Chapter 1
इकाई
I
भूगोल एक विषय के रूप में
इस इकाई के विवरण :
1
भूगोल एक विषय के रूप में
आपने माध्यमिक स्तर तक भूगोल का अध्ययन सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम के एक घटक के रूप में किया है। आप विश्व एवं इसके विभिन्न भागों के भौगोलिक तथ्यों से परिचित हैं। अब आप भूगोल का अध्ययन एक स्वतंत्र विषय के रूप में करेंगे तथा पृथ्वी के भौतिक वातावरण, मानवीय क्रियाओं एवं उनके अंत्प्रीक्रियात्मक संबंध के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे। यहाँ आप एक प्रासंगिक प्रश्न पूछ सकते हैं कि हमें भूगोल क्यों पढ़ना चाहिए? हम धरातल पर रहते हैं। हमारा जीवन हमारे परिस्थान से अनेक रूपों में प्रभावित होता है। हम निर्वाह के लिए अपने आस-पास के संसाधनों पर निर्भर करते हैं। आदिम समाज अपने भरण-पोषण के लिए प्राकृतिक निर्वाह-संसाधनों, जैसे पशुओं एवं खाद्य पौथों पर आश्रित था। समय बीतने के साथ हमने तकनीकों का विकास किया तथा प्राकृतिक संसाधनों, यथा भूमि, मृदा, जल का उपयोग करते हुए अपना आहार उत्पादन प्रारंभ किया। हमने अपने भोजन की आद्तों एवं वस्त्र को मौसमी दशाओं के अनुरूप समायोजित किया। ध्यातव्य है कि प्राकृतिक संसाधन आधार, तकनीकी विकास, भौतिक वातावरण के साथ अनुकूलन एवं उसका परिष्करण, सामाजिक संगठन तथा सांस्कृतिक विकास में विभिन्नता पायी जाती है। भूगोल के एक छात्र के रूप में आपको धरातल पर विभिन्नता वाले सभी सत्यों के विषय में जानने के लिए उत्सुक होना चाहिए। आप विविध प्रकार की भूमि एवं लोगों से परिचित हैं, फिर भी समय के साथ होने वाले परिवर्तनों को समझने में रुचि रखते होंगे। भूगोल आपको विविधता समझने तथा समय एवं स्थान के संदर्भ में ऐसी विभिन्नताओं को उत्पन्न करने वाले कारकों की खोज करने की क्षमता प्रदान करता है। इससे आपमें मानचित्र में परिवर्तित गोलक (Globe) को समझने तथा धरातल के दृश्य ज्ञान की कुशलता विकसित होती है। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक, यथा भौगोलिक सूचना तंत्र (G.I.S.), संगणक मानचित्र कला (Computer cartography) के रूप में प्राप्त ज्ञान एवं कुशलता आपको राष्ट्रस्तरीय विकास में योगदान करने की योग्यता से लैस करती है।
अब आप अगला प्रश्न पूछना चाहेंगे कि भूगोल क्या है? आप जानते हैं कि पृथ्वी हमारा आवास है। यह पृथ्वी पर रहने वाले अन्य छोटे-बड़े प्राणियों का भी आवास है। पृथ्वी की सतह एकरूप नहीं है। इसके भौतिक स्वरूप में भिन्नता होती है। यहाँ पर्वत, पहाडियाँ, घाटियाँ, मैदान, पठार, समुद्र, झील, रेगिस्तान, वन एवं उजाड़ क्षेत्र मिलते है। यहाँ सामाजिक एवं सांस्कृतिक तत्वों में भी भिन्नता पायी जाती है जो सांस्कृतिक विकास की पूर्ण अवधि में मानव द्वारा सृजित ग्रामों, नगरों, सड़कों, रेलों, पत्नों, बाजारों एवं मानवजनित अन्य कई तत्वों के रूप में विद्यमान है।
