केंद्रीय प्रवृत्ति की माप

अध्याय
5

| 1 | Marks (Manual) | Marks (Computer) | ||
| 2 | ||||
| 3 | Mean | 66.40 | Mean | 72.67 |
| 4 | Standard Error | 1.61 | Standard Error | 1.07 |
| 5 | Median | 71.50 | Median | 72.00 |
| 6 | Mode | 75.00 | Mode | 67.00 |
| 7 | Standard Deviation | 12.47 | Standard Deviation | 8.29 |
| 8 | Sample Variance | 155.50 | Sample Variance | 68.77 |
इस अध्याय को पढ़ने के बाद आप इस योग्य होंगे कि:
1. प्रस्तावना
पिछले अध्याय में, आप ऑँकड़ों के सारणीबढ़ एवं आलेखी प्रस्तुतीकरण के बारे में पढ़ चुके हैं। इस अध्याय में, आप केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों के बारे में अध्ययन करेंगे, जो ऑँकड़ों की संक्षिप्त रूप में व्याख्या करने की संख्यात्मक विधि है। दैनिक जीवन में आप ऑँकड़ों के विशाल समुच्चय के संक्षेपण के उदाहरण देख सकते हैं, जैसे किसी कक्षा में छात्रों द्वारा किसी परीक्षा में प्राप्त किए गए औसत अंक, क्षेत्र विशेष की औसत वर्षा, किसी कारखाने में औसत उत्पादन, किसी फर्म में काम करने वाले या किसी स्थान विशेष में रहने वाले लोगों की औसत आय आदि।
बैजू एक किसान है। वह बिहार के बक्सर जिले के बालापुर गाँव में अपने खेत में खाद्यान्न का उत्पादन करता है। उस गाँव में 50 छोटे कृषक हैं। बैजू के पास एक एकड़ भूमि है। आप बालापुर के किसानों की आर्थिक स्थिति जानने में रुचि रखते हैं। आप बालापुर गाँव में बैजू की आर्थिक स्थिति की तुलना करना चाहते हैं। इसके लिए आपको बालापुर गाँव के दूसरे किसानों की जोतों के आकार के साथ बैजू की जोत के आकार का तुलनात्मक मूल्यांकन करना होगा। आप यह जानना चाहंगे कि क्या बैजू की भूमि -
बैजू की तुलनात्मक आर्थिक स्थिति के मूल्यांकन के लिए, आपको बालापुर गाँव के सभी किसानों की जोतों के ऑँकड़ों के संपूर्ण समुच्चय का संक्षेपण करना होगा। इसे केंद्रीय प्रवृत्ति के माप द्वारा किया जा सकता है, जो ऑँकड़ों का संक्षेपण किसी एकल मान में इस प्रकार करता है कि यह एकल मान संपूर्ण ऑँकड़ों का प्रतिनिधित्व करे। केंद्रीय प्रवृत्ति की माप प्रतिनिधि या विशिष्ट मान के रूप में ऑँकड़ों के संक्षेपण का एक तरीका है।
केंद्रीय प्रवृत्ति या औसतों के कई सांख्यिकीय माप हैं। तीन सर्वाधिक प्रचलित औसत निम्नलिखित हैं-
आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दो अन्य प्रकार के औसत और भी हैं, जैसे ज्यामितीय माध्य तथा हरात्मक माध्य, जो विशिष्ट परिस्थितियों में उपयुक्त होते हैं। लेकिन वर्तमान परिचर्चा उपर्युक्त तीन प्रकार के औसतों तक ही सीमित रहेगी।
2. समांतर माथ्य (Arithmetic Mean)
मान लीजिए 6 परिवारों की मासिक आय (रु में) निम्नलिखित हैः
1600, 1500, 1400, 1525, 1625, 1630.
