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Unit10

भारत का संविधान

भरन

लोग और अर्थव्यवस्था

कक्षा 12 के लिए भूगोल की पाठ्यपुस्तक

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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्

NATIONAL COUNCIL OF EDUCATIONAL RESEARCH AND TRAINING

प्रथम संस्करण

मार्च 2007 चैत्र 1929

पुनमुद्रण

अक्तूबर 2007, फ़रवरी 2009, जनवरी 2010,

जनवरी 2011, जनवरी 2012, मार्च 2013,

नवंबर 2013, जनवरी 2015, जनवरी 2016,

फ़रवरी 2017, फ़रवरी 2018, फ़रवरी 2019,

अक्तूबर 2019, फ़रवरी 2021 और नवंबर 2021

संशोधित संस्करण

अक्तूबर 2022 अश्विन 1944

पुनमुद्रण

मार्च 2024 चैत्र 1946

दिसंबर 2024 अग्रहायण 1946

दिसंबर 2025 अग्रहायण 1947

PD 30T BS

© राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, 2007, 2022

₹ 90.00

एन.सी.ई.आर.टी. वाटरमार्क 80 जी.एस.एम. पेपर पर मुद्रित।

प्रकाशन प्रभाग में सचिव, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, श्री अरविंद मार्ग, नयी दिल्ली 110 016 द्वारा प्रकाशित तथा इंडिया बाइंडिंग हाउस, ए-98, सैक्टर-65, नोएडा 201301 द्वारा मुद्रित।

सर्वाधिकार सुरक्षित

•
☐ प्रकाशक की पूर्व अनुमति के बिना इस प्रकाशन के किसी भाग को छापना तथा इलैक्ट्रॉनिकी, मशीनी, फोटोप्रतिलिपि, रिकार्डिंग अथवा किसी अन्य विधि से पुनः प्रयोग पढ़ति द्वारा उसका संग्रहण अथवा प्रसारण वर्जित है।
•
☐ इस पुस्तक की बिक्री इस शर्त के साथ की गई है कि प्रकाशक की पूर्व अनुमति के बिना यह पुस्तक अपने मूल आवरण अथवा जिल्द के अलावा किसी अन्य प्रकार से व्यापार द्वारा उधारी पर, पुनर्विक्रय या किराए पर न दी जाएगी, न बेची जाएगी।

एन सी ई आर टी के प्रकाशन प्रभाग के कार्यालय

एन.सी.ई.आर.टी. कैंपस

श्री अरविंद मार्ग

नयी दिल्ली 110 016 फ्रोन : 011-26562708

108, 100 फीट रोड

हेली एक्सटेंशन, होस्डेकरे

बनाशंकरी III इस्टेज

बेंगलुरु 560 085 फ्रोन : 080-26725740

नवजीवन ट्रस्ट भवन

डाकघर नवजीवन

अहमदाबाद 380 014 फ्रोन : 079-27541446

सी.डब्ल्यू.सी. कैंपस

निकटः धनकल बस स्टॉप पनिहटी

कोलकाता 700 114 फ्रोन : 033-25530454

सी.डब्ल्यू.सी. कॉम्प्लैक्स

मालीगांव

गुवाहाटी 781021 फ्रोन : 0361-2674869

प्रकाशन सहयोग

अध्यक्ष, प्रकाशन प्रभाग : एम.वी. श्रीनिवासन

मुख्य संपादक : बिज्ञान सुतार

मुख्य व्यापार प्रबंधक : अमिताभ कुमार

मुख्य उत्पादन अधिकारी (प्रभारी) : दीपक जैसवाल

संपादक : रेखा अग्रवाल

सहायक उत्पादन अधिकारी : दीपक कुमार

लेआउट

जायल गिल

आवरण एवं चित्रांकन

ब्लू फिश

काटोंग्राफ़ी

काटोग्राफ्किक डिज्ञाइस

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) सुझाती है कि बच्चों के स्कूली जीवन को बाहर के जीवन से जोड़ा जाना चाहिए। यह सिद्धांत किताबी ज्ञान की उस विरासत के विपरीत है जिसके प्रभाववश हमारी व्यवस्था आज तक स्कूल और घर के बीच अंतराल बनाए हुए है। नयी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पर आधारित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें इस बुनियादी विचार पर अमल करने का प्रयास है। इस प्रयास में हर विषय को एक मजबूत दीवार से घेर देने और जानकारी को रटा देने की प्रवृत्ति का विरोध शामिल है। आशा है कि ये कदम हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) में वर्णित बाल-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में काफ़ी दूर तक ले जाएँगे।

