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Unit6

कालक्रम चार

चार

आधुनिकीकरण की ओर

मूल निवासियों का विस्थापन

आधुनिकीकरण के रास्ते

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आधुनिकीकरण की ओर

दुनिया को जोड़ना। 1927 में 25 वर्षीय चाल्स लिंडबर्ग की एक इंजन वाले हवाई जहाज में अंटलांटिक महासागर को पार करते हुए न्यूयार्क से पैरिस, की यात्रा।

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छले भाग में आपने मध्यकालीन और प्रारम्भिक आधुनिक विश्व की कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रक्रियाओं का अध्ययन किया – सामंतवाद, यूरोपीय पुनर्जगरण और यूरोप तथा एशिया, अफ्रिका और अमरीका के बीच सम्पर्क अथवा टकराव। जैसा कि आप समझ गये होंगे, आधुनिक विश्व को बनाने में जिन घटनाओं का योगदान रहा वे इसी समय हुई; खासतौर से 15वीं शताब्दी के मध्य से। विश्व इतिहास के दो अन्य परिवर्तनों ने ऐसी ज्ञमीन तैयार की जिसे ‘आधुनिकीकरण’ कहा गया। यह थे औद्योगिक क्रांति और राजनीतिक क्रांतियों की लड़ी जिसने प्रजा को नागरिक में तब्दील कर दिया। इन राजनीतिक क्रांतियों की शुरुआत अमरीकी क्रांति (1776-81) और फ्रांसीसी क्रांति (1789-94) से हुई।

ब्रिटेन दुनिया का पहला औद्योगिक राष्ट्र रहा है। पिछली कक्षा में आपने इसका अध्ययन किया कि ऐसा कैसे और क्यों हुआ। लंबे अरसे से यह समझा जाता था कि ब्रिटेन के औद्योगीकरण ने दूसरे देशों के औद्योगीकरण के लिए आदर्श नमूना (माँडल) प्रस्तुत किया। हालाँळि इतिहासकारों ने औद्योगीकरण संबंधी पहले के कुछ विचारों को लेकर प्रश्न उठाए हैं। हालाँळि प्रत्येक देश ने दूसरों के अनुभवों से बहुत कुछ सीखा फिर भी उसने औद्योगीकरण के प्रस्तुत नमूनों का अंधानुकरण नहीं किया। मिसाल के तौर पर ब्रिटेन में कोयला और सूती कपड़े के उद्योगों का विकास औद्योगीकरण के पहले चरण में हुआ जबकि रेलवे के आविष्कार ने इस प्रक्रिया के दूसरे चरण की शुरुआत की। अन्य देशों, जैसे रूस में औद्योगिक विकास काफ़ी देर से शुरु हुआ – 19वीं शताब्दी के आखिर में – यहाँ रेलवे और भारी उद्योग औद्योगीकरण के पहले चरण में ही विकसित होने लगे। इसी तरह औद्योगीकरण में राज्य और बैंकों की भूमिका प्रत्येक देश में भिन्न-भिन्न रही है। नि:संदेह ब्रिटेन के औद्योगिक विकास ने अन्य औद्योगिक देशों जैसे अमरीका और जर्मनी जो महत्वपूर्ण औद्योगिक शक्तियाँँ रहे हैं, की औद्योगिक प्रगति को प्रभावित किया। इसने यह भी दर्शाया कि ब्रिटेन को औद्योगीकरण की कितनी मानवीय और भौतिक कीमत चुकानी पड़ी - गरीब मज्ञदूर खासकर बच्चों की दुर्दशा, पर्यावरण का क्षय और हैंज्ञा तथा तपेदिक की महामारियाँ। इसी तरह से विषय 7 में आप जापान में कैंडमियम और पारे के जहर के फैलने से हुए औद्योगिक प्रदूषण के बारे में पढ़ँगे, जिसने लोगों को अंधाधुंध औद्योगीकरण के खिलाफ्र जन आंदोलन करने के लिए जागृत किया।

यूरोपीय शक्तियों ने औद्योगिक क्रांति के बहुत पहले से अमरीका, एशिया और दक्षिण अप्रॉनीका के हिस्सों में उपनिवेश बनाना शुरू कर दिया था। विषय 6 आपको यूरोपीय उपनिवेशियों द्वारा अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के साथ किए गए बर्ताव की कहानी बताता है। आबादकारों की बुर्जुआ मानसिकता ने उन्हें ज्ञमीन और पानी से लेकर सब कुछ बेचने और खरीदने के लिए प्रेरित किया। लेकिन मूल निवासी, जो यूरोपीय अमरीकियों को असभ्य नज्ञर आते थे, का पूछना था ‘अगर आप हवा की ताज्गी और पानी के बुलबुलों के मालिक नहीं हैं, तो उसे कोई कैसे खरीद सकता है?’ मूल निवासियों को ज्ञमीन, मछली और जानवरों पर मालिकाना हक जताने की ज्ञरूरत महसूस नहीं हुई। उन्हें इन चीजों को बेचने और खरीदने की वस्तुओं के रूप में बदलने की कोई इच्छा नहीं थी। अगर चीजों के आदान-प्रदान की ज्ञरूरत थी, तो उन्हें आसानी से उपहार में दिया जा सकता था। जाहिर है कि मूल निवासी और यूरोपीय, सभ्यता की प्रतियोगी अवधारणाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। मूल निवासियों ने यूरोपीय अतिवृष्टि से अपनी संस्कृति को मिटने नहीं दिया। हालाँकि 20वीं सदी के मध्य की अमरीकी और कनाडा की सरकारें चाहती थीं कि मूल निवासी ‘मुख्यधारा से जुड़े’। इसी दौर में आस्ट्रेलिया में सत्ताधारियों ने उनकी परंपरा और संस्कृति को पूरी तरह से नज्ञरअंदाज करने का प्रयास किया। किसी को हैरत हो सकती है कि आखिर ‘मुख्यधारा’ का मतलब क्या है? आर्थिक और राजनीतिक शक्ति किस तरह ‘मुख्यधारा की संस्कृति’ के निर्माण को प्रभावित करती है?

पश्चिमी पूँजीवाद- व्यापारिक, औद्योगिक और वित्तीय- और 20वीं सदी के शुरू के जापानी पूँजीवाद ने तीसरी दुनिया के बहुत से हिस्सों में उपनिवेश बनाये। इनमें से कुछ ऐसे उपनिवेश थे जहाँ यूरोपीय गोरे लोग बस गए। अन्य, जैसे कि भारत में ब्रिटिश शासन, सीध ' औपनिवेशिक नियंत्रण के उदाहरण हैं। 19वीं और प्रारंभिक 20वीं सदी का चीन उपनिवेशवाद की तीसरी किस्म का उदाहरण है। यहाँ ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, अमरीका और जापान ने बिना सत्ता हाथ में लिए चीन के मामलों में दखलअंदाजी की। उन्होंने देश के संसाधनों से भरपूर फ्रायदा उठाया। इससे चीन की प्रभुसत्ता को गंभीर ठेस पहुँची और चीन का दर्जा अर्थ-उपनिवेश का हो गया।

लगभग सभी देशों में शक्तिशाली राष्ट्रीय आंदोलनों ने औपनिवेशिक शोषण को चुनौती दी। वैसे राष्ट्रवाद बिना औपनिवेशिक संदर्भ के भी उभरा जैसे कि पश्चिम या जापान में। सभी किस्मों के राष्ट्रवाद लोक प्रभुसत्ता के सिद्धांतों पर आधारित हैं। राष्ट्रीय आंदोलनों का मानना है कि राजनीतिक सत्ता जनता के हाथ में होनी चाहिए और इसी वजह से राष्ट्रवाद एक आधुनिक अवधारणा है। नागरिक राष्ट्रवाद भाषा, धर्म, जाति और लिंग पर ध्यान दिए बिना प्रभुसत्ता सभी लोगों के हाथ में प्रदान करता है। यह बराबर अधिकार वाले नागरिकों का समुदाय बनाने की कोशिश करता है और राष्ट्रीयता को जातीयता और धर्म से परे हटकर नागरिकता से परिभाषित करता है। जातीय और धार्मिक राष्ट्रवाद राष्ट्रीय एकता का निर्माण किसी भाषा, धर्म या कुछ परंपराओं के इर्द-गिर्द बनाने की कोशिश करते हैं जहाँ लोगों को जातीयता के आधार पर परिभाषित किया जाता है, समान नागरिकता के आधार पर नहीं। बहु जातीय देश में जातीय राष्ट्रवादी प्रभुसत्ता चुने हुए समूहों-समुदायों तक सीमित कर सकते हैं, जिन्हें अल्पसंख्यक समुदायों की तुलना में बेहतर समझा जाता है। समसामयिक काल में अधिकतर पश्चिमी देश राष्ट्रीयता की जातीयता की बजाय समान अधिकारों से परिभाषित करते है। एक प्रमुख अपवाद जर्मनी है जहाँ जातीय राष्ट्रवाद की विचारधारा का लंबा और कष्टदायी इतिहास रहा है। यह इतिहास, एक तरह से, 1806 में जर्मन राज्यों पर फ्रांस के शाही कब्जे के खिलाफ्र प्रतिक्रिया से शुरु हुआ। नागरिक राष्ट्रवाद की विचारधारा विश्व भर में जातीय/धार्मिक राष्ट्रवाद के साथ प्रतियोगिता करती आई है। यही हाल आधुनिक भारत, चीन और जापान में भी रहा है।

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जैसे औद्योगीकरण के भिन्न-भिन्न तरीके रहे हैं, वैसे ही आधुनिकीकरण के कई माउडल देखने को मिले हैं। विभिन्न समाजों ने अपनी विशिष्ट आधुनिकता विकसित की है। इस मामले में जापानी और चीनी उदाहरणों के साथ-साथ ताइवान और दक्षिण कोरिया के उदाहरणों से बहुत कुछ समझ़ में आता है। जापान उपनिवेशी नियंत्रण से आज्ञाद रहने में सफल रहा और 20वीं सदी के दौरान तेज्जी से आर्थिक और औद्योगिक प्रगति कर सका। द्वितीय विश्व युढ़ में हुई शर्मनाक हार के बाद जापानी अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण को केवल युढ़ के बाद के चमत्कार के रूप में नहीं देखना चाहिए। जैसा कि विषय 7 दिखाता है, यह उस उन्नति का नतीजा था जो जापान 19वीं और 20वीं शताब्दी के शुरू में बनाने में कामयाब हुआ था। उदाहरण के लिए, क्या आपको मालूम है कि 1910 तक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने के लिए फ्रीस लगभग खत्म हो गई थी और सब बच्चों के लिए दाखिला अनिवार्य था? फिर भी जापानी आधुनिकीकरण की, अन्य किसी भी देश की तरह, अपनी दिक्कतें थीं: लोकतंत्र और सैन्यवाद के बीच, जातीय राष्ट्रवाद और नागरिक राष्ट्र निर्माण के बीच और जिसे बहुत से जापानी ‘परंपरा’ और ‘पश्चिमीकरण’ कहते हैं।

चीनियों ने औपनिवेशिक शोषण का और अपने नौकरशाह – सामंत वर्ग का प्रतिरोध किसान विद्रोह, सुधार और क्रांति के ज्ञरिये किया। 1930 के दशक के शुरुआती सालों में चीनी साम्यवादी पाटी, जिसकी ताकत किसानों में थी, ने औपनिवेशिक शक्तियों का और देश के कुलीन वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे राष्ट्रवादियों का सामना करना शुरु किया। उन्होंने अपने विचार देश के कुछ चुने हुए हिस्सों में आजमाने शुरु किये। उनकी समतावादी विचारधारा, भूमि सुधारों पर जोर, और महिलाओं की समस्याओं के प्रति जागरूकता ने 1949 में विदेशी उपनिवेशवाद और राष्ट्रवादियों को उखाड़ फेंकने में मदद की। एक बार सत्ता में आने के बाद वे असमानताएँ घटाने, शिक्षा फैलाने और राजनीतिक जागरूकता बनाने में सफल रहे। इसके बावजूद, देश के एक-पाटी ढाँचा और राज्य-प्रायोजित दमन ने, 1960 के दशक के मध्य के बाद राजनीतिक व्यवस्था के साथ बढ़ते असंतोष में योगदान किया। लेकिन साम्यवादी पाटी काफ़ी हद तक देश पर अपना नियंत्रण रख पाई है क्योंकि बाजार के कुछ सिद्धांतों को अपनाकर उसने खुद का पुनराविष्कार किया और चीन को आर्थिक शक्ति में तब्दील करने के लिए कड़ी मेहनत की है।