यहाँ पर परिवारों की औसत आय प्राप्त करने के लिए आय को एक साथ जोड़कर, उसे परिवारों की संख्या से विभाजित किया गया है।
इससे पता चलता है कि औसतन एक परिवार 1,547 रु अर्जित करता है।
समांतर माध्य केंद्रीय प्रवृत्ति का सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला माप है। समांतर माध्य को, सभी प्रेक्षणों के मूल्यों के योग को उनकी कुल संख्याओं से विभाजन के रूप में परिभाषित किया जाता है और सामान्यतः से निर्देशित किया जाता है। यदि , आदि N प्रेक्षण हैं, तो समांतर माध्य इस प्रकार प्राप्त होगा:
दाँए पक्ष को इस प्रकार लिखा जा सकता है
यहाँ i एक सूचक है जो क्रमबढ़ रूप से मान 1, 2, 3, ....., N धारण करता है। सुविधा के लिए, इसे सूचक i के बिना सरल रूप में लिखा जाएगा। अतः , जहाँ, ।
समांतर माध्य का परिकलन कैसे किया जाता है समांतर माध्य के परिकलन का अध्ययन मोटे तौर पर दो श्रेणियों के अंतर्गत किया जा सकता है -
असमूहित ऑँकड़ों की शृंखला के लिए समांतर माध्य
प्रत्यक्ष विधि
प्रत्यक्ष विधि के द्वारा समांतर माध्य निकालने के लिए किसी शृंखला के सभी प्रेक्षणों के योग को प्रेक्षणों की कुल संख्याओं से विभाजित किया जाता है।
उदाहरण 1
किसी कक्षा के छात्रों के अर्थशास्त्र की परीक्षा में प्राप्तांक प्रदर्शित करने वाले ऑँकड़ों से समांतर माध्य का परिकलन करें: 40, 50, 55, 78, 58,
अर्थशास्त्र की परीक्षा में छात्रों के औसत अंक 56.2 हैं।
कल्पित माध्य विधि
यदि ऑँकड़ों में प्रेक्षणों की संख्या अधिक हो तथा संख्याएँ भी बड़ी हों, तो प्रत्यक्ष विधि द्वारा समांतर मान को अभिकलित करना कठिन हो जाता है। अतः अभिकलन को कल्पित माध्य विधि के प्रयोग द्वारा सरल बनाया जा सकता है।
ऐसे ऑँकड़ा-समुच्चयों में जिनमें बड़ी संख्या में प्रेक्षणों के साथ-साथ बड़े संख्यात्मक अंक भी हों, परिकलन में समय बचाने के लिए आप कल्पित माध्य विधि का प्रयोग कर सकते हैं। यहां पर आप तर्क/अनुभव के आधार पर एक विशिष्ट अंक को समांतर माध्य मान लेते हैं। इसके बाद आप प्रत्येक प्रेक्षण का इस कल्पित माध्य से विचलन ले सकते हैं। इसके बाद आप इन विचलनों के संकलन को ऑँकड़ों के प्रेक्षणों की संख्या से विभाजित कर सकते हैं। विचलनों के जोड़ तथा प्रेक्षणों की संख्या के अनुपात को, कल्पित माध्य में जोड़कर, वास्तविक समांतर माध्य का अनुमान लगाया जा सकता है। प्रतीकात्मक रूप में,
इसके बाद, सभी विचलनों को जोड़ लें, जैसे d (X A)
इसके बाद निकालों।

इसके बाद A तथा को जोड़कर प्राप्त करें।
ध्यान रहे कि किसी भी मान को, चाहे वह ऑँकड़ों में विद्यमान हो या नहीं, कल्पित माध्य के रूप में लिया जा सकता है। फिर भी, परिकलन को सरल बनाने के लिए ऑँकड़ों में केंद्रीय रूप में अवस्थित मान को कल्पित माध्य के लिए चुना जा सकता है। उदाहरण 2
निम्नलिखित ऑँकड़े 10 परिवारों की साप्ताहिक आय दिखाते हैं:
परिवार
| क | ख | ग | घ | ऊ |
| च | छ | ज | झ | अ |
साप्ताहिक आय (रु में)
850 700 100 750 5000 80 420 2500
400 360
परिवारों की माध्य आय का आकलन करें।
| परिवार | आय(X) | ||
| क | 850 | 0 | 0 |
| ख | 700 | -150 | -15 |
| ग | 100 | -750 | -75 |
| घ | 750 | -100 | -10 |
| ड़ | 5000 | +4150 | +415 |
| च | 80 | -770 | -77 |
| छ | 420 | -430 | -43 |
| ज | 2500 | +1650 | +165 |
| झ | 400 | -450 | -45 |
| ज | 360 | -490 | -49 |
| 11160 | +2660 | +266 |
कल्पित माध्य विधि के प्रयोग द्वारा समांतर माध्य
अतः दोनों ही विधियों से उस परिवार की औसत साप्ताहिक आय 1,116 रु है। इसे आप प्रत्यक्ष विधि के प्रयोग द्वारा भी जाँच सकते हैं।
पद विचलन विधि
कल्पित माध्य से लिए गए सभी विचलनों को समापवर्तक 'c' से विभाजित करके और भी सरल बनाया जा सकता है। इसका उदेश्य बड़ी संख्याओं से बचना है। उदाहरण के लिए, यदि d = X - A का मान बहुत बड़ा है, तब d' को ज्ञात करें। इसे निम्नलिखित विधि से किया जा सकता है:
इसका सूत्र नीचे दिया गया हैः:
c = समापवर्तक, N = कुल प्रेक्षणों की संख्या, A = कल्पित माध्य।
इस प्रकार, आप पद विचलन विधि द्वारा, उदाहरण 2 में दिए गए समांतर माध्य का परिकलन कर सकते हैं।
समूहित ऑँकड़ों के लिए समांतर माध्य का परिकलन
विविक्त शृंखला
प्रत्यक्ष विधि
यदि शृंखला विविक्त है, तो प्रत्येक प्रेक्षण की बारंबारता को प्रेक्षण के मान के द्वारा गुणा किया जाता है। इससे जो मान प्राप्त होते हैं, उन्हें जोड़ा जाता है और बारंबारताओं की कुल संख्या के द्वारा विभाजित किया जाता है। प्रतीक के रूप में,
यहाँ पर Σ fX = चरों के उत्पाद तथा बारंबारताओं का योग।
उदाहरण 3
एक आवासीय कॉलोनी में भूखंड केवल तीन आकारों में मिलते हैः 100 वर्ग मीटर, 200 वर्ग मीटर एवं 300 वर्ग मीटर तथा भूखण्डों की संख्या क्रमशः 200, 50 एवं 10 है।
| भूखंड का आकार (वर्ग मीटर)(x) | भूखंडों की संख्या (f) | |||
| 100 | fd' | |||
| 100 | 200 | 20000 | -1 | -200 |
| 200 | 50 | 10000 | 0 | 0 |
| 300 | 10 | 3000 | +1 | 10 |
| 260 | 33000 | 0 | -190 | |
प्रत्यक्ष विधि के प्रयोग द्वारा समांतर माध्य,
अतः आवासीय कॉलोनी का औसत भूखण्ड आकार 126.92 वर्ग मीटर है।
कल्पित माध्य विधि
जैसा पहले बताया जा चुका है व्यष्टि श्रृंखला में, कल्पित माध्य विधि के प्रयोग द्वारा परिकलन को थोड़ा संशोधित करके सरल बनाया जा सकता है। चूँकि यहाँ प्रत्येक मद की बारंबारता (f) दी गयी है, अतः fd को ज्ञात करने हेतु हम प्रत्येक विचलन (d) को बारंबारता से गुणा करते हैं। इससे हमें Σfd मिलता है। अगला चरण सभी बारंबारताओं का योग करके Σf प्राप्त करना है। इसके बाद Σfd/Σf ज्ञात करें। अंत में समांतर माध्य के परिकलन A के द्वारा कल्पित माध्य विधि का प्रयोग कर किया जाता है।
पद विचलन विधि
इसमें विचलनों को समापवर्तक 'c' द्वारा विभाजित किया जाता हैं, जो कि परिकलन को सरल बना देता हैं। यहां संख्यात्मक अंकों के आकार को घटा कर परिकलन को सरल बनाने के लिए d' = \frac{d}{c} \frac{X A}{C} का आकलन किया जाता है। इसके बाद fd' तथा Σfd' प्राप्त करें। अंत में, पद विचलन विधि का सूत्र नीचे दिया गया हैः:
क्रियात्मक गतिविधि
- पद विचलन तथा कल्पित माध्य विधि का प्रयोग करते हुए उदाहरण 3 में दिए गए ऑँकड़ों के लिए जोत का माध्य आकार ज्ञात करें।
संतत श्रूंखला
यहाँ वर्ग अंतराल दिए गए हैं। संतत श्रृंखला में भी समांतर माध्य परिकलन की प्रक्रिया ठीक वैसी ही है, जैसी विविक्त श्रृंखला में थी। इसमें अंतर केवल इतना है कि भिन्न वर्ग अंतरालों के मध्य बिंदु लेने पड़ते हैं। आप स्वतः जानते हैं कि वर्ग अंतराल, अपवर्जी या समावेशी या असमान आकार वाले हो सकते हैं। अपवर्जी अंतराल के उदाहरण हैं, 0–10, 10–20 आदि। समावेशी अंतराल के उदाहरण हैं 0–9, 10–19 आदि। असमान वर्ग अंतराल के उदाहरण हैं, 0–20, 20–50 आदि। इन सभी स्थितियों में, समांतर माध्य का परिकलन एक ही तरीके से होता है।
उदाहरण 4
