हिन्दी दिवस 2026
प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। दरअसल 1949 में इसी दिन संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को देश की आधिकारिक भाषा के तौर पर अपनाया था। आज हिन्दी दुनिया में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है और 52 करोड़ से ज़्यादा लोगों की पहली भाषा है।
उल्लेखनीय है कि यह दिवस संविधान सभा द्वारा भारत के भाषा संबंधी विवाद को सुलझाने के लिये मुंशी–अयंगार सूत्र को अपनाने के ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में मनाया जाता है। यह अवसर संविधान सभा में हुए भाषा विवाद और भारत की भाषाई विविधता के साथ हिंदी के प्रोत्साहन के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयासों पर पुनः ध्यान आकर्षित करता है।
संविधान सभा में भाषा विवाद क्या था?
| विवाद का मुख्य मुद्दा: | आज़ादी के समय भारत में सैकड़ों भाषाएँ बोली जाती थीं। सबसे बड़ा सवाल यह था कि अंग्रेज़ी, जो 1% से भी कम लोग बोलते थे, उसे हटाकर किस भारतीय भाषा को केंद्र की राजभाषा बनाया जाए। |
| हिन्दी समर्थक पक्ष: | हिन्दी क्षेत्रों के नेता जैसे आर.वी. धुलेकर और सेठ गोविंद दास चाहते थे कि हिन्दी को ही देश की एकमात्र "राष्ट्रीय भाषा" बनाया जाए। उनका कहना था कि बहुत सारी भाषाएँ होने से देश में एकता नहीं रहेगी, इसलिए अंग्रेज़ी को तुरंत हटाना चाहिए। |
| गैर-हिंदी भाषी प्रतिनिधि: | दक्षिण भारत सहित गैर-हिंदी क्षेत्रों के सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध किया। श्री शंकरराव देव जैसे नेताओं ने "विविधता में एकता" की बात कही और चेतावनी दी कि हिन्दी थोपने से भाषाई अल्पसंख्यकों की संस्कृति और पहचान खतरे में पड़ जाएगी। |
| मध्यमार्गी पक्ष: | जवाहरलाल नेहरू और मौलाना आज़ाद जैसे नेताओं ने बीच का रास्ता सुझाया। उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा समर्थित हिंदुस्तानी (हिन्दी और उर्दू का मिला-जुला रूप) को बढ़ावा देने की बात कही। उनका मानना था कि उस समय हिंदी में प्रशासनिक और तकनीकी शब्दों की कमी थी, इसलिए बदलाव धीरे-धीरे और स्वाभाविक रूप से होना चाहिए। |
मुंशी-अयंगार सूत्र
तीन साल तक चले तीखे और बेनतीजा वाद-विवाद के बाद, प्रारूप समिति के सदस्य के.एम. मुंशी और एन. गोपालस्वामी अयंगार ने एक बीच का रास्ता निकाला। समझौते के मुख्य प्रावधान:
| राजभाषा, न कि राष्ट्रीय भाषा: | इस सूत्र में बहुत सोच-समझकर हिन्दी को "राष्ट्रीय भाषा" नहीं कहा गया। बल्कि देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को केवल केंद्र सरकार की "राजभाषा" के रूप में स्वीकार किया गया। |
| अंग्रेज़ी को जारी रखना: | गैर-हिन्दी भाषी राज्यों को भरोसा दिलाने के लिए, हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेज़ी को 15 साल तक (1965 तक) सहायक राजभाषा के रूप में जारी रखने का फैसला किया गया, ताकि प्रशासनिक कामकाज में कोई रुकावट न आए। बाद में जब 1965 में यह 15 साल की अवधि खत्म होने वाली थी, तो गैर-हिंदी भाषी राज्यों, खासकर तमिलनाडु में हिन्दी के खिलाफ बड़े आंदोलन हुए। इसके जवाब में संसद ने राजभाषा अधिनियम, 1963 पास किया, जिसने तय किया कि केंद्र के कामकाज और राज्यों के बीच संवाद के लिए हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेज़ी का इस्तेमाल जारी रहेगा। |
| अंक/न्यूमरल्स: | आधिकारिक काम के लिए हिंदू-अरबी अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप (1,2,3) को अपनाया गया, जिससे देवनागरी अंकों की मांग करने वालों और विरोध करने वालों के बीच संतुलन बन गया। |
| क्षेत्रीय भाषाएँ: | राज्यों को यह पूरी आज़ादी दी गई कि वे अपने राज्य के अंदरूनी प्रशासन के लिए किसी भी क्षेत्रीय भाषा या अंग्रेज़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं। |
संवैधानिक प्रावधान
मुंशी-अयंगार सूत्र को संविधान के भाग XVII (अनुच्छेद 343 से 351) में जगह दी गई। अनुच्छेद 343: यह कहता है कि संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी होगी। अनुच्छेद 348: इसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की सभी कार्यवाहियाँ और विधायिका के आधिकारिक पाठ अंग्रेज़ी में ही होंगे। अनुच्छेद 348(2) के तहत, राज्यपाल राष्ट्रपति की मंजूरी से हाई कोर्ट की कार्यवाही में हिन्दी या राज्य की राजभाषा के इस्तेमाल की अनुमति दे सकते हैं। अनुच्छेद 350A: यह राज्यों को निर्देश देता है कि वे प्राथमिक स्तर पर बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने की सुविधा दें। अनुच्छेद 351: यह केंद्र सरकार को हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए काम करने का निर्देश देता है। आठवीं अनुसूची: शुरू में संविधान की आठवीं अनुसूची में 14 प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं को मान्यता दी गई थी ताकि उनकी सुरक्षा और विकास हो सके। बाद में संशोधनों के जरिए यह संख्या बढ़ाकर 22 कर दी गई, जिनमें हिन्दी भी उन शुरुआती 14 भाषाओं में से एक थी। खास बात यह है कि अंग्रेज़ी आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है। वह राजभाषा अधिनियम, 1963 के तहत सहायक राजभाषा के रूप में जारी है।
हिन्दी दिवस 2026 के बारे में
छठा अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन: इस बार हिन्दी दिवस 2026 के मौके पर इसका आयोजन नवी मुंबई, महाराष्ट्र में किया गया। इसका मकसद हिन्दी को एक व्यावहारिक संपर्क भाषा के रूप में बढ़ावा देना है, साथ ही अन्य अनुसूचित भारतीय भाषाओं के साथ तालमेल और सह-अस्तित्व को भी प्रोत्साहित करना है।
राजभाषा पुरस्कार (2025-26):
राजभाषा कीर्ति पुरस्कार: यह राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय) द्वारा दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार है। यह उन मंत्रालयों, विभागों, PSU और बैंकों को दिया जाता है जो सरकारी कामकाज में हिन्दी का सबसे अच्छा इस्तेमाल करते हैं।
प्रमुख विजेता (2025-26):
रक्षा मंत्रालय (MoD): 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाले मंत्रालयों/विभागों की श्रेणी में पहला पुरस्कार मिला।
वित्तीय सेवा विभाग (DFS): 300 से कम कर्मचारियों वाले मंत्रालयों/विभागों की श्रेणी में पहला पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार सरकारी काम में हिंदी के प्रभावी इस्तेमाल और नए तरीकों से प्रोत्साहन के लिए दिया गया।
राजभाषा उत्कृष्टता सम्मान (विशेष मान्यता): नियम के अनुसार, अगर कोई मंत्रालय लगातार दो साल पहला पुरस्कार जीत लेता है, तो वह तीसरे साल सामान्य कीर्ति पुरस्कार के लिए पात्र नहीं रहता। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) ने 2023-24 और 2024-25 में लगातार प्रथम पुरस्कार जीता था, इसलिए इस बार उसे निरंतर उत्कृष्टता के लिए विशेष राजभाषा उत्कृष्टता सम्मान दिया गया।
राजभाषा गौरव पुरस्कार: यह व्यक्तिगत लेखकों और सरकारी कर्मचारियों को हिंदी में मौलिक किताबें, साहित्य और बेहतरीन लेख लिखने के लिए दिया जाता है।
विश्व हिन्दी दिवस
भारत में हिन्दी दिवस साल में दो बार- 14 सितंबर और 10 जनवरी को को मनाया जाता है। हालांकि, 14 सितंबर के दिन को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस एवं 10 जनवरी के दिन को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। विश्व हिन्दी दिवस 1975 में नागपुर में हुए पहले विश्व हिंदी सम्मेलन की याद में मनाया जाता है और इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी को बढ़ावा देना है।










