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Unit6

Chapter 6

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अध्याय

6

सहसंबंध

Textbook illustration

इस अध्याय का अध्ययन करने के बाद आष इस योग्य होंगे कि:

•
सहसंबंध का अर्थ समझ सकें;
•
दो चरों के बीच संबंध के स्वरूप को समझ सर्कें;
•
सहसंबंध के विभिन्न मापों का परिकलन कर सकें;
•
संबंध की कोटि और दिशा का विश्लेषण कर सकें।

1. प्रस्तावना

पिछले अध्याय में आपने सीखा कि ऑँकड़ों के समूह तथा सर्वसम चरों में परिवर्तनों का संक्षिप्त माप कैसे प्राप्त किया जाए। अब आप यह सीखेंगे कि दो चरों के बीच के संबंध का परीक्षण कैसे करें।

जैसे-जैसे गर्मी में तापमान बढ़ता है, पर्वतीय स्थलों पर सैलानियों की भीड़ बढ़ने लगती है। आइसक्रीम की बिक्री तेजी से बढ़ने लगती है। इस प्रकार, तापमान का संबंध सैलानियों की संख्या एवं आइसक्रीम की बिक्री से हो जाता है। ठीक इसी प्रकार, जब स्थानीय मंडी में टमाटर की पूर्ति बढ़ जाती है, तो उसकी कीमत कम हो जाती है। जब स्थानीय फसल तैयार होकर बाजार में पहुँचने लगती है तो टमाटरों की कीमत सामान्य पहुँच के बाहर की 40 रु प्रति किलो से घटकर 4 रु प्रति किलो या और भी कम हो जाती है। अतः पूर्ति का संबंध कीमत से रहता है। सहसंबंध का विश्लेषण ऐसे संबंधों के क्रमबढ़ परीक्षण का एक साधन है। यह निम्नलिखित प्रश्नों के समाधान करता हैः:

- क्या दो चरों का आपस में कोई संबंध है?

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- यदि एक चर का मान बदलता हैं तो क्या दूसरे का मान भी बदल जाता है?

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- क्या दोनों चरों में समान दिशा में परिवर्तन होता है?

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- उनका यह संबंध कितना घनिष्ठ (पक्का) है?

2. संबंधों के प्रकार

आड़ए, पहले विभिन्न प्रकार के संबंधों पर विचार करें। माँँगी गई मात्रा तथा किसी बस्तु की कीमत में परिवर्तन का संबंध माँँग के सिद्धांत का अभिन्न अंग है। इसके बारे में आप विस्तार से कक्षा XII में पढ़ेंगे। कृषि उत्पादकता की कमी का संबंध बारिश की कमी से रहता है। संबंधों के इस प्रकार के उदाहरणों को कारण और परिणाम के रूप में समझा जा सकता है। अन्य उदाहरण संयोग मात्र हो सकते हैं। किसी पक्षी-विहार में प्रवासी पक्षियों के आने के साथ उस क्षेत्र में जन्म-दरों के संबंध को कारण-परिणाम संबंध का नाम नहीं दिया जा सकता। ऐसे संबंध संयोग-मात्र हैं। आपके जूते की माप और आपकी जेब में पैसों का संबंध भी संयोग का ही एक उदाहरण है, यदि इनके बीच कोई संबंध हो भी, तो उसकी व्याख्या करना कठिन होता है।

एक अन्य उदाहरण में, दो चरों पर तीसरे चर के प्रभाव से, दोनों चरों के बीच के संबंध प्रभावित हो सकते हैं। आइसक्रीम की बिक्री में तेजी डूबकर मरने बालों की संख्या से जोड़ी जा सकती है, यद्यपि मरने बाले आइसक्रीम खाकर नहीं डूबे थे। तापमान के बढ़ने के कारण ही आइसक्रीम की बिक्री में तेजी आती है। साथ ही, गर्मी से राहत पाने के लिए लोग अधिक संख्या में तरणतालों में जाने लगते हैं। संभवतः डूब कर मरने बालों की संख्या इसी कारण बढ़ गई हो। इस प्रकार, आइसक्रीम की बढ़ती हुई बिक्री और डूबने से मरने बालों की संख्या के बीच उच्च सहसंबंध का कारण तापमान है।

सहसंबंध किसका मापन करता है?

सहसंबंध चरों के बीच संबंधों की गहनता एवं दिशा का अध्ययन एवं मापन करता है। सहसंबंध सह-प्रसरण का मापन करता है न कि कार्य-कारण संबंध का। सहसंबंध को कार्य-कारण संबंध के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। दो चरों x और y के बीच सहसंबंध की उपस्थिति का अर्थ है कि जब एक चर का मान किसी दिशा में बदलता है तो दूसरे चर का मान या तो उसी दिशा में बदलता है (अर्थात् (धनात्मक परिवर्तन) या फिर विपरीत दिशा में (अर्थात् ऋष्णात्मक परिवर्तन)। परंतु, यह एक निश्चित ढंग से होता है। इसे आसानी से समझने के लिए, यहाँ हम मान लें कि सहसंबंध, यदि है, तो रेखीय है, अर्थात दो चरों की सापेक्ष गति को ग्राफ पेपर पर एक सीधी रेखा द्वारा दिखाया जा सकता है।

सहसंबंध के प्रकार

सहसंबंध को आमतौर पर धनात्मक या ऋष्णात्मक सहसंबंध के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। जब चरों की गति एक ही दिशा में एक साथ होती है तो सहसंबंध को धनात्मक कहा जाता है। जब आय बढ़ती है तो उपभोग में भी वृद्धि होती है। अब आय में कमी होती है तो उपभोग भी कम हो जाता है। आइसक्रीम की बिक्री तथा तापमान दोनों एक ही दिशा में गतिमान हैं। जब चर विपरीत दिशा में गतिमान हों तो सहसंबंध ऋष्णात्मक कहलाता है। जब सेबों की कीमत में गिरावट आती हैं तो उनकी माँग बढ़ जाती है और जब कीमत बढ़ती है तो माँग कम हो जाती हैं। जब आप पढ़ाई में अधिक समय लगाते हैं तो आपके अनुत्तीर्ण होने की संभावना कम हो जाती है और जब पढ़ाई में कम समय लगाते हैं तो अनुत्तीर्ण होने की संभावना बढ़ जाती है। ये ऋष्णात्मक सहसंबंध के उदाहरण हैं। यहाँ चरों की गति विपरीत दिशाओं में होती है।

3. सहसंबंध को मापने की प्रविधियाँ

सहसंबंध को मापने के लिए ये महत्वपूर्ण साँख्यिकीय उपकरण हैः प्रकीर्ण आरेख, कार्ल पियरसन का सहसंबंध गुणांक तथा स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध।