निम्नलिखित छात्रों के औसत प्राप्तांकों का परिकलन (क) प्रत्यक्ष विधि (ख) पद विचलन विधि का प्रयोग करते हुए कीजिए।
प्रत्यक्ष विधि
प्राप्तांक
छात्रों की संख्या
| 5 | 12 | 15 | 25 | 8 |
| 3 | 2 |
सारणी 5.3
| प्राप्तांक(x) | छात्रों कीसंख्या(f)(1) | मध्यबिंदु(m)(2) | fm(2)×(3)(4) | 10(5) | (6) |
| 0-10 | 5 | 5 | 25 | -3 | -15 |
| 10-20 | 12 | 15 | 180 | -2 | -24 |
| 20-30 | 15 | 25 | 375 | -1 | -15 |
| 30-40 | 25 | 35 | 875 | 0 | 0 |
| 40-50 | 8 | 45 | 360 | 1 | 8 |
| 50-60 | 3 | 55 | 165 | 2 | 6 |
| 60-70 | 2 | 65 | 130 | 3 | 6 |
| 70 | 2110 | -34 |
चरणः
1. प्रत्येक वर्ग के लिए मध्यमान प्राप्त करें, जिसे m द्वारा दर्शाया जाता है।
2. Σ fm निकालें और प्रत्यक्ष विधि सूत्र का प्रयोग करें।
पद विचलन विधि
1. d' = निकालें 2. A = 35 लें (कोई स्वैच्छिक संख्या), c = समापवर्तक
समांतर माध्य की दो रोचक विशेषताएँ
भारित समांतर माध्य (Weighted Arithmetic Mean)
समांतर माध्य के परिकलन में कभी-कभी विभिन्न मदों के लिए, उनके महत्व के अनुसार, भार निर्धारित करना महत्वपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए, दो खाद्य पदार्थ आम और आलू हैं। आप आम तथा आलू की औसत कीमतें (क्रमश: p₁ तथा p₂) जानना चाहते हैं। इनका समांतर माध्य होगा। हो सकता है आप आलू की कीमत ( ) में वृद्धि को अधिक महत्व देना चाहते हों। ऐसा करने के लिए, आप उपभोक्ता के बजट में आमों के भाग को भार ( ) के तौर पर प्रयोग कर सकते हैं तथा बजट में आलू के भाग को भार ( ) के तौर पर। अब बजट में भाग के द्वारा भारित समांतर माध्य होगा।
सामान्यतः भारित समांतर माथ्य
प्राप्त किया जाता है।
जब कीमतों में वृब्द्धि होती है, तब आप शायद उन वस्तुओं की कीमतों की वृब्द्धि में रुचि रख सकते हैं। जो आपके लिए अधिक महत्वपूर्ण हों। आप इसके बारे में, अध्याय 8 में सूचकांकों की चर्चा में अधिक विस्तार से पढ़ेंगे।
क्रियात्मक गतिविधियाँ
3. मध्यिका (Median)
मध्यिका उस चर का स्थितिक मान है जो वितरण को दो समान भागों में बॉँट देता है। एक भाग के अंतर्गत सभी मान मध्यिका मान से अधिक या उसके बराबर होते हैं तथा दूसरे भाग के सभी मान उससे कम या उसके बराबर होते है। जब ऑँकड़ों के समुच्चय को उनके परिमाण के क्रम में व्यवस्थित किया जाए, तो मध्यवर्ती मान मध्यिका होता है। क्योंकि मध्यिका का निर्धारण विभिन्न मानों की स्थिति या स्थान द्वारा होता है, यह अधिकतम मूल्य वाले मान में होने वाली वृद्धि से अप्रभावित रहता है।
मध्यिका का अभिकलन
ऑँकड़ों को क्रमशः सबसे छोटे से सबसे बड़े की और व्यवस्थित करते हए मध्यिका को मध्य मान द्वारा आसानी से अभिकलित किया जा सकता है।
उदाहरण 5
मान लीजिए, एक ऑँकड़ा समुच्चय में निम्नलिखित प्रेक्षण हैं: 5, 7, 6, 1, 8, 10, 12, 4, और 3.
ऑँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करते हुए आप पाते हैं:
1, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 10, 12.

यहाँ पर ‘मध्य अंक’ 6 है। अतः मध्यिका भी 6 है। इसमें आधे अंक 6 से अधिक हैं और आधे 6 से कम।
यदि ऑँकड़ों में सम संख्याएँ होती हैं, तब दो प्रेक्षण होंगे, जो मध्य में होंगे। ऐसी स्थिति में मध्यिका को इन दो मध्य मानों के समांतर माध्य द्वारा अभिकलित किया जाता है।
उदाहरण 6
निम्नलिखित ऑँकड़ों में 20 छात्रों के प्राप्तांक दिए गए है। मध्यिका का परिकलन करें:
25, 72, 28, 65, 29, 60, 30, 54, 32, 53, 33, 52, 35, 51, 42, 48, 45, 47, 46, 33.
आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर आप पाते हैं
25, 28, 29, 30, 32, 33, 33, 35, 42, 45, 46, 47, 48, 51, 52, 53, 54, 60, 65, 72.
यहाँ पर आप देख सकते हैं कि मध्य भाग में दो प्रेक्षण 45 और 46 है। इन दो प्रेक्षणों का समांतर माध्य निकालकर मध्यिका को प्राप्त किया जा सकता हैः:
मध्यिका को परिकलित करने के लिए मध्य इकाई/इकाइयों की अवस्थिति को जान लेना महत्वपूर्ण है, जिस पर मध्यिका निर्भर होती है। मध्यिका की अवस्थिति को निम्नलिखित सूत्र के द्वारा परिकलित किया जा सकता है:
मध्यिका की अवस्थिति = वें मद का आकार जहाँ, N = मदों की संख्या।
आप यह देख सकते हैं कि उपर्युक्त सूत्र आपको मध्यिका की अवस्थिति एक क्रमबढ़ सारणी के रूप में देता है, न कि मध्यिका को ही। मध्यिका इस सूत्र द्वारा अभिकलित की जाती हैं:
विविक्त या असंतत शृंखला
विविक्त श्रृंखला में मध्यिका की अवस्थिति अर्थात् (N+1)/2 इकाई को संचयी बारंबारता के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। इस अवस्थिति पर संगत मान ही मध्यिका का मान होता है।
उदाहरण 7
नीचे व्यक्तियों की संख्याएँ तथा उनकी आय (रु में) का बारंबारता वितरण दिया गया है। मध्यिका आय का परिकलन कीजिए।
| आय (रु में): | 10 | 20 | 30 | 40 |
| व्यक्तियों की संख्या: | 2 | 4 | 10 | 4 |
मध्यिका आय को परिकलित करने के लिये, आप निम्नानुसार बारंबारता-वितरण तैयार कर सकते हैं।
| आय(रु में) | लोगों की संख्या(f) | संचयी बारंबारता(cf) |
| 10 | 2 | 2 |
| 20 | 4 | 6 |
| 30 | 10 | 16 |
| 40 | 4 | 20 |
मध्यिका (N+1)/2 = (20+1)/2 = 10.5वें प्रेक्षण में अवस्थित है। इसे आसानी पूर्वक संचयी बारंबारता के माध्यम से ढूढ़ा जा सकता है। 10.5वॉं प्रेक्षण, 16वीं संचयी बारंबारता में निहित है। इससे संगत आय 30 रु है। अतः मध्यिका आय 30 रु है। संतत शृंखला
संतत श्रूंखला में आपको वह मध्य-वर्ग वहाँ दृष्ठना है, जहाँ N/2वाँ मद [न कि (N+1)/2वाँ मद] निहित है। तब मध्यिका को निम्न प्रकार से प्राप्त किया जा सकता हैः:
यहाँ पर, L = मध्यिका वर्ग की निम्न सीमा,
c.f. = मध्यिका वर्ग के पूर्ववर्ती वर्ग की संचयी बारंबारता,

उस दशा में किसी समायोजन की आवश्यकता नहीं है, जब बारंबारता का आकार या परिमाण असमान हो।
उदाहरण 8
निम्नलिखित ऑँकड़े किसी कारखाने में कार्थरत लोगों की दैनिक मजदूरी से संबढ़ हैं। मध्यिका दैनिक मजदूरी का अभिकलन कीजिए।
दैनिक मजदूरी (रु में)
55-60 50-55 45-50 40-45 35-40
30-35 25-30 20-25
मजदूरों की संख्या
7 13 15 20 30 33
28 14
यहाँ पर ऑँकड़े आरोही क्रम में व्यवस्थित हैं।
उपर्युक्त चित्र में, मध्यिका (N/2)वें मद (अर्थात् 160/2) = शृंखला के 80वें मद का मान है, जो 35–40 वर्ग-अंतराल में स्थित है। मध्यिका के सूत्र का प्रयोग करने परः
मध्यिका = L +










| दैनिक मजदूरी (रु में) | मजदूरों की संख्या (f) | संचयी बारंबारता (f) |
| 20-25 | 14 | 14 |
| 25-30 | 28 | 42 |
| 30-35 | 33 | 75 |
| 35-40 | 30 | 105 |
| 40-45 | 20 | 125 |
| 45-50 | 15 | 140 |
| 50-55 | 13 | 153 |
| 55-60 | 7 | 160 |
अतः मध्यिका दैनिक मजदूरी 35.83 रु है। इसका अर्थ है कि 50 प्रतिशत मजदूर 35.83 रुपये से कम या इसके बराबर मजदूरी प्राप्त करते हैं और 50 प्रतिशत मजदूर इससे अधिक या इसके बराबर मजदूरी प्राप्त करते हैं।
आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि केंद्रीय प्रवृत्ति के माप के रूप में मधिका श्रृंखला के सभी मानों के प्रति संवेदी नहीं होता है। यह ऑँकड़ों के केंद्रीय मदों के मान पर संकेंद्रित होता है।
क्रियात्मक गविविधि
- श्रेणह के सभी चारों मूल्यों के लिए माध्य एवं मध्यिका ज्ञात करें। आप क्या देखते हैं?
| श्रूंखलाएँ | x(चर के मान) | माध्य | मध्यिका |
| क | 1, 2, 3 | ? | ? |
| ख | 1, 2, 30 | ? | ? |
| ग | 1, 2, 300 | ? | ? |
| घ | 1, 2, 3000 | ? | ? |
चतुर्थक (Quartiles)
चतुर्थक वे माप हैं, जो ऑँकड़ों को चार बराबर भागों में विभाजित करते हैं और प्रत्येक भाग में बराबर संख्या में प्रेक्षण दिए होते हैं। अतः यहाँ पर तीन चतुर्थक प्रचलित हैं। प्रथम चतुर्थक या निम्न चतुर्थक (Q₁ द्वारा निर्देशित) में वितरण के 25 प्रतिशत मद इससे कम होते हैं और 75 प्रतिशत मद इससे अधिक होते हैं। द्वितीय चतुर्थक या मधियका (Q₂ द्वारा निर्देशित) में 50 प्रतिशत मद इसके नीचे होते है और 50 प्रतिशत मद इसके ऊपर होते हैं। तृतीय चतुर्थक या उच्च चतुर्थक (Q₃ द्वारा निर्देशित) में विवरण के 75 प्रतिशत मद इसके नीचे होते हैं और 25 प्रतिशत मद इसके ऊपर होते हैं। अतः Q₁ एवं Q₃ दो सीमाएँ हैं जिनके बीच केन्द्रीय 50 प्रतिशत ऑँकड़े निहित होते हैं।

शतमक ( Percentile )
शतमक वितरण को 100 बराबर भागों में विभाजित करता है। इस प्रकार आपको 99 विभाजक स्थितियाँ प्राप्त होती हैं, जिन्हें P₁, P₂, P₃, ..., P₉₉ द्वारा दर्शाया जाता है। इसमें P₅₀ मध्यिका मान होता है। यदि आप एक प्रबंधन-प्रवेश परीक्षा में 82 शतमक प्राप्त करते हैं, तो इसका अर्थ है कि कुल परीक्षार्थियों से आपका स्थान 18 प्रतिशत नीचे था। यदि इस परीक्षा में कुल एक लाख परीक्षार्थी बैठते हैं तो बताएँ आपकी स्थिति कहाँ है?
चतुर्थकों का परिकलन
चतुर्थक की अवस्थिति ज्ञात करने की विधि ठीक वैसी ही है जैसी कि व्यष्टिगत एवं विविक्त श्रृंखलाओं में मध्यिका की थी। किसी क्रमबढ़ श्रृंखला में Q₁ एवं Q₃ के मान निम्नलिखित सूत्र (सिद्धांत) से प्राप्त किए जा सकते हैं, जिसमें N प्रेक्षणों की कुल संख्या है और
उदाहरण 9
किसी परीक्षा में दस छात्रों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों के ऑँकड़ों से निम्न चतुर्थक के मान का परिकलन कीजिए।
22, 26, 14, 30, 18, 11, 35, 41, 12, 32.
आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर 11, 12, 14, 18, 22, 26, 30, 32, 35, 41.
क्रियात्मक गतिविधि
- तृतीय चतुर्थक (Q₃) स्वयं ज्ञात करें।
5. बहुलक (Mode)
कभी-कभी आपको किसी शृंखला से अति प्ररूपी मान अथवा उस मान को, जिसके आस-पास मदों का संकेंद्रीकरण अधिकतम हो, जानने की उत्तुकता हो सकती है। उदाहरण के लिए, एक विनिर्माता जूते के उस आकार, जिसकी माँगे अधिकतम है या किसी खास स्टाइल की शर्ट, जिसकी बहुत अधिक माँगे है, के बारे में जानना चाहता है। ऐसी स्थिति में बहुलक एक सर्वाधिक उपयुक्त माप है। बहुलक शब्द प्रंचे भाषा के शब्द ‘ला मोड (La Mode)’ से व्युत्पन्न है, जो वितरण के सर्वाधिक प्रचलित मानों का द्योतक है, क्योंकि यह शृंखला में सबसे अधिक बार दोहराया जाता है। बहुलक सर्वाधिक प्रेक्षित ऑँकड़ा मान है। इसे M₀ के द्वारा दर्शाया जाता है।
बहुलक का अभिकलन
विविक्त श्रूंखला
ऑकड़ा समुच्चय 1, 2, 3, 4, 4, 5 को लों। यहाँ पर इस ऐँकड़े का बहुलक 4 है, क्योंकि यह ऐँकड़ा समुच्चय में सबसे अधिक बार (दो बार) आया है।
उदाहरण 10
निम्नलिखित विविक्त शृंखला को देखिएः
| चर | 10 | 20 | 30 | 40 | 50 |
| बारंबारता | 2 | 8 | 20 | 10 | 5 |
यहाँ पर आप देख सकते हैं कि अधिकतम बारंबारता 20 है, अतः बहुलक का मान 30 है। चूँकि यह मोड का एकल मान है, अतः ऑँकड़ा एक-बहुलकी है, लेकिन यह जर्सरी नहीं है कि बहुलक समांतर माध्य एवं मध्यिका की भॉति एकल ही रहे। आपके पास ऐसा ऑँकड़ा हो सकता है, जिसमें दो बहुलक (द्विबहुलकी) या दो से अधिक बहुलक (बहु-बहुलकी) हों। यह भी संभव है कि एक भी बहुलक न हो, यदि वितरण में कोई मान अन्य मानों की तुलना में अधिक बार प्रकट नहीं होता है। उदाहरण के लिए शृंखला 1, 1, 2, 2, 3, 3, 4, 4 लें। यहां कोई भी बहुलक नहीं है।

संतत श्रूंखला
संतत बारंबारता वितरण में, बहुलक वर्ग वह वर्ग है, जिसकी बारंबारता सबसे अधिक है। बहुलक को निम्नलिखित सूत्र के द्वारा परिकलित किया जा सकता हैः:
यहाँ पर,
L = बहुलक वर्ग की निम्न सीमा
h = वितरण का वर्ग अंतराल।
ध्यान रहे कि संतत श्रृंखला में वर्ग अंतराल समान होने चाहिए तथा श्रृंखला को बहुलक के परिकलन के लिए अपवर्जी होना चाहिए। यदि मध्य बिन्दु दिए गये हैं, तो वर्ग अंतरालों को निकालना पड़ता है।
उदाहरण 11
निम्नलिखित ऑँकड़ों के आधार पर श्रमिक परिवारों की बहुलक मासिक आय का परिकलन कीजिएः:
| मासिक आय(हज्ञार रुपये) | संचयी आवृत्तिया बारंबारता |
| 50 से कम | 97 |
| 45 से कम | 95 |
| 40 से कम | 90 |
| 35 से कम | 80 |
| 30 से कम | 60 |
| 25 से कम | 30 |
| 20 से कम | 12 |
| 15 से कम | 04 |
जैसा कि आप देख सकते हैं, यह संचयी आवृत्ति वितरण की स्थिति है। बहुलक को परिकलित करने के लिए आपको इसे अपवर्जी श्रूंखला में बदलना होगा। इस उदाहरण में, श्रूंखला अवरोही क्रम में है। बहुलक वर्ग को निर्धारित करने के लिए समूहन एवं विश्लेषण सारणी (सारणी 5.7) बनानी होगी।
| आय समूह (हज्ञार रुपये) | आवृति |
| 45-50 | 97-95 = 2 |
| 40-45 | 95-90 = 5 |
| 35-40 | 90-80 = 10 |
| 30-35 | 80-60 = 20 |
| 25-30 | 60-30 = 30 |
| 20-25 | 30-12 = 18 |
| 15-20 | 12-04 = 08 |
| 10-15 | 04 |
बहुलक का मूल्य 25–30 वर्ग अंतराल में पड़ता है। निरीक्षण करने पर यह देखा जा सकता है कि यह बहुलक वर्ग है।
सूत्र का प्रयोग करके बहुलक का मान इस प्रकार प्राप्त कर सकते हैं:
अतः श्रमिक परिवार की बहुलक आय 27.273 रु है।
क्रियात्मक गविविधियाँ

6. समांतर माध्य, मध्यिका एवं बहुलक की सापेश्किक स्थिति
मान लीजिए कि,
इन तीनों की सापेक्षिक स्थिति या होती है। (यहाँ पादांक वर्णमाला के क्रम से आते हैं) मध्यिका सदैव समांतर माध्य और बहुलक के बीच में होती है।
7. सारांश
केंद्रीय प्रवृत्ति की माप या औसतों का प्रयोग ऑँकड़ों के संक्षेपण के लिए किया जाता है। यह ऑँकड़ा-समुच्चय
का वर्णन करने के लिए एकल प्रतिनिधि मान को दर्शाता है। समांतर माध्य सर्वाधिक प्रयोग किया जाने वाला औसत है। यह परिकलन में सरल एवं सभी प्रेक्षणों पर आधारित होता है। लेकिन यह चरम मदों की उपस्थिति से अनुचित रूप से प्रभावित होता है। इस प्रकार के ऑँकड़ों के लिए मध्यिका अच्छा संक्षेपण है। बहुलक का प्रयोग सामान्यतः गुणात्मक ऑँकड़ों की व्याख्या में किया जाता है। मध्यिका एवं बहुलक को आलेखी तौर पर आसानी से अभिकलित किया जा सकता है। मुक्तांत वितरणों के लिए भी इनका अभिकलन सरलता से किया जा सकता है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम विश्लेषण के उद्देश्य तथा वितरण की प्रकृति को देखते हुए उपयुक्त औसत का चुनाव करें।
पुनरावर्तन
अभ्यास
1. निम्नलिखित स्थितियों में कौन सा औसत उपयुक्त होगा?
2. प्रत्येक प्रश्न के सामने दिए गए बहु विकल्पों में से सर्वाधिक उचित विकल्प को चिहित करें:
(i) गुणात्मक मापन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त औसत हैः:
(ii) चरम मदों को उपस्थिति से कौन सा औसत सर्वाधिक प्रभावित होता हैः
(iii) समांतर माध्य से मूल्यों के किसी समुच्चय के विचलन का बीजगणितीय योग है-
(क) द
(ख) 0
(ग) 1
(घ) उपुर्यक्त कोई भी नहीं।
[उत्तर (1) (ख) (2) (ग) (3) (ग)]
3. बताइए कि निम्नलिखत कथन सही है या गलत-
4. यदि नीचे दिए गए ऑँकड़ों का समांतर माध्य 28 है, तो (क) लुप्त आवृत्ति का पता करें, और (ख) श्रुंखला की मध्यिका ज्ञात करें।
प्रति खुदरा दुकान लाभ (रु में) 0-10 10-20 20-30 30-40 40-50 50-60 खुदरा दुकानों की संख्या 12 18 27 - 17 6
(उत्तर - लुप्त आवृत्ति का मान 20 है और मध्यिका का मान 27.41 रु है)
5. निम्नलिखित सारणी में एक कारखाने के 10 मजदूरों की दैनिक आय दी गई है। इनका समांतर माध्य ज्ञात कीजिए।
मजदूर A B C D E F G H I J दैनिक आय (रु में) 120 150 180 200 250 300 220 350 370 260 (उत्तर - रु 240)
6. निम्नलिखित सूचना 150 परिवारों की दैनिक आय से संबढ़ है। समांतर माध्य का परिकलन कीजिए।
| आय (रु में) | परिवारों की संख्या |
| 75 से अधिक | 150 |
| 85 ,, | 140 |
| 95 ,, | 115 |
| 105 ,, | 95 |
| 115 ,, | 70 |
| 125 ,, | 60 |
| 135 ,, | 40 |
| 145 ,, | 25 |
| (उत्तर - 116.3 रु) |
7. नीचे एक गाँव के 380 परिवारों की जोतों का आकार दिया गया है। जोत का मध्यिका आकार ज्ञात कीजिए।
| 100 से कमपरिवारों की संख्या | 100–200 | 200–300 | 300–400 | 400 तथा उससे अधिक |
| 40(उत्तर 241.22 एकड़) | 89 | 148 | 64 | 39 |
| दैनिक आय (रु में) | 10-14 | 15-19 | 20-24 | 25-29 | 30-34 | 35-39 |
| मजदूरों की संख्या | 5 | 10 | 15 | 20 | 10 | 5 |
(संकेत - मध्य, निम्न चतुर्थक तथा उच्च चतुर्थक का अभिकलन कीजिए)
[उत्तर - (क) रु 25.11 (ख) रु 19.92 (ग) रु 29.19,
9. निम्न सारणी में किसी गाँव के 150 खेतों में गेहृँ की प्रति हेक्टेयर पैदावार दी गई है। समांतर माध्य, मध्यिका तथा बहुलक के मान की गणना कीजिए।
उत्पादित फसल (प्रति हेक्टेयर कि.ग्रा. में)
50-53 53-56 56-59 59-62 62-65 65-68 68-71 71-74 74-77 खेतों की संख्या
3 8 14 30 36 28 16 10 5
(उत्तर - माध्य = 63.83 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर, मध्यिका = 63.67 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर, बहुलक = 63.29 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर)
