भारत का संविधान - नागरिकों के मूल कर्तव्य
भौतिक भूगोल के
मूल सिद्धांत
कक्षा 11 के लिए पाठ्यपुस्तक


राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्
NATIONAL COUNCIL OF EDUCATIONAL RESEARCH AND TRAINING
11093 – भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत
कक्षा 11 के लिए पाठ्यपुस्तक
ISBN 81-7450-531-8
प्रथम संस्करण
मार्च 2006 चैत्र 1928
पुनर्मुद्रण
जनवरी 2007, अक्तूबर 2007, जनवरी 2009,
जनवरी 2010, जून 2011, जनवरी 2012,
अक्तूबर 2012, नवंबर 2013, नवंबर 2014,
दिसंबर 2015, दिसंबर 2016, दिसंबर 2017,
दिसंबर 2018, फ्रवरी 2019, अक्तूबर 2019,
अगस्त 2021 और नवंबर 2021
संशोधित संस्करण
नवंबर 2022 कार्तिक 1944
पुनर्मुद्रण
मार्च 2024 चैत्र 1946
जून 2024 ज्येष्ठ 1946
अगस्त 2024 भाद्रपद 1946
जनवरी 2025 माघ 1946
मार्च 2026 फाल्गुन 1947
PD 15T BS
© राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, 2006, 2022
₹ 90.00
एन.सी.ई.आर.टी. वाटरमार्क 80 जी.एस.एम. पेपर पर मुद्रित।
प्रकाशन प्रभाग में सचिव, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, श्री अरविंद मार्ग, नई दिल्ली 110016 द्वारा प्रकाशित तथा गोयल स्टेशनर्स, बी-36/9, जी. टी. करनाल रोड इंडस्ट्रियल एरिया, दिल्ली 110 033 द्वारा मुद्रित।
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प्रकाशन सहयोग
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मुख्य संपादक : बिज्ञान सुतार
मुख्य व्यापार प्रबंधक : अमिताभ कुमार
मुख्य उत्पादन अधिकारी : दीपक जैसवाल (प्रभारी)
संपादक : रेखा अग्रवाल
सहायक उत्पादन अधिकारी : सायुराज ए.आर.
आवरण
श्वेता राव
चित्रांकन
निधि वाधवा
के.एन. पृथ्वी राजू
दिलीप कुमार
काटोंग्राफी
काटोग्राफिक डिज्ञाइन्स
एजेंसी
आमुख
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) सुझाती है कि बच्चों के स्कूली जीवन को बाहर के जीवन से जोड़ा जाना चाहिए। यह सिद्धांत किताबी ज्ञान की उस विरासत के विपरीत है जिसके प्रभाववश हमारी व्यवस्था आज तक स्कूल और घर के बीच अंतराल बनाये हुए है। नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पर आधारित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें इस बुनियादी विचार पर अमल करने का प्रयास है। इस प्रयास में हर विषय को एक मज़बूत दीवार से घेर देने और जानकारी को रटा देने की प्रवृत्ति का विरोध शामिल है। आशा है कि ये कदम हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) में वर्णित बाल-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में काफ़ी दूर तक ले जाएँगे।
इस प्रयत्न की सफलता अब इस बात पर निर्भर है कि स्कूलों के प्राचार्य और अध्यापक बच्चों को कल्पनाशील गतिविधियों और सवालों की मदद से सीखने और सीखने के दौरान अपने अनुभवों पर विचार करने का अवसर देते हैं। हमें यह मानना होगा कि यदि जगह, समय और आज्ञादी दी जाए तो बच्चे बड़ों ढ्वारा सौपी गई सूचना-सामग्री से जुड़कर और जूझकर नये ज्ञान का सृजन करते हैं। शिक्षा के विविध साधनों एवं स्रोतों की अनदेखी किए जाने का प्रमुख कारण पाठ्यपुस्तक को परीक्षा का एकमात्र आधार बनाने की प्रवृत्ति है। सर्जना और पहल को विकसित करने के लिए ज्ञरुरी है कि हम बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में पूरा भागीदार मानें और बनाएँ, उन्हें ज्ञान की निर्धीरित खुराक का ग्राहक मानना छोड़ दें।
ये उद्देश्य स्कूल की दैनिक जिंदगी और कार्यशैली में काफ़ी फेरबदल की माँंग करते हैं। दैनिक समय-सारणी में लचीलापन उतना ही जरुरी है जितनी वार्षिक कैलेण्डर के अमल में चुस्ती, जिससे शिक्षण के लिए नियत दिनों की संख्या हकीकत बन सके। शिक्षण और मूल्यांकन की विधियाँ भी इस बात को तय करेंगी कि यह पाठ्यपुस्तक स्कूल में बच्चों के जीवन को मानसिक द्बाव तथा बोरियत की जगह खुशी का अनुभव बनाने में कितनी प्रभावी सिझ्ट्र होती है। बोझ की समस्या से निपटने के लिए पाठ्यक्रम निर्माताओं ने विभिन्न चरणों में ज्ञान का पुनर्निर्धारण करते समय बच्चों के मनोविज्ञान एवं अध्यापन के लिए उपलब्ध समय का ध्यान रखने की पहले से अधिक सचेत कोशिश की है। इस कोशिश को और गहराने के यत्न में यह पाठ्यपुस्तक सोच-विचार और विस्मय, छोटे समूहों में बातचीत एवं बहस और हाथ से की जाने वाली गतिविधियों को प्राथमिकता देती है।
एन.सी.ई.आर.टी. इस पुस्तक की रचना के लिए बनाई गई पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के परिश्रम के लिए कृतज्जता व्यक्त करती है। परिषद् सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर हरि वासुदेवन और इस पाठ्यपुस्तक समिति के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर एम. एच. कुरैशी की विशेष आभारी है। इस पाठ्यपुस्तक के विकास में कई शिक्षकों ने योगदान किया, इस योगदान को संभव बनाने के लिए हम उनके प्राचायों के आभारी हैं। हम उन सभी संस्थाओं और संगठनों के प्रति कृतज्ञ हैं जिन्होंने अपने संसाधनों, सामग्री और सहयोगियों की मदद लेने में हमें उदारतापूर्वक सहयोग दिया। हम माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रोफेसर मृणाल मीरी एवं प्रोफेसर जी.पी. देशपांडे की अध्यक्षता में गठित निगरानी समिति (मॉनिटरिंग कमेटी) के सदस्यों को अपना मूल्यवान समय और सहयोग देने के लिए धन्यवाद देते हैं। व्यवस्थागत सुधारों और अपने प्रकाशनों में निरंतर निखार लाने के प्रति समर्पित एन.सी.ई.आर.टी. टिप्पणियों एवं सुझावों का स्वागत करेगी जिनसे भावी संशोधनों में मदद ली जा सके।
निदेशक
नई दिल्ली
20 दिसंबर 2005
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान
और प्रशिक्षण परिषद्
पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन
कोविड-19 महामारी को देखते हुए, विद्यार्थियों के ऊपर से पाठ्य सामग्री का बोझ कम करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भी विद्यार्थियों के लिए पाठ्य सामग्री का बोझ कम करने और रचनात्मक नज़रिए से अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करने पर जौर दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् ने सभी कक्षाओं में पाठ्यपुस्तकों को पुनर्स्योजित करने की शुरुआत की है। इस प्रक्रिया में रा.शै.अ.प्र.प. द्वारा पहले से ही विकसित कक्षावार सीखने के प्रतिफलों को ध्यान में रखा गया है।
पाठ्य सामग्रियों के पुनर्सयोजन में निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है -
वर्तमान संस्करण, ऊपर दिए गए परिवर्तनों को शामिल करते हुए तैयार किया गया पुनर्स्योजित संस्करण है।
भारत का संविधान
उहेशिका
हम, भारत के लोग, भारत को एक ¹[संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य] बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म
और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता
प्राप्त कराने के लिए,
तथा उन सब में
व्यक्ति की गरिमा और ²[राष्ट्र की एकता
और अखंडता] सुनिश्चित करने वाली बंधुता
बढ़ाने के लिए
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति
अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समिति
हरि वासुदेवन, प्रोफेसर, इतिहास विभाग, कलकता विश्वविद्यालय, कोलकाता
मुख्य सलाहकार
एम.एच. कुरैशी, प्रोफेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
सदस्य
इंदु शर्मा, पी. जी. टी., डी. एम. स्कूल, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, अजमेर
एल. काजी, रीडर, भूगोल विभाग, नाँर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलाँग
एस. आर. जोग, प्रोफेसर (अवकाश प्राप्त), भूगोल विभाग, पुणे विश्वविद्यालय, पुणे
के. कुमारास्वामी, प्रोफेसर, भूगोल विभाग, भारतीदासन विश्वविद्यालय, तिरूचिरापल्ली