इस प्रयत्न की सफलता अब इस बात पर निर्भर है कि स्कूलों के प्राचार्य और अध्यापक बच्चों को कल्पनाशील गतिविधियों और सवालों की मदद से सीखने और सीखने के दौरान अपने अनुभवों पर विचार करने का अवसर देते हैं। हमें यह मानना होगा कि यदि जगह, समय और आज्ञादी दी जाए तो बच्चे बड़ों द्वारा सौपी गई सूचना-सामग्री से जुड़कर और जूझकर नए ज्ञान का सृजन करते हैं। शिक्षा के विविध साधनों एवं स्रोतों की अनदेखी किए जाने का प्रमुख कारण पाठ्यपुस्तक को परीक्षा का एकमात्र आधार बनाने की प्रवृत्ति है। सर्जना और पहल को विकसित करने के लिए जरूरी है कि हम बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में पूरा भागीदार मानें और बनाएँ, उन्हें ज्ञान की निर्धारित खुराक का ग्राहक मानना छोड़ दें।

ये उद्देश्य स्कूल की दैनिक जिंदगी और कार्यशैली में काफ्री फेरबदल की माँग करते हैं। दैनिक समय-सारणी में लचीलापन उतना ही ज़रुरी है जितनी वार्षिक कैलेंडर के अमल में चुस्ती, जिससे शिक्षण के लिए नियत दिनों की संख्या हक्कीकत बन सके। शिक्षण और मूल्यांकन की विधियाँ भी इस बात को तय करेंगी कि यह पाठ्यपुस्तक स्कूल में बच्चों के जीवन को मानसिक दबाव तथा बोरियत की जगह खुशी का अनुभव बनाने में कितनी प्रभावी सिझ्ड होती है। बोझ की समस्या से निपटने के लिए पाठ्यक्रम निर्माताओं ने विभिन्न चरणों में ज्ञान का पुनर्निर्धारण करते समय बच्चों के मनोविज्ञान एवं अध्यापन के लिए उपलब्ध समय का ध्यान रखने की पहले से अधिक सचेत कोशिश की है। इस कोशिश को और गहराने के यत्न में यह पाठ्यपुस्तक सोच-विचार और विस्मय, छोटे समूहों में बातचीत एवं बहस और हाथ से की जाने वाली गतिविधियों को प्राथमिकता देती है।

एन.सी.ई.आर.टी. इस पुस्तक की रचना के लिए बनाई गई पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के परिश्रम के लिए कृतज्ञता व्यक्त करती है। परिषद् सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर हरि वासुदेवन और इस पाठ्यपुस्तक समिति के मुख्य सलाहकार प्रोफ़ेसर एम. एच. कुरैशी की विशेष आभारी है। इस पाठ्यपुस्तक के विकास में कई शिक्षकों ने योगदान किया, इस योगदान को संभव बनाने के लिए हम उनके प्राचार्यों के आभारी हैं। हम उन सभी संस्थाओं और संगठनों के प्रति कृतज्ञ हैं जिन्होंने अपने संसाधनों, सामग्री और सहयोगियों की मदद लेने में हमें उदारतापूर्वक सहयोग दिया। हम माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ढ्वारा प्रोफ़ेसर मृणाल मीरी एवं प्रोफ़ेसर जी.पी. देशपांडे की अध्यक्षता में गठित निगरानी समिति (मॉनिटरिंग कमेटी) के सदस्यों को अपना मूल्यवान समय और सहयोग देने के लिए धन्यवाद देते हैं। व्यवस्थागत सुधारों और अपने प्रकाशनों में निरंतर निखार लाने के प्रति समर्पित एन.सी.ई.आर.टी. टिप्पणियों एवं सुझावों का स्वागत करेगी जिनसे भावी संशोधनों में मदद ली जा सके।

निदेशक

नयी दिल्ली

20 नवंबर 2006

राष्ट्रीय शैक्षिक

अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्

कोविड-19 महामारी को देखते हुए, विद्यार्थियों के ऊपर से पाठ्य सामग्री का बोझ कम करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भी विद्यार्थियों के लिए पाठ्य सामग्री का बोझ कम करने और रचनात्मक नज़रिए से अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करने पर जौर दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् ने सभी कक्षाओं में पाठ्यपुस्तकों को पुनर्स्योजित करने की शुरुआत की है। इस प्रक्रिया में रा.शै.अ.प्र.प. ढ्वारा पहले से ही विकसित कक्षावार सीखने के प्रतिफलों को ध्यान में रखा गया है।

पाठ्य सामग्रियों के पुनर्स्योजन में निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है -

•
एक ही कक्षा में अलग-अलग विषयों के अंतर्गत समान पाठ्य सामग्री का होना;
•
एक कक्षा के किसी विषय में उससे निचली कक्षा या ऊपर की कक्षा में समान पाठ्य सामग्री का होना;
•
कठिनाई स्तर;
•
विद्यार्थियों के लिए सहज रूप से सुलभ पाठ्य सामग्री का होना, जिसे शिक्षकों के अधिक हस्तक्षेप के बिना, वे खुद से या सहपाठियों के साथ पारस्परिक रूप से सीख सकते हों;
•
वर्तमान संदर्भ में अप्रासंगिक सामग्री का होना।

वर्तमान संस्करण, ऊपर दिए गए परिवर्तनों को शामिल करते हुए तैयार किया गया पुनर्स्योजित संस्करण है।

अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समिति

हरि वासुदेवन, प्रोफेसर, इतिहास विभाग, कलकता विश्वविद्यालय, कोलकाता

मुख्य सलाहकार

एम. एच. कुरैशी, प्रोक्फसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली

सदस्य

अब्दुल शाबान, असिस्टेंट प्रोफ्रेसर, सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज, टाटा इस्टीट्यूट ऑफ सोशल साईसेज, देओनार, मुंबई

अर्चना के. राँय, लेकचरर, भूगोल विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी बी.एस. बुटोला, प्रोफेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली

बीना श्रीकुमार, पी.जी.टी., सीआरपीएफ पब्लिक स्कूल, रोहिणी, नयी दिल्ली जी. परिमला, डीन, कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल, मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नई एम.एस. जागलान, रीडर, भूगोल विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र पी.के. मलिक, लेक्चरर, गवर्नमेंट कॉलेज, बहादुरगढ़, झज्जर सुचारिता सेन, एसोसिएट प्रोफ्रेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली

सुदेशना भढ़ाचार्या, रीडर, भूगोल विभाग, मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली सुतापा सेनगुप्ता, लेक्चरर (सेलेक्शन ग्रेड), भूगोल विभाग, सेंट मेरी कॉलेज, शिलाँग

हिंदी अनुवाद

अशोक दिवाकर, लेक्चरर, गवर्नमेंट पी.जी. कॉलेज, गुड़गाँव

अमर एस. सचान, सेक्टर-6, आर. के. पुरम, नयी दिल्ली

राजेश्वरी जागलान, लेक्चरर, भूगोल विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र

भावना मोहन, रामदत्त एनक्लेव, उत्तम नगर, नयी दिल्ली

सदस्य-समन्वयक

अपर्णा पाण्डेय, लेक्चरर, सामाजिक विज्ञान शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, नयी दिल्ली

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उहेशिका

हम, भारत के लोग, भारत को एक ¹[संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य] बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को :

सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,

विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म

और उपासना की स्वतंत्रता ,

प्रतिष्ठा और अवसर की समता

प्राप्त कराने के लिए,

तथा उन सब में

व्यक्ति की गरिमा और ²[राष्ट्र की एकता

और अखंडता] सुनिश्चित करने वाली बंधुता

बढ़ाने के लिए

दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, इस पुस्तक के विकास में सहयोग देने हेतु कल्पना मार्कडेय, प्रोफेसर, भूगोल विभाग, उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद तथा परवेज्ञ अहमद, लेक्चरर, भूगोल विभाग, कश्मीर विश्वविद्यालय, कश्मीर का आभार व्यक्त करती है।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, इस पुस्तक के अनुवाद के पुनरीक्षण हेतु आयोजित कार्यशाला में भाग लेने और अपना बहुमूल्य योगदान देने के लिए निम्नलिखित सभी के प्रति आभार व्यक्त करती है-बीर सिंह आर्य, प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी (अवकाश प्राप्त), वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार; एम.एस. जागलान, रीडर, भूगोल विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र; नरेंद डबास, लेक्चरर (भूगोल), एस.सी.ई. आर.टी., हरियाणा; दीपावली बधवार, लेक्चरर (भूगोल), एस.सी.ईआर.टी., हरियाणा; डी.एन. सिंह, प्रोफेसर (अवकाश प्राप्त), भूगोल विभाग, बी.एच.यू. वाराणसी एवं दिनेश प्रताप, रीडर, भूगोल विभाग, डी.ए.वी. पी.जी. कॉलेज, देहरादून।

परिषद् सविता सिन्हा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग के प्रति भी अपनी कृतज्जता अर्पित करती है जिन्होंने प्रत्येक स्तर पर इस पाठ्यपुस्तक के निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग दिया।

परिषद् भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भी धन्यवाद देती है जिसने पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित मानचित्रों को प्रमाणित किया।

परिषद् उन सभी व्यक्तियों एवं संगठनों का आभार व्यक्त करती है, जिन्होंने इस पाठ्यपुस्तक को सहज बनाने हेतु विभिन्न चित्र, कार्टून तथा पाठ्यसामग्री उपलब्ध करवाई–ज़हीन आलम, लेक्चरर, दयाल सिंह कॉलेज, नयी दिल्ली को चित्र 7.4 के लिए; स्वप्निल सखारे, मुंबई को पृष्ठ 95 तथा 100 पर दिए गए चित्रों के लिए; दलित तथा जनजातीय अध्ययन केंद्र, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइसेज्ज, मुंबई को पृष्ठ 98 पर दिए गए चित्र के लिए; जनहित फाउंडेशन, मेरठ को पृष्ठ 97 पर दिए गए केस अध्ययन के लिए; एम.एस. जागलान, रीडर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को चित्र 6.1, 6.4, तथा 6.5 के लिए; आर. के. लक्षमण (द टाइम्स ऑफ इंडिया, नयी दिल्ली) को पृष्ठ 97 पर दिए गए कार्टून के लिए; श्वेता उप्पल, एन.सी.ई आर.टी. कोचित्र 2.1, 2.2, 3.10 तथा 7.7 के लिए; कल्याण बैनर्जी, एन.सी.ई.आर.टी. को पृष्ठ 15, 41 पर दिए गए चित्रों के लिए; डायरेक्टरेट ऑफ एक्सटेंशन, कृषि मंत्रालय, आई.ए.आर.आई., कैंपस, न्यू पूसा, नयी दिल्ली को चित्र 3.2, 3.7 तथा 3.8 के लिए; द टाइम्स ऑफ इंडिया, नयी दिल्ली को चित्र 3.5, 7.1 तथा पृष्ठ 12, 38, 46, 63, 95, 96 तथा 99 पर दिए गए समाचारों के लिए; द हिंदू को चित्र 9.1 तथा पृष्ठ 63 तथा 99 पर दिए गए समाचारों के लिए; सी.सी.एस.एच.ए.यू, हिसार को चित्र 3.12 के लिए; द इकॉनॉमिक टाइम्स, नयी दिल्ली को पृष्ठ 38, 55, 63 पर दिए गए समाचारों के लिए; दैनिक जागरण, वाराणसी को पृष्ठ 38 पर दिए गए समाचार के लिए; खनन मंत्रालय, भारत सरकार को चित्र 9.2 तथा पृष्ठ 53 पर दिए गए चित्र के लिए; जियॉलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, चेनई को चित्र 5.4 के लिए; आई.टी.डी.सी./पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार को चित्र 2.3, 7.8 पर दिए गए चित्र के लिए; एन.डी.एम.डी./गृह मंत्रालय, भारत सरकार को पृष्ठ 48 पर दिए गए चित्रों के लिए; इंडिया टुडे को चित्र 7.2 के लिए; कंपटीशन सक्सेस रिव्यू इयर बुक 2006 को चित्र 7.5 तथा 7.6 के लिए; पोत परिवहन विभाग, पोत परिवहन, सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार को चित्र 8.3 तथा पृष्ठ 84 पर दिए गए चित्र के लिए; डाउन टु अर्थ, सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरनमेंट, नयी दिल्ली को पृष्ठ 93 पर दिए गए चित्र के लिए; द इकॉनॉमिक टाइम्स समाचारों के लिए पृष्ठ 38, एनर्जी वर्ल्ड डॉट कॉम को पृष्ठ 63.

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परिषद् पाठ्यपुस्तक के निर्माण में सहयोग के लिए ईश्वर सिंह, नरगिस इस्लाम, डी.टी.पी. ऑपरेटर; नेहाल अहमद, नौशाद अहमद, अवध किशोर सिंह काँपी एडिटर; उमेद सिंह गौड़, गूफ रीडर; दिनेश कुमार, कंप्यूटर स्टेशन प्रभारी के सहयोग हेतु अपना आभार ज्ञापित करती है। इसी संदर्भ में प्रकाशन विभाग एन.सी.ई.आर.टी. का सहयोग भी उल्लेखनीय है।

निम्नलिखित बिंदु इस पाठ्यपुस्तक में इस्तेमाल किए गए भारत के मानचित्रों के लिए लागू हैं:

•
© भारत सरकार का प्रतिलिप्यधिकार, 2006
•
आंतरिक विवरणों को सही दर्शने का दायित्व प्रकाशक का है।
•
समुद्र में भारत का जलप्रदेश, उपयुक्त आधार-रेखा से मापे गए बारह समुद्री मील की दूरी तक है।
•
चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के प्रशासी मुख्यालय चंडीगढ़ में है।
•
इस मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के मध्य में दर्शई गई अंतरीज्यीय सीमाएँ, उत्तरी पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम 1971 के निर्वाचनानुसार दर्शित है, परंतु अभी सत्यापित होनी है।
•
भारत की बाह्य सीमाएँ तथा समुद्र तटीय रेखाएँ भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा सत्यापित अभिलेख/प्रधान प्रति से मेल खाती है।
•
इस मानचित्र में उत्तरांचल एवं उत्तर प्रदेश, झारखंड एवं बिहार और छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के बीच की राज्य सीमाएँ संबंधित सरकारों द्वारा सत्यापित नहीं की गई है।
•
इस मानचित्र में दर्शित नामों का अक्षरविन्यास विभिन्न सूत्रों द्वारा प्राप्त किया है।

आमुख iii

पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन v

इकाई I

1. जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 1-14

इकाई Ⅱ

2. मानव बस्तियाँ 15-20

इकाई Ⅲ

3. भूसंसाधन तथा कृषि 21-40

4. जल-संसाधन 41-52

5. खनिज तथा ऊर्जा संसाधन 53-64

6. भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास 65-73

इकाई IV

7. परिवहन तथा संचार 74-83

8. अंतर्ण्ट्रीय व्यापार 84-92

इकाई V

9. भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्धे एवं समस्याएँ 93-103

परिशिष्ट 104-111

शब्दावली 112

संदर्भ पुस्तकें 113-114

स्कूल भुवन-एन.सी.ई.आर.टी. एक ऑनलाइन वेब पोर्टल

छात्रों में भू-स्थानिक कौशल विकसित करने के उद्देश्य से एन.सी.ई.आर.टी. तथा इसरो ने मिलकर ऑनलाइन वेब आधारित भू-स्थानिक पोर्टल स्कूल भुवन-एन.सी.ई.आर.टी. बनाया है। इस भू-स्थानिक पोर्टल पर भूगोल की पाठ्यपुस्तकों मे दिए गए मानचित्र उपलब्ध हैं। यह पोर्टल छात्रों में भू-स्थानिक तकनीक के उपयोग द्वारा भूगोल की विभिन्न संकल्पनाओं को समझने में मदद करता है। इस पोर्टल पर ऑनलाइन क्रियाकलाप - लेवल 1, लेवल 2 तथा लेवल 3 के अंतर्गत दिए गए हैं। कक्षा VI से XII तक के छात्र इस पोर्टल पर उपलब्ध सेटेलाइट चित्रों पर आस-पड़ोस का मानचित्र तथा उनकी विशेषताओं को ऑनलाइन चित्रित कर सकते हैं।