विभिन्न देशों ने आधुनिकता को अलग-अलग तरीके से समझा है और अलग-अलग तरीकों से प्राप्त करने की कोशिश की है। हर रास्ता अपनी परिस्थिति और विचारों के संदर्भ में दिलचस्प कहानी पेश करता है। यह भाग उस कहानी के कुछ पहलुओं से आपका परिचय करवाएगा।

(लगभग 1700-2000)

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यह कालरेखा आपको यह बताएगी कि पिछले तीन सौ वर्षों में दुनिया के अलग-अलग भागों में क्या घटित हो रहा था और किस प्रकार विभिन्न देशों के लोग हमारे आधुनिक विश्व के निर्माण में क्या योगदान दे रहे थे। आपको यह विश्व में पिछली शताब्दी में हुए अफ्रीका के दास-व्यापार और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद शासन की स्थापना, यूरोप में सामाजिक आंदोलनों, राष्ट्र राज्यों के निर्माण, साम्राज्यिक शक्तियों के विस्तार, उपनिवेशीकरण की प्रक्रिया, जनतंत्रीय और उपनिवेश विरोधी आंदोलनों के विषय में बताएगी। यह आपको कुछ उन अन्वेषणों और प्रौद्योगिक विकास के विषय में भी जानकारी देगी जो आधुनिकता संबंधी विचारों के सहयोगी रहे। जैसा कि सभी कालरेखाओं के साथ हुआ है, कालरेखा कुछ तिथियों पर ही प्रकाश डालती है। इसके अलावा कुछ और तिथियाँ भी हैं जो महत्वपूर्ण है। जब आप इन कालरेखाओं की कड़ियों को देखते हैं तो यह न सोचें कि आपको केवल इन्हीं तिथियों को ही जानना है। इसका भी पता लगाएँ कि क्यों विभिन्न कालों की कालरेखाएँ विभिन्न तिथियों पर प्रकाश डालती हैं और इनका चयन आपको यह सब बताता है।

तिथिअफ़ीकायूरोप
1720-30पश्चम अफ़ीका में स्थित दाहोमी के राजा अगाज (1724–34) ने दास-व्यापार* पर प्रतिबंध लगाया; 1740 ई. में इसे फिर से लागू किया गया
1730-40कैरोलस लिनेअएस (Carolus Linnaeus ) ने पौधों और जानवरों का वर्गीकरण करने के लिए एक वर्गिकीय प्रणाली (taxonomic system) की खोज की (1735)
1740-1750
1750-1760दक्षिण अफ़ीका के केप टाउन में पहली बार चेचक (1755) का प्रकोप हुआ जिसे नाविकों ने फैलाया
1760-1770
1770-1780अंतराष्ट्रीय दास-व्यापार अपने चरम उत्कर्ष पर था। सभी ‘उपनिवेशिक शक्तियाँ दास-व्यापार कर रही थी। लाखों अश्वेत अफ़ीकी लोगों को प्रत्येक वर्ष अटलांटिक के पार भेजा जाता था जिनमें दो तिहाई समुद्री यात्रा के दौरान मर जाते थेरुस में इमेलियन पगाचेव (Emelian Pugachev) ने कृषक विद्रोह (1773-75) का नेतृत्व किया
1780-90फ्रांसीसी क्रांति* (1789) का प्रारंभ
1790-1800
1800-1810मोहम्मद अली ने मिस्त्र में शासन किया, 1805-48; मिस्त्र ऑठोमन साम्राज्य से अलग हो गया
1810-1820
1820-30पश्चम अफ़ीका में लाइबेरिया की स्थापना (1822) जो स्वतंत्र दासों का देश थालुई ब्रेल (Louis Braille) ने अंगुलियों से पढ़ने की प्रणाली* को विकसित किया (1823); इंग्लैण्ड में यात्री रेलगाड़ी चलाई गई (1825)
1830-40अब्दुल-कादिर ने फ्रांसीसियों के अल्जीरिया में बसने के विरुढ्ध (1832–47) आंदोलन किया
1840-50अनेक यूरोपीय देशों में उदारवादी और सामाजिक आंदोलन (1848)
1850-60
तिथिअफ्रीकायूरोप
1860-70विश्व के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मागों में से एक स्वेज नहर* व्यापार हेतु खोली गईरुसी कृषि-दासों (serfs) को स्वंतत्र किया गया (1861)
1870-80जर्मनी और इटली एक संयुक्त राष्ट्र राज्यों के रूप में उभर कर आए
1880-90यूरोप के लोगों का‘अफ्रीका के लिए संघर्ष’ प्रारंभ हुआ
1890-1900पहली फिल्म का निर्माण (1895); पहलाओलांपिक खेल एथेंस में संपन्न हुआ (1896)
1900-1910महात्मा गांधी* ने नस्लवादी कानूनों के खिलाफ सत्याग्रह की वकालत की (1906)
1910-1920दक्षिण अफ्रीका ने श्वेत लोगों के लिए 87 प्रतिशत भूमि आरंक्षित करने हेतु कानून बनाए (1913)प्रथम विश्व युढ्ध (1914-1918), 1917 की रूसी क्रांति
1920-30मुस्तफ़ा कमाल के नेतृत्व में तुर्की गणराज्य बना (1923)
1930-40अंगोला से मोज्ञाम्बिक तक प्रथम ट्रांस-अफ्रीकी रेलसेवा पूर्ण हुई (1931)हिटलर ने जर्मन शासन की बागडोर हथिया ली (1933); द्वितीय विश्व युढ्ध (1939-45)
1940-50दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीकी नेशनल पार्टी की विजय (1948), रंगभेद नीति की स्थापनाब्रिटेन ने आयरिश स्वतंत्रता को मान्यता दी (1949)
1950-60उप-सहारा अफ्रीकी क्षेत्र में घाना प्रथम स्वतंत्र देश बना (1957)डी.एन.ए. की खोज; रूस ने अंतरिक्षयान स्पूतनिक भेजा (1957)
1960-70अफ्रीकी एकता संगठन की स्थापना (1963)यूरोप में विरोध आंदोलन (1968)
1970-80[78×7]
1980-90मिखाइल गोरबाचेव सोवियत रूस के नेता बने (1985); संपूर्ण विश्व में वेब का प्रारंभ (1989)
1990-2000दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला* को रिहा किया गया (1990); रंगभेद को समाप्त करने की प्रक्रिया आरंभ हुईवैज्ञानिकों ने डॉली (1997) क्लोन भेड़ बनाई जिससे आनुर्विशिक इंजीनियरिंग की सीमा के बारे में नए विवाद प्रारंभ हुए
तिथिएशियादक्षिणी एशिया
1720-30गुजिन तुशू जिचेंग* (Gujin tushu jicheng) नामक सबसे विशाल विश्वकोश को चीन के मंच शासक कांगक्षी ने छपा कर अधिक
1730-40
1740-1750मराठों ने उत्तरी भारत में अपनी प्रभुता का विस्तार किया
1750-1760एओकी कोन्यो (Aoki Konyo), एक जापानी विद्धान ने डच-जापानी शब्दकोश का संकलन किया (1758)।राबर्ट क्लाइव ने बंगाल के नवाब को प्लासी के युद्ध में पराजित किया (1757)
1760-1770
1770-1780
1780-90अंग्रेजों ने भारत से चीन को अफीम* का निर्यात किया जिसमें अत्यधिक वृद्धि हुई
1790-1800रणजीत सिंह* ने पंजाब में सिख राज्य की स्थापना की (1799)
1800-1810
1810-1820
1820-30जावा के लोगों की डचों के खिलाफ बगावत (1825-30)सती प्रथा को गैर कानूनी घोषित किया गया (1829)
1830-40ऑटोमन सुल्तान अब्दुल मज्नीद ने आधुनिकीकरण के कार्यक्रम शुरू किए (1839)
1840-50
1850-60थाईलैंड के राजा रामा चतुर्थ का शासन, उसने अपने देश में विदेशी व्यापार की शुरुआत की (1853)रेल और टेलीग्राफ लाइन का आरंभ (1853); महान विद्रोह* (1857)
1860-70फ्रांसीसियों के इंडोचीन (दक्षिण-एशिया) में आधिपत्य का प्रारंभ (1862)
1870-80जापान की प्रथम रेल-सेवा, टोकियो से याकोहामा, का प्रारंभ (1872)दक्कन और दक्षिण भारत में अकाल (1876-78), पचास लाख से अधिक लोगों की मृत्यु
1880-90ब्लिटन ने बर्मा (म्यांमार) पर अधिकार किया (1885-86)भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना* (1885)
1890-1900प्रथम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, 1885
1900-1910जापानी जलसेना ने रूसी जहाज़ी बेड़ों को परास्त किया (1905)
1910-1920बेल्फोर (Balfour) घोषणा-पत्र ने फिलिस्तीन में यहूदियों को स्वदेश देने का आशवासन दिया (1917)
1920-30महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया (1921); ई.वी. रामास्वामी नायकर ने तमिलनाडु में आत्म-सम्मान आंदोलन प्रारंभ किया (1925)
1930-40इराक से सीरिया तक ब्रिटिश तेल पाइपलाइन बनी (1934)अर्देशीर ईरानी की आलम आरा (1931) सबसे पहली टॉकी फिल्म थी। बगदाद को इस्तांबुल से जोड़ने वाली बर्लिन-बगदाद रेलवे का परिचालन शुरू (1940)
1940-50संयुक्त राष्ट्र अमरीका ने जापानी नगर हिरोशिमा और नागासाकी* (1945) पर अणु बम गिराया जिसमें लगभग 1,20,000 व्यक्तियों की मृत्यु हुई बाद में बहुत से लोग विकिरण के प्रभाव से मरे; चीनी लोक-गणतंत्र का संघटन (1949)भारत छोड़ो आंदोलन (1942); भारत और पाकिस्तान को स्वतंत्रता मिली (1947)
1950-60बांदुंग (Bandung) सम्मेलन (1955) ने गुट निरपेक्ष आंदोलन को मज्जबूत कियाभारत गणतंत्र* (1950) बना
1960-70फिलिस्तीनी शरणार्थियों को एक्त्रित करने के लिए अरब नेताओं ने फिलस्तीन मुक्ति संगठन की स्थापना की (1964); वियतनाम में युढ़ (1965-73)सिरमावो भंडारनायकें* (Sirimavo Bhandarnaike) विश्व की प्रथम महिला प्रधानमंत्री (1960)।
1970-80ईरान के शाह का तख्ता-पलट दिया गया (1979)बांग्लादेश स्वतंत्र राष्ट्र बना (1971)
1980-90बेगिंग, चीन के तिआननमेन चौक (Tiananmen Square) में प्रजातंत्र के लिए विशाल प्रदर्शन (1989)भोपाल गूनियन कार्बाइड के कीटनाशी (pesticides) प्लांट में रिसाव (1984)। यह इतिहास में बहुत ही भयंकर औद्योगिक दुर्घटना थी जिसमें हज्ञारों व्यक्तियों की मृत्यु हुई
1990-2000इराक, कुवैत और अमरीका के मध्य खाड़ी युढ़भारत और पाकिस्तान ने नाभिकीय परीक्षण (nuclear tests) किए (1998)
तिथिअमरीकाआस्ट्रेलिया/प्रशांत महासागरीय द्वीप
1720-30पुर्तगालियों ने ब्राजील में कॉफी का प्रचलन किया (1727)डच नाविक रोगेवीन (Roggeveen) समोआ द्वीपों और प्रशांत महासागर के ईस्टर द्वीप में पहुँचा (1722)
1730-40स्टोनो दास विद्रोह का नेतृत्व एक शिक्षित दास जेमी ने किया (1739)
1740-1750जुआन सेंटोस (Juan Santos), जिसे अताहुआल्पा II भी कहते हैं, ने पेरु के मूल निवासियों का नेतृत्व किया किंतु उसका विद्रोह असफल रहा (1742)
1750-1760
1760-1770ब्रिटिश लोगों के विरुद्ध ओटावा कबीले के चीफ पोन्टियक ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया (1763)कैप्टन कुक की प्रशांत महासागरीय* तीन यात्राओं में प्रथम (1768-71)
1770-1780अमरीकी स्वतंत्रता की घोषणा (1776)
1780-90अमरीका का सविधान बना; डॉलर का पहली बार अमरीकी मुद्रा के रूप में प्रयोग (1787)प्रथम ब्रिटिश अपराधियों को आस्ट्रेलिया के बोटानी बे (Botany Bay) भेजा गया (1788)
1790-1800
1800-1810मैध्यू फ्लंडर्स (Matthew Flinders) ने परक्रमा की और आस्ट्रेलिया नाम रखा जिसका अर्थ ‘दक्षिणी’ है (1801-03)
1810-1820
1820-30साइमन बोलिवर* (Simon Bolivar) ने बैनिजुएला को स्वतंत्रता दिलाई (1821)
1830-40अमरीका में ‘ट्रेल ऑफ टियर्स’ (औसुओं की पगडंडी); इसमें हज्ञारों पूर्वी क्षेत्र के अमरीकी मूल निवासियों को जबरन पश्चिम की और खदेड़ा गया जिसमें बहुतों ने मार्ग में ही दम तोड़ दिया (1838)चार्ल्प डार्किन ने प्रशांत महासागर में गलपगोस (Galapagos) द्रीपों (1831) की यात्रा की जिसके फलस्वरूप विकास के सिद्धांत को समझने में सहायता मिली
1840-50सेनेका फॉल्स (Seneca Falls), न्यूगार्क की बैठक में अमरीकी महिलाओं के समान अधिकार का आढान किया (1848) गयाब्रिटिश और माओरिस ने न्यूजीलैंड में वेटंगी (Waitangi) की संधि (1840) पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद माओरिस लोगों ने अनेक विद्रोह किए (1844-88)
1850-60आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच भाप की नियमित जलयान सेवा पहली बार शुरू की गई (1856)
तिथिउत्तरी-दक्षिणी अमरीकाआस्ट्रैलिया/प्रशांत द्वीप समूह
1860-70अमरीका में गृह युढ़ (1861-65); संविधान के तेरहवें संशोधन द्वारा दास प्रथा पर प्रतिबंधब्रिटेन से आस्ट्रैलिया बॉदियों को भेजने पर प्रतिबंध (1868)
1870-80टेलीफोन, रिकार्ड-प्लेयर, बिजली के बल्ब का अन्वेषण
1880-90कोका-कोला* की खोज (1886)
1890-1900न्यूजीलैंड में महिलाओं को मताधिकार मिला (1893)
1900-1910राइट ब्रदर्स ने हवाई जहाज़ का आविष्कार किया (1903)
1910-1920हेनरी फोर्ड ने कार उत्पादन का प्रारंभ किया (1913); अटलाउटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाली पनामा नहर खोली गई (1914)पश्चिम सेमओ की एक बटा पाँच जनसंख्या इन्म्लूएंज्ञा से समाप्त हो गई (1918)
1920-30अमरीका की वॉल स्ट्रीट स्टॉक एक्सचेंज में भारी गिशवट (1929); इससे महामदी का दौर शुरू हुआ, 1932 तक 1 करोड़ बीस लाख व्यक्ति बेरोज्ञगार हो गएन्यूजीलैंड सरकार के विरुढ़ सेमओ के मोओ लोगों का विद्रोह (1929)
1930-40
1940-50संयुक्त राष्ट्र अमरीका ने द्वितीय विश्व युढ़ में भाग लिया
1950-60क्यूबा क्रांति के बाद फिदेल कास्त्रो (Fidel Castro), 1958 सत्ता में आए
1960-70संयुक्त राज्य अमरीका में नागरिक अधिकार आंदोलन (1963)* ; अमरीकी नागरिक अधिकार अधिनियम (1964) में प्रजालीय पार्थिक्य पर प्रतिबंध लगाया। नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग की हत्या (1968); अमरीकी अंतरिक्ष-यात्री चन्द्रमा की भूमि पर उत्तरा (1969)
1970-80महिलाओं के आंदोलनों के कारण अमरीकी कांग्रेस ने समान अवसर अधिनियम पारित कियाटोंगा और फीजी ने ब्रिटेन की अधीनता से मुक्त होकर स्वतंत्रता प्राप्त की (1970); पपुआ न्यू गिनी आस्ट्रैलिया की अधीनता से मुक्त होकर स्वतंत्र हो गया
1980-90न्यूजीलैंड को नाभिकीय अस्त्रमुक्त क्षेत्र घोषित किया गया (1984); रेरोटोंगा की सॉधि ने दक्षिण पेसिफिक को नाभिकीय अस्त्र मुक्त क्षेत्र (Nuclear Free Zone) घोषित किया
1990-2000क्रियाकलापयदि आप इस पुस्तक में दी गई चार कालरेखाओं की तुलना करें तो आप बाएँ खाने में दिए गए तिथि क्रम के कालों में विभिन्ता पाएँं। इसके पीछे के कारणों के बारे में आप क्या सोचते हैं? अपने आप एक कालरेखा बनाने की कोशिश करिए और घटनाओं के अपने चयन के कारण बताइए?
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क्रियाकलाप