के. एन. पृध्वी राजू, प्रोफेसर, भूगोल विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी
के. एस. सिवासामी, प्रोफेसर (अवकाश प्राप्त), क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली
पी. के. मलिक, लेक्चरर, गवर्नमेंट कॉलेज, तावडू, गुढ़गाँव
हिंदी अनुवाद
अशोक दिवाकर, लेक्चरर, गवर्नमेंट पी.जी. कॉलेज, गुड़गाँव; स्पेक्ट्रम कम्यूनिकेशंस, नई दिल्ली
डी. एन. सिंह, प्रोक्फेसर (अवकाश प्राप्त), भूगोल विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
राजेश्वरी जागलान, लेक्चरर, गवर्नमेंट पी.जी. कॉलेज, करनाल
सदस्य-समन्वयक
अपर्णा पाण्डेय, लेक्चरर, सामाजिक विज्ञान शिक्षा विभाग, एन.सी.ई.आर.टी., नयी दिल्ली
आभार
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, इस पुस्तक के निर्माण में सहयोग देने हेतु अशोक दिवाकर, लेक्चरर (भूगोल), गवर्नमेंट पी.जी. कॉलेज, गुड़गाँव का आभार व्यक्त करती है।
परिषद् इनकी भी आभारी हैं: नेम सिंह, उप-प्रधानाचार्य (अवकाश प्राप्त), गवर्नमेंट सर्वोंद्य बाल विद्यालय, किरन विहार, दिल्ली; सैय्यद जहीन आलम, लेक्चरर (भूगोल), द्याल सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली; बीर सिंह आर्य, प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी (अवकाश प्राप्त), वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, भारत सरकार; डी. डी. चौनियाल, रीडर, भूगोल विभाग, एच.एन.बी., गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर जिन्होंने अनुवाद के पुनरीक्षण हेतु आयोजित कार्यशालाओं में भाग लिया और अपना बहुमूल्य योगदान दिया।
परिषद् प्रस्तुत पुस्तक के निर्माण में निम्नलिखित सभी व्यक्तियों एवं संगठनों का आभार व्यक्त करती है, जिन्होंने इस पुस्तक को सहज बनाने हेतु विभिन्न फोटोग्राफ एवं अन्य पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाई :- आर. वैद्दनाधन (चित्र 6.1); एन.के. सैनी (चित्र 5.3 एवं 6.4); वाई. रमेश एवं कृष्णम राजू, वी.एस.वी.जी. (यू.एस.ए.) (चित्र 6.10); के.एन. पृध्वी राजू (चित्र 6.2, 6.5, 6.7, 6.11 तथा 6.14); आई.टी.डी.सी./पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार (चित्र 10.1 तथा 10.2); पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार (चित्र 14.1, 14.2, 14.3 तथा 14.4); द टाइम्स ऑफ इंडिया, नई दिल्ली (भूकंप द्वारा हुए विनाश का चित्र तथा सुनामी एवं भूमंडलीय ऊष्मन पर कोलाज पृष्ठ संख्या 23 एवं 103); एन.सी.ई.आर.टी., सामाजिक विज्ञान, पाठ्यपुस्तक, कक्षा-8, भाग-2 (ज्वालामुखी से संबंधित चित्र पृष्ठ संख्या 25 और 26)।
परिषद्, सविता सिन्हा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग के प्रति भी अपनी कृतज्जता अर्पित करती है, जिन्होने प्रत्येक स्तर पर इस पाठ्यपुस्तक के निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग दिया।
परिषद् पाठ्यपुस्तक में ईश्वर सिंह, अरविंद शर्मा, डी.टी.पी. ऑपरेटर; अरविन्द सारस्वत, कॉपी एडिटर; आनन्द बिहारी वर्मा, प्रूफ रीडर; दिनेश कुमार, कंप्यूटर स्टेशन प्रभारी के सहयोग हेतु अपना हार्दिक आभार ज्ञापित करती है, जिन्होंने इस पाठ्यपुस्तक को पूर्ण रूप देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी संदर्भ में प्रकाशन विभाग, एन.सी.ई.आर.टी. का सहयोग भी उल्लेखनीय है।
विषय-सूची
आमुख iii
पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन
इकाई I : भूगोल एक विषय के रूप में 1-12
1. भूगोल एक विषय के रूप में 2
इकाई Ⅱ : पृथवी 13-38
इकाई Ⅲ : भू-आकृतियाँ 39-68
इकाई IV : जलवायु 69-105
इकाई V : जल (महासागर) 106-122
इकाई VI : पृथ्वी पर जीवन 123-129
14. जैव-विविधता एवं संरक्षण 124
शब्दावली 130-133
भारत का संविधान
भाग 4क
नागरिकों के मूल कर्तव्य
अनुच्छेद 51 क
मूल कर्तव्य - भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह -
