशनर (AC)
  • रेफ्रिजरेटर और कोल्ड स्टोरेज
  • व्यावसायिक कूलिंग उपकरण
  • फोम निर्माण और कुछ अन्य औद्योगिक प्रक्रियाएँ

HFCs ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुँचातीं, फिर भी समस्या क्यों हैं?

HFCs ओजोन परत को सीधे नष्ट करने वाले पदार्थ नहीं हैं, लेकिन कई HFCs की ग्लोबल वार्मिंग क्षमता (Global Warming Potential — GWP) बहुत अधिक होती है। इसका अर्थ है कि समान मात्रा में मुक्त किये जाने पर वे कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कहीं अधिक गर्मी रोक सकती हैं यानी trap कर सकती हैं.

CFCs का उपयोग कम करना → कई उपयोगों में HCFCs/HFCs जैसे विकल्प → HCFCs को भी चरणबद्ध समाप्त करना और HFCs की खपत कम करना।

किगाली संशोधन से ग्लोबल वार्मिंग कितनी कम हो सकती है?

संयुक्त राष्ट्र से जुड़े वैज्ञानिक आकलनों के आधार पर HFCs को नियंत्रित करने से वर्ष 2100 तक लगभग 0.3°C से 0.5°C तक वैश्विक तापवृद्धि को रोकने में मदद मिल सकती है। यह अनुमान इस बात पर निर्भर करता है कि नियंत्रण किस तरह लागू किए जाते हैं।

यह कमी छोटी दिखाई दे सकती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में एक डिग्री के छोटे हिस्से का भी महत्त्व है।

इसके लाभ हो सकते हैं:

  • अत्यधिक गर्मी की तीव्रता बढ़ने के जोखिम को सीमित करना।
  • जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालीन प्रभावों को कम करने में मदद।
  • कूलिंग क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करना।
  • ऊर्जा दक्षता में सुधार होने पर बिजली की माँग और उससे संबंधित उत्सर्जन कम करना।

हालाँकि, केवल HFCs कम करने से जलवायु परिवर्तन समाप्त नहीं होगा। इसके लिए ऊर्जा, परिवहन, उद्योग, कृषि और अन्य क्षेत्रों में भी उत्सर्जन कम करना जरूरी है।

भारत के लिए किगाली संशोधन का महत्त्व

भारत में गर्मी, नगरीकरण, बढ़ती आय और जीवन स्तर में सुधार के कारण AC, फ्रिज तथा अन्य कूलिंग उपकरणों की माँग बढ़ रही है।

लेकिन कूलिंग की बढ़ती माँग के सामने भारत की दोहरी चुनौती है:

  1. लोगों को गर्मी से बचाने के लिए किफायती कूलिंग उपलब्ध कराना।
  2. इस कूलिंग के कारण होने वाले बिजली के उपयोग और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करना।

भारत की HFC कटौती की समय-सीमा

भारत ने 27 सितंबर 2021 को किगाली संशोधन का अनुमोदन किया। भारत उन विकासशील देशों के समूह में है, जिनके लिए HFC नियंत्रण की समय-सीमा अपेक्षाकृत बाद में शुरू होती है।

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती: Cooling Demand

कूलिंग की बढ़ती माँग भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन रही है।

मान लीजिए, किसी शहर में पहले 100 घरों में AC थे। अब आय बढ़ने और गर्मी बढ़ने के कारण 300 घरों में AC लग गए। यदि प्रत्येक AC अधिक बिजली खर्च करता है, तो शहर में बिजली की कुल माँग भी बढ़ेगी।

यदि बिजली का बड़ा हिस्सा कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों से बनता है, तो बिजली उत्पादन के दौरान CO₂ उत्सर्जन भी बढ़ सकता है।

इस प्रकार एक चक्र बन सकता है:

गर्मी और तापमान में वृद्धि — AC और कूलिंग की माँग में वृद्धि—बिजली की माँग और रेफ्रिजरेंट का उपयोग बढ़ना—यदि ऊर्जा और गैसें स्वच्छ न हों, तो उत्सर्जन बढ़ सकता है

समाधान 

भारत को केवल अधिक AC बनाने या केवल AC का उपयोग कम करने के बीच चुनाव करने की जरूरत नहीं है। उसे कम ऊर्जा में अधिक कूलिंग उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना चाहिए।

इसके लिए:

  • उच्च ऊर्जा-दक्षता वाले AC और फ्रिज को बढ़ावा देना।
  • कम GWP वाले उपयुक्त रेफ्रिजरेंट अपनाना।
  • भवनों में प्राकृतिक वेंटिलेशन, छायादार डिजाइन और बेहतर इन्सुलेशन को प्रोत्साहित करना।
  • AC की सर्विसिंग के दौरान रेफ्रिजरेंट गैस का रिसाव रोकना।
  • पुरानी गैसों को सुरक्षित तरीके से एकत्र करना और उनका उचित प्रबंधन करना।

India Cooling Action Plan क्या है?

भारत सरकार ने मार्च 2019 में India Cooling Action Plan (ICAP) शुरू किया। इसका उद्देश्य देश में कूलिंग की बढ़ती जरूरतों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से पूरा करना है।

इसके प्रमुख लक्ष्य 2037–38 तक हैं:

क्षेत्रनिर्धारित लक्ष्य
कूलिंग की माँग20–25% तक कम करना
रेफ्रिजरेंट की माँग25–30% तक कम करना
कूलिंग से संबंधित ऊर्जा की जरूरत25–40% तक कम करना
कुशल तकनीकी मानव संसाधनकूलिंग क्षेत्र में कौशल विकास और प्रशिक्षण

ICAP और Kigali Amendment का संबंध

  • किगाली संशोधन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर HFCs के उत्पादन और खपत को कम करने का ढाँचा देता है।
  • ICAP भारत में कूलिंग की माँग, ऊर्जा दक्षता, रेफ्रिजरेंट और कौशल विकास से संबंधित व्यापक राष्ट्रीय योजना है।
  • दोनों का साझा उद्देश्य कूलिंग क्षेत्र के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है।

किगाली संशोधन के लक्ष्य को पूरी तरह सफल बनाने के लिए अभी तीन प्रमुख पक्ष जरूरी

1. सभी देशों को इसमें शामिल करना (Universal Participation)

किगाली संशोधन को अपनाए जाने के 10 साल बाद भी सभी देश इसमें शामिल नहीं हुए हैं। अक्टूबर 2026 की शुरुआत तक 175 पक्ष (Parties) इसमें शामिल हो चुके थे। इसका मतलब है कि अभी और देशों को इस समझौते से जुड़ने तथा HFC गैसों को कम करने के प्रयासों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

  1. पुराने AC और फ्रिज में मौजूद गैसों का सुरक्षित प्रबंधन

सिर्फ नई HFC गैसों के उत्पादन और खपत को कम करना पर्याप्त नहीं है। पुराने AC और फ्रिज में पहले से भरी गैसों का भी उचित प्रबंधन जरूरी है। दो समस्याओं का ध्यान रखना जरूरी है :

  • सर्विसिंग के दौरान रिसाव: AC की मरम्मत या सर्विसिंग करते समय गैस वातावरण में निकल सकती है।
  • पुराने उपकरणों को कबाड़ में डालना: AC या फ्रिज को फेंकते समय उसमें बची गैस वातावरण में निकल सकती है।

इससे निपटने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं.

  • गैस को उपकरण से सावधानीपूर्वक निकालकर एकत्र करना।
  • संभव होने पर गैस को शुद्ध करके दोबारा इस्तेमाल करना।
  • दोबारा इस्तेमाल संभव न हो, तो उसे सुरक्षित तरीके से नष्ट करना।

इस प्रक्रिया को Refrigerant Recovery and Destruction कहा जाता है। उदाहरण: जैसे पुराने मोबाइल की बैटरी को सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय सुरक्षित तरीके से रिसाइकिल किया जाता है, वैसे ही पुराने AC और फ्रिज की गैस को भी सुरक्षित तरीके से संभालना चाहिए।

  1. अधिक देशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता देना

बीते 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में सरकारों ने Friends of the Kigali Amendment गठबंधन को फिर से सक्रिय किया। इस समूह का उद्देश्य है:

  • अधिक देशों को किगाली संशोधन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • समझौते को लागू करने के लिए अधिक वित्तीय सहायता जुटाना।
  • उद्योगों के साथ मिलकर ऊर्जा-दक्ष कूलिंग उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाना।
  • रेफ्रिजरेंट गैसों को सुरक्षित तरीके से एकत्र करने और पुनः उपयोग करने की व्यवस्था मजबूत करना।

इस प्रयास को Climate and Clean Air Coalition का समर्थन प्राप्त है।

इस ब्लॉग से संबंधित क्विज़ हल करें। यहाँ क्लिक करें।

Reference: The Indian Express

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