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केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की विशेषताएँ, लाभ, पर्यावरणीय चुनौतियाँ, महत्व और BPSC परीक्षा के लिए संपूर्ण जानकारी।

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Written by Akhilesh Anand
Published: 3 August 20268 min read
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना
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केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना

हाल ही में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केन बेतवा नदी जोड़ों परियोजना से संबंधित जानकारियों को साझा किया है। एक तरफ उन्होंने बताया है कि संबंधित परियोजना प्राधिकरण, जिला प्रशासन और वन विभाग द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, कोई विरोध नहीं देखा गया है, वहीं दुसरी तरफ केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना, मध्य प्रदेश में जनजातीय समुदायों के विरोध का केंद्र बन गई है। विरोध का कारण विस्थापन, पुनर्वास, मुआवज़े और पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़ी चिंताएं हैं।  

केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (एनपीपी) के अंतर्गत कार्यान्वयन चरण में पहुंचने वाली पहली ऐसी इंटरलिंकिंग पहल है। एनपीपी के अंतर्गत चिन्हित अन्य लिंक परियोजनाओं के लिए, बजटीय प्रावधान, निधि आवंटन और व्यय आदि पर विचार तब किया जाएगा जब ये परियोजनाएं कार्यान्वयन चरण में पहुंच जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्य प्रदेश में केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना की आधारशिला रखी थी।

केन-बेतवा लिंक परियोजना के बारे में

केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली अंतर-नदी जोड़ो परियोजना है। इसे 1980 में तैयार की गई राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत प्रस्तावित 30 नदी जोड़ो योजनाओं में से प्रथम परियोजना के रूप में चिन्हित किया गया है।

परियोजना का क्रियान्वयन केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। यह परियोजना के प्रबंधन और समन्वय के लिए गठित एक विशेष प्रयोजन संस्था है।

इस योजना का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार की तरफ से दिया जाएगा जबकि 10-10 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से जारी किया जाएगा।

इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश में बहने वाली केन नदी के अतिरिक्त जल को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में अंतरित करना है। दोनों ही नदियाँ यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।

चरण-I: इसमें दौधन बांध परिसर का निर्माण, निम्न-स्तरीय और उच्च-स्तरीय सुरंगें, केन-बेतवा लिंक नहर तथा विद्युत गृहों की स्थापना शामिल है।

चरण-II: इसमें बेतवा की सहायक नदी पर ओर्र बांध का विकास, बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देशीय परियोजना और कोठा बैराज का निर्माण शामिल है।

इससे होने वाले लाभ

परियोजना से कुल 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पन्न होने का अनुमान है। केन और बेतवा नदी के पानी का इस्तेमाल पूरे बुंदेलखंड में होगा। अभी यह नदियां अलग-अलग जिलों तक जाती हैं।

यह परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुल 13 जिलों को आपस में जोड़ते हुए पानी की किल्लत को हमेशा के लिए खत्म करेगी। केन नदी का पानी 221 किलोमीटर लंबी कंक्रीट नहर और एक विशेष सुरंग के जरिए ट्रांसफर होकर बेतवा बेसिन तक पहुंचेगा जिससे सभी जिलों में लाभ होगा।

राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना (NRLP) के बारे में

राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का उद्देश्य देश में जल की अधिकता वाले क्षेत्रों से जल को जल की कमी वाले क्षेत्रों तक स्थानांतरित करना है।

नदियों को आपस में जोड़ने का मुख्य उद्देश्य देश की सभी नदियों में जल-स्तर का संतुलन स्थापित करना है।

भारत के कुछ हिस्से सूखे की समस्या से जूझते हैं, जबकि अन्य हिस्से हर वर्ष बाढ़ का सामना करते हैं।

नदियों को आपस में जोड़ने से जल-स्तर का संतुलन बना रहेगा और इन दोनों आपदाओं की तीव्रता में कमी लाई जा सकेगी।

इसे वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के मुख्य घटक:

इस योजना के तहत देश में कुल 30 नदी-लिंक बनाने का प्रस्ताव है, जिनके माध्यम से 37 नदियों को आपस में जोड़ा जाएगा। 

इसके लिए लगभग 15,000 कि.मी. लंबी नई नहरों का निर्माण प्रस्तावित है। 

यह परियोजना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण - हिमालयी घटक: इसमें गंगा, यमुना, कोसी, सतलुज जैसी हिमालयी नदियों पर कुल 14 लिंक बनाए जाएंगे।

दूसरा चरण - प्रायद्वीपीय घटक: इसमें महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा जैसी दक्षिण भारत की नदियों पर 16 लिंक बनाने की योजना है। 

इस परियोजना का प्रबंधन जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (NWDA) द्वारा किया जाता है।

केन-बेतवा परियोजना का महत्त्व:

बुंदेलखंड क्षेत्र मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैला एक सूखाग्रस्त क्षेत्र है।

यह परियोजना इस क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सिंचाई को विश्वसनीय बनाने, कृषि उत्पादन बढ़ाने, क्षेत्रीय विकास को गति देने और पलायन को रोकने में सहायक होगी।

पर्यावरणीय चिंताएँ:

परियोजना को लेकर पन्ना टाइगर रिजर्व पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएँ सामने आई हैं। दौधन जलाशय के निर्माण से रिजर्व के लगभग 4,141 हेक्टेयर कोर क्षेत्र और 1,314 हेक्टेयर बफर क्षेत्र के जलमग्न होने की आशंका है।

  • उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश राज्य में केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी) के अंतर्गत, दौधन बांध और उससे संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण कार्य को सुगम बनाने के लिए लगभग 17,101 पेड़ काटने के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 12,404 पेड़ पन्ना टाइगर रिजर्व वन में काटे गए हैं।
  • भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम, 2013) की धारा-11 के जारी होने के समय उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, इस परियोजना में 7,193 परियोजना प्रभावित परिवार (पीएएफ) शामिल हैं।
  • IIT-बॉम्बे द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, जल स्थानांतरण के कारण वर्षा की कमी हो सकती है।

नदियों जोड़ो परियोजना - संक्षिप्त अवलोकन

वर्षप्रमुख घटना
1919नदियों को जोड़ने की अवधारणा सर्वप्रथम मद्रास प्रेसीडेंसी के मुख्य अभियंता सर आर्थर कॉटन द्वारा प्रस्तावित की गई।
1960तत्कालीन ऊर्जा एवं सिंचाई राज्य मंत्री डॉ. के.एल. राव ने इस विचार को पुनर्जीवित किया और गंगा-कावेरी नदी लिंक का प्रस्ताव दिया।
1982पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (NWDA) की स्थापना की गई।
2002सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को 2003 तक नदी जोड़ो योजना का खाका तैयार कर 2016 तक इसे लागू करने का निर्देश दिया।
2003नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन हेतु केंद्र सरकार द्वारा टास्क फोर्स का गठन किया गया।
2012सर्वोच्च न्यायालय ने पुनः सरकार से नदी जोड़ो परियोजना को शीघ्र प्रारंभ करने का आग्रह किया।
2014केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में मंजूरी प्रदान की।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना भारत की जल सुरक्षा के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना है। यह परियोजना सूखा-प्रवण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने, बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई का विस्तार और जलविद्युत उत्पादन के माध्यम से क्षेत्रीय विकास को गति दे सकती है। केन-बेतवा लिंक जैसी परियोजनाओं से बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, विस्थापन, पुनर्वास, उच्च लागत, अंतर-राज्यीय जल विवाद और पन्ना टाइगर रिजर्व जैसे पर्यावरणीय मुद्दे इस योजना के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ हैं। अतः परियोजना को लागू करते समय सतत विकास, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और प्रभावित समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। वैज्ञानिक योजना, पारदर्शी नीति और केंद्र-राज्य समन्वय के साथ ही नदी जोड़ो परियोजना "जल से समृद्धि" के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

Reference:

  1. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2149870&reg=48&lang=2
  2. https://www.thehindu.com/news/national/why-are-there-protests-over-the-ken-betwa-project/article71267449.ece
  3. https://ndtv.in/india/ken-betwa-link-project-route-map-jhansi-lalitpur-chhatarpur-tikamgarh-including-13-districts-water-connectivity-11855260
  4. https://hindi.downtoearth.org.in/river/kenbetwa-project-forced-displacement-of-adivasis-and-farmers-incomplete-rehabilitation-and-broken-homes-the-reality-of-indias-first-river-linking-project
What is the Ken-Betwa river link project?

It is India's first inter-river linking project, transferring surplus water from the Ken river in Madhya Pradesh to the Betwa river in Uttar Pradesh; both rivers are major tributaries of the Yamuna.

Who is implementing the project?

The project is implemented by the Ken-Betwa Link Project Authority, a special purpose entity set up for its management and coordination.

When was the foundation stone for the project laid?

PM Narendra Modi laid the foundation stone for the Ken-Betwa National Project in Madhya Pradesh in 2024, on the occasion of former PM Atal Bihari Vajpayee's 100th birth anniversary.

What do the two phases of the project involve?

Phase-I includes construction of the Daudhan dam complex, low-level and high-level tunnels, the Ken-Betwa link canal, and power houses. Phase-II includes the Orr dam on a Betwa tributary, the Bina Complex multipurpose project, and the Kotha barrage.

What benefits is the project expected to deliver?

It is estimated to generate 103 megawatts of hydropower and 27 megawatts of solar power, and it will connect a total of 13 districts across Madhya Pradesh and Uttar Pradesh, addressing water scarcity in the Bundelkhand region.

Why has the project faced opposition?

It has become a center of protest by tribal communities in Madhya Pradesh over concerns related to displacement, rehabilitation, compensation, and environmental impacts.

What is the environmental concern regarding Panna Tiger Reserve?

Construction of the Daudhan reservoir is expected to submerge about 4,141 hectares of the reserve's core area and 1,314 hectares of buffer area, and 12,404 of the 17,101 trees identified for felling are within the Panna Tiger Reserve forest.

How many families are affected by the project?

According to records available under Section 11 of the RFCTLARR Act, 2013, the project involves 7,193 project-affected families.

What is the National River Linking Project (NRLP) and its target?

The NRLP aims to transfer water from water-surplus to water-deficit regions through 30 proposed river links connecting 37 rivers, managed by the National Water Development Agency, with a target completion year of 2030.

Is the Ken-Betwa project relevant to the BPSC syllabus?

Yes, as a Geography-related current affairs topic, interlinking of rivers and water resource projects such as Ken-Betwa are relevant to GS Paper-1 in the BPSC syllabus.

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