इस अध्याय में अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के इतिहास के कुछ पहलू पेश किए गए हैं। विषय 8 में हमने दक्षिण अमरीका में स्पेनी और पुर्तगाली औपनिवेशीकरण के इतिहास की झाँँकी देखी थी। 18वीं सदी से दक्षिणी अमरीका के और भी हिस्सों में, तथा मध्य, उत्तरी अमरीका, दक्षिणी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूज्जीलैंड के इलाकों में यूरोप से आए आप्रवासी बसने लगे। इस प्रक्रिया ने बहाँ के बहुत से मूल निवासियों को दूसरे इलाकों में जाने पर मजबूर किया। यूरोपीय लोगों की ऐसी बस्तियों को ‘कॉलोनी’ (उपनिवेश) कहा जाता था। जब यूरोप से आए इन उपनिवेशों के बाशिंदे यूरोपीय ‘मातृदेश’ से स्वतंत्र हो गए, तो उन्हें ‘राज्य’ या देश का दज्ञा हासिल हो गया।

19वीं और 20वीं सदी में एशियाई देशों के लोग भी इनमें से कुछ देशों में आ बसे। आज ये यूरोपीय और एशियाई लोग इन देशों में बहुसंख्यक हैं, और वहाँ के मूल निवासियों की संख्या कम रह गई है। वे शहरों में मुश्किल से ही नजर आते हैं, और लोग भूल गए हैं कि कभी देश का अधिकतर हिस्सा उन्हीं के कब्जे में था, और यह भी कि कई नदियों, शहरों इत्यादि के नाम ‘देसी’ नामों से बने हैं [(मसलन, संयुक्त राज्य अमरीका में ओहियो (Ohio), मिसीसिपी (Mississippi) और सिएटल (Seattle) व कनाडा में सस्कातचेवान (Saskatchewan), ऑस्ट्रेलिया में बॉलानाँना (Wollongong) और परामत्ता (Parramatta)]।

बीसवीं सदी के मध्य तक अमरीका और ऑस्ट्रेलिया की इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में यह बताया जाता था कि किस तरह यूरोपवासियों ने उत्तरी और दक्षिणी अमरीका तथा ऑस्ट्रेलिया की ‘खोज’ की। उनमें यहाँ के मूल बाशिंदों का शायद ही कभी जिक्र होता था, सिवाय यह बताने के कि यूरोपीय लोगों के प्रति उनका रवैया शत्रुतापूर्ण था। पर 1840 के दशक से ही अमरीका में मानविज्ञानियों ने उन पर अध्ययन आरंभ कर दिया था। बहुत बाद में, 1960 के दशक से, इन मूल निवासियों को अपने इतिहास को लिखने या बयान करने (मौखिक इतिहास) के लिए प्रेरित किया गया।

आज इन मूल निवासियों द्वारा लिखे गए इतिहास और कथाकृतियों को पढ़ना संभव है। इन देशों में जानेवाले लोग बहाँ के संग्रहालयों में ‘देसी कला’ की दीर्घाएँ तथा आदिवासी जीवन-शैली को दिखलानेवाले विशेष संग्रहालय भी देख सकते है। संयुक्त राज्य अमरीका में नया अमरीकी इंडियन राष्ट्रीय संग्रहालय खुद अमरीकी इंडियनों की देख-रेख में बना है।

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यूरोपीय साम्राज्यवाद

स्पेन और पुर्तगाल के अमरीकी साम्राज्य (देखिए, विषय 8) का सत्रहवीं सदी के बाद विस्तार नहीं हुआ। तब तक फ्रांस, हाँलैंड और इंग्लैंड जैसे दूसरे देशों ने अपनी व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार करना और अमरीका, अफ्रीका तथा एशिया में अपने उपनिवेश बसाना शुरू कर दिया;

आयरलौंड भी कमोबेश इंग्लौंड का उपनिवेश ही था, क्योंकि वहाँ बसे हुए ज्यादातर भूस्वामी अंग्रेज्ञ ही थे।

अठारहवीं सदी से यह बहुत साफ्र–साफ्र दिखने लगा कि यद्यपि मुनाफ्रे की संभावना ने ही लोगों को यहाँ उपनिवेश बसाने के लिए प्रेरित किया था, लेकिन जो नियंत्रण स्थापित किया गया, उसकी ‘प्रकृति’ में महत्वपूर्ण विविधताएँ थी।

दक्षिण एशिया में व्यापारिक कंपनियों ने अपने को राजनीतिक सत्ता का रूप दिया, स्थानीय शासकों को हराया और अपने इलाके का विस्तार किया। उन्होंने पुरानी सुविकसित प्रशासकीय व्यवस्था को जारी रखा और भूस्वामियों से कर वसूलते रहे। बाद में उन्होंने व्यापार को सुगम बनाने के लिए रेलवे का निर्माण किया, खदानें खुद्वाई और बड़े-बड़े बाग्गान स्थापित किए।

दक्षिणी अफ्रीका को छोड़ कर शेष पूरे अफ्रीका में यूरोपीय लोग सर्वत्र समुद्र तटों पर ही व्यापार करते रहे। 19वीं सदी के आखिरी दौर में ही वे अंदरूनी इलाकों में जाने का साहस कर सके। इसके बाद कुछ यूरोपीय मुल्कों के बीच अपने उपनिवेशों के रूप में अफ्रीका का बॉट्वारा करने का समझौता हुआ।

‘सेटलर’ (Settler/आबादकार) शब्द दक्षिण अफ्रीका में डच के लिए, आयरलौंड, न्यूज़ीलौंड और ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश के लिए और अमरीका में यूरोपीय लोगों के लिए इस्तेमाल होता है। इन उपनिवेशों की राजभाषा अंग्रेज्ञी थी (कनाडा को छोड़ कर, जहाँँ प्रांसीसी भी एक राजभाषा है)।

'नयी दुनिया' के देशों को यूरोपवासियों द्वारा दिए गए नाम

‘अमरीका’पहली बार अमेरिगो वेसपुकी (1451-1512) का यात्रा-वृत्तांत छपने के बाद प्रयुक्त
‘कनाडा’कनाटा से निकला शब्द (1535 में खोजी ज्ञाक कार्टियर को मिली जानकारी के मुताबिक, ह्यूरों-इरोक्यूइस की भाषा में कनाटा का मतलब था, ‘गाँव’)
‘ऑस्ट्रेलिया’महान दक्षिणी महासागर में स्थित भूमि के लिए सोलहवीं सदी में प्रयुक्त नाम (लातिनी में ‘दक्षिण’ को ऑस्ट्रल कहते है।)
‘न्यूजीलैंड’हाँलैंड के तासमान द्वारा दिया गया नाम, जिसने सबसे पहले 1642 में इन टापुओं को देखा था (डच भाषा में ‘समुद्र’ को ज्ञी कहते है।)

जियोग्राँफिकल डिक्शनरी (पृ. 805–822) में अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के ऐसे सौ से ज्यादा स्थान-नामों की सूची दी गई है, जो ‘न्यू’ से शुरू होते हैं।

उत्तरी अमरीका

उत्तरी अमरीका का महाद्वीप उत्तरधुवीय बृत्त से लेकर कर्क रेखा तक और प्रशांत महासागर से अटलांटिक महासागर तक फैला है। पथरीले पहाड़ों की शृंखला के पश्चिम में अरिज्जोना और नेवाडा की मरुभूमि है। थोड़ा और पश्चिम में सिएरा नेवाडा पर्वत हैं। पूरब में ग्रेट (विस्तृत) मैदानी इलाके, ग्रेट (विस्तृत) झीलें, मिसीसिपी और ओहियो और अप्पालाचियाँ पर्वतों की घाटियाँ हैं। दक्षिण दिशा में मेक्सिको है। कनाडा का 40 फीसदी इलाका जंगलों से ढँका है। कई क्षेत्रों में तेल, गैस और खनिज संसाधन पाए जाते हैं, जिनके चलते संयुक्त राज्य अमरीका और कनाडा में ढेरों बड़े उद्योग हैं। आजकल कनाडा में गेहूँ, मकई और फल बड़े पैमाने पर पैदा किए जाते हैं और मत्स्य-उद्योग बहाँ का एक महत्वपूर्ण उद्योग है।

खनन, उद्योग और बड़े पैमाने की खेती का विकास पिछले 200 सालों में ही यूरोप, अफ्रीका और चीन के आप्रवासियों के हाथों हुआ है। लेकिन यूरोपवासियों की जानकारी में आने से पहले हज्ञारों सालों से उत्तरी अमरीका में लोग रह रहे थे।

मूल निवासी

उत्तरी अमरीका के सबसे पहले बाशिंदे 30,000 साल पहले बेरिंग स्ट्रेट्स के आरपार फैले भूमि-सेतु के रास्ते एशिया से आए, और 10,000 साल पहले आखिरी हिमयुग के दौरान वे और दक्षिण की तरफ़ बढ़े। अमरीका में मिलनेवाली सबसे पुरानी मानव कृति- एक तीर की नोक - 11,000 साल पुरानी है। तकरीबन 5000 साल पहले जब जलवायु में ज्यादा स्थिरता आई, तब आबादी बढ़नी शुरू हुई।

“अमरीका की पूर्वसंध्या (यानी जब यूरोपीय लोग आए और इस महाद्वीप को उन्होंने अमरीका नाम दिया) से ठीक पहले तक विविधता हर जगह पसरी हुई थी। लोग सौ से भी ज्यादा जँबानें बोलते थे। वे शिकार, मछली पकड़ना, संग्रहण, बागवानी और खेती में से जो-जो मुमकिन हो, वह सब आज्ञमाते हुए अपनी जीविका कमाते थे। मिट्री की गुणवत्ता कैसी है और उसके इस्तेमाल तथा देख-भाल के लिए कितने प्रयास की दरकार है, इसी पर जीने के तरीके का उनका चुनाव निर्भर करता था। सांस्कृतिक और सामाजिक पूर्वग्रह के आधार पर कुछ दूसरी चीज़ों तय होती थी। मछली, अनाज, बाग़ के पेड़-पौधे, मांस – इनके अधिशेष हमारे यहाँं ताकतवर, श्रेणीबढ़ समाजों की रचना में मददगार बने, लेकिन वहाँं नहीं। कुछ संस्कृतियाँं सहस्ताब्दियों तक कायम रहीं। . . .”

- विलियम मैकलिश, अमरीका से पहले का दिन

ये लोग नदी घाटी के साथ-साथ बने गाँवों में समूह बना कर रहते थे। वे मछली और मांस खाते थे, और सब्जियाँ तथा मकई उगाते थे। वे अक्सर मांस की तलाश में लंबी यात्राओं पर जाया करते थे। मुख्य रूप से उन्हें ‘बाइसन’ यानी उन जंगली भैसों की तलाश रहती थी, जो घास के मैदानों में घूमते थे। (यह सत्रहवीं सदी से आसान हो गया, जब इन मूल निवासियों ने घुड़सवारी शुरू कर दी। वे घोड़े स्पेनी आबादकारों से खृरीदते थे।) लेकिन वे उतने ही जानवर मारते, जितने की उन्हें भोजन के लिए ज़रूरत होती थी।

'नेटिव' (मूल बाशिंदा) का मतलब होता है ऐसा व्यक्ति, जो अपने मौजूदा निवास-स्थान में ही पैदा हुआ था। बीसवीं सदी के आरंभिक वर्षों तक यह पद यूरोपीय लोगों द्वारा अपने उपनिवेशों के बाशिंदों के लिए इस्तेमाल होता था।

उन्होंने बड़े पैमाने पर खेती करने की कोई कोशिश नहीं की और चूकि वे अपनी आवश्यकताओं से अधिक उत्पाद्न नहीं करते थे, इसलिए उन्होंने केंद्रीय तथा दक्षिणी अमरीका की तरह राजशाही और साम्राज्य का विकास नहीं किया। इलाके को लेकर कबीलों के बीच झगड़े की कुछ मिसालें

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मिलती हैं, पर कुल मिलाकर ज़मीन पर नियंत्रण कोई मुद्धा नहीं था। वे ज़मीन पर अपनी ‘मिल्कियत’ की कोई ज़रूरत महसूस किए बगैर उससे मिलनेवाले भोजन और आश्रय से संतुष्ट थे। उनकी परंपरा की एक महत्वपूर्ण

रंगीन सीपियों को आपस में सिलकर बनायी जाने वाली वेमपुम बेल्ट; किसी समझौते के बाद स्थानीय कबीलों के बीच इसका आदान-प्रदान होता था।

विशेषता थी, औपचारिक संबंध और दोस्तियाँ कायम करना तथा उपहारों का आदान-प्रदान करना। चीज़े उन्हें खरीदने की बजाय उपहार के तौर पर हासिल होती थीं।

उत्तरी अमरीका में अनेक भाषाएँ बोली जाती थीं, हालांकि वे लिखी नहीं जाती थीं। उनका विश्वास था कि समय की गति चक्रीय है, और हर कबीले के पास अपनी उत्पत्ति और इतिहास के बारे में ब्यौरे थे जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते आ रहे थे। वे कुशल कारीगर थे और खूबसूरत कपड़े बुनते थे। वे धरती को पढ़ सकते थे – जलवायु और विभिन्न भू-दृश्यों को वे उसी तरह समझ सकते थे, जैसे पढ़-लिखे लोग लिखी हुई चीज़ों पढ़ते हैं।

यूरोपियनों से मुकाबला

मूल निवासियों के नाम ऐसी चीजों को दिये गये जिनका इन कृबीलों से कोई संबंध नहीं था। डकोटा (हवाईजहाज्ज) चिरोकी (जीप) पोंटिआक (कार) मोहाँक (बाल-कटाई)!

'नयी दुनिया' के मूल बाशिंदों के लिए अंग्रेज़ी में प्रयुक्त पद aborigine – native people of Australia (लौटिन में ऐब का मतलब है, 'से' और ओरिजिन का, 'शुरुआत')

Aboriginal – एक विशेषण, जिसे संज्ञा की तरह इस्तेमाल करने की गृलती अक्सर की जाती है

American Indian/Amerind/Amerindian-उत्तरी और दक्षिणी अमरीका तथा कैरेबियन के मूल निवासी

First Nations peoples – मूल निवासियों के संगठित समूह, जिन्हें कनाडाई सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त थी (1876 के इंडियन्स एक्ट में ‘बैंड्स’ पद का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन 1980 के दशक से ‘नेशन्स’ शब्द प्रयुक्त होने लगा)

indigenous people – ऐसे लोग, जो किसी जगह में हमेशा से रहते आए हैं

native American – उत्तरी और दक्षिणी अमरीका के देसी लोग (यह पद अब बहुप्रचलित है)

‘Red Indian’ – गेहुंए बर्ण के लोग, जिनके निवास-स्थान को कोलंबस ने गृलती से इंडिया समझ लिया था

विस्कान्सिन के विनेबागो कबीले की एक महिला। 1860 के दशक में इस कबीले के लोग नेबरास्का स्थानांतरित कर दिए गए।

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“प्रस्तर की पट्टी पर यह खुदा था कि *होपी यह मानते थे कि उनके पास वापस आने वाले पहले भाई और बहन धरती के पार से कछुओं के रूप में आएँगे। वे इनसान होंगे, पर कछुओं के रूप में आएँगे। इसलिए जब समय आया, तो होपी लोग धरती के उस पार से आनेवाले उन कछुओं का स्वागत करने के लिए एक खास गाँव में इकढुा हुए। वे सुबह-सुबह उठ गए और उन्होने सूयोंदय देखा। उन्होने मरुभूमि के पार निगाह दौढाई और उन्हें बख्टरबंद स्पेनी कॉन्क्वस्टाडोर दिखलाई पड़े, जो धरती के उस छोर से आते कछुओं की तरह लग रहे थे। सो, उन्होने समझा, ये वही हैं जिनका इंतजार था। इसलिए वे स्पेनी इनसान के पास गए और हाथ मिलाने की उम्मीद में अपना हाथ बढाया, लेकिन स्पेनी ने उनके हाथ में कोई सस्ती-सीचीज़ पकड़ा दी। और इससे पूरे उत्तरी अमरीका में यह बात फैल गई कि बहुत कठिन समय आनेवाला है, कि शायद कुछ भाइयों और बहनों ने सभी चीज़ों की पवित्रता को भुला दिया है और इसकी वजह से धरती पर सभी इनसान काफी कष्ट पानेवाले हैं।”

-ली ब्राउन की एक वार्ता से, 1986

सत्रहवीं सदी में दो महीने के कठिन समुद्री अभियान के बाद उत्तरी अमरीका के उत्तरी तट पर पहुँचे यूरोपीय व्यापारियों को यह देख कर सुकून मिला कि वहाँ के स्थानीय लोगों का व्यवहार दोस्ताना और गर्मजोशी-भरा है। दक्षिण अमरीका गए स्पेनियों के विपरीत, जो वहाँ की सोने की प्रचुरता से अभिभृत हो गए थे, ये लोग मछली और रोंएदार खाल के व्यापार के लिए आए थे, जिसमें उन्हें शिकार-कुशल देसी लोगों की ओर से अपेक्षित मदद मिली।

थोड़ा और दक्षिण में, मिसीसिपी के किनारे-किनारे, फ्रांसीसियों ने पाया कि देसी लोग नियमित रूप से जमा होते थे। इसका मक्रसद था, ऐसे हस्तशिल्पों का आदान-प्रदान करना जो किसी खास कबीले में ही बनते थे, या ऐसे खाद्य पदार्थीं का आदान-प्रदान जो अन्य इ्लाकों में उपलब्ध नहीं थे। स्थानीय उत्पादों के बदले में यूरोपीय लोग वहाँं के बाशिंदों को कंबल, लोहे के बर्तन (जिसे वे कभी-कभी अपने मिट्री के पात्रों की जगह इस्तेमाल करते थे), बंदूकें (जो जानवरों को मारने में तौर-धुनष की अच्छी पूरक साबित हुई) और शराब देते थे। वहाँं के बाशिंदों का पहले शराब से परिचय नहीं था। वे जल्दी ही इसकी आदत के शिकार हो गए, जो कि यूरोपीय लोगों के लिए अच्छा साबित हुआ, क्योंकि इसने उन्हें व्यापार के लिए अपनी शर्तें थोपने में सक्षम बनाया। (यूरोपीय लोगों ने उन मूल निवासियों से तंबाकू की आदत ग्रहण की।)

क्यूबेक्रअमरीकी उपनिवेश
1497 में जाँन कैबोट ‘न्यूफाउंडलैंड’ पहुँचा1507 अमेरिगो डे वेसपुकी की ‘टैवेल्स’ प्रकाशित हुई
1534 जैक कार्टियर ने सेंट लॉरिंस नदी के किनारे-किनारे यात्रा की और मूल बाशिंदों से मिला-
1608 फ्रांसीसियों ने क्यूबेक उपनिवेश की खोज की1607 ब्रिटिश लोगों ने वर्जीनिया उपनिवेश की खोज की
1620 ब्रिटिश लोगों ने प्लाइमाउथ (मेसाचुसैट्स में) की खोज की

*होपी अब कैलीफोर्निया के निकट रहने वाले आदिवासी हैं।

पारस्परिक धारणाएँ

अठारहवीं सदी में पश्चिमी यूरोप के लोग ‘सभ्य’ मनुष्य की पहचान साक्षरता, संगठित धर्म और शहरीपन के आधार पर ही करते थे। उन्हें अमरीका के मूल निवासी ‘असभ्य’ प्रतीत हुए। फ्रांसीसी दर्शनशास्त्री ज्यां जैक रुसो जैसे कुछ यूरोपीयों के लिए ऐसे लोग तारीफ़ के काबिल थे, क्योंकि वे ‘सभ्यता’ की विकृतियों से अछूते थे। इसके लिए एक प्रचलित पद था, ‘उदात्त उत्तम जंगली’ (The noble savage)। एक दूसरा नज्गरिया अंग्रेज्जी के कवि विलियम वड्र्सवर्थ की कुछ पंक्तियों में मिलता है। वड्र्सवर्थ और रुसो में से कोई भी किसी अमरीकी मूल निवासी से नहीं मिला था, लेकिन वड्र्सवर्थ ने उनका वर्णन करते हुए कहा कि वे “जंगलांं में” रहते हैं, “जहाँँ कल्पनाशक्ति के पास उन्हें भावसंपन्न करने, उन्हें ऊँचा उठाने या परिष्कृत करने के अवसर बहुत कम हैं”, जिसका मतलब यह कि प्रकृति के निकट रहनेवालों की कल्पनाशक्ति और भावना अत्यंत सीमित होती है !

संयुक्त राज्य अमरीका के तीसरे प्रेसिड्टेंट और वड्स्सवर्थ के समकालीन, थॉमस जैफर्सन ने मूल निवासियों के बारे में ऐसे शब्द कहे हैं, जिन पर आज के समय में कड़ा विरोध ज्ञाहिर किया जाता : “यह अभागी नस्ल, जिसे सभ्य बनाने के लिए हमने इतनी ज़हमत उठाई . . . अपने उन्मूलन का औचित्य सिद्ध करती है।”

*मूल निवासियों की कई लोककथओं में यूरोपीय जनों का मज्ञाक उड़ाया गया था और उनका वर्णन लालची और धूर्त के रूप में किया गया था, लेकिन चृंकि वे काल्पनिक कथाओं की शक्ल में थीं, इसलिए यूरोपीय लोग उनके सही संदर्भ को काफ़ी बाद में जाकर समझ पाए।

यह दिलचस्प है कि एक दूसरे लेखक, वाशिंगटन इरविंग ने, जो वड्सर्ववर्थ से खासे छोटे थे और जो मूल निवासियों से सचमुच मिले थे, उनका वर्णन बिलकुल भिन्न रूप में किया। “जिन इंडियन्स की असली जिंदगी को देखने का मुझे मौका मिला, वे कविताओं में वर्णित अपने रूप से काफ़ी भिन्न हैं। यह सच है कि गोरे लोगों, जिनकी नीयत पर वे भरोसा नहीं करते और जिनकी भाषा भी नहीं समझते, की संगत में रहने पर वे काफ़ी कम बोलते हैं। पर परिस्थितियाँ वैसी ही हों, तो गोरा आदमी भी उन्हीं की तरह अल्पभाषी हो जाता है। ये इंडियन्स जब अपनों के बीच होते हैं, तो वे नकल उतारने के उस्ताद साबित होते हैं और गोरों की नकल उतार कर अपना खूब मनोरंजन करते हैं... वही गोरे, जो समझते हैं कि इंडियन्स को वे अपनी भव्यता और गरिमा के प्रति गहरे आदरभाव से ओत-प्रोत कर चुके हैं। . . . गोरे लोग गरीब इंडियन्स के साथ ऐसे पेश आते हैं (मैं इसका साक्षी हूँ), मानो उनमें और जानवरों में बहुत कम फ़र्क हो।”

मूल बाशिंदे यूरोपीय लोगों के साथ जिन चीज़ों का आदान-प्रदान करते थे, वे उनके लिए दोस्ती में दिए गए ‘उपहार’ थे। दूसरी ओर अमीरी का सपना देखने वाले यूरोपीय लोगों के लिए मछली और रोएँदार खाल ‘माल’ थे, जिसे उन्हें मुनाफ़ा कमाने के लिए यूरोप में बेचना था, इन बेची जानेवाली चीज़ों के दाम, पूर्ति के आधार पर, साल-दर-साल बदलते रहते थे। मूल निवासी इसे समझ नहीं सकते थे – उन्हें सुदूर यूरोप में स्थित ‘बाज्ञार’ का ज़रा भी बोध नहीं था। उनके लिए तो यह सब पहेली की तरह था कि यूरोपीय व्यापारी उनकी चीज़ों के बदले में कभी तो बहुत सारा सामान देते थे और कभी बहुत कम। वे यूरोपीय लोगों के लालच को देख कर भी दुखी होते थे।* प्रचुर मात्रा में रोएँदार खाल हासिल करने के लिए उन्होंने सैकड़ों ऊदबिलावों को हलाल किया था, और मूल बाशिंदे इससे काफ़ी विचलित थे। उन्हें डर था कि जानवर उनसे इस विध्वंस का बदला लेंगे।

शुरुआत में आए यूरोपीय लोगों, जो कि व्यापारी थे, के पीछे-पीछे अमरीका में 'बसने' के लिए भी लोग आए। 17वीं सदी से यूरोपीय लोगों के कुछ समूह ईसाइयत के भिन्न संप्रदाय से ताल्लुक रखने की वजह से उत्पीड़न के शिकार थे (कैथलिक प्रभुत्व के देशों में रहनेवाले प्रोटैस्टेंट, या प्रोटैस्टेंटवाद को राजधर्म का दर्जा देनेवाले देशों के कैथलिक)। उनमें से बहुतेरों ने यूरोप छोड़ दिया और एक नयी जिंदगी शुरू करने के लिए अमरीका चले गए। जब तक वहाँ खाली ज़मीनें थीं, कोई समस्या नहीं आई, लेकिन धीरे-धीरे वे और अंदर, मूल निवासियों के गाँवों की ओर बढ़े। उन्होंने जंगलों की सफ़ाई के लिए अपने लोहे के औज़ारों का इस्तेमाल किया, ताकि खेती की जा सके।

मूल निवासी और यूरोपीय लोग जब जंगल को देखते, तो उनकी निगाह में अलग-अलग चीज़ों आती थीं – मूल निवासियों ने उन रास्तों की पहचान की, जो यूरोपीय लोगों के लिए अदृश्य थे। यूरोपीय लोगों की कल्पना में कटे हुए जंगल की जगह मक्के के खेत उभरते थे। जैफर्सन का सपना एक ऐसे देश का था जो छोटे-छोटे खेतों वाले यूरोपीय लोगों से आबाद था। मूल निवासी – जो अपनी ज़रुरतों के लिए फ़सलें उगाते, न कि बिक्री और मुनाफे के लिए, और जो ज़मीन का ‘मालिक’ बनने को गृलत मानते थे – इस बात को नहीं समझ सकते थे। यही चीज उन्हें जैफर्सन की निगाह में ‘असभ्य’ बनाती थी।

कनाडासंयुक्त राज्य अमरीका
1701क्यूबेक के मूल निवासियों के साथफ्रांसीसियों का समझौता
1763क्यूबेक पर ब्रिटिशों की विजय1781 ब्रिटेन ने संयुक्त राज्य अमरीकाको एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी
1774क्यूबेक एक्ट1783 ब्रिटिश लोगों ने संयुक्त राज्य अमरीकाको मध्य-पश्चिम सौपा
1791कनाडा संवैधानिक एक्ट

क्रियाकलाप 1

यूरोपीय लोगों और अमरीकी मूल निवासियों के मन में एक-दूसरे की जो छवि थी तथा प्रकृति को देखने के जो उनके अलग-अलग तरीके थे, उन पर विचार करें।

मानचित्र 1: संयुक्त राज्य
अमरीका का विस्तार।
मानचित्र 1: संयुक्त राज्य अमरीका का विस्तार।

जिन मुल्कों को हम कनाडा और संयुक्त राज्य अमरीका के नाम से जानते हैं, वे 18वीं सदी के अंत में वजूद में आए। अपने वर्तमान क्षेत्रफल का एक छोटा हिस्सा ही उस समय उनके कब्जे में था। मौजूदा आकार तक पहुँचने के लिए अगले सौ सालों में उन्होंने अपने नियंत्रण वाले इलाके में काफी इज्ञाफ्रा किया। संयुक्त राज्य अमरीका ने कई विशाल क्षेत्रों की खरीद की – उन्होंने दक्षिण में फ्रांस (लुइसियाना परचेज) और रुस (अलास्का) से जृमीन खरीदी, साथ ही, उसने युढ़ में भी ज्ञमीन जीती- दक्षिणी सं.रा.अ. का अधिकतर हिस्सा मेक्सिको से ही जीता गया है। किसी के मन में यह खयाल नहीं आया कि उन इलाकों में रहने वाले मूल बाशिंदों की भी रज्ञामंदी ली जाए। संयुक्त राज्य अमरीका की पश्चिमी ‘सरहद’ (फ्रांटियर) खिसकती रहती थी, और जैसे-जैसे यह खिसकती जाती, मूल निवासी भी पीछे खिसकने के लिए बाध्य किए जाते थे।

कनाडासंयुक्त राज्य अमरीका
1803फ्रांस से लुइसियाना की खरीद
गए1825-58 संयुक्त राज्य अमरीका के मूल निवासी आरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाए
1837फ्रांसीसी कनाडाई विद्रोह1832जस्टिस मार्शल का फैसला
1840उच्चतर और निम्नतर कनाडा की कैनेडियन यूनियन1849अमरीकी गोल्ड रश
1859कनाडा गोल्ड रश1861-65अमरीकी गृहयुढ़
1867कनाडा महासंघ1865-90अमरीकी इंडियन युढ़
1869-85कनाडा में मेटिसों द्वारा रेड रिवर विद्रोह1870पारमहाद्वीपीय रेलवे
1876कनाडा इंडियन्स एक्ट1890अमरीका में जंगली भैंसे का प्रायः उन्मूलन
1885पारमहाद्वीपीय रेलवे के जृरिए पूर्वी और पश्चिमी तटों का जुंड़ाव1892अमरीकी फ्रंटियर का ‘अंत’

19वीं सदी में अमरीका के भूदृश्य में जँबर्दस्त बदलाव आए। ज़मीन के प्रति यूरोपीय लोगों का रवैया मूल निवासियों से अलग था। ब्रिटेन और फ्रांस से आए कुछ प्रवासी ऐसे थे, जो छोटे बेटे होने के कारण पिता की संपत्ति के उत्तराधिकारी नहीं बन सकते थे और इसी वजह से अमरीका में ज़मीन के मालिक बनना चाहते थे। बाद में जर्मनी, स्वीडन और इटली जैसे मुल्कों से ऐसे आप्रवासी उमड़ पड़े, जिनकी ज़मीनें बड़े किसानों के हाथ चली गई थीं और वे ऐसी ज़मीन चाहते थे, जिसे अपना कह सकें। पोलैंड से आए लोगों को प्रेयरी (prairie) चारागाहों में काम करना अच्छा लगता था, जो उन्हें अपने घरों के स्टेपीज़ (घास के मैदानों) की याद दिलाते थे, और यहाँँ बहुत कम कीमत पर बड़ी संपत्तियाँँ खरीद पाना उन्हें बहुत रास आ रहा था। उन्होंने ज़मीन की सफाई की और खेती का विकास किया। उन्होंने ऐसी फृसलें (धान और कपास) उगाई, जो यूरोप में नहीं उगाई जा सकती थीं और इसीलिए वहाँँ उन्हें ऊँचे मुनाफे पर बेचा जा सकता था। अपने विस्तृत खेतों को जंगली जानवरों – भेड्डिए और पहाड़ी शरों – से बचाने के लिए उन्होंने शिकार के ज़रिए उनका सफाया ही कर दिया। 1873 में कॉंटीले तारों की खोज के बाद ही वे अपने को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर पाए।

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घर के बाहर काम करने के लिहाज़ से दक्षिणी इलाके की जलवायु यूरोपीय जनों के लिए काफ़ी गर्म थी, और दक्षिण अमरीकी उपनिवेशों का यह अनुभव रहा था कि दास बनाए गए मूल निवासी बहुत बड़ी संख्या में मौत के शिकार हुए थे। इसीलिए बागान-मालिकों ने अफ़्रीका से दास खृरीदे। दासप्रथा-विरोधी समूहों के विरोध के चलते दासों के व्यापार पर तो रोक लग गई, लेकिन जो अफ़्रीकी संयुक्त राज्य अमरीका में थे, वे और उनके बच्चे दास ही बने रहे।

संयुक्त राज्य अमरीका के उत्तरी राज्यों ने, जहाँ अर्थतंत्र बग़ानों पर (और इसीलिए दासप्रथा पर) टिका हुआ नहीं था, दासप्रथा को खत्म करने के पक्ष में दलीलें दीं और उसे एक अमानवीय प्रथा बताया। 1861–65 में दासप्रथा को जारी रखनेवाले और उसके खात्मे की वकालत करने वाले राज्यों के बीच युढ्धे हुआ। दासता विरोधियों की जीत हुई। दासप्रथा खत्म कर दी गई, हालांकि अफ्रीकी मूल के अमरीकियों को नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए अपने संघर्ष में विजय 20वीं सदी में आकर ही मिल पाई और तभी स्कूलों तथा ट्रेनों-बसों में उन्हें अलग रखने की व्यवस्था समाप्त हुई।

कनाडाई सरकार के सामने एक समस्या थी, जो लंबे समय तक हल नहीं हो पाई थी, और जो मूल निवासियों के सवाल के मुकाबले ज्यादा जँरूरी प्रतीत होती थी – 1763 में ब्रिटिश लोगों ने फ्रांस के साथ हुई लड़ाई में कनाडा को जीता था। वहाँ फ्रांसीसी आबादकार लगातार स्वायत्त राजनीतिक दर्जौं की मांग कर रहे थे। 1867 में कनाडा को स्वायत्त राज्यों के एक महासंघ के रूप में संगठित करके ही इस समस्या का हल निकल पाया।

कोलोरेडो का एक पशु-फार्म।

अपनी जमीन से मूल बाशिंदों की बेदखली

जैसे-जैसे संयुक्त राज्य अमरीका ने अपनी बस्तियों का विस्तार किया, ज़मीन की बिक्री के समझौते पर दस्तखृत कराने के बाद मूल निवासियों को वहाँं से हटने के लिए प्रेरित या बाथ्य किया गया। उन्हें दी गई कीमतें बहुत कम थी, और इसके भी उदाहरण मिलते हैं कि अमरीकियों (संयुक्त राज्य अमरीका में रहनेवाले यूरोपीय लोगों के लिए प्रयुक्त पद) ने धोखे से उनसे ज्यादा जमीन ले ली या पैसा देने के मामले में वायदाखिलाफ़ी की।

उच्च अधिकारी भी मूल बाशिंदों की बेदखृली को गृलत नहीं मानते थे। यह जॉर्जिया के एक प्रकरण में देखा जा सकता है। जॉर्जिया संयुक्त राज्य अमरीका का एक राज्य है। यहाँ के अधिकारियों की द्लील थी कि चिरोकी कबीला राज्य के कानून से शासित तो होता है, लेकिन वे नागरिक अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकते। (ध्यान देने की बात है कि मूल निवासियों में से चिरोकी ही ऐसे थे, जिन्होने अग्रेजी सीखने और अमरीकी जीवन-शैली को समझने की सबसे ज्यादा कोशिश की थी, और तब भीं उन्हें नागरिक अधिकार नहीं दिए गए।)

1832 में संयुक्त राज्य के मुख्य न्यायाधीश, जॉन मार्शल ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि चिरोकी कबीला “एक विशिष्ट समुदाय है और उसके स्वत्वाधिकार वाले इलाके में जॉर्जिया का कानून लागू नहीं होता” और वे कुछ मामलों में संप्रभुतासंपन्न हैं। संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति, एंड्डिउ जैकसन, जिनकी छवि आर्थिक और राजनीतिक पक्षपात के खिलाफ़ लड़नेवाले की थी, इंडियन्स का मामला आने पर बह बिलकुल उलट गए। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की इस बात का मान रखने से इनकार कर दिया और चिरोकियों को अपनी जृमीन से हाँ़क कर विस्तृत अमरीकी मरुभूमि (Great American Desert) की और खदेड्ने के लिए अमरीकी फौज भेज दी। जिन 15000 लोगों को बहाँं से हटने पर मजबूर किया गया, उनमें से एक चौथाई अपने ‘आँसुओं की राह’ (Trail of Tears) के सफर में ही मर-खप गए।

जिन लोगों ने पहले से रहनेवाले कबीलों की ज़मीनें ले लीं, वे इस आधार पर अपने को उचित ठहराते थे कि चूँकि मूल निवासी जमीन का अधिकतम इस्तेमाल करना नहीं जानते, इसलिए वह उनके कब्जे में रहनी ही नहीं चाहिए। वे इस बिना पर भी मूल निवासियों की आलोचना करते कि वे आलसी हैं- इसलिए बाजार हेतु उत्पादन करने में अपने शिल्प-कौशल का इस्तेमाल नहीं करते हैं, अंग्रेजी सीखने और ‘ढंग के’ कपड़े (जिसका मतलब था, यूरोपीयों जैसे कपड़े) पहनने में उनकी दिलचस्पी नहीं है। कुल मिलाकर उनका कहना यह था कि वे ‘मर-खपने’ लायक ही हैं। खेती की जमीन निकालने के लिए प्रेयरीज्न साफ़ की गई, और जंगली भैंसों को मारा गया। एक फ्रांसीसी आगंतुक ने लिखा, “आदिम जानवरों के साथ-साथ आदिम मनुष्य लुप्त हो जाएगा”।

क्रियाकलाप 2
इन दो तरह के जनसांख्यिक आंकड़ों पर टिप्पणी करें
सं.रा.अ. - 1820स्पेनी अमरीका - 1800
मूल निवासी6 लाख75 लाख
गोरे90 लाख33 लाख
मिले-जुले यूरोपीय1 लाख53 लाख
काले19 लाख8 लाख
कुल1 करोड़ 16 लाख1 करोड़ 69 लाख

इस बीच मूल निवासी पश्चिम की ओर धकेल दिए गए थे। उन्हें 'स्थायी तौर पर अपनी' ज़मीन दे दी गई थी, लेकिन अक्सर उन्हें उस जगह से भी बेदखृल होना पड़ता, जब उनकी ज़मीन के अंदर सीसा, सोना या तेल जैसे खनिज के होने का पता चलता। प्रायः कई समूहों को मूलतः किसी एक के कञ्जे वाली जमीन में ही साझा करने के लिए बाध्य किया जाता, जिससे उनके बीच झगड़े हो जाते थे। मूल निवासी छोटे इलाकों में कैद कर दिए गए थे, जिन्हें ‘रिज़र्वेशन्स’ (आरक्षण) कहा जाता था। ये प्रायः ऐसी ज़मीन होती थी, जिसके साथ उनका पहले से कोई रिश्ता नहीं होता था। ऐसा नहीं है कि अपनी ज़मीनें उन्होंने बिना लड़े छोड़ दी हों। संयुक्त राज्य की फौज ने 1865 से 1890 के बीच विद्रोहांं की एक पूरी श्रृंखला का दमन किया था। कनाडा में 1869 से 1885 के बीच मेटिसों (यूरोपीय मूल निवासियों के वंशज) के सशस्त्र विद्रोह हुए थे। लेकिन इन लड़ाइयों के बाद उन्होंने हार मान ली।

1854 में, संयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति को मूल निवासियों के एक नेता, सिएटल के प्रधान का खत मिला। राष्ट्रपति ने प्रधान से एक समझौते पर दस्तखत करने के लिए कहा था। समझौते के अनुसार सिएटल के लोगों की रिहाइशी जमीन का एक बड़ा हिस्सा अमरीकी सरकार को सौपा जाना था। प्रधान ने जवाब दिया :

“आप आकाश को, भूमि की ऊष्मा को कैसे खरीद या बेच सकते हैं? यह खयाल ही हम लोगों के लिए बहुत अजूबा है। अगर आप हवा की ताज़गी और पानी की चमक के स्वामी नहीं हैं, तो आप उसे खरीद कैसे सकते हैं? धरती का हर हिस्सा मेरी जनता के लिए पुण्य-पावन है। चीड़ की चमकती हुई हर सुई, हर बालुका-तट, घने जंगलों में पसरा हर कुहरा, सफाई करनेवाला और गुनगुनाने वाला हर कीड़ा मेरे लोगों की स्मृत्ति और अनुभवों में पवित्र है। पेड़ों में दौड़ता हुआ रस ‘रेड मैन’ की स्मृतियों का वाहक है। . . . .

इसलिए वाशिंगटन में बैठा महान मुखिया (ग्रेट चीफ़) जब यह संदेश भेजता है कि वह हमारी ज़मीन खरीदना चाहता है, तो वह हमसे कुछ ज्यादा ही उम्मीद करता है। महान मुखिया का संदेश है कि वह हमारे लिए कोई जगह मुकर्श कर देंगे, ताकि हम आराम से रह सकेंगे। वह हमारे पिता होंगे और हम उनके बच्चे होंगे। इसलिए हम इस ज़मीन को खरीदे जाने के प्रस्ताव पर विचार करेंगे। लेकिन यह आसान न होगा। क्योंकि यह ज़मीन हमारे लिए पावन है। धाराओं और नदियों में बहता हुआ चमकीला पानी सिफ् पानी नहीं है, वह हमारे पुरखों का लहू है। अगर हम आपको ज़मीन बेच दें, तो आपको यह याद रखना होगा कि वह पवित्र है और अपने बच्चों को सिखाना होगा कि वह पवित्र है और उसके तालाबों के निथरे हुए पानी में दिखता हर भूतहा प्रतिबिंब मेरी जनता के जीवन की घटनाओं और स्मृतियों का बयान करता है। पानी की कलकल मेरे पिता के पिता की आवाज़ है . . .”

गोल्ड रश और उद्योगों की वृद्धि

यह उम्मीद हमेशा से की जाती थी कि उत्तरी अमरीका में धरती के नीचे सोना है। 1840 में संयुक्त राज्य अमरीका के कैलीफौरिन्या में सोने के कुछ चिह्न मिले। इसने ‘गोल्ड रश’ को जन्म दिया। यह उस आपाधापी का नाम है, जिसमें हज्ञारों की संख्या में आतुर यूरोपीय लोग चुटकियों में अपनी तकदीर सँवार लेने की उम्मीद में अमरीका पहुँचे। इसके चलते पूरे महाद्वीप में रेलवे-लाइनों का निर्माण हुआ जिसके लिए हज्ञारों चीनी श्रमिकों की नियुक्ति हुई। संयुक्त राज्य अमरीका रेलवे का काम 1870 में पूरा हुआ और कनाडा की रेलवे का 1885 में। एड्डिउ कार्नेगी ने, जो स्कॉटलैंड से आया हुआ एक गृरीब आप्रवासी और सं.रा.अ. के पहले करोड़पति उद्योग-स्वामियों में से एक

मानवशास्त्र

यह महत्वपूर्ण है कि इसी समय (1840 के दशक से) उत्तरी अमरीका में ‘मानवशास्त्र’ विषय (जो कि फ्रांस में विकसित हुआ था) की शुरुआत हुई। यह शुरुआत स्थानीय ‘आदिम’ समुदायों और यूरोप के ‘सभ्य’ समुदायों के बीच के अंतर के अध्ययन के लिए हुई थी। कुछ मानवशास्त्रियों ने यह स्थापित किया कि जिस तरह यूरोप में ‘आदिम’ लोग नहीं पाए जाते, उसी तरह अमरीकी मूल निवासी भी ‘समाप्त हो जाएँगे’।

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मूल निवासी का एक घर, 1862 पुरातत्वविदों ने इसे पहाड़ों के बीच से ले जाकर व्योमिंग के एक संग्रहालय में रखा।

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था, कहा – “पुराने राष्ट्र घोंघे की चाल से सरकते हैं, नया गणराज्य किसी एक्सप्रेप्त की गति से दौड़ रहा है।”

इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के एक खास समय में होने के पीछे एक कारण यह भी था कि छोटे खेतिहर बड़े किसानों के हाथों अपनी ज़मीन से वंचित होकर कारखानों की नौकरी की ओर मुड़ रहे थे (देखिए विषय 9)। उत्तरी अमरीका में उद्योग कई अलग तरह के कारणों से विकसित हुए – रेलवे के साज़-सामान बनाने के लिए ताकि दूर-दूर की जगहों को तीव्र परिवहन के द्वारा जोड़ा जा सके, और ऐसे यंत्रों का उत्पादन करने के लिए जिनसे बड़े पैमाने की खेती को आसान बनाया जा सके। सं.रा.अ. और कनाडा, दोनों जगहों पर औद्योगिक नगरों का विकास हुआ, और कारखानों की संख्या तेजी से बढ़ी। 1860 में

सं.रा.अ. का अर्थतंत्र अविकसित अवस्था में था। 1890 में वह दुनिया की अग्रणी औद्योगिक शक्ति बन चुका था।

बड़े पैमाने की खेती का भी विस्तार हुआ। बड़े-बड़े इलाके साफ़ किए गए और खेतों के रूप में उनके टुकड़े किए गए। 1890 तक आते-आते जंगली भौंसों का लगभग

पूरी तरह उन्मूलन किया जा चुका था, और इस तरह शिकार बाली वह जीवनचयां भी समाप्त हुई, जिसे मूल बाशिंदे सदियों से जीते आ रहे थे। 1892 में संयुक्त राज्य अमरीका का महाद्रीपीय

विस्तार पूरा हो चुका था। प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर के बीच का क्षेत्र राज्यों में विभाजित किया जा चुका था। अब कोई ‘फ्रंटियर’ नहीं रहा, जो कई दशकों तक यूरोपीय आबाद्कारों को पश्चिम की और खींचता रहा था। कुछ ही वर्षों के भीतर संयुक्त राज्य अमरीका हवाई और फिलिपीन्स में अपने उपनिवेश बसा रहा था। वह एक साम्राज्यवादी शक्ति बन चुका था।

संवैधानिक अधिकार

आबादकारों ने 1770 के दशक में आजादी के अपने संघर्ष में ‘लोकतांत्रिक भावना’ के जिस नारे के तहत एकजुटता

बनाई थी, वही पुरानी दुनिया

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ऊपरः सं.रा.अ. द्वारा

आप्रवासियों का स्वागत, रंगीन छपाई, 1909

नीचेः प्रेयरी पर एक पशु-फार्म जो कि गरीब यूरोपीय

आप्रवासी का सपना होता था, कैमराचित्र

की राजशाही और अभिजात तंत्र के खिलाफ्र संयुक्त राज्य अमरीका की पहचान बनी। उनके लिए यह भी अहम था कि उनके संविधान में व्यक्ति के ‘संपत्ति के अधिकार’ को शामिल किया गया, जिसे रह करने की छूट राज्य को नहीं थी।

लेकिन लोकतांत्रिक अधिकार (राष्ट्रपति और कांग्रेस के प्रतिनिधियों के चुनाव में बोट देने का अधिकार) और संपत्ति का अधिकार, दोनों सिफ् गोरे लोगों के लिए थे। एक कनाडाई मूल निवासी, डेनियल पॉल ने 2000 में इस और ध्यान खींचा कि अमरीकी स्वाधीनता संग्राम और फ्रांसीसी क्रांति के समय लोकतंत्र के पक्ष में आवाज़ बुलंद करने वाले थॉमस पाइन ने “समाज का संगठन करने के लिए इंडियन्स का इस्तेमाल एक मॉडल के तौर पर किया था।” इसके आधार पर उसने दलील दी कि “अमरीकी मूल निवासियों ने मिसाल बन कर यूरोपीय लोगों के लंबे लोकतंत्रोन्मुखी आंदोलन के बीज बोये थे”। (वी वर नॉट द सेवेजेज, पृष्ठ 333)

बदलाव की लहर...

1920 के दशक तक संयुक्त राज्य अमरीका और कनाडा के मूल निवासियों के लिए कुछ भी बेहतर होना शुरू नहीं हुआ। संयुक्त राज्य अमरीका की समस्त जनता को प्रभावित करनेवाली बड़ी आर्थिक मंदी से कुछ साल पहले, 1928 में समाजवैज्ञानिक लेवाइस मेरिअम के निर्देशन में संपन्न हुआ एक सर्वेक्षण प्रकाशित हुआ – दि प्राँब्लम ऑफ इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन – जिसमें रिजर्वेशन्स में रह रहे मूल निवासियों की स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं की दरिद्वता का बड़ा ही दारुण चित्र प्रस्तुत किया गया था।

गोरे अमरीकियों के मन में उन मूल निवासियों के प्रति सहानुभृति जागी, जिन्हें अपनी संस्कृति को पूरा-पूरा निभाने से रोका जाता था और साथ-ही-साथ नागरिकता के लाभों से भी बंचित रखा जाता था। इसने संयुक्त राज्य अमरीका में एक युगांतरकारी कानून को जन्म दिया – 1934 का इंडियन रीऑर्गनाईज्जेशन एक्ट – जिसके ढ्वारा रिज़र्वेशन्स में मूल निवासियों को जमीन खरीदने और क्रृष्ण लेने का अधिकार हासिल हुआ।

1950 और 60 के दशकों में संयुक्त राज्य और कनाडा की सरकारों ने मूल बाशिंदों के लिए किए गए विशेष प्रावधानों को खत्म करने पर इस उम्मीद से विचार किया, कि इससे वे ‘मुख्यधारा में शामिल’ होंगे, अर्थात वे यूरोपीय संस्कृति को अपनाएँगे। लेकिन मूल बाशिंदे ऐसा नहीं चाहते थे। 1954 में अनेक मूल निवासियों ने अपने द्वारा तैयार किए गए ‘डिक्लेरेशन ऑफ़ इंडियन राइट्स’ में इस शर्त के साथ सं.रा.अ. की नागरिकता स्वीकार की कि उनके रिज़र्वेशन्स वापस नहीं लिए जाएँगे और उनकी परंपराओं में दखलंदाजी नहीं की जाएगी। कुछ ऐसी ही चीज़े कनाडा में भी हुई। 1969 में सरकार ने घोषणा की कि वह “आदिवासी अधिकारों को मान्यता नहीं” देगी। मूल निवासियों ने सुसंगठित तरीके से इसका विरोध करते हुए धरना-प्रदर्शनों और वाद-विवादों की एक पूरी श्रृंखला आयोजित की। 1982 में एक संवैधानिक धारा के तहत मूल निवासियों के मौजूदा आदिवासी अधिकारों और समझौता-आधारित अधिकारों को स्वीकृति मिलने तक यह सवाल हल नहीं हो पाया। परन्तु इन अधिकारों की बारीकियों के बारे में बहुत से फैसले बाकी हैं पर अब यह बहुत साफ़ है कि दोनों मुल्कों के मूल निवासियों ने, 18वीं सदी के मुकाबले अपनी संख्या बहुत कम हो जाने के बावजूद, अपनी संस्कृति को निभाने के अपने अधिकारों को लेकर पुरजोर दावेदारी की है और, खास तौर से कनाडा में, अपनी पवित्र भूमि पर अधिकार की भी दावेदारी की है। ऐसी दावेदारी 1880 के दशक में उनके पुरखे नहीं कर सकते थे।

महान जर्मन दार्शनिक कार्ल माकर्स (1818–83) ने अमरीकी फ्रॉटियर को “आखिरी सकारात्मक पृँजीवादी यूटोपिया” के रूप में देखा है . . . “सीमाहीन प्रकृति और स्थान, जिसके अनुरूप अपने को ढालती है मुनाफे की सीमाहीन चाहत।”

- 'बस्तियात एंड कैरे', ग्रुद्रिसे'

क्रियाकलाप 3

अमरीकी इतिहासकार होवर्ड स्पॉडेक के इस कथन पर टिप्पणी करें: ‘ अमरीकी क्रांति का जो प्रभाव (गोरे) आबादकारों के लिए था, उससे ठीक विपरीत मूल निवासियों के लिए था – फैलाव सिकुट्न बन गया, लोकतंत्र तानाशाही बन गया, संपन्नता विपन्नता बन गई, और मुक्ति कैद बन गई।

ब्रिटिश राज के अधीन भारतीयमनमाने ढंग से इन पर कर लगाये गए; उन्हें बराबर नहीं माना गया(तर्क यह दिया गया – कि अभी प्रतिनिधित्व की सरकार की ज्ञिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं है)
अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासीइन्हें नागरिक के रूप में नहीं देखा गया; असमान माना गया(तर्क यह दिया गया – कि ये ‘पिछड़े हुए आदिमानव’ हैं जिनकी कोई स्थानबढ़ कृषि नहीं थी; भविष्य के बारे में न ज्यादा सोचते थे न बचत करते थे; उनके पास शहर नहीं थे)
अमरीका में अफ्रीकी मूल के दासव्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित, बराबर नहीं माना गया (तर्क – “‘दासप्रथा उनकी अपनी सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा’” है, काले लोग निकृष्ट हैं)

आस्ट्रेलिया

उत्तरी और दक्षिण अमरीका की तरह ही ऑस्ट्रेलिया में भी मानव निवास का इतिहास लंबा है। शुरुआती मनुष्य या आदिमानव जिन्हें 'एबॉरिजिनीज़' कहते हैं(यह कई भिन्न-भिन्न समाजों के लिए प्रयुक्त एक सामान्य नाम है) ऑस्ट्रेलिया में 40,000 साल पहले आने शुरु हुए (संभवतः उससे भी पहले से)। वे ऑस्ट्रेलिया के साथ एक भू-सेतु से जुड़े न्यू गिनी से आए थे। मूल निवासियों की अपनी परंपराओं के हिसाब से वे ऑस्ट्रेलिया आए नहीं थे, बल्कि हमेशा से यहीं थे। बीती सदियाँ 'स्वप्नकाल' कही जाती थीं। इस कथन को समझना यूरोपीय लोगों के लिए मुशिकल था, क्योंकि इसमें अतीत और वर्तमान का अंतर धुँधला हो जाता था।

18बीं सदी के आखिरी दौर में ऑस्ट्रेलिया में मूल निवासियों के 350 से 750 तक समुदाय थे। हर समुदाय की अपनी भाषा थी (इनमें से 200 भाषाएँ आज भी बोली जाती हैं)। देसी लोगों का एक और विशाल समूह उत्तर में रहता है(इसे टॉरस स्ट्रेट टापूवासी कहते हैं। 'एबॉरिजिनी' शब्द इनके लिए इस्तेमाल नहीं होता, क्योंकि यह माना जाता है कि वे कहीं और से आए हैं और एक अलग नस्ल के हैं। 2005 में कुल मिला कर वे ऑस्ट्रेलिया की आबादी का 2.4 फौसदी हिस्सा थे।

ऑस्ट्रेलिया की आबादी बहुत छितरायी हुई है, और आज भी वहाँ के ज्यादातर शहर समुद्रतट के साथ-साथ बसे हैं (जहाँ 1770 में ब्रिटिश लोग पहली बार पहुँचे थे), क्योंकि बीच का इलाका शुष्क मरुभूमि है।

1606डच यात्रियों ने ऑस्ट्रेलिया को देखा
1642तास्मान इस टापू पर पहुँचा। बाद में टापू का नाम तस्मानिया रखा गया
1770जेम्स कुक बाँटनी खाड़ी पहुँचता है, जिसका नामकरण हुआ, न्यू साउथ वेल्स
1788ब्रिटेन के दंडितों की बस्ती बनायी गई। सिडनी की स्थापना हुई
मानचित्र 2:
आस्ट्रेलिया।
मानचित्र 2: आस्ट्रेलिया।

ऑस्ट्रेलिया में यूरोपीय आबादकारों, मूल निवासियों और ज्ममीन के बीच आपसी रिश्तों का किस्सा उत्तरी और दक्षिणी अमरीका के किस्से से कई बिंदुओं पर मिलता-जुलता है, हालांकि इसकी शुरुआत 300 साल बाद हुई। मूल निवासियों के साथ हुई मुलाक्कात को लेकर कैप्टन कुक और उसके जत्थे के आरंभिक ब्यौरे मूल निवासियों के दोस्ताना व्यवहार के बारे में उत्साहपूर्ण हैं। लेकिन जब एक मूल निवासी ने कुक की हत्या कर दी – हवाई में, ऑस्ट्रेलिया में नहीं – तब ब्रिटिशों का रवैया पूरी तरह से उलट गया। जैसा कि प्रायः होता आया है, इस तरह की एक घटना औपनिवेशिक ताकतों द्वारा बाद में दूसरों के खिलाफ़ किए गए हिंसक व्यवहार का औचित्य साबित करने के लिए इस्तेमाल की गई।

सिडनी के इलाके का एक वर्णन, 1790

“ब्रिटिशों की उपस्थिति ने आदिवासियों के उत्पादन को नाटकीय छंग से अस्त-व्यस्त कर दिया। हज्जारों भूर्खे मुखों के आने से, जिनके पीछे-पीछे सैकड़ों और आए, स्थानीय खाद्य संसाधनों पर अभूतपूर्व दबाव पडा।

तो दारूक लोगों ने इन सबके बारे में क्या सोचा होगा? उनके लिए पवित्र स्थानों का इतने बड़े पैमाने पर विनाश और अपनी जृमीन के प्रति विचित्र, हिंसक बरताव समझ से परे था। ये नवागंतुक बिना वजह पेड़ों को काटते जाते। यह बिना बजह इसलिए जान पड़ता था कि उन्हें न डोंगी बनानी थीं, न जंगली शहद इकट्टा करना था और न ही जानवर पकड़ने थे। पत्थरों को हटाकर उनका चट्टा लगा दिया गया, मिट्री खोद कर उसे आकार देकर पका दिया गया, जृमीन में गड़े बना दिए गए, बहुत भारी-भरकम इमारतें तैयार कर दी गई। पहले-पहल उन्होंने इस सफाई की तुलना किसी पवित्र आनुष्ठानिक भूमि के निर्माण से की होगी . . . संभवतः उन्होंने सोचा कि एक विशाल कर्मकांडी जलसा होने जा रहा है और यह एक खतरनाक धंधा होगा, जिससे उन्हें पूरी तरह दूर रहना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं कि इसके बाद दारूक उन बस्तियों से बच कर रहने लगे, और राजकीय अपहरण ही उन्हें बापस लाने का एकमात्र तरीका था।"