उक्त भिन्नता में भौतिक पर्यावरण एवं सांस्कृतिक लक्षणों के मध्य संबंधों को समझने का संकेत निहित होता है। भौतिक पर्यावरण एक मंच प्रस्तुत करता है जिसपर मानव समाजों ने अपने सृजनात्मक क्रियाकलापों का ढॉमा अपनी तकनीकी विकास से प्राप्त उपकरणों ढ़ारा मंचित क्रिया। अब आप पहले पूछे गए प्रश्नः ‘भूगोल क्या है?’ का उत्तर देने का सक्षम प्रयास कर सकते हैं। अत्यंत सरल शब्दों में यह कहा जा सकता हैं कि भूगोल पृथ्वी का वर्णन है। सर्वप्रथम भूगोल शब्द का प्रयोग इरेटॉस्थेनीज़, एक ग्रीक विद्धान (276-194 ईंपू०) ने किया। यह शब्द, ग्रीक भाषा के दो मूल ‘Geo’ (पृथ्वी) एवं ‘graphos’ (वर्णन) से प्राप्त किया गया है। दोनों को एक साथ रखने पर इसका अर्थ बनता है, पृथ्वी का वर्णन। पृथ्वी को सर्वदा मानव के आवास के रूप में देखा गया है और इस दृष्टि से विद्धान भूगोल को ‘मानव के निवास के रूप में पृथ्वी का वर्णन’ परिभाषित करते हैं। आप इस तथ्य से तो परिचित ही हैं कि यथार्थता बहु-आयामी होती है तथा पृथ्वी भी बहु-आयामी है। इसीलिए अनेक प्राकृतिक विज्ञान जैसे- भौमिकी, मृदा विज्ञान, समुद्र विज्ञान, वनस्पति शास्त्र, जीवन विज्ञान, मौसम विज्ञान तथा अन्य सहविज्ञान, सामाजिक विज्ञान के अनेक सहयोगी विषय जैसे- अर्थशास्त्र, इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, नृ-विज्ञान इत्यादि धरातल की वास्तविकता के विभिन्न पक्षों का अध्ययन करते हैं। भूगोल अन्य विज्ञानों से विषयवस्तु तथा विधितंत्र में भिन्न है परंतु साथ ही अन्य विषयों से इसका निकट का संबंध है। भूगोल सभी प्राकृतिक एवं सामाजिक विषयों से सूचनाधार प्राप्त कर उसका संश्लेषण करता है।
हमें पृथ्वी पर भौतिक तथा सांस्कृतिक वातावरण में भिन्नता दिखाई पड़ती है। अनेक तत्वों में समानता तथा कई में असमानता पाई जाती है। अतएव भूगोल को क्षेत्रीय-भिन्नता का अध्ययन मानना तार्किक लगता है। इस प्रकार भूगोल को उन सभी तथ्यों का अध्ययन करना होता है जो क्षेत्रीय संदर्भ में भिन्न होते हैं। भूगोलवेत्ता मात्र धरातल पर तथ्यों में विभिन्नता का अध्ययन नहीं करते अपितु उन कारकों का भी अध्ययन करते हैं जो इन विभिन्नताओं के कारण होते हैं। उदाहरणार्थ, फसल का स्वरूप एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में भिन्न होता है, किंतु यह भिन्नता एक तथ्य के रूप में मिट्री, जलवायु, बाजार में माँग, किसानों की व्यय-क्षमता, तकनीकी निवेश की उपलब्धता आदि में भिन्नता से संबंधित होती है। इस प्रकार भूगोल की दिलचस्पी किन्हीं दो तत्वों या एक से अधिक तत्वों के मध्य कार्य-कारण संबंध को ज्ञात करने में है।
एक भूगोलवेत्ता तथ्यों की व्याख्या कार्य-कारण संबंधों के ढाँँचे में ही करता है, क्योंकि यह केवल व्याख्या में ही सहायक नहीं होता, अपितु तथ्य के पूर्वानुमान एवं भविष्य के परिप्रेक्ष्य में देखने की क्षमता भी रखता है। भौतिक तथा मानवीय दोनों प्रकार के भौगोलिक तथ्य स्थैतिक नहीं, अपितु गत्यात्मक होते हैं। वे सतत् परिवर्तनशील पृथ्वी तथा अथक एवं निरंतर सक्रिय मानव के बीच आबढ़ प्रक्रियाओं के फलस्वरूप कालांतर में परिवर्तित होते रहते हैं। आदिम मानव समाज अपने निकटतम पर्यावरण पर सीधे तौर पर निर्भर करता था; अब ऐसा नहीं है। भूगोल, इस प्रकार, ‘प्रकृति’ तथा ‘मानव’ के समग्र इकाई के रूप में अंतप्रक्रिया के अध्ययन से संबंधित है। मानव प्रकृति का एक अंगभूत भाग है तथा वह प्रकृति पर अपनी छाप छोड़ता है। प्रकृति मानव जीवन के विभिन्न पक्षों को प्रभावित करती है। इसकी छाप उसके वस्त्र, आवास, व्यवसाय आदि पर देखी जा सकती है। मानव ने