CBD COP 17 सम्मेलन: पूरी चर्चा
यह विषय UPSC Prelims, UPSC Mains GS Paper III और BPSC के पर्यावरण एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध वाले हिस्से के लिए उपयोगी है।
CBD COP 17 पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है। इसका आयोजन 19–30 अक्टूबर 2026 को येरेवन (Yerevan), आर्मेनिया में निर्धारित है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें पहली बार दुनिया के देश सामूहिक रूप से समीक्षा करेंगे कि वे Kunming–Montreal Global Biodiversity Framework (KMGBF) के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में कितना आगे बढ़े हैं।
CBD COP 17 क्या है?
- CBD: Convention on Biological Diversity — जैव विविधता पर कन्वेंशन।
- COP 17: Conference of the Parties — इस अभिसमय में शामिल देशों का 17वां सम्मेलन।
- स्थान: येरेवन, आर्मेनिया।
- तिथि: 19 से 30 अक्टूबर 2026।
- थीम: Taking Action for Nature — प्रकृति के लिए कार्रवाई करना। यह वह मंच है जहाँ अलग-अलग देश मिलकर चर्चा करते हैं कि पृथ्वी पर मौजूद पादप, जंतु, वन, नदी, समुद्र और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों को कैसे बचाया जाए।
मान लिजिए कि यदि किसी देश में जंगल तेजी से कट रहे हैं और दूसरे देश में समुद्री जीवों की संख्या घट रही है, तो COP के जरिये देश संरक्षण के लक्ष्य, वित्तीय सहायता, तकनीक और निगरानी के उपायों पर सहमति बनाने की कोशिश करते हैं।
CBD (Convention on Biological Diversity) :
यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौता है, जिसे 1992 में रियो डी जेनेरियो, ब्राजील में हुए Earth Summit के दौरान अपनाया गया था। यह 1993 में लागू हुआ।
इसके तीन मुख्य उद्देश्य हैं:
1. जैव विविधता का संरक्षण
जंगलों, वन्यजीवों, पादपों, समुद्री जीवों और उनके आवासों की रक्षा करना।
2. जैव विविधता का सतत उपयोग
प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा उपयोग करना जिससे वे भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी उपलब्ध रहें।
3. आनुवंशिक संसाधनों से मिलने वाले लाभों का उचित बँटवारा
उदाहरण के लिए, किसी पौधे के आनुवंशिक संसाधन से दवा विकसित होने पर लाभों को साझा करने के लिए उचित व्यवस्था करना।
COP 17 क्यों महत्वपूर्ण है?
2022 में अपनाए गए Kunming–Montreal Global Biodiversity Framework का लक्ष्य 2030 तक जैव विविधता के नुकसान को रोकने की दिशा में काम करना है। COP 17 इस ढाँचे पर दुनिया की सामूहिक प्रगति की पहली वैश्विक समीक्षा का अवसर है।
इसका मतलब है कि केवल लक्ष्य घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा। देशों को यह भी दर्शाना होगा कि उन्होंने वास्तव में क्या कदम उठाए हैं।
यदि किसी देश ने 2030 तक जंगलों और अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों की रक्षा के लिए लक्ष्य बनाया है, तो समीक्षा में यह देखना जरूरी है कि संरक्षित क्षेत्र बढ़े या नहीं, जंगलों का नुकसान घटा या नहीं और संरक्षण के लिए पर्याप्त पैसा मिला या नहीं।
COP 17 में किन विषयों पर विशेष ध्यान रहेगा?
- जैव विविधता के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना।
- देशों की प्रगति की निगरानी और रिपोर्टिंग।
- राष्ट्रीय जैव विविधता योजनाओं को लागू करना।
- वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण।
- स्वदेशी समुदायों और स्थानीय लोगों की भागीदारी।
- आनुवंशिक संसाधनों से लाभों का उचित बँटवारा।
- जैव विविधता को कृषि, स्वास्थ्य और विकास नीतियों में शामिल करना।
Kunming–Montreal Global Biodiversity Framework (KMGBF) क्या है?
