असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड
Eduteria Insights · 31 Oct 2026
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने दो सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के गठन की अधिसूचना जारी की है।
इनका उद्देश्य असंगठित श्रमिकों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए कल्याणकारी योजनाओं को बढ़ावा देना है।
ये बोर्ड सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security) के तहत बनाए गए हैं।
दोनों बोर्डों के बारे में
क. राष्ट्रीय असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा बोर्ड (National Social Security Board for Unorganised Workers): 40 सदस्यों वाला यह बोर्ड असंगठित श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के लिए योजनाओं की सिफारिश करेगा।
ख. राष्ट्रीय गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिक सामाजिक सुरक्षा बोर्ड (National Social Security Board for Gig & Platform Workers): 22 सदस्यों वाला यह बोर्ड गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करेगा।
अध्यक्ष: केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया।
उपाध्यक्ष: केंद्रीय श्रम सचिव।
बोर्डों की बैठक कम-से-कम वर्ष में तीन बार होगी।
गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स कौन हैं?
गिग वर्कर्स: ऐसे लोग जो स्थायी नौकरी के बजाय छोटे कार्यों, अस्थायी काम या अनुबंध के आधार पर काम करते हैं। उदाहरण: स्वतंत्र रूप से काम करने वाले फ्रीलांसर और अस्थायी सेवा प्रदाता।
प्लेटफॉर्म वर्कर्स: ऐसे श्रमिक जो डिजिटल प्लेटफॉर्म या ऐप के माध्यम से काम प्राप्त करते हैं।
उदाहरण: Zomato और Swiggy के डिलीवरी पार्टनर तथा Rapido के ड्राइवर।
बोर्डों के प्रमुख कार्य
श्रमिकों के विभिन्न वर्गों के लिए उपयुक्त कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करना।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की निगरानी करना।
केंद्र सरकार को योजनाओं के प्रशासन और क्रियान्वयन पर सुझाव देना।
श्रमिकों के रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था की समीक्षा करना।
योजनाओं पर होने वाले खर्च और खातों की समीक्षा करना।
केंद्र सरकार द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य करना।
इन बोर्डों का महत्त्व
सामाजिक सुरक्षा: श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाने में मदद।
कल्याणकारी योजनाएँ: विभिन्न श्रमिक समूहों की जरूरतों के अनुसार योजनाएँ बनाने में सहायता।
डिजिटल अर्थव्यवस्था: तेजी से बढ़ते ऐप-आधारित रोजगार को औपचारिक कल्याण व्यवस्था से जोड़ना।
श्रमिकों का प्रतिनिधित्व: सरकार, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों के बीच संवाद को बढ़ावा देना।
समावेशी विकास: कमजोर और असंगठित श्रमिक वर्गों की सुरक्षा को मजबूत करना।
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