प्रश्न
अल-नीनो और विश्व की जलवायु पर इसके प्रभाव के बारे में एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
आदर्श उत्तर
अल-नीनो समुद्र और वायुमंडल से जुड़ी एक ऐसी घटना है जो समय-समय पर होती रहती है। इसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। यह 'अल-नीनो सदर्न ऑसिलेशन' (ENSO) का एक महत्वपूर्ण चरण है, जो अनियमित अंतराल पर होता है और वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण पर गहरा प्रभाव डालता है। हवा के पैटर्न, समुद्री धाराओं और बारिश के वितरण में बदलाव लाकर, अल-नीनो दुनिया की जलवायु पर दूरगामी प्रभाव डालता है। इसके कारण अक्सर अलग-अलग क्षेत्रों में सूखा, बाढ़, लू (हीटवेव) जैसी स्थितियां पैदा होती हैं और कृषि उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ता है।
अल-नीनो का विकास भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर, समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिसंचरण के बीच होने वाली परस्पर क्रिया में बदलाव के कारण होता है। इसकी प्रक्रिया को निम्नलिखित चरणों के माध्यम से समझा जा सकता है:
सामान्य स्थितियाँ: सामान्य स्थितियों में, भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में पूर्वी व्यापारिक हवाएँ पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं, जो सतह के गर्म पानी को ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया की ओर धकेलती हैं।
गर्म पानी का जमा होना: इन हवाओं के कारण, पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में गर्म पानी जमा हो जाता है, जबकि दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के पास 'अपवेलिंग' नामक प्रक्रिया के जरिए ठंडा और पोषक तत्वों से भरपूर पानी ऊपर आ जाता है।
व्यापारिक पवनों का कमजोर होना: अल-नीनो के दौरान, पूर्वी व्यापारिक पवनें काफी कमजोर हो जाती हैं और कभी-कभी अपनी दिशा भी बदल सकती हैं।
गर्म पानी का पूर्व की ओर बहाव: गर्म सतही पानी मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र की ओर बढ़ता है, जिससे इन क्षेत्रों में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ जाता है।
अपवेलिंग में कमी: पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में थर्मोक्लाइन की गहराई बढ़ जाती है, जिससे दक्षिण अमेरिकी तट के किनारे ठंडे और पोषक तत्वों से भरपूर पानी का ऊपर की ओर आना कम हो जाता है।
वायुमंडलीय परिसंचरण में परिवर्तन: संवहन और वर्षा का केंद्र पूर्व की ओर खिसक जाता है, जिससे सामान्य वॉकर परिसंचरण कमजोर हो जाता है और वैश्विक पवन तथा वर्षा के पैटर्न बदल जाते हैं।

इस प्रकार, अल-नीनो समुद्र और वायुमंडल के बीच एक महत्वपूर्ण परस्पर क्रिया है, जो वैश्विक जलवायु परिसंचरण के सामान्य पैटर्न को बाधित करती है। इसका प्रभाव प्रशांत महासागर से आगे तक फैला हुआ है, जो दुनिया भर में मानसूनी प्रणालियों, कृषि उत्पादकता, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और अत्यधिक मौसमी घटनाओं की बारंबारता को प्रभावित करता है। इसलिए, इसके प्रतिकूल सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय परिणामों को कम करने के लिए सटीक पूर्वानुमान, जलवायु की निगरानी और आपदा प्रबंधन की अनुकूलनीय रणनीतियाँ अत्यंत आवश्यक हैं।