प्रकरीण आरेख साहचर्य के स्वरूप को कोई विशिष्ट संख्यात्मक मान दिए बिना दृश्य रूप में प्रस्तुत करता है। कार्ल पियरसन का सहसंबंध-गुणांक दो चरों के बीच के रेखीय संबंधों का संख्यात्मक मापन करता है। संबंध को तब रेखीय कहा जाता है, जब इसे एक सीधी रेखा द्वारा प्रस्तुत किया जा सके। स्पीयरमैन का सहसंबंध गुणांक व्यष्टिगत मदों के बीच उनके गुणों के आधार पर निर्धारित कोटियों के द्वारा रेखीय सहसंबंध को मापा जाता है। गुण वे चर हैं, जिनका संख्यात्मक मापन संभव नहीं जैसे लोगों का बौढ़िक स्तर, शारीरिक रूप-रंग तथा ईमानदारी आदि।

प्रकीर्ण आरेख ( Scatter Diagram )

प्रकीर्ण आरेख, किसी संख्यात्मक मान के बिना, संबंधों के स्वरूप की जाँच दृश्य रूप में प्रस्तुत करने की एक उपयोगी प्रविधि है। इस प्रविधि में, दो चरों के मान को ग्राफ पेपर पर बिंदुओं के रूप में आलेखित किया जाता है। प्रकीर्ण आरेख के द्वारा संबंधों के स्वरूप को काफी सही रूप में जाना जा सकता है। प्रकीर्ण आरेख में प्रकीर्ण बिंदुओं के सामीप्य की कोटि और उनकी व्यापक दिशा के आधार पर उनके आपसी संबंधों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यदि सभी बिंदु एक ही रेखा पर होते हैं तो सहसंबंध परिपूर्ण होता है एवं एक (1) के बराबर होता है। यदि प्रकीर्ण बिंदु सरल रेखा के चारों तरफ फैले हुए होते हैं तो सहसंबंध निम्न माना जाता है। सहसंबंध को तब रेखीय कहा जाता है जब प्रकीर्ण बिंदु एक रेखा पर हों या रेखा के निकट हों।

प्रकरीण आरेख, आरेख 6.1 से 6.5 तक दिखाए गए हैं। ये हमेशा चरों के बीच के संबंधों के बारे में जानकारी देते हैं। आरेख 6.1 में प्रकरीणन ऊपर की और बढ़ती हुई रेखा के आस-पास दिखाया गया है, जो एक ही दिशा में चरों के गतिमान होने का संकेत देता है। जब X बढ़ता है तो Y भी बढ़ता है, जो धनात्मक सहसंबंध दर्शाता है। आरेख 6.2 में सारे बिंदु नीचे की और ढलती रेखा के आस-पास बिखरे हुए हैं। इस बार चर विपरीत दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जब X बढ़ता है तो Y घटता है और Y के बढ़ने पर X घटता है। यह ऋष्णात्मक सहसंबंध दर्शाता है। चित्र 7.3 में न तो ऐसी ऊपर उठती रेखा है और न नीचे गिरती हुई रेखा, जिनके आसपास ये बिंदु फैले हों। यह सहसंबंध न होने का उदाहरण है। आरेख 6.4 तथा 6.5 में ये बिंदु न तो ऊपर उठती रेखा के चारों और फैले दिखाई देते है और न नीचे गिरती रेखा के चारों ओर। ये बिंदु स्वयं रेखाओं पर ही स्थित हैं। इन्हें क्रमशः पूर्ण धनात्मक सहसंबंध तथा पूर्ण ऋष्णात्मक सहसंबंध कहा जाता है। प्रकीर्ण आरेख का सावधानीपूर्वक प्रेक्षण करने से हमें संबंधों की गहनता एवं स्वरूप की जानकारी प्राप्त होती है।

क्रियात्मक गतिविधि

- अपनी कक्षा के छात्रों के कद, वजन तथा उनके द्वारा दसर्वी कक्षा के दो विषयों में प्राप्त अंकों के ऑँकड़े संगृहीत करें। इनमें से एक बार में दो चरों को लेकर उनका प्रकरीण आरेख बनाएँ। आप उनमें किस प्रकार का सहसंबंध देखते हैं?

कार्ले पियरसन का सहसंबंध गुणांक (Karl Pearson's Coefficient of Correlation)

इसे गुणन आधूर्ण सहसंबंध (Product Moment Correlation) तथा सरल सहसंबंध गुणांक के नामों से भी जाना जाता है। यह दो चरों X एवं Y के बीच रेखीय संबंधों के सही संख्यात्मक मान की कोटि दर्शिता है।

यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि कार्ल पीयरसन के सहसंबंध गुणांक को तभी उपयोग में लाना चाहिए जब चरों के बीच रेखीय संबंध हो। जब X और Y के बीच गौर-रेखीय संबंध हो। जब X और Y के बीच गौर-रेखीय संबंध होता है तो कार्ल पीयरसन सहसंबंध की गणना भ्रामक हो सकती है। अतः यदि सही संबंध रेखीय प्रकार का है, जैसा कि चित्र 6.1, 6.2, 6.4 तथा 6.5 के प्रकीर्ण आरेखों द्वारा दर्शाया गया है, तो कार्ल पीयरसन के सहसंबंध का आगणन किया जाना चाहिए और तब यह हमको दो चरों के बीच संबंधों की गहनता को बताएगा। परंतु, यदि सही संबंध इस प्रकार का है जैसा कि चित्र 6.6 अथवा 6.7 के प्रकीर्ण आरेखों द्वारा दिखाया गया है, तो इसका अर्थ है कि X तथा Y के बीच गौर-रेखीय संबंध है तथा हमको कार्ल पीयरसन के सहसंबंध गुणांक का उपयोग करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

अतः यह उचित है कि पहले चरों के बीच संबंध के प्रकरीर्ण चित्र की कार्ल पीयरसन के सहसंबंध गुणांक की गणना से पूर्व, जाँच की जाए।

मान लें कि X1,X2,...,XNX_{1}, X_{2}, ..., X_{N} आदि X के N मान हैं तथा Y1,Y2,...,YNYY_{1}, Y_{2}, ..., Y_{N}Y के संगत मान हैं। आगे की प्रस्तुतियों में सरलता की दृष्टि से इकाइयों को दर्शने वाले पादांकों को छोड़ दिया गया है। X तथा Y के समांतर माध्य को इस प्रकार परिभाषित किया गया हैं:

Xˉ=ΣXN;Yˉ=ΣYN\bar {\mathrm{X}} = \frac {\Sigma \mathrm{X}}{\mathrm{N}}; \quad \bar {\mathrm{Y}} = \frac {\Sigma \mathrm{Y}}{\mathrm{N}}

और उनके प्रसरण निम्नलिखित हैं:

σx2=Σ(X−Xˉ)2N=ΣX2N−Xˉ2\sigma_ {\mathrm{x}} ^ {2} = \frac {\Sigma (\mathrm{X} - \bar {\mathrm{X}}) ^ {2}}{\mathrm{N}} = \frac {\Sigma \mathrm{X} ^ {2}}{\mathrm{N}} - \bar {\mathrm{X}} ^ {2}

तथा σy2=Σ(Y−Yˉ)2N=ΣY2N−Yˉ2\sigma^{2}_{y}=\frac{\Sigma(Y-\bar{Y})^{2}}{N}=\frac{\Sigma Y^{2}}{N}-\bar{Y}^{2}

यहाँ, X एवं Y के मानक विचलन क्रमशः उनके प्रसरण के धनात्मक वर्गमूल हैं। X तथा Y के सहप्रसरण निम्नलिखित हैं:

चित्र 6.1 धनात्मक सहसंबंध
चित्र 6.1 धनात्मक सहसंबंध
चित्र 6.2 ऋणात्मक सहसंबंध
चित्र 6.2 ऋणात्मक सहसंबंध
चित्र 6.3 कोई संबंध नहीं
चित्र 6.3 कोई संबंध नहीं
चित्र 6.4 पूर्ण धनात्मक सहसंबंध
चित्र 6.4 पूर्ण धनात्मक सहसंबंध
चित्र 6.5 पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध
चित्र 6.5 पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध
चित्र 6.6 धनात्मक गैर-रेखीय संबंध
चित्र 6.6 धनात्मक गैर-रेखीय संबंध
चित्र 6.7 क्षणात्मक गैर-रेखीय संबंध
चित्र 6.7 क्षणात्मक गैर-रेखीय संबंध
Cov(X,Y)=Σ(X−Xˉ)(Y−Yˉ)N=ΣxyN\mathrm{Cov} (\mathrm{X}, \mathrm{Y}) = \frac {\Sigma (\mathrm{X} - \bar {\mathrm{X}}) (\mathrm{Y} - \bar {\mathrm{Y}})}{\mathrm{N}} = \frac {\Sigma \mathrm{xy}}{\mathrm{N}}

जहाँ x = X - Xˉ\bar{X} तथा y = Y - Yˉ\bar{Y} । ये X तथा Y के माध्य मानों से उनके i वें मान के विचलन हैं।

X और Y के बीच सहप्रसरण का चिह्न सहसंबंध गुणांक के चिह्न का निर्धारण करता है। मानक विचलन हमेशा धनात्मक होते हैं। यदि सहप्रसरण शून्य होता है, तो सहसंबंध गुणांक भी सदैव शून्य होता है। गुणन आधूर्ण सहसंबंध या कार्ल पियरसन का सहसंबंध मापन नीचे दिया जा रहा है,

r=∑xyNσxσy…(1)\mathrm{r} = \frac {\sum \mathrm{xy}}{\mathrm{N} \sigma_ {\mathrm{x}} \sigma_ {\mathrm{y}}} \quad \dots (1)

या

r=∑(X−Xˉ)(Y−Yˉ)∑(X−Xˉ)2∑(Y−Yˉ)2…(2)\mathrm{r} = \frac {\sum (\mathrm{X} - \bar {\mathrm{X}}) (\mathrm{Y} - \bar {\mathrm{Y}})}{\sqrt {\sum (\mathrm{X} - \bar {\mathrm{X}}) ^ {2}} \sqrt {\sum (\mathrm{Y} - \bar {\mathrm{Y}}) ^ {2}}} \quad \dots (2)

या

r=∑XY−(∑X)(∑Y)N∑X2−(∑X)2N∑Y2−(∑Y)2N…(3)\mathrm{r} = \frac {\sum \mathrm{XY} - \frac {(\sum \mathrm{X}) (\sum \mathrm{Y})}{\mathrm{N}}}{\sqrt {\sum \mathrm{X} ^ {2} - \frac {(\sum \mathrm{X}) ^ {2}}{\mathrm{N}}} \sqrt {\sum \mathrm{Y} ^ {2} - \frac {(\sum \mathrm{Y}) ^ {2}}{\mathrm{N}}}} \dots (3)

या

r=N∑XY−(∑X)(∑Y)N∑X2−(∑X)2N∑Y2−(∑Y)2…(4)\mathrm{r} = \frac {\mathrm{N} \sum \mathrm{XY} - (\sum \mathrm{X}) (\sum \mathrm{Y})}{\sqrt {\mathrm{N} \sum \mathrm{X} ^ {2} - (\sum \mathrm{X}) ^ {2}} \sqrt {\mathrm{N} \sum \mathrm{Y} ^ {2} - (\sum \mathrm{Y}) ^ {2}}} \dots (4)

सहसंबंध गुणांक के गुण

सहसंबंध गुणांक के गुण निम्नलिखित हैं:

•
rr की कोई इकाई नहीं होती। यह एक संख्या-मात्र है। इसका तात्पर्य है कि माप की इकाइयाँ rr का हिस्सा नहीं है। उदाहरण के लिए, कद (फुटों में) तथा वजन (कि.ग्रा. में) के बीच rr है 0.7।
•
r का ऋष्णात्मक मान प्रतिलोम संबंध दर्शाता है। किसी चर में बदलाव, दूसरे चर में विपरीत दिशा

में बद्लाव के साथ संबंढ़ रहता है। जब एक वस्तु की कीमत बढ़ती है तो उसकी माँग घट जाती है। जब ब्याज दर बढ़ती है तो निधियां (ब्याज पर ली जाने बाली धन-राशियाँ) की माँग घट जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि निधियाँ महँगी हो जाती हैं।

Textbook illustration
•
यदि r धनात्मक होता है तो दोनों चर एक ही दिशा में गतिमान होते हैं। जब चाय के स्थानापन्न के रूप में कॉफी के दाम बढ़ते हैं, तो चाय की माँग भी बढ़ जाती है। सिंचाई व्यवस्था के सुधार का संबंध फसलों की अधिक पैदावार से रहता है। जब तापमान में वृद्धि होती है, तो आइसक्रीम की बिक्री बढ़ जाती है।
•
सहसंबंध गुणांक का मान -1 तथा +1 के बीच स्थित होता है -1 ≤ r ≤ + 11 यदि किसी भी अभ्यास में r का मान इस परास के बाहर होता है तो इससे परिकलन में त्रुटि का संकेत मिलता है।
•
‘r’ परिमाण, उद्गम और पैमाने के परिवर्तन से अप्रभावित होता है। यदि हमें दो चर X तथा Y दिए गए हों तो दो नए चरों को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है-
U=X−AB;V=Y−CD\mathrm{U} = \frac {\mathrm{X-A}}{\mathrm{B}}; \quad \mathrm{V} = \frac {\mathrm{Y-C}}{\mathrm{D}}

यहाँ पर A तथा C क्रमशः X तथा Y के कल्पित मान हैं। B तथा D समापवर्तक हैं और इनका समान उद्धाम है।

अतः

rxy=ruv\mathrm{r} _ {\mathrm{xy}} = \mathrm{r} _ {\mathrm{uv}}

अति सरल प्रकार से, सहसंबंध गुणांक की गणना में, पद विचलन पढ़ति की भॉति, इस गुण का उपयोग किया जाता है।

•
r=0r = 0, तो इसका अर्थ है कि दो चरों में सह संबंध नहीं है। उनके बीच कोई रेखीय संबंध नहीं है। वैसे, अन्य प्रकार के संबंध हो सकते हैं।
•
r=1r = 1 अथवा r=−1r = -1, तो इसका अर्थ है कि सहसंबंध पूर्ण है और चरों के बीच सटीक रेखीय संबंध है।
•
r के मान का होना, घनिष्ठ रेखीय संबंध को इंगित करता है। इसके मान को उच्च तब कहा जाता है जब यह +1 अथवा -1 के निकट होता है।
•
r का निम्न मान (शून्य के निकट), मंद रेखीय संबंध को इंगित करता है, परंतु गैर-रेखीय संबंध पाया जा सकता है।

हमने पहले अध्याय में चर्चा की है कि सांख्यिकीय विधियाँ व्यवहार बुढ़ि का स्थानापन्न नहीं हैं। एक अन्य उदाहरण लेते हैं, जो सहसंबंध के परिकलन और व्याख्या से पहले ऑँकड़ों की विशेषताओं को समझने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। कुछ गाँवों में महामारी फैलती है और सरकार प्रभावित गाँवों में डॉक्टरों का द्ल भेजती है। गाँव में होने बाली मौतों की संख्या तथा भेजे गए डॉक्टरों की संख्या के बीच धनात्मक सहसंबंध पाया गया। (अर्थात् डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मौतें बढ़ गई)। सामान्यतः डॉक्टरों ढ़ारा उपलब्ध कराई जानेवाली सेवाओं के परिणामस्वरूप मृत्यु दर में कमी की आशा की जाती है, अर्थात् इनके बीच ऋष्णात्मक सहसंबंध होता है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो इसके पीछे अन्य कारण रहे होंगे। ऑँकड़े, संभवत:, किसी अवधि-विशेष से संबंधित होंगे या फिर, दर्ज की गई मृत्यु दर संभवतः ऐसे व्यक्तियों के बारे में हो सकती है जिनकी दशा बहुत बिगड़ चुकी थी। साथ ही, किसी भी क्षेत्र में डाक्टरों की उपस्थिति का सुपरिणाम कुछ समय बीतने के बाद ही दिखाई देता है। यह भी संभव है कि दर्ज की गई मौतें महामारी के कारण हुई ही न हों। जैसे, सुनामी ने अचानक किसी देश में अपना भयंकर रूप दिखाया हो और मृत्यु-दर बढ़ गई हो।

आइए, किसानों द्वारा विद्यालय में बिताए गए वर्षों तथा प्रति एकड़ वार्षिक उपज के बीच के संबंध के परीक्षण के द्वारा r के परिकलन को सोदाहरण स्पष्ट करें:

किसानों द्वारा विद्यालय में बिताए गए वर्षप्रति एकड़ वार्षिक उपज ('000 रु में)
04
24
46
610
810
108
127

सूत्र 1 के लिए Σxy, σx, σy के मानों की आवश्यकता है। सारणी 7.1 के द्वारा हम इन मान को प्राप्त कर सकते हैं।

Σxy=42,\Sigma \mathrm{xy} = 4 2,
σx=∑(X−Xˉ)2N=1127,\sigma_ {\mathrm{x}} = \sqrt {\frac {\sum (\mathrm{X} - \bar {\mathrm{X}}) ^ {2}}{\mathrm{N}}} = \sqrt {\frac {1 1 2}{7}},
σy=∑(Y−Yˉ)2N=387\sigma_ {\mathrm{y}} = \sqrt {\frac {\sum (\mathrm{Y} - \bar {\mathrm{Y}}) ^ {2}}{\mathrm{N}}} = \sqrt {\frac {3 8}{7}}

इन मानों को सूत्र 1 में प्रतिस्थापित करने पर,

r=4271127387=0.644\mathrm{r} = \frac {4 2}{7 \sqrt {\frac {1 1 2}{7}} \sqrt {\frac {3 8}{7}}} = 0. 6 4 4

सूत्र 2 के द्वारा भी इन्हीं मानों को प्राप्त किया जा सकता है,

r=∑(X−X‾)(Y−Y‾)∑(X−X‾)2∑(Y−Y‾)2…(2)\mathrm{r} = \frac {\sum (\mathrm{X} - \overline {{\mathrm{X}}}) (\mathrm{Y} - \overline {{\mathrm{Y}}})}{\sqrt {\sum (\mathrm{X} - \overline {{\mathrm{X}}}) ^ {2}} \quad \sqrt {\sum (\mathrm{Y} - \overline {{\mathrm{Y}}}) ^ {2}}} \quad \dots (2)
r=4211238=0.644\mathrm{r} = \frac {4 2}{\sqrt {1 1 2} \sqrt {3 8}} = 0. 6 4 4

इस प्रकार, हमने देखा कि किसानों की शिक्षा के वर्ष तथा प्रति एकड़ उपज के बीच धनात्मक सहसंबंध है। साथ ही r का मान भी अधिक है। इससे पता चलता है कि किसान जितने अधिक वर्षों तक शिक्षा ग्रहण करेंगे, प्रति एकड़ उपज उतनी ही अधिक होगी। इससे किसानों के लिए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश पड़ता है।

सूत्र (3) का प्रयोग करने पर

r=ΣXY−(ΣX)(ΣY)NΣX2−(ΣX)2NΣY2−(ΣY)2N...(3)\mathrm{r} = \frac {\Sigma \mathrm{XY} - \frac {(\Sigma \mathrm{X}) (\Sigma \mathrm{Y})}{\mathrm{N}}}{\sqrt {\Sigma \mathrm{X} ^ {2} - \frac {(\Sigma \mathrm{X}) ^ {2}}{\mathrm{N}}} \sqrt {\Sigma \mathrm{Y} ^ {2} - \frac {(\Sigma \mathrm{Y}) ^ {2}}{\mathrm{N}}}} \quad ... (3)

इस सूत्र के प्रयोग के लिए हमें निम्नलिखित व्यंजकों का परिकलन करना होगा,

ΣXY,ΣX2,ΣY2\Sigma \mathrm{XY},\Sigma \mathrm{X}^2,\Sigma \mathrm{Y}^2

अब r का मूल्य जानने के लिए सूत्र (3) का प्रयोग करें।

आइए, अब r के मान की विभिन्न व्याख्याओं की जानकारी लें। मान लें कि अंग्रेजी तथा साँख्यिकी इन दोनों विषयों के प्राप्तांकों के बीच सहसंबंध 0.1 है। इसका अर्थ है कि इन दोनों विषयों में प्राप्त किए गए अंकों में धनात्मक सहसंबंध है एवं सहसंबंध की प्रबलता कमजोर है। अंग्रेजी में अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र साँख्यिकी में अपेश्काकृत कम अंक प्राप्त कर सकते हैं। यदि r का मान 0.9 होता, तो अंग्रेजी में अधिक प्राप्तांक वाले विद्यार्थियों ने निश्चित रूप से साँख्यिकी में अधिक अंक प्राप्त किए होते।

शिक्षा के वर्ष (x) (X−X‾)(X-\overline{X}) (X−X‾)2(X-\overline{X})^{2} प्रति एकड़ वार्षिक पैदावार '000 रु (Y) (Y−Y‾)(Y-\overline{Y}) (Y−Y‾)2(Y-\overline{Y})^{2} (X−X‾)(Y−Y‾)(X-\overline{X})(Y-\overline{Y})
0-6364-3918
2-4164-3912
4-246-112
60010390
82410396
104168114
126367000
∑X=42\sum X=42 ∑(X−X‾)2=112\sum (X-\overline{X})^{2}=112 ∑Y=49\sum Y=49 ∑(Y−Y‾)2=38\sum (Y-\overline{Y})^{2}=38 ∑(X−X‾)(Y−Y‾)=42\sum (X-\overline{X})(Y-\overline{Y})=42

त्रष्णात्मक सहसंबंध के एक उदाहरण के रूप में स्थानीय मंडी में सब्जियों के आगमन के साथ उनकी कीमत के संबंध को लिया जा सकता है। यदि r = -0.9 होता, तो स्थानीय मंडी में सब्जियों की पूर्ति बढ़ने के साथ इनकी कीमत कम होगी। यदि r = -0.1 होता तो भी सब्जियों की अधिक पूर्ति के साथ इनकी कीमतें कम तो होतीं, परंतु उतनी कम नहीं जितनी तब थीं, जब r = -0.9 था। कीमत में किस हद तक गिरावट होगी इसका संबंध r के निरपेक्ष मान के साथ है। यदि r = 0 होगा, तो बाजार में पूर्ति के काफी बढ़ने पर भी, कीमत में कोई कमी नहीं होती। ऐसी भी संभावना है कि पूर्ति के बढ़ने पर कुशल परिवहन तंत्र की सहायता से इन्हें अन्य बाजारों में ले जाया गया हो।

क्रियात्मक गतिविधि

- निम्नलिखित सारणी को देखें। वर्तमान कीमत पर राष्ट्रीय आय में वार्षिक वृद्धि तथा (सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में) सकल घरेलू बचत के बीच r का परिकलन कीजिए। सहसंबंध गुणांक के परिकलन में पद-विचलन विधि

वर्षराष्ट्रीय आय की वार्षिक वृद्धिसकल घरेलू बचतGDP के प्रतिशत के रूप में
1992-931424
1993-941723
1994-951826
1995-961727
1996-971625
1997-981225
1998-991623
1999-001125
2000-01824
2001-021023

जब चरों के मान ऊँचे हों, तो परिकलन की समस्या को r के एक गुण के प्रयोग द्वारा कम किया जा सकता है। यह गुण है कि r ‘उद्गम परिवर्तन’ तथा ‘स्केल परिवर्तन’ से प्रभावित नहीं होता है। इसे पद विचलन विधि के रूप में भी जाना जाता है। इसके अंतर्गत X एवं Y चरों को निम्नलिखित पद विचलन विधि से परिवर्तित किया जा सकता हैः:

U=X−AB;V=Y−CD\mathrm{U} = \frac {\mathrm{X-A}}{\mathrm{B}}; \mathrm{V} = \frac {\mathrm{Y-C}}{\mathrm{D}}

यहाँ A तथा B कल्पित माध्य हैं तथा h एवं k समापवर्तक हैं एवं एक ही चिह्न के हैं।

अत:rUV=rXY\text {अत:} \mathrm{r} _ {\mathrm{UV}} = \mathrm{r} _ {\mathrm{XY}}

इसे कीमत सूचकांक तथा धन की पूर्ति के बीच सहसंबंध के विश्लेषण की प्रक्रिया के द्वारा समझा जा सकता है।

कीमत120150190220230
सूचकांक (X)
धन की पूर्ति18002000250027003000
(करोड़ रु में) (Y)

पद विचलन विधि का प्रयोग करते हुए, सरलीकरणों को निम्नलिखित विधि द्वारा दिखाया गया है:

A=100;h=10;B=1700 एवं k=100\begin{array}{l} \mathrm{A} = 1 0 0; \mathrm{h} = 1 0; \mathrm{B} = 1 7 0 0 \text { एवं } \\ \mathrm{k} = 1 0 0 \end{array}

चरों की रूपांतरित सारणी नीचे दी गई हैः:

कीमत सूचकांक तथा मुद्रा की पूर्ति के बीच पद-विचलन विधि का उपयोग करते हुए r का परिकलन:

UV
(X−10010)\left( \frac{\mathrm{X}-100}{10} \right) (Y−1700100)\left( \frac{\mathrm{Y}-1700}{100} \right) U2U^2 V2V^2 UV
21412
5325915
98816472
1210144100120
1313169169169
ΣU=41;ΣV=35;ΣU2=423;\Sigma \mathrm{U} = 4 1; \Sigma \mathrm{V} = 3 5; \Sigma \mathrm{U} ^ {2} = 4 2 3;
ΣV2=343;ΣUV=378\Sigma \mathrm{V} ^ {2} = 3 4 3; \Sigma \mathrm{UV} = 3 7 8

इन मानों को सूत्र (3) में प्रतिस्थापन करने पर

r=ΣUV−(ΣU)(ΣV)NΣU2−(ΣU)2NΣV2−(ΣV)2N=378−41×355423−(41)25343−(35)25=0.98(3)\begin{array}{l} \mathrm{r} = \frac {\Sigma \mathrm{UV} - \frac {(\Sigma \mathrm{U}) (\Sigma \mathrm{V})}{\mathrm{N}}}{\sqrt {\Sigma \mathrm{U} ^ {2} - \frac {(\Sigma \mathrm{U}) ^ {2}}{\mathrm{N}}} \sqrt {\Sigma \mathrm{V} ^ {2} - \frac {(\Sigma \mathrm{V}) ^ {2}}{\mathrm{N}}}} \tag {3} \\ = \frac {3 7 8 - \frac {4 1 \times 3 5}{5}}{\sqrt {4 2 3 - \frac {(4 1) ^ {2}}{5}} \sqrt {3 4 3 - \frac {(3 5) ^ {2}}{5}}} \\ = 0. 9 8 \\ \end{array}

कीमत सूचकांक एवं मुद्रा-पूर्ति के बीच यह प्रबल धनात्मक सहसंबंध वित्तीय नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आधार है। जब मुद्रा-पूर्ति बढ़ती है तब कीमत सूचकांक में भी वृद्धि होती है।

क्रियात्मक गतिविधि

- भारत की जनसंख्या एवं राष्ट्रीय आय से संबंधित ऑँकड़ों का उपयोग करें और पद विचलन विधि का उपयोग करते हुए उनके बीच सहसंबंध का परिकलन करें।

स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध (Spearman's Rank Correlation)

‘स्पीयरमैन कोटि सहसंबंध’ का विकास ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक सी.ई. स्पीयरमैन द्वारा किया गया था। इसका उपयोग निम्न परिस्थितियों में किया जाता है-

•
कल्पना कीजिए कि हमें किसी दूर-दराज्न के गाँव में जहाँँ न कोई मापदंड उपलब्ध है और न कोई वज्जन मापने की कोई मशीन, छात्रों की लंबाई और वज्जन के बीच, सहसंबंध का आकलन करना है। ऐसी स्थिति में हम लंबाई अथवा वज्जन का माप नहीं कर सकते, परंतु हम छात्रों को उनकी लंबाई और वज्जन के अनुसार निश्चित रूप से कोटिबढ़ कर सकते हैं और फिर इन कोटियों को स्पीयरमैन के सहसंबंध की गणना में उपयोग किया जा सकता है।
•
कल्पना कीजिए कि हमें, निष्पक्षता, ईमानदारी अथवा सौंदर्थ का अध्ययन करना है। हम इनका उसी प्रकार माप नहीं कर सकते, जिस प्रकार आय, भार अथवा लंबाई का। अधिक से अधिक, इन चीजों का सापेक्ष माप किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, हम लोगों को सौंदर्थ के आधार पर कोटिबढ़ कर सकते हैं। कुछ लोग यह बहस कर सकते हैं कि ऐसा करना संभव नहीं है, क्योंकि सौंदर्थ मापने के मापदंड और कसौटियाँ, व्यक्ति से व्यक्ति तथा संस्कृति से संस्कृति भिन्न हो सकती है। यदि हमें दो चरों के बीच, जिनमें कम से कम एक उपरोक्त प्रकार का है, तो स्पीयरमैन के सहसंबंध गुणांक का उपयोग किया जाएगा।
•
स्पीयरमैन के कोटि सहसंबंध का उन स्थितियों में भी उपयोग किया जा सकता है, जिनमें संबंध की दिशा तो स्पष्ट है, लेकिन वह गैर-रेखीय है, जैसा कि चित्र 6.6 तथा 6.7 के प्रकीर्ण चित्रों द्वारा प्रदर्शित किया गया है।

4. स्पीयरमैन का सहसंबंध गुणांक चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता। इस दृष्टि से यह कार्ल पीयरसन के सहसंबंध गुणांक से उत्तम है। अतः समंकों में यदि कुछ चरम मूल्य हैं, तो स्पीयरमैन के सहसंबंध गुणांक का उपयोग अति लाभप्रद होता है।

कोटि सहसंबंध गुणांक तथा सरल सहसंबंध गुणांक की व्याख्या समान रूप से की जाती है। इसका सूत्र सरल सहसंबंध गुणांक से प्राप्त किया गया है जहाँ व्यष्टिगत मानों को कोटियों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है। इन कोटियों का प्रयोग सहसंबंध के परिकलन के लिए किया जाता है। यह गुणांक इन इकाइयों के लिए निर्धारित कोटियों के बीच रेखीय संबंध को मापता है, न कि उनके मानों के बीच। स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध निम्नलिखित सूत्र द्वारा प्राप्त करते हैँ:

rs=1−6ΣD2n3−n…(4)\mathrm{r} _ {\mathrm{s}} = 1 - \frac {6 \Sigma \mathrm{D} ^ {2}}{\mathrm{n} ^ {3} - \mathrm{n}} \quad \dots (4)

यहाँ 'n' प्रेक्षणों की संख्या है तथा D किसी चर के लिए निर्धारित कोटियों का, किसी अन्य चर के लिए निर्धारित कोटि से, विचलन दर्शाता है।

सरल सहसंबंध गुणांक के सभी गुण यहाँ लागू किए जा सकते हैं। पियरसन सहसंबंध गुणांक की भॉति यह भी +1 तथा -1 के बीच स्थित होता है। हालॉँकि, सामान्य तौर पर यह सामान्य विधि की तरह यथातथ नहीं होता है। इसका कारण यह है कि आँकड़ों से संबढ़ सभी सूचनाओं का उपयोग नहीं होता है।

प्रथम अंतर क्रमिक मानों में अंतर होता है। श्रृंखला में मदों के मानों के वे प्रथम अंतर जो उनके परिमाण के अनुसार क्रम में व्यवस्थित किए जाते हैं, आमतौर पर कभी स्थिर नहीं होते। सामान्यतः ऑँकड़ा-गुच्छ केंद्रीय मानों के आस पास सरणी के मध्य में थोड़े बहुत अंतर पर एकत्र होता है।

यदि प्रथम अंतर स्थिर होते, तब r और rkr_{k} समान परिमाण देते। सामान्यत: rkr_{k} का मान r से कम या इसके बराबर होता है।

कोटि सहसंबंध का परिकलन

•
जब कोटियाँ दी गई हों।
•
जब कोटियाँ नहीं दी गई हों। उन्हें ऑँकड़ों से प्राप्त किया जाना हो।
•
जब कोटियों की पुनरावृत्ति की गई हो।

स्थिति 1: जब कोटियाँ दी गई हों

उदाहरण 3

किसी सौंदर्य प्रतियोगिता में तीन निर्णायकों द्वारा पाँच लोगों का मूल्यांकन किया जाता है। हमें ज्ञात करना है कि सौंदर्य-बोध के प्रति किन दो निर्णायकों का दृष्टिकोण सर्बाधिक समान है।

निर्णायक12345
क12345
ख24153
ग13524
rs=1−6ΣD2n3−n…(4)\mathrm{r} _ {\mathrm{s}} = 1 - \frac {6 \Sigma \mathrm{D} ^ {2}}{\mathrm{n} ^ {3} - \mathrm{n}} \quad \dots (4)
क\text{क} ख\text{ख} ग\text{ग} ग2\text{ग}^{2}
12-11
24-24
3124
45-11
5324
योग14

सूत्र (4) में इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर

rs=1−6ΣD2n3−n…(4)\mathrm{r} _ {\mathrm{s}} = 1 - \frac {6 \Sigma \mathrm{D} ^ {2}}{\mathrm{n} ^ {3} - \mathrm{n}} \quad \dots (4)
=1−6×1453−5=1−84120=1−0.7=0.3= 1 - \frac {6 \times 1 4}{5 ^ {3} - 5} = 1 - \frac {8 4}{1 2 0} = 1 - 0. 7 = 0. 3

निर्णायकों (क) और (ग) के बीच कोटि सहसंबंध निम्नवत् परिकलित किया गया हैः:

क\text{क} ख\text{ख} ग\text{ग} ग2\text{ग}^{2}
1100
23-11
35-24
4224
5411
योग10

सूत्र (4) में इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर कोटि सहसंबंध 0.5 होता है। ठीक इसी प्रकार से निर्णायकों ‘ख’ और ‘ग’ के बीच कोटि सहसंबंध 0.9 है। अतः निर्णायकों ‘क’ और ‘ग’ के सौदर्य बोध निकटतम है। निर्णायक ‘ख’ और ‘ग’ की रुचियाँ काफी भिन्न है।

स्थिति 2: जब कोटियाँ नहीं दी गई हों

उदाहरण 4

यहाँ पर 5 छात्रों द्वारा अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विषयों में प्राप्त अंकों का प्रतिशत दिया गया है। अब कोटियों का निर्धारण करना है और कोटि सह-संबंध का परिकलन करना है।

छात्रसांख्यकी में प्राप्तांक (X)अर्थशास्त्र में प्राप्तांक (Y)
क8560
ख6048
ग5549
घ6550
ड़7555
छात्रसांख्यिकी में कोटियाँ (Rx)अर्थशास्त्र में कोटियाँ (Ry)
क11
ख45
ग54
घ33
ड़22

एक बार जब कोटियाँ देने का क्रम जब पूरा हो जाए तो कोटि सहसंबंध के परिकलन के लिए सूत्र (4) का प्रयोग किया जाता है।

स्थिति 3: जब कोटियों को दोहराया गया हो

उदाहरण 5

X तथा Y के मान नीचे दिए गये हैं:

(X)(Y)
120075
115065
100050
990100
80090
78085
76090
75040
73050
70060
62050
60075

कोटि सहसंबंध के परिकलन के लिए मानों की कोटियाँ निर्धारित की जाती हैं। दोहराए गए मदों के लिए समान कोटियाँ दी जाती हैं। समान कोटि उन कोटियों का माध्य है जिन्हें वे मद तब धारण करते हैं, जब उनमें एक दूसरे से भिन्नता होती। अगले मद के लिए बह कोटि निर्धारित की जायेगी जो पहले दी गई कोटि के बाद होगी।

यहाँ नौवीं, दसवीं तथा ग्यारहवीं कोटियों का मान 50 है। अतः इन तीनों को औसत कोटि अर्थात 10 दी गई है।

कोटि Xकोटि Yकोटि क्रम में विचलन D2D^{2}
15.5-4.520.25
27-525.00
310-749.00
4139.00
52.52.56.25
6424.00
72.54.520.25
812-416.00
910-11.00
10824.00
111011.00
125.56.542.25
योग198.00

जब कोटियों को दोहराया जाता है तो स्पीयरमैन कोटि सहसंबंध के गुणांक का सूत्र इस प्रकार है-

rs=1−\mathbf {r} _ {\mathrm{s}} = 1 -
6[ΣD2+(m31−m1)12+(m32−m2)12+… ]n(n2−1)\frac {6 \left[ \Sigma \mathrm{D} ^ {2} + \frac {\left(\mathrm{m} ^ {3 _ {1}} - \mathrm{m} _ {1}\right)}{1 2} + \frac {\left(\mathrm{m} ^ {3 _ {2}} - \mathrm{m} _ {2}\right)}{1 2} + \dots \right]}{\mathrm{n} \left(\mathrm{n} ^ {2} - 1\right)}

यहाँ m₁, m₂, ..., कोटियों की पुनरावृत्त संख्याएँ हैं और m13−m112\frac{m^{3}_{1}-m_{1}}{12} ..., उनके संगत संशोधन गुणक हैं। इस विवरण के लिए आवश्यक सुधार इस प्रकार हैं:

33−312+23−212=3012=2.5\frac {3 ^ {3} - 3}{1 2} + \frac {2 ^ {3} - 2}{1 2} = \frac {3 0}{1 2} = 2. 5

इन व्यंजकों के मानों को प्रतिस्थापित करने पर,

rs=1−6(198+2.5)123−12=(1−0.70)=0.30\mathrm{rs} = 1 - \frac {6 (1 9 8 + 2 . 5)}{1 2 ^ {3} - 1 2} = (1 - 0. 7 0) = 0. 3 0

इस प्रकार यहाँ पर X और Y के बीच धनात्मक कोटि सहसंबंध है। X तथा Y दोनों एक ही दिशा में गतिमान हैं। हालॉँकि इनके संबंध को सुदृढ़ नहीं कहा जा सकता।

क्रियात्मक गतिविधि

- अपनी कक्षा के 10 छात्रों द्वारा नवीं और दसवीं की परीक्षाओं में प्राप्त किए अंकों के ऑँकड़े संगृहीत करें। उनके बीच कोटि सहसंबंध गुणांक का परिकलन करें। यदि आपके ऑँकड़ों में पुनरावर्तन हो, तो दोहराई गई कोटियों बाले ऑँकड़ों का संग्रह करके इस अभ्यास को पुनः दोहराएँ। एसी कौन सी स्थितियाँ हैं, जिनमें कोटि सहसंबंध गुणांक को सरल सह संबंध गुणांक की तुलना में प्राथमिकता दी जाती है। यदि ऑँकड़ों को सही ढंग से मापा जाय, तो क्या फिर भी आप कोटि सहसंबंध गुणांक की तुलना में सरल गुणांक को प्राथमिकता देंगे? आप किन स्थितियों में इनके चुनाव में तटस्थ रह सकते हैं? कक्षा में इन मुढ़ों पर चर्चा कीजिए।

4. सारांश

हमने दो चरों के बीच संबंध, विशेषतः रेखीय संबंध , के अध्ययन के लिए कुछ प्रविधियों की चर्चा की। प्रकीर्ण आरेख संबंधों की दृश्यात्मक प्रस्तुति करता है और यह रेखीय संबंध तक ही सीमित नहीं है। कार्ल पियरसन का सहसंबंध गुणांक तथा स्पीयरमैन का कोटि-सहसंबंध चरों के बीच रेखीय संबंधों की माप हैं। जब चरों को परिशुद्ध रूप से मापना संभव न हो, तो वहाँ कोटि सहसंबंध का प्रयोग हो सकता है। लेकिन ये माप कार्य-कारण संबंध सूचित नहीं करते। जब सहसंबंधित चरों में परिवर्तन होता है, तो सहसंबंध का ज्ञान हमें चरों में परिवर्तन की दिशा तथा गहनता के बारे में बताता है।

पुनरावर्तन

•
सहसंबंध विश्लेषण के अंतर्गत दो चरों के बीच के संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
•
प्रकीर्ण आरेख दो चरों के बीच संबंध के स्वरूप का दृश्य प्रस्तुतीकरण करता है।
•
कार्ल पियरसन का सहसंबंध गुणांक r दो चरों के बीच केवल रेखीय संबंध को संख्यात्मक रूप से मापता है। r सदैव -1 तथा +1 के बीच स्थित रहता है।
•
यदि चरों को परिशुद्धता से न मापा जा सके, तो स्पीयमेन के कोटि सहसंबंध का उपयोग रेखीय संबंधों को संख्यात्मक रूप से मापने के लिए किया जा सकता है।
•
दोहराई गई कोटियों को संशोधन गुणकों की आवश्यकता होती है।
•
सहसंबंध का तात्पर्य कार्य-कारण संबंध नहीं, बल्कि केवल सहप्रसरण दर्शिना है।

अभ्यास

1. कद (फुटों में) तथा वज्ञन (किलोग्राम में) के बीच सहसंबंध गुणांक की इकाई है:

(क) कि.ग्रा./फुट

(ख) प्रतिशत

(ग) अविद्यमान

2. सरल सहसंबंध गुणांक का परास निम्नलिखित होगा

(क) 0 से अनंत तक

(ख) -1 से +1 तक

(ग) ऋष्णात्मक अनंत (infinity) से धनात्मक अनंत (infinity) तक

3. यदि rxyr_{xy} धनात्मक है तो x और y के बीच का संबंध इस प्रकार का होता है:

(क) जब y बढ़ता है तो x बढ़ता है।

(ख) जब y घटता है तो x बढ़ता है।

(ग) जब y बढ़ता है तो x नहीं बदलता है।

4. यदि rxy=0r_{xy} = 0 तब चर x और y के बीच:

(क) रेखीय संबंध होगा

(ख) रेखीय संबंध नहीं होगा

(ग) स्वतंत्र होगा

5. निम्नलिखित तीनों मापों में, कौन सा माप किसी भी प्रकार के संबंध की माप कर सकता है।

(क) कार्ल पियरसन सहसंबंध गुणांक

(ख) स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध

(ग) प्रकीर्ण आरेख

6. यदि परिशुढ़ रूप से मापित ऑँकड़े उपलब्ध हों, तो सरल सहसंबंध गुणांक:

(क) कोटि सहसंबंध गुणांक से अधिक सही होता है।

(ख) कोटि सहसंबंध गुणांक से कम सही होता है।

(ग) कोटि सहसंबंध की ही भाँति सही होता है।

•
साहचर्य के माप के लिए r को सहप्रसरण से अधिक प्राथमिकता क्यों दी जाती है?
•
क्या ऑँकड़ों के प्रकार के आधार पर r, -1 तथा +1 के बाहर स्थित हो सकता है?
•
क्या सहसंबंध के द्वारा कार्यकारण संबंध की जानकारी मिलती है?
•
सरल सहसंबंध गुणांक की तुलना में कोटि सहसंबंध गुणांक कब अधिक परिशुढ़ होता है?
•
क्या शून्य सहसंबंध का अर्थ स्वतंत्रता है?
•
क्या सरल सहसंबंध गुणांक किसी भी प्रकार के संबंध को माप सकता है?
•
एक सप्ताह तक अपने स्थानीय बाजार से 5 प्रकार की सब्जियों की कीमतें प्रतिदिन एकत्र करें। उनका सहसंबंध गुणांक परिकलित कीजिए। इसके परिणाम की व्याख्या कीजिए।
•
अपनी कक्षा के सहपाठियों के कद मापिए। उनसे उनके बेंच पर बैठे सहपाठी का कद पूछिए। इन दो चरों का सहसंबंध गुणांक परिकलित कीजिए और परिणाम का निर्वचन कीजिए।
•
कुछ ऐसे चरों की सूची बनाएँ जिनका परिशुङ्क मापन कठिन हो।
•
r के विभिन्न मानों +1, -1, तथा 0 की व्याख्या करें।
•
पियरसन सहसंबंध गुणांक से कोटि सहसंबंध गुणांक क्यों भिन्न होता है?
•
पिताओं (x) और उनके पुत्रों (y) के कदों का माप नीचे इंचों में दिया गया है, इन दोनों के बीच सहसंबंध गुणांक को परिकलित कीजिए
•
(उत्तर r = 0.603)
x6566576768697072
y6756656872726971

19. x और y के बीच सहसंबंध गुणांक को परिकलित कीजिए और उनके संबंध पर टिप्पणी कीजिए।

x-3-2-1123
y941149

(उत्तर r = 0)

20. x और y के बीच सहसंबंध गुणांक को परिकलित कीजिए और उनके संबंध पर टिप्पणी कीजिए।

x134578
y268101416

(उत्तर r = 1)

क्रियात्मक गतिविधि

- भारत की राष्ट्रीय आय और निर्यात के कम से कम 10 प्रेक्षण लेकर, इस पाठ में बताए गए सभी सूत्रों का उपयोग करते हुए r को परिकलित कीजिए।