- (पी.ग्रिमशॉ, एम.लेक, ए.मैक्याथ, एम.क्वार्टली, क्रिएटिंग ए नेशन)

यूरोपीय लोगों के आगमन को सभी मूल बाशिंदों ने खतरे की तरह नहीं देखा। वह यह अनुमान नहीं लगा पाए कि 19वीं और 20वीं सदी के दरम्यान कीटाणुओं के असर से, अपनी ज़मीनें खोने के चलते और आबादकारों के साथ हुई लड़ाइयों में लगभग 90 फ़ीसदी मूल बाशिंदों को अपनी जान गाँवानी पड़ेगी। ब्राजील में पुर्तगाली कैदियों को बसाने का प्रयोग तब जाकर बंद कर दिया गया, जब उनके हिंसक बरताव ने मूल निवासियों को प्रतिहिंसा पर उतारू कर दिया। ब्रिटिशों ने स्वतंत्र होने तक अमरीकी उपनिवेशों में यही तरीका अपनाया, और फिर उसे ऑस्ट्रेलिया में भी जारी रखा। ऑस्ट्रेलिया के ज्यादातर शुरुआती आबादकार इंग्लैंड से निर्वासित होकर आए थे और उनके कारावास पूरा होने पर ब्रिटेन वापस न लौटने की शर्त पर उन्हें ऑस्ट्रेलिया में स्वतंत्र जीवन जीने की इजाजृत दे दी गई। अपने क्षेत्र से इतने भिन्न इस इ्लाके में किसी भी तरह के सहारे के बगैर जीवनयापन करने के लिए उन्होने खेती के लिए ली गई ज़मीन से मूल निवासियों को निकाल बाहर करने में कोई झिझक नहीं दिखलाई।

आस्ट्रेलिया का विकास
1850आस्ट्रेलियाई बस्तियों को स्वशासन का अधिकार
1851चीनी कुलियों का आप्रवास। 1855 में कानून बना कर इसे रोका गया
1851-1961गोल्ड रश
1901छह राज्यों को लेकर ऑस्ट्रेलियाई संघ का निर्माण
1911कैनबरा राजधानी बनाई गई
1948-7520 लाख यूरोपीय लोग ऑस्ट्रेलिया में आकर बस गए

क्रियाकलाप 4

1911 में यह घोषणा हुई कि नयी दिल्ली और कैनबरा को क्रमशः ब्रिटिश भारत और ऑस्टैलियाई राष्ट्रमण्डल की राजधानी बनाया जाएगा। उस समय में इन देशों के मूल निवासियों की राजनीतिक स्थितियों की तुलना कीजिए और उसकी विषमता को रेखांकित कीजिए।

यूरोपीय बस्तियों के तहत ऑस्ट्रेलिया का आर्थिक विकास अमरीका जितना भिन्नतापूर्ण नहीं था। भेड़ों के विशाल फ़ार्म और खानें उसके पश्चात, मदिरा बनाने हेतु अंगूर के बाग़ा और गेहूँ की खेती एक लंबी अवधि में और काफ़ी परिश्रम से विकसित हो पाई, इन्हांने ऑस्ट्रेलिया की संपन्नता की बुनियाद तैयार की। जब राज्यों को मिलाया गया और 1911 में ऑस्ट्रेलिया की एक राजधानी बनाने की योजना चल रही थी, तब उसके लिए ‘वूलक्हीटगोल्ड’ (Woolwheat gold) नाम का सुझाव दिया गया था! अंततः उसका नाम कैनबरा रखा गया जो एक स्थानीय शब्द कैमबरा (Kamberra) से बना है, जिसका अर्थ है, ‘सभा-स्थल’)।

कुछ मूल निवासी ऐसे सख्त हालात में खेतों में काम करते थे कि उसका दासप्रथा से अंतर बहुत कम था। बाद में चीनी आप्रवासियों ने सस्ता श्रम मुहैया कराया, जैसा कि कैलिफ्पोर्निया में हुआ था। लेकिन गैर-गोरों पर बढ़ती हुई निर्भरता से जन्मी घबराहट के चलते दोनों देशों की सरकारों ने चीनी आप्रवासियों को प्रतिबंधित कर दिया। 1974 तक लोगों के मन में यह भय घर कर गया था कि दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के ‘गहरी रंगत वाले’ लोग बड़ी तादाद में ऑस्ट्रेलिया आ सकते हैं, और इसीलिए ‘गैर-गोरों’ को बाहर रखने के लिए सरकार ने एक नीति अपनाई।

बदलाव की लहर...

1968 में एक मानवशास्त्री डब्ल्यूई.एच.स्टैनर के एक व्याख्यान से लोगों में बिजली की तरंग-सी दौड़ गई। व्याख्यान का शीर्षक, दि ग्रेट ऑस्ट्रेलियन साइलेंस (महान ऑस्ट्रेलियाई चुष्पी) - इतिहासकारों की मूल निवासियों के बारे में चुष्पी थी। 1970 के दशक से उत्तरी अमरीका की तरह ही यहाँ भी मूल निवासियों को एक नए रूप में समझने की चाहत जग चुकी थी। उन्हें मानवशास्त्रीय जिज्ञासाओं के रूप में नहीं, बल्क विशिष्ट संस्कृतियों वाले समुदायों के रूप में, प्रकृति और जलवायु को समझने की विशिष्ट पढ़तियों के रूप मे समझना था। उन्हें ऐसे समुदायों के रूप में समझना था, जिनके पास अपनी कथाओं और कपड़ासाजी-चित्रकारी-हस्तशिल्प के कौशल का विशाल भंडार था और वह भंडार सराहने, आदर तथा अभिलेखन के योग्य था। इन सबकी तह में वह जृरूरी सवाल था, जिसे आगे चल कर हेनरी रेनॉल्ड्स ने अपनी प्रभावशाली पुस्तक, व्हाइ वरंट वी टोल्ड? (हमें बताया क्यों नहीं गया?), में सामने रखा। इस किताब में ऑस्टैलियाई इतिहास लेखन के उस ढरें की भर्सना की गई थी, जिसमें कैष्टन कुक की ‘खोज’ से ही इतिहास की शुरुआत मानी जाती थी।

उसके बाद से मूल निवासियों की संस्कृतियों का अध्ययन करने के लिए विश्वविद्यालयी विभागों की स्थापना हुई है। कलादीर्घाओं (आर्ट गैलरीज़) में देसी कलाओं की दीर्घाएँ शामिल की गई हैं, देसी संस्कृति को समझानेवाले कल्पनाशील तरीके से सज्जित कमरों के लिए संग्रहालयों में जगह बनाई गई है, और मूल निवासियों ने अपने जीवन-इतिहासों को लिखना शुरू किया है। यह सब एक अद्भुत प्रयास है। यह प्रयास समय रहते शुरू हो गया। अगर मूल निवासियों की संस्कृतियों की अनदेखी बदस्तूर जारी रहती, तो इस समय तक उसका काफी कुछ विस्मृति की गर्त में जा चुका होता। 1974 से ‘बहुसंस्कृतिवाद’ ऑस्ट्रेलिया की राजकीय नीति रही है, जिसने मूल निवासियों की संस्कृतियों और यूरोप तथा एशिया के आप्रवासियों की भाँति-भाँति की संस्कृतियों को समान आदर दिया है।

“विदीर्ण हद्य वाली मेरी बहन कैथी,

में नही जानती कि कागज की छाल पर लिखी

तुम्हारे सपनों के समय की हर्ष-विषादमय कहानियों के लिए

मैं तुम्हें कैसे धन्यवाद ढूँ।

तुम गहरी रंगत वाले उन बच्चों में से एक थीं,

जिनके साथ खेलने की मुझे इजाजृत न थी –

नदी-तट पर अपना खेमा गाड़नेवाले, गलत रंग के लोग

(मैं तुम्हें गोरा न बना सकी।)

इसलिए काफ़ी देर से मैं तुम्हें मिली,

काफ़ी देर से शुरुआत हुई जानने की

उन्हांने मुझे नहीं बताया था कि जिस ज़मीन को मैं इतना प्यार करती हूँ

वह तुम्हारे ही हाथों से छीनी गई थी।"

- 'दो स्वज्नसमय', ऊडगेरो नूनुक्कल (Oodgeroo Noonuccal) के लिए

ऑस्ट्रेलियाई लेखिका ज्यूडिथ राइट(Judith Wright)

(1915-2000) ने ऑस्ट्रेलियाई

मूल निवासियों के अधिकारों के

लिए जोरदार आवाज़ बुलंद की।

उसने गोरे और मूल निवासियों को

अलग-अलग रखने से होनेवाले कई

नुकसानों को लेकर अत्यंत

प्रभावशाली कविताएँ लिखीं।

1970 के दशक से, जब संयुक्त राष्ट्र संघ और दूसरी अंतराष्ट्रीय एजोसियों की बैठकों में 'मानवाधिकार' शब्द सुनाई पड़ने लगा, ऑस्ट्रेलियाई जनता को यह अहसास हुआ कि संयुक्त राज्य अमरीका, कनाडा और न्यूजीलौंड के विपरीत ऑस्ट्रेलिया में यूरोपीय लोगों द्वारा किए गए भूमि-अधिग्रहण को औपचारिक बनाने के लिए मूल निवासियों के साथ कोई समझौता-पत्र तैयार नहीं किया गया है। सरकार हमेशा से ऑस्ट्रेलिया की जृमीन को टेरा न्यूलिअस (terra nullius) कहती आई थी। इसका मतलब था, 'जो किसी की नहीं है'। इसके अलावा, वहाँ अपने आदिवासी रिश्तेदारों से छीने गए मिश्रित रक्तवाले (मूल निवासी-यूरोपीय) बच्चों का एक लंबा और यंत्रणापूर्ण इतिहास भी था।

इन सवालों पर खड़े हुए आंदोलन के कारण तहकीकातें शुरू हुई और दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – एक, इस बात को मान्यता देना कि मूल निवासियों का जृमीन के साथ, जो कि उनके लिए ‘पवित्र’ है, मज़बूत ऐतिहासिक संबंध रहा है और इसका आदर किया जाना चाहिए; दो, पिछली गलतियों को धोया तो नहीं जा सकता, लेकिन ‘गोरों’ और ‘रंगबिंगे लोगों’ को अलग-अलग रखने की कोशिश करके बच्चों के साथ जो अन्याय किया गया है, उसके लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँँगी जानी चाहिए।

1974 ‘गोरे ऑस्ट्रेलिया’ की नीति का खात्मा, एशियाई आप्रवासियों को प्रवेश की इजाज़त

1992 ऑस्ट्रेलियाई हाई कोर्ट द्वारा (माबो केस में) टेरा न्यूलिअस की कानूनी अवैधता की घोषणा और 1770 के पहले से ज़मीन पर मूल निवासियों के दावों को मान्यता

1995 आदिवासी और टॉरस स्ट्रेट टापूवासी बच्चों को उनके परिवारों से अलग किए जाने के मामले में राष्ट्रीय जाँच

1999 1820 से 1970 के दशक के बीच 'गुम हुए' बच्चों से माफ़ीनामे के तौर पर 'राष्ट्रीय क्षमायाचना दिवस' (A National Sorry Day) (26 मई)

अभ्यास

संक्षेप में उत्तर दीजिए

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दक्षिणी और उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों के बीच के फ़कर्कों से संबंधित किसी भी बिन्दु पर टिप्पणी करिए।
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आप उन्नीसवीं सदी के संयुक्त राज्य अमरीका में अंग्रेज्जी के उपयोग के अतिरिक्त अंग्रेजों के आर्थिक और सामाजिक जीवन की कौन-सी विशेषताएँ देखते हैं?
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अमरीकियों के लिए 'फ्रंटियर' के क्या मायने थे?
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इतिहास की किताबों में ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को शामिल क्यों नहीं किया गया था?

संक्षेप में निबंध लिखिए

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लोगों की संस्कृति को समझाने में संग्रहालय की गैलरी में प्रदर्शित चीर्जें कितनी कामयाब रहती हैं? किसी संग्रहालय को देखने के अपने अनुभव के आधार पर सोदाहरण विचार करिए।
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कैलिफ्पोर्निया में चार लोगों के बीच 1880 में हुई किसी मुलाकात की कल्पना करिए। ये चार लोग हैं : एक अफ्रीकी गुलाम, एक चीनी मज़दूर, गोल्ड रश के चक्कर में आया हुआ एक जर्मन और होपी कबीले का एक मूल निवासी। उनकी बातचीत का वर्णन करिए।