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Unit8

भारत का संविधान - उद्देशिका

अर्थशास्त्र में सांख्यिकी

कक्षा 11 के लिए पाठ्यपुस्तक

11099
11099

11099 – अर्थशास्त्र में सांख्यिकी

कक्षा 11 के लिए पाठ्यपुस्तक

ISBN 81-7450-521-0

प्रथम संस्करण

मार्च 2006 फाल्गुन 1927

पुनमुद्रण

नवंबर 2007, मार्च 2009,

जनवरी 2010, जनवरी 2011,

दिसंबर 2015, दिसंबर 2016,

फ़रवरी 2018, दिसंबर 2018,

अक्तूबर 2019, जुलाई 2021

और नवंबर 2021

संशोधित संस्करण

नवंबर 2022 कार्तिक 1944

पुनर्मुद्रण

मार्च 2024 चैत्र 1946

जनवरी 2025 माघ 1946

मार्च 2026, फाल्गुन 1947

PD 10T BS

© राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, 2006, 2022

₹ 65.00

एन.सी.ई.आर.टी. वाटरमार्क 80 जी.एस.एम. पेपर पर मुद्रित।

प्रकाशन प्रभाग में सचिव, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, श्री अरविंद मार्ग, नई दिल्ली 110 016 द्वारा प्रकाशित तथा वीके ग्लोबल डिजिटल, प्ल्छॉट नंबर-928, सेक्टर-68, आई. एम. टी. फरीदाबाद, हरियाणा-121004 द्वारा मुद्रित।

सर्वाधिकार सुरक्षित

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प्रकाशन सहयोग

अध्यक्ष, प्रकाशन प्रभाग : एम. वी. श्रीनिवासन

मुख्य संपादक : बिज्ञान सुतार

मुख्य व्यापार प्रबंधक : अमिताभ कुमार

मुख्य उत्पादन अधिकारी : दीपक जैसवाल (प्रभारी)

संपादक : मरियम बारा

सहायक उत्पादन अधिकारी : सायुराज ए. आर.

चित्रांकन आवरण

सरिता वर्मा माथुर श्वेता राव

आमुख

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) सुझाती है कि बच्चों के स्कूली जीवन को बाहर के जीवन से जोड़ा जाना चाहिये। यह सिद्धांत किताबी ज्ञान की उस विरासत के विपरीत है जिसके प्रभाववश हमारी व्यवस्था आज तक स्कूल और घर के बीच अंतराल बनाये हुए है। नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पर आधारित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें इस बुनियादी विचार पर अमल करने का प्रयास है। इस प्रयास में हर विषय को एक मज्जबृत दीवार से घेर देने और जानकारी को रटा देने की प्रवृत्ति का विरोध शामिल है। आशा है कि ये कदम हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) में वर्णित बाल-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में काफ़ी दूर तक ले जाएँगे।

इस प्रयत्न की सफलता अब इस बात पर निर्भर है कि स्कूलों के प्राचार्य और अध्यापक बच्चों को कल्पनाशील गतिविधियों और सवालों की मदद से सीखने और सीखाने के दौरान अपने अनुभवों पर विचार करने का कितना अवसर देते हैं। हमें यह मानना होगा कि यदि जगह, समय और आज्ञादी दी जाए तो बच्चे बड़ों द्वारा सौपी गई सूचना-सामग्री से जुड़कर और जूझकर नये ज्ञान का सृजन करते हैं। शिक्षा के विविध साधनों एवं स्थोतों की अनदेखी किये ज्ञाने का प्रमुख कारण पाठ्यपुस्तक को परीक्षा का एकमात्र आधार बनाने की प्रवृत्ति है। सर्जना और पहल को विकसित करने के लिये जरूरी हैं कि हम बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में पूरा भागीदार मानें और बनाएँ, उन्हें ज्ञान की निर्धारित खुराक का ग्राहक मानना छोड़ दें।

ये उद्देश्य स्कूल की दैनिक जिंदगी और कार्यशैली में काफ़ी फेरबदल की माँंग करते हैं। दैनिक समय-सारणी में लचीलापन उतना ही जरुरी है जितनी वार्षिक कैलेंडर के अमल में चुस्ती, जिससे शिक्षण के लिये नियत दिनों की संख्या हकीकत बन सके। शिक्षण और मूल्यांकन की विधियाँ भी इस बात को तय करेंगी कि यह पाठ्यपुस्तक स्कूल में बच्चों के जीवन को मानसिक दबाव तथा बोरियत की जगह खुशी का अनुभव बनाने में कितनी प्रभावी सिझ्छ होती है। बोझ की समस्या से निपटने के लिये पाठ्यक्रम निर्माताओं ने विभिन्न चरणों में ज्ञान का पुननिर्धारण करते समय बच्चों के मनोविज्ञान एवं अध्यापन के लिये उपलब्ध समय का ध्यान रखने की पहले से अधिक सचेत कोशिश की है। इस कोशिश को और गहराने के यत्न में यह पाठ्यपुस्तक सोच-विचार और विस्मय, छोटे समूहों में बातचीत एवं बहस, और हाथ से की जाने वाली गतिविधियों को प्राथमिकता देती है।

एन.सी.ई.आर.टी. इस पुस्तक की रचना के लिये बनाई गई पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के परिश्रम के लिए कृतज्जता व्यक्त करती है। परिषद् सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समूह के अध्यक्ष प्रोफेसर हरि वासुदेवन और अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक समिति के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर तापस मजूमदार की विशेष आभारी है। इस पाठ्यपुस्तक के विकास में कई शिक्षकों ने योगदान दिया;

इस योगदान को संभव बनाने के लिए हम उनके प्राचायों के आभारी हैं। हम उन सभी संस्थाओं और संगठनों के प्रति कृतज्ज हैं जिन्होंने अपने संसाधनों, सामग्री तथा सहयोगियों की मदद लेने में हमें उदारतापूर्वक सहयोग दिया। हम माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रोफेसर मृणाल मीरी एवं प्रोफेसर जी.पी. देशपांडे की अध्यक्षता में गठित निगरानी समिति (मॉनीटरिंग कमेटी) के सदस्यों को अपना मूल्यवान समय और सहयोग देने के लिए धन्यवाद देते हैं। व्यवस्थागत सुधारों और अपने प्रकाशनों में निरंतर निखार लाने के प्रति समर्पित एन.सी.ई.आर.टी. टिष्पणियों व सुझावों का स्वागत करेगी जिनसे भावी संशोधनों में मदद ली जा सके।

निदेशक

नई दिल्ली

20 दिसंबर 2005

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान

और प्रशिक्षण परिषद्

पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन

कोविड-19 महामारी को देखते हुए, विद्यार्थियों के ऊपर से पाठ्य सामग्री का बोझ कम करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भी विद्यार्थियों के लिए पाठ्य सामग्री का बोझ कम करने और रचनात्मक नज्गरिए से अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करने पर जौर दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् ने सभी कक्षाओं में पाठ्यपुस्तकों को पुनर्सयोजित करने की शुरुआत की है। इस प्रक्रिया में रा.शै.अ.प्र.प. द्वारा पहले से ही विकसित कक्षावार सीखने के प्रतिफलों को ध्यान में रखा गया है।

पाठ्य सामग्रियों के पुनर्सयोजन में निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है -

•
एक ही कक्षा में अलग-अलग विषयों के अंतर्गत समान पाठ्य सामग्री का होना;
•
एक कक्षा के किसी विषय में उससे निचली कक्षा या ऊपर की कक्षा में समान पाठ्य सामग्री का होना;
•
कठिनाई स्तर;
•
विद्यार्थियों के लिए सहज रूप से सुलभ पाठ्य सामग्री का होना, जिसे शिक्षकों के अधिक हस्तक्षेप के बिना, वे खुद से या सहपाठियों के साथ पारस्परिक रूप से सीख सकते हों;
•
वर्तमान संदर्भ में अप्रासंगिक सामग्री का होना।

वर्तमान संस्करण, ऊपर दिए गए परिवर्तनों को शामिल करते हुए तैयार किया गया पुनर्सयोजित संस्करण है।

पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति

अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समिति

हरि वासुदेवन, प्रोफेसर, इतिहास विभाग, कलकता विश्वविद्यालय, कोलकाता।

मुख्य सलाहकार

तापस मजूमदार, एमेरिटस प्रोफेसर, अर्थशास्त्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली।

समिति

एम.एम. गोयल, प्रवाचक, वाणिज्य विभाग, पी.जी.डी.ए.वी. कालेज (एम), दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।

एलाड्बम बिजय कुमार सिंह, प्राचार्य, अर्थशास्त्र विभाग, मणिपुर विश्वविद्यालय, इम्फाल। टी. पी. सिन्हा, प्रवाचक, अर्थशास्त्र विभाग, एस. एस. एन. कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।

भावना राजपूत, वरिष्ठ प्रवक्ता, अदिति महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।

मीरा मलहोत्रा, विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र, मार्डन स्कूल, बाराखम्बा रोड, नई दिल्ली।

सुधीर कुमार, प्रवाचक, अनुग्रह नारायण सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान, पटना।

हिंदी अनुवादक

अमर एस. सचान, अनुवादक, म.न. 189, सेक्टर 6, आर.के. पुरम, नयी दिल्ली

सदस्य-समन्वयक

नीरजा रश्म, ग्रोफ्रेसर, सामाजिक विज्ञान शिक्षा विभाग, एन.सी.ई.आर.टी., नयी दिल्ली।

आभार

परिषद् उन सभी लेखकों के प्रति आभार व्यक्त करती है, जिन्होंने पुस्तक के लेखन का कार्य किया है। हम जे. खुंतिया, वरिष्ठ प्रवक्ता, स्कूल ऑफ करेस्पोंडैस कोर्सेस, दिल्ली विश्वविद्यालय; एम. वी. श्रीनिवासन, प्रवक्ता सा.वि.मा.शि.वि., रा.शै.अ.प्र.प.; जया सिंह, प्रवक्ता, सा.वि.मा.शि.वि.; रा.शै.अ.प्र.प. के भी आभारी हैं, जिन्होंने पुस्तक को अंतिम रूप देने में सहायता की।

हम इनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं: डी.डी. नौटियाल, पूर्व सचिव एवं भाषाविद् वैज्ञानिक, तकनीकी शब्दावली आयोग; ओ.पी. अग्रवाल, प्रोफेसर (अवकाश प्राप्त), मेरठ विश्वविद्यालय; एच.के. गुप्ता, बाबृराम राजकीय सर्वोदय बाल विद्यालय, शाहदरा, दिल्ली; ए.एस. गर्ग, उपप्रधानाचार्य, राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय, गांधीनगर दिल्ली; कांता जोशी, पी.जी.टी. (अर्थशास्त्र), राजकीय कन्या उ.मा. विद्यालय, नं. 2, किंदवई नगर, नई दिल्ली; लीना सिंह, पी.जी.टी. (अर्थशास्त्र), केंद्रीय विद्यालय, ए.जी.सी.आर., दिल्ली; वीणा गुप्ता, पी.जी.टी. (अर्थशास्त्र), सर्वोदय कन्या विद्यालय नं. 1, नई दिल्ली; एम. एम. गोयल, प्रवाचक, वाणिज्य विभाग, पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, जिन्होंने अनुवाद के पुनरीक्षण हेतु आयोजित कार्यशालाओं में भाग लिया और अपना बहुमूल्य योगदान दिया।

पुस्तक के विकास में सहयोग के लिए हम सविता सिन्हा, प्रोफ्रेसर एवं विभागाध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग के प्रति विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने हर संभव सहयोग दिया।

पुस्तक के विकास के विभिन्न चरणों में सहयोग के लिए अयाज़ अहमद अंसारी, अमजद हुसैन, गिरीश गोयल और उत्तम कुमार, डी.टी.पी. आपरेटर; विभोर सिंह, पूफरीडर; विनय शंकर पाण्डेय, कॉपी एडिटर; दिनेश कुमार, इंचार्ज कंप्यूटर कक्ष के भी हम आभारी हैं। प्रकाशन विभाग द्वारा हमें पूर्ण सहयोग एवं सुविधाएँ प्राप्त हुई, इसके लिए हम उनका आभार व्यक्त करते हैं।

परिषदु, इस संस्करण के पुनर्स्योजन के लिए पाठ्यक्रमों, पाठ्यपुस्तकों एवं विषय सामग्री के विश्लेषण हेतु दिए गए महत्वपूर्ण सह्योग के लिए नीरजा रश्चि, प्रोफेसर, डी.ई.एस.एस., रा.शै.अ.प्र.प.; एम.वी. श्रीनिवासन, प्रोफेसर, डी.ई.एस.एस., रा.शै.अ.प्र.प.; जया सिंह, प्रोफेसर, डी.ई.एस.एस., रा.शै.अ.प्र.प.; प्रतिमा कुमारी, एसोसिएट प्रोफेसर, डी.ई.एस.एस., रा.शै.अ.प्र.प.; अशिता रवींद्रन, एसोसिएट प्रोफेसर, पी.एम.डी., रा.शै.अ.प्र.प.; सबिता पटनायक, पी.जी.टी. अर्थशास्त्र, डी.एम.एस., आर.आई.ई., भुवनेश्वर एवं अनीता रवींद्र, पी.जी.टी. अर्थशास्त्र, डी.एम.एस., आर.आई.ई., मैसूरू के प्रति आभार व्यक्त करती है।

विषय-सूची

आमुख iii

पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन v

अध्याय 1 : परिचय 1

अध्याय 2 : ऑँकड़ों का संग्रह 9

अध्याय 3 : ऑँकड़ों का संगठन 22

अध्याय 4 : ऑँकड़ों का प्रस्तुतीकरण 39

अध्याय 5 : केंद्रीय प्रवृत्ति की माप 58

अध्याय 6 : सहसंबंध 74

अध्याय 7 : सूचकांक 89

अध्याय 8 : सांख्यकीय विधियों के उपयोग 104

परिशिष्ट अ : सांख्यकीय पदों का पारिभाषिक शब्द-संग्रह 113

परिशिष्ट ब : दो अंकों के बेतरतीब अंक 116

भारत का संविधान

उद्देशिका

हम, भारत के लोग, भारत को एक ¹[संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य] बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को :

सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,

विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म

और उपासना की स्वतंत्रता,

प्रतिष्ठा और अवसर की समता

प्राप्त कराने के लिए,

तथा उन सब में

व्यक्ति की गरिमा और ²[राष्ट्र की एकता

और अखंडता] सुनिश्चित करने वाली बंधुता

बढ़ाने के लिए

दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख

26 नवंबर, 1949 ई. को एतद्दारा इस संविधान को

अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

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