प्रश्न
जूट की सस्ती क़ीमत, कोमलता, मजबूती, लंबाई और रेशों की एकरूपता के कारण इसकी अत्यधिक मांग है। पश्चिम बंगाल और बिहार में जूट की खेती के लिए उपयुक्त अनुकूल परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
आदर्श उत्तर
जूट, जिसे 'गोल्डन फाइबर' के नाम से भी जाना जाता है, भारत की एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक रेशे वाली फसल है। इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर बोरे, रस्सियां, कालीन और पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग सामग्री बनाने में किया जाता है। पश्चिम बंगाल और बिहार जूट उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हैं, क्योंकि यहां की कृषि-जलवायु परिस्थितियां अनुकूल हैं, मिट्टी उपजाऊ (जलोढ़) है और जल संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
जूट की खेती के अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियाँ
तापमान: 24°C से 35°C के बीच का तापमान और गर्म जलवायु, पौधों की अच्छी वृद्घि के लिए अनुकूल होती है।
वर्षा: लगभग 150–250 cm की अच्छी तरह से वितरित वर्षा इसके लिए आदर्श है।
आर्द्रता: उच्च सापेक्ष आर्द्रता (लगभग 70–90%) पौधों की स्वस्थ वानस्पतिक वृद्घि में सहायक होती है।
धूप: विकास के मौसम के दौरान पर्याप्त धूप मिलने से रेशे (फाइबर) का विकास बेहतर होता है।
मिट्टी : गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली जलोढ़ मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
पानी की पर्याप्त उपलब्धता : पौधों के विकास के दौरान पर्याप्त पानी बहुत ज़रूरी है। नदियाँ, तालाब और अन्य जलस्रोत 'रेटिंग' (जूट के तनों से रेशे अलग करने की प्रक्रिया) के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं।
क्षेत्रीय कारक
पश्चिम बंगाल
बिहार
गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा और हुगली बेसिन में उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है।
गर्म और नम मौसम तथा मानसून की भरपूर बारिश खेती के लिए अनुकूल है।
हुगली औद्योगिक क्षेत्र में सस्ते श्रम, परिवहन सुविधाओं और जूट मिलों की उपलब्धता उत्पादन और प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) में मदद करती है।
प्रमुख उत्पादक जिलों में नदिया, मुर्शिदाबाद, हुगली और उत्तर 24 परगना शामिल हैं।
उत्तर-पूर्वी बिहार के उपजाऊ जलोढ़ मैदान, विशेष रूप से कोसी और महानंदा नदी घाटियाँ, जूट की खेती के लिए अनुकूल हैं।
गर्मियों में उच्च तापमान, मानसून की पर्याप्त बारिश और उपयुक्त आर्द्रता फसल की वृद्घि में सहायक होती हैं।
जूट उत्पादन करने वाले प्रमुख जिलों में पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया शामिल हैं।
इसमें श्रम की अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है, जो इन क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
इस प्रकार, अनुकूल जलवायु परिस्थितियों, उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, प्रचुर मात्रा में पानी और श्रम की उपलब्धता का मेल पश्चिम बंगाल और बिहार को जूट की खेती के लिए उपयुक्त बनाता है। सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने, रेटिंग (जूट को गलाने) की सुविधाओं, आधुनिक प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने से उत्पादकता बढ़ सकती है और किसानों की आय में सुधार हो सकता है।