प्रकृति के साथ समझौता, अनुकूलन (Adaptation) अथवा आपरिवर्तन (Modification) के माध्यम से किया है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि वर्तमान समाज आदिम समाज की अवस्था पार कर चुका है। उसने तकनीकी के खोज एवं प्रयोग द्वारा अपने अस्तित्व के लिए सनिकट परिवेश (प्राकृतिक वातावरण) को आपरिवर्तित कर प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए अपने कार्य क्षेत्र के क्षितिज में परिवर्द्धन कर लिया है। तकनीकी के क्रमशः विकास के साथ मानव अपने ऊपर भौतिक पर्यावरण के द्वारा कसे हुए बंधन को ढीला करने में सक्षम हो गया है। तकनीकी ने श्रम की कठोरता को कम कर, श्रम-क्षमता को बढ़ाया तथा अवकाश का प्रावधान करते हुए मानव को उच्चतर आवश्यकताओं को पूर्ण करने का अवसर दिया। उससे उत्पादन के पैमाने एवं श्रम की गत्तिशीलता में भी वृद्धि हुई।
भौतिक वातावरण एवं मानव के अन्योन्यक्रिया को एक कवि ढ्वारा संक्षेप में मानव एवं ईश्वर के बीच निम्न वार्तालाप के माध्यम से व्यक्त किया गया है। “आपने मिट्री का सृजन किया, मैने कप का निर्माण किया, आपने रात्रि का सृजन किया, मैने दीपक बनाया। आपने बंजर भूमि, पहाड़ी भू-भाग एवं मरुस्थलों का सृजन किया, मैने फूलों की क्यारी तथा बाग-बगीचे बनाये। प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करते हुए मानव अपने सृजनात्मक योगदान का दावा करता है। तकनीकी की सहायता से मानव आवश्यकता की अवस्था से स्वतंत्रता की और अग्रसर हुआ। उसने सर्वत्र अपनी छाप छोड़ी तथा प्रकृति के सहयोग से नयी संभावनाओं का सृजन किया। इस प्रकार हमें मानवीकृत प्रकृति तथा प्रकृति-प्रभावित मानव के दर्शन होते हैं। भूगोल इसी अंतप्रीक्रियात्मक संबंध का अध्ययन करता है। परिवहन एवं संचार के साधनों के जाल तथा पदानुक्रमिक केंद्रों के माध्यम से क्षेत्र समाकलित और संगठित हो गये। एक सामाजिक विज्ञान के रूप में भूगोल इसी क्षेत्रीय समाकलन एवं संगठन का अध्ययन करता है।
एक वैज्ञानिक विषय के रूप में भूगोल तीन वर्गिकृत प्रश्नों से संबंधित हैः:
सब मिलाकर उक्त दोनों प्रश्नों में प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक तत्वों के वितरण एवं स्थिति को ध्यान में रखा गया है। इन प्रश्नों से कौन से तत्व कहाँ स्थित हैं, से संबंधित सूचीबढ़ सूचनायें प्राप्त होती हैं। औपनिवेशिक काल से ही यह उपागम बहुत प्रचलित रहा है। इन दो प्रश्नों में तीसरे प्रश्न के जुड़ने तक भूगोल एक वैज्ञानिक विषय नहीं बन सका।
(iii) यह तृतीय प्रश्न व्याख्या अथवा तत्वों एवं तथ्यों के मध्य कार्य-कारण संबंध से जुड़ा हुआ है। भूगोल का यह पक्ष ‘क्यों’ प्रश्न से जुड़ा हुआ है।
एक विषय के रूप में भूगोल का क्रोड क्षेत्र से संबंधित होता है तथा स्थानिक विशेषताओं एवं गुणों का विवेचन करता है। यह क्षेत्र में तथ्यों के वितरण, स्थिति एवं केंद्रीकरण के प्रतिरूप का अध्ययन करता है तथा इन प्रतिरूपों की व्याख्या करते हुए उनका स्पष्टीकरण देता है। यह मानव तथा उसके भौतिक वातावरण के मध्य गत्यात्मक अंतप्रिक्रिया से उपजे तथ्यों के बीच साहचर्य एवं अंतर्संबंध का विश्लेषण करता है।
भूगोल एक समाकलन (Integrating) विषय के रूप में
भूगोल एक संश्लेषणात्मक (Synthesis) विषय है जो क्षेत्रीय संश्लेषण का प्रयास करता है तथा इतिहास, कालिक संश्लेषण का प्रयास करता है। इसके उपागम की प्रकृति समग्रात्मक (Holistic) होती है। यह इस तथ्य को मानता है कि विश्व एक परस्पर निर्भर तंत्र है। आज वर्तमान विश्व से एक वैश्विक ग्राम का प्रतिबोधन होता है। परिवहन के बेहतर साधनों तथा बढ़ती हुई गम्यता के कारण दूरियाँ कम हो गयी है। श्रव्य-दृश्य माध्यमों (Audio-visual media) एवं सूचना तकनीकी ने ऑँकड़ों को बहुत समृढ़ बना दिया है। तकनीकी ने प्राकृतिक तथ्यों तथा आर्थिक एवं सामाजिक प्राचल (पैरामीटर) के निरीक्षण एवं परीक्षण के बेहतर अवसर प्रदान किए है। भूगोल का एक संश्लेषणात्मक विषय के रूप में अनेक प्राकृतिक तथा सामाजिक विज्ञानों से अंतरापृष्ठ (Interface) संबंध है। प्राकृतिक या सामाजिक सभी विज्ञानों का एक मूल उदेश्य है: यथार्थता को ज्ञात करना। भूगोल यथार्थता से जुड़े तथ्यों के साहचर्य को बोधगम्य बनाता है। रेखाचित्र 1.1 भूगोल का अन्य विज्ञानों के साथ संबंध दर्शाता है। वस्तुतः: विज्ञान से संबंधित सभी विषय भूगोल से जुड़े हैं, क्योंकि उनके कई तत्व क्षेत्रीय संदर्भ में भिन्न-भिन्न होते है। भूगोल स्थानिक संदर्भ में यथार्थता को समग्रता से समझने में सहायक होता है। अतः: भूगोल न केवल एक स्थान से दूसरे स्थान में तथ्यों की भिन्नता पर ध्यान देता है, अपितु उन्हें समग्रता में समाकलित करता है। भूगोलवेत्ता को सभी संबंधित क्षेत्रों की व्यापक समझ रखने की आवशकता होती है जिससे कि वह उन्हें तार्किक रूप से संश्लेषित कर सके। यह संश्लेषण कुछ उदाहरणों की सहायता से सरलतापूर्वक समझाया जा सकता है। यथा, भूगोल ऐतिहासिक घटनाओं को प्रभावित करता है; स्थानिक दूरी स्वयं विश्व के इतिहास की दिशा को परिवर्तित करने के लिए एक प्रभावशाली कारक है। क्षेत्रीय विस्तार लड़ाई के दौरान विशेषकर पिछली शताब्दी में, कई देशों के लिए सुरक्षा का साधन बना। 'परंपरागत युढ़ में बड़े आकार वाले देशों ने अधिक स्थान छोड़कर समय का लाभ प्राप्त किया।' नये विश्व के देशों के चारो तरफ विस्तृत समुद्र द्वारा प्रदत्त रक्षा कवच उन्हें उनकी मिट्री पर युढ़ होने से बचाता रहा है। यदि हम विश्व की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का विवेचन करें तो उनमें से प्रत्येक की भौगोलिक व्याख्या की जा सकती है।
भारत में हिमालय एक महान अवरोध के रूप में देश की रक्षा करता रहा है, परंतु उसमें विद्यमान दरें मध्य एशिया के आक्रमणकर्ताओं एवं प्रत्रजकों को मार्ग की सुविधा देते रहे हैं। सामुद्रिक किनारे दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप तथा अफ्रीका से संपर्क को प्रोत्साहित करते रहे हैं। नौ-संचालन (Navigation) तकनीकी ने यूरोपीय देशों को भारत सहित कई एशियाई एवं अफ्रीकी राष्ट्रों पर उपनिवेशीकरण करने में सहायता की, क्योंकि उन्हें समुद्र के माध्यम से गम्यता मिली। भौगोलिक तत्वों द्वारा विश्व के विभिन्न भागों में इतिहास की धारा के आपरिवर्तन के अनेक उदाहरण मिलते हैं।
प्रत्येक भौगोलिक तथ्य समय के साथ परिवर्तित होता रहता है तथा समय के परिप्रेक्ष्य में उसकी व्याख्या की जा सकती है। भू-आकृति, जलवायु, वनस्पति, आर्थिक क्रियायें, व्यवसाय एवं सांस्कृतिक विकास ने एक निश्चित ऐतिहासिक पथ का अनुसरण किया है। अनेक भौगोलिक तत्व विभिन्न संस्थानों द्वारा एक विशेष समय पर निर्णय लेने की प्रकिया के प्रतिफल होते हैं। उदाहरणार्थ, अ स्थान ब स्थान से 1,500 कि०मी० दूर है जिसे विकल्प के रूप में यह भी कहा जा सकता है कि अ स्थान ब से 2 घंटा दूर है (यदि हवाई जहाज से यात्रा की जाय) या 17 घंटा दूर है (यदि तीव्रगामी रेल से यात्रा की जाय)। इसी कारण समय भौगौलिक अध्ययन के चतुर्थ आयाम के रूप में एक समाकल भाग माना जाता है। कृपया तीन अन्य आयामों का उल्लेख कीजिए। रेखाचित्र (संख्या 1.1) विभिन्न प्राकृतिक एवं सामाजिक विज्ञानों से भूगोल का संबंध प्रचुर रूप से चित्रित करता है।
भूगोल की शाखाएँ
पुनः स्मरण हेतु कृषया चित्र 1.1 का अध्ययन करें। इससे यह स्पष्टतः प्रकट होता है कि भूगोल अध्ययन का एक अंतर्शिक्षण (Interdisciplinary) विषय है। प्रत्येक विषय का अध्ययन कुछ उपागमों के अनुसार किया जाता है। इस दृष्टि से भूगोल के अध्ययन के दो प्रमुख उपागम हैं: (1) विषय वस्तुगत (क्रमबढ़) एवं (2) प्रादेशिक। विषय वस्तुगत भूगोल का उपागम वही है जो सामान्य भूगोल का होता है। यह उपागम एक जर्मन भूगोलवेत्ता, अलेक्ज्रोंडर बॉन हम्बोल्ट (1769–1859) ढ्वारा प्रवर्तित किया गया, जबकि प्रादेशिक भूगोल का विकास हम्बोल्ट के समकालीन एक दूसरे जर्मन भूगोलवेत्ता कार्ले रिटर (1779–1859) ढ्वारा किया गया।
विषयवस्तुगत उपागम में एक तथ्य का पूरे विश्वस्तर पर अध्ययन किया जाता है। तत्पश्चात् क्षेत्रीय स्वरूप के वर्गीकृत प्रकारों की पहचान की जाती है। उदाहरणार्थ, यदि कोई प्राकृतिक वनस्पति के अध्ययन में रूचि रखता है, तो सर्वप्रथम विश्व स्तर पर उसका अध्ययन किया जायेगा, फिर प्रकारात्मक वर्गीकरण, जैसे विषुवतरेखीय सदाबहार वन, नरम लकड़ीवाले कोणधारी वन अथवा मानसूनी वन इत्यादि की पहचान, उनका विवेचन तथा सीमांकन करना होगा। प्रादेशिक उपागम में विश्व को विभिन्न पदानुक्रमिक स्तर के प्रदेशों में विभक्त किया जाता है और फिर एक विशेष प्रदेश में सभी भौगोलिक तथ्यों का अध्ययन किया जाता है। ये प्रदेश प्राकृतिक, राजनीतिक या निर्दिष्ट (नामित) प्रदेश हो सकते है। एक प्रदेश में तथ्यों का अध्ययन समग्रता से विविधता में एकता की खोज करते हुए किया जाता है। ढैतवाद भूगोल की एक मुख्य विशेषता है। इसका प्रारंभ से ही विषय में प्रवर्तन हो चुका था। ढैतवाद (दिथा) अध्ययन में महत्व दिये जाने वाले पक्ष पर निर्भर करता है। पहले विद्वान भौतिक भूगोल पर बल देते थे। परंतु बाद में स्वीकार किया गया कि मानव धरातल का समाकलित भाग है, वह प्रकृति का अनिवार्य अंगे है। उसने सांस्कृतिक विकास के माध्यम से भी योगदान दिया है। इस प्रकार मानवीय क्रियाओं पर बल देने के साथ मानव भूगोल का विकास हुआ।

भूगोल की शाखाएँ ( विषयवस्तुगत या क्रमबन्द्र उपागम के आधार पर )
(अ) भौतिक भूगोल
(i) भू-आकृति विज्ञानः यह भू-आकृतियों, उनके क्रम विकास एवं संबंधित प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है।
(ii) जलवायु विज्ञानः इसके अंतर्गत वायुमंडल की संरचना, मौसम तथा जलवायु के तत्व, जलवायु के प्रकार तथा जलवायु प्रदेश का अध्ययन किया जाता है।
(iii) जल-विज्ञानः यह धरातल के जल परिमंडल जिसमें समुद्र, नदी, झील तथा अन्य जलाशय सम्पिलित हैं तथा उसका मानव सहित विभिन्न प्रकार के जीवों एवं उनके कायों पर प्रभाव का अध्ययन है।

(iv) मूदा भूगोलः यह मिट्री निर्माण की प्रक्रियाओं, मिट्री के प्रकार, उनका उत्पादकता स्तर, वितरण एवं उपयोग आदि के अध्ययन से संबंधित है।
(ब) मानव भूगोल
(iii) आर्थिक भूगोलः यह मानव की आर्थिक क्रियाओं, जैसे- कृषि, उद्योग, पर्यटन, व्यापार एवं परिवहन, अवस्थापना तत्व एवं सेवाओं का अध्ययन है।
(iv) ऐतिहासिक भूगोलः यह उन ऐतिहासिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है जो क्षेत्र को संगठित करती हैं। प्रत्येक प्रदेश वर्तमान स्थिति में आने के पूर्व ऐतिहासिक अनुभवों से गुजरता है। भौगोलिक तत्चों में भी सामयिक परिवर्तन होते रहते हैं और इसी की व्याख्या ऐतिहासिक भूगोल का ध्येय है।
(υ) राजनीतिक भूगोलः यह क्षेत्र को राजनीतिक घटनाओं की दृष्टि से देखता है एवं सीमाओं, निकटस्थ पड़ोसी इकाइयों के मध्य भू-वैन्यासिक संबंध, निर्वाचन क्षेत्र का परिसीमन एवं चुनाव परिदूश्य का विश्लेषण करता है। साथ ही जनसंख्या के राजनीतिक व्यवहार को समझने के लिए सैन्धांतिक रूपरेखा विकसित करता है।
(स) जीव-भूगोल
भौतिक भूगोल एवं मानव भूगोल के अंतरापृष्ठ (Interface)के फलस्वरूप जीव-भूगोल का अभ्युदय हुआ। इसके अंतर्गत निम्नलिखित शाखाएँ आती हैं।
( द ) प्रादेशिक उपागम पर आधारित भूगोल की शाखाएँ

(ख) विधितंत्र एवं तकनीक
उपर्युक्त वर्गीकरण भूगोल की शाखाओं की एक विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करता है। भूगोल पाठ्यक्रम सामान्यतः इसी के ढाँँचे में बनाया एवं पढ़ाया जाता है। परंतु यह रूपरेखा एक दृष्टि से स्थौतिक है; क्योंकि किसी भी विषय की यह बाध्यता है कि वह नई सोच, नयी समस्या, नये विधितंत्र एवं नई तकनीक के साथ अग्रसर होता रहे। उदाहरणार्थ, जो पहले हस्तनिर्मित मानचित्रण तकनीक थी, अब संगणक निर्मित मानचित्रण में परिवर्तित हो गयी है। तकनीकी ने विद्धानों को वृहद् मात्रा में ऑँकड़ों के प्रबंधन की क्षमता प्रदान कर दी है। इंटरनेट व्यापक सूचनाएँ देता है। इस प्रकार विश्लेषण क्षमता में अपार वृँछि हुई है। भौगोलिक सूचना तंत्र (G.I.S.) ने ज्ञान के नये परिदृश्य को खोला है। वैश्विक स्थितीय तंत्र (G.P.S.) बिल्कुल सही स्थिति ज्ञात करने के लिए सुविधाजनक उपकरण हो गया है। तकनीकी ने गंभीर सैद्धांतिक ज्ञान के साथ संश्लेषण करने की क्षमता को बढ़ा दिया है। आप इन तकनीकों के कुछ प्राथमिक पक्षों के विषय में अपनी पुस्तक ‘भूगोल में प्रयोगात्मक कार्य भाग-1’ में जान सकेंगे। आप अपनी कुशलता में सुधार करते रहंगे और उनके उपयोग के विषय का ज्ञान प्राप्त करंगे।
भौतिक भूगोल एवं इसका महत्व
पुस्तक का शीर्षक और विषय–सूची इसके विषय क्षेत्र को प्रतिबिंबित करती है। यहाँ भूगोल की इस शाखा के महत्व को बताना युक्ति संगत होगा। भौतिक भूगोल में भूमंडल (भू-आकृतियाँ, प्रवाह, उच्चावच), वायुमंडल (इसकी बनावट, संरचना, तत्व एवं मौसम तथा जलवायु, तापक्रम, वायुदाब, वायु, वर्षा, जलवायु के प्रकार इत्यादि) जलमंडल (समुद्र, सागर, झीलें तथा जल परिमंडल से संबढ़ तत्व) जैव मंडल (जीव के स्वरूप–मानव तथा वृहद् जीव एवं उनके पोषक प्रक्रम, जैसे– खाद्यश्रूंखला, पारिस्थैतिक प्राचल (Ecological parametres) एवं पारिस्थैतिक संतुलन) का अध्ययन सम्मिलित होता है। मिट्टियाँ मृदा–निर्माण प्रक्रिया के माध्यम से निर्मित होती हैं तथा वे मूल चट्टान, जलवायु, जैविक प्रक्रिया एवं कालावधि पर निर्भर करती है। कालावधि मिट्टियों को परिपक्वता प्रदान करती है तथा मृदा पार्शिवंका (Profile)
के विकास में सहायक होती है। मानव के लिए प्रत्येक तत्व महत्वपूर्ण है। भू-आकृतियाँ आधार प्रस्तुत करती हैं जिसपर मानव क्रियाएँ संपन्न होती हैं। मैदानों का प्रयोग कृषि कार्य के लिए किया जाता है, जबकि पठारों पर वन तथा खनिज संपदा विकसित की जाती है। पर्वत, चरागाहों, वनों, पर्यटक स्थलों के आधार तथा निम्न क्षेत्रों को जल प्रदान करने वाली नदियों के स्त्रोत होते हैं। जलवायु हमारे घरों के प्रकार, वस्त्र, भोजन को प्रभावित करती है। जलवायु का वनस्पति, सस्य प्रतिरूप, पशुपालन एवं (कुछ) उद्योगों आदि पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। मानव ने ऐसी तकनीकी विकसित की है जो सीमित क्षेत्र में जलवायु को आपरिवर्तित (Modify) कर देती है, जैसे-वातानुकूलक (Air conditioner), वायु शीतक इत्यादि। तापमान तथा वर्षा, वनों के घनत्व एवं घास प्रदेशों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं। भारत में मानसूनी वर्षा कृषि
भूगोल क्या है?
भूगोल का उद्देश्य धरातल की प्रादेशिक/क्षेत्रीय भिन्नता का वर्णन एवं व्याख्या करना है।
रिचर्ड हार्टशोर्न
भूगोल धरातल के विभिन्न भागों में कारणात्मक रूप से संबंधित तथ्यों में भिन्नता का अध्ययन करता है।
अलफ्रेड हैटनर
आवर्तन प्रणाली को गति प्रदान करती है। वर्षा, भूमिगत जल-धारक प्रस्तर (Aquifer) को पुनरावेशित (Recharge) कर कृषि एवं घरेलू कायों के लिए जल की उपलब्धता संभव बनाती है। हम संसाधनों के भंडार समुद्र का अध्ययन करते हैं। वह मछली एवं अन्य समुद्री भोजन के अतिरिक्त खनिजों की दृष्टि से भी सम्पन्न है। भारत ने समुद्री-तल से मैंगनीज पिंड (नॉढ्यूल्स) एकत्रित करने की तकनीक विकसित कर ली है। मृदा एक नवीकरणीय/पुनः स्थापनीय संसाधन है जो अनेक आर्थिक क्रियाओं, जैसे कृषि को प्रभावित करती है। मिट्री की उर्वरता प्रकृति से निर्धारित तथा संस्कृति से प्रेरित होती है। मृदा पौधों, पशुओं एवं सूक्ष्म जीवाणुओं के धारक जीवमंडल के लिए आधार प्रदान करती है।
भौतिक भूगोल प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन एवं प्रबंधन से संबंधित विषय के रूप में विकसित हो रहा है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु भौतिक पर्यावरण एवं मानव के मध्य संबंधों को समझना आवश्यक है। भौतिक पर्यावरण संसाधन प्रदान करता है एवं मानव इन संसाधनों का उपयोग करते हुए अपना आर्थिक एवं सास्कृतिक विकास सुनिश्चित करता है। तकनीकी की सहायता से संसाधनों के बढ़ते उपयोग ने विश्व में पारिस्थौतिक असंतुलन उत्पन्न कर दिया है। अतएव सतत् विकास (Sustainable development) के लिए भौतिक वातावरण का ज्ञान नितांत आवश्यक है जो भौतिक भूगोल के महत्व को रेखांकित करता है।
अभ्यास
1. बहुवैकल्पिक प्रश्न :
(i) निम्नलिखित में से किस विद्वान ने भूगोल (Geography) शब्द (Term) का प्रयोग किया?
(क) हेरोडटस
(ग) इरेटास्थेनीज़
(ख) गैलिलियो
(घ) अरस्तू
(ii) निम्नलिखित में से किस लक्षण को भौतिक लक्षण कहा जा सकता है?
(क) पत्तन
(ग) सड़क
(ख) मैदान
(घ) जल उद्यान
(iii) स्तंभ I एवं II के अंतर्गत लिखे गए विषयों को पढ़िए।
| स्तंभ कप्राकृतिक/सामाजिक विज्ञान | स्तंभ खभूगोल की शाखाएँ |
| 1. मौसम विज्ञान2. जनांकिकी3. समाजशास्त्र4. मृदा विज्ञान | अ. जनसंख्या भूगोलब. मृदा भूगोलस. जलवायु विज्ञानद. सामाजिक भूगोल |
सही मेल को चिहांकित कीजिए
(क) 1ब, 2स, 3अ, 4द
(ख) 1द, 2ब, 3स, 4अ
(ग) 1अ, 2द, 3ब, 4स
(घ) 1स, 2अ, 3द, 4ब
(iv) निम्नलिखित में से कौन सा प्रश्न कार्य-कारण संबंध से जुड़ा हुआ है?
(क) क्यों
(ग) कहाँ
(ख) क्या
(घ) कब
(v) निम्नलिखित में से कौन सा विषय कालिक संश्लेषण करता है?
(क) समाजशास्त्र
(ग) इतिहास
(ख) मानवशास्त्र
(घ) भूगोल
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए :
(i) आप विद्यालय जाते समय किन महत्वपूर्ण सांस्कृतिक लक्षणों का पर्यवेक्षण करते हैं? क्या वे सभी समान हैं अथवा असमान? उन्हें भूगोल के अध्ययन में सम्मिलित करना चाहिए अथवा नहीं? यदि हाँँ तो क्यों?
(ii) आपने एक्टेनिस गेंद, क्रिकेट गेंद, संतरा एवं लौकी देखा होगा। इनमें से कौन सी वस्तु की आकृत्ति पृथ्वी की आकृत्ति से मिलती जुलती है? आपने इस विशेष वस्तु को पृथ्वी की आकृत्ति को वर्णित करने के लिए क्यों चुना है।
(iii) क्या आप आपने विद्यालय में वन महोत्सव समारोह का आयोजन करते हैं? हम इतने पौधारोपण क्यों करते हैं? वृक्ष किस प्रकार पारिस्थौतिक संतुलन बनाए रखते हैं?
(iv) आपने हाथी, हिरण, केंचुए, वृक्ष एवं घास देखा है। वे कहाँ रहते एवं बढ़ते हैं? उस मंडल को क्या नाम दिया गया है? क्या आप इस मंडल के कुछ लक्षणों का वर्णन कर सकते हैं?
(v) आपको अपने निवास से विद्यालय जाने में कितना समय लगता है? यदि विद्यालय आपके घर की सड़क के उस पार होता तो आप विद्यालय पहुँचने में कितना समय लेते? आने जाने के समय पर आपके घर एवं विद्यालय के बीच की दूरी का क्या प्रभाव पड़ता है? क्या आप समय को स्थान या, इसके विपरीत, स्थान को समय में परिवर्तित कर सकते हैं?
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए :
(i) आप आपने परिस्थान (Surrounding) का अवलोकन करने पर पाते हैं कि प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक दोनों तथ्यों में भिन्नता पाई जाती है। सभी वृक्ष एक ही प्रकार के नहीं होते। सभी पशु एवं पक्षी जिसे आप देखते हैं भिन्न भिन्न होते हैं। ये सभी भिन्न तत्व धरातल पर पाये जाते हैं। क्या अब आप यह तर्क दे सकते हैं कि भूगोल प्रादेशिक/क्षेत्रीय भिन्नता का अध्ययन है?
(ii) आप पहले ही भूगोल, इतिहास, नागरिकशास्त्र एवं अर्थशास्त्र का सामाजिक विज्ञान के घटक के रूप में अध्ययन कर चुके हैं। इन विषयों के समाकलन का प्रयास उनके अंतरापृष्ठ (Interface) पर प्रकाश डालते हुए कीजिए।
परियोजना कार्य
(अ) वन को एक संसाधन के रूप में चुनिए, एवं