यह वैश्विक जैव विविधता संरक्षण की कार्ययोजना है, जिसे दिसंबर 2022 में कनाडा के मॉन्ट्रियल में CBD COP 15 के दौरान अपनाया गया था। इसका नाम चीन के कुनमिंग और कनाडा के मॉन्ट्रियल शहरों से जुड़ा है, क्योंकि सम्मेलन की प्रक्रिया दोनों शहरों से संबंधित रही।
इसका मुख्य उद्देश्य है — 2030 तक जैव विविधता के नुकसान को रोकने और उसे पलटने के लिए ठोस कार्रवाई करना। इसमें चार व्यापक लक्ष्य और 2030 के लिए 23 विशिष्ट लक्ष्य हैं।
KMGBF के कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्य
क. 30×30 लक्ष्य
2030 तक दुनिया की कम-से-कम 30% स्थलीय और अंतर्देशीय जल क्षेत्रों तथा 30% समुद्री और तटीय क्षेत्रों का प्रभावी संरक्षण करना।
ख. खराब हो चुके पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली
जंगलों, नदियों, आर्द्रभूमियों और अन्य क्षतिग्रस्त प्राकृतिक क्षेत्रों को बहाल करना।
ग. प्रदूषण में कमी
कीटनाशकों, अतिरिक्त पोषक तत्वों और प्लास्टिक जैसे प्रदूषण के जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करना।
घ. सतत उत्पादन और उपभोग
कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन और अन्य क्षेत्रों में ऐसे तरीके अपनाना जिनसे प्रकृति को कम नुकसान पहुँचे।
वित्त COP 17 का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा
जैव विविधता बचाने के लिए कानून और योजनाएँ जरूरी हैं, लेकिन उन्हें लागू करने के लिए पर्याप्त वित्त भी चाहिए।
संरक्षित क्षेत्र बनाना, जंगल बहाल करना, वन्यजीवों की निगरानी करना, स्थानीय समुदायों को सहयोग देना और वैज्ञानिक शोध करना इन सभी पर खर्च होता है।
COP 17 में Resource Mobilization यानी वित्तीय संसाधन जुटाना एक प्रमुख विषय है। इसमें यह चर्चा महत्वपूर्ण होगी कि संरक्षण के लिए पैसा कैसे जुटाया जाए, विकासशील देशों को किस प्रकार सहायता मिले और उपलब्ध धन का सही इस्तेमाल कैसे हो।
हानिकारक सब्सिडी का मुद्दा
कुछ सरकारी सब्सिडी या आर्थिक प्रोत्साहन अनजाने में प्रकृति को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी प्रोत्साहन से अत्यधिक दोहन, प्रदूषण या प्राकृतिक आवासों का विनाश बढ़ता है, तो उसे सुधारने की जरूरत हो सकती है।
KMGBF के Target 18 में 2030 तक जैव विविधता को नुकसान पहुँचाने वाली सब्सिडी और प्रोत्साहनों की पहचान, उन्हें समाप्त करने या सुधारने तथा ऐसे प्रोत्साहनों को कम-से-कम 500 अरब अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष घटाने का लक्ष्य शामिल है। साथ ही, संरक्षण के लिए सकारात्मक प्रोत्साहनों को बढ़ावा देना भी महत्वपूर्ण है।
COP 17 और Cali Fund
COP 16 के दौरान 2024 में Cali Fund से संबंधित व्यवस्था शुरू की गई थी। चूँकि यह सम्मेलन कोलंबिया के Cali में हुआ था , इसलिए इस fund को यह नाम दिया गया. इसका संबंध Digital Sequence Information (DSI) यानी आनुवंशिक संसाधनों से जुड़ी डिजिटल अनुक्रम जानकारी के उपयोग से मिलने वाले लाभों को साझा करने से है।
DSI के बारे में
किसी जीव के DNA या RNA में मौजूद आनुवंशिक जानकारी का डिजिटल रूप से विश्लेषण और उपयोग करना DSI से जुड़ा विषय है।
उदाहरण के लिए, किसी पौधे की आनुवंशिक जानकारी का उपयोग करके दवा या अन्य उपयोगी उत्पाद विकसित करने के शोध में मदद मिल सकती है।
इससे यह प्रश्न उठता है कि जब कंपनियाँ ऐसी जानकारी से व्यावसायिक लाभ कमाती हैं, तो लाभों को साझा करने की व्यवस्था कैसी होनी चाहिए और जैव विविधता के संरक्षण में योगदान कैसे दिया जाए।
COP 17 के साथ Cartagena Protocol और Nagoya Protocol की बैठकें भी होंगी
CBD COP 17 के साथ दो अन्य महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल की बैठकें भी आयोजित होंगी।
| प्रोटोकॉल | मुख्य उद्देश्य | आसान उदाहरण |
| जैव सुरक्षा पर कार्टाजेना प्रोटोकॉल | आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी से बने जीवों के सुरक्षित उपयोग और संभावित जोखिमों से निपटना | आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (LMOs) से जैव विविधता पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का प्रबंधन |
| नागोया प्रोटोकॉल | आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच और उनसे मिलने वाले लाभों का उचित बँटवारा | औषधीय पौधों के आनुवंशिक संसाधनों से व्यावसायिक लाभ होने पर उचित लाभ-साