प्रश्न
प्लेट विवर्तनिकी सिद्घांत की सहायता से हिमालय के निर्माण की व्याख्या कीजिए।
आदर्श उत्तर
हिमालय, जो दुनिया की सबसे नई और सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, एक लंबी विवर्तनिक प्रक्रिया का परिणाम है। यह प्रक्रिया भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के आपस में टकराने से जुड़ी है। 'प्लेट टेक्टोनिक्स' सिद्घांत के अनुसार, हिमालय का निर्माण तब शुरू हुआ जब गोंडवाना के टूटने के बाद भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसकने लगी। इसके परिणामस्वरूप टेथिस सागर बंद हो गया और उसमें जमा सेडिमेंट्स मुड़कर ऊपर उठ गए। महाद्वीपीय टकराव की यह प्रक्रिया लगभग 50-55 मिलियन साल पहले शुरू हुई थी और आज भी जारी है, जिससे हिमालय एक भूवैज्ञानिक रूप से सक्रिय पर्वत प्रणाली बन गया है।
हिमालय के निर्माण को निम्नलिखित चरणों के माध्यम से समझा जा सकता है:
गोंडवाना का विखंडन: लगभग 18 करोड़ साल पहले, भारतीय प्लेट गोंडवाना महाद्वीप से अलग हो गई और उत्तर की ओर खिसकने लगी।
टेथिस सागर का अस्तित्व: टेथिस सागर, भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों के बीच स्थित था। लाखों वर्षों के दौरान, इसके तल पर अवसादों की मोटी परतें जमा हो गईं।
अभिसरण और सबडक्शन: जैसे-जैसे भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़ी, टेथिस सागर की महासागरीय क्रस्ट धीरे-धीरे यूरेशियन प्लेट के नीचे धंसती गई।
महाद्वीपीय टक्कर: लगभग 50–55 मिलियन वर्ष पहले, भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराई, जिससे टेथिस सागर समाप्त हो गया।
वलन और उत्थान: तीव्र संपीड़न बलों के कारण जमा हुए अवसादों में वलन, भ्रंशन और उत्थान हुआ, जिसके परिणामस्वरूप हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं का निर्माण हुआ।
जारी विवर्तनिक गतिविधि: भारतीय प्लेट लगातार उत्तर की ओर बढ़ रही है और यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है, जिससे हिमालय के उत्थान, भूकंपों और भूपर्पटी में विरूपण की प्रक्रिया जारी है।
इस प्रकार, हिमालय भूवैज्ञानिक दृष्टि से युवा और विवर्तनिक रूप से सक्रिय वलित पर्वत हैं, जिनका निर्माण प्लेटों के अभिसरण और महाद्वीपीय टकराव से हुआ है। इनका निरंतर विकास पृथ्वी की पपड़ी (क्रस्ट) की गतिशील प्रकृति को दर्शाता है, और इसी वजह से हिमालयी क्षेत्र भूकंप और भूस्खलन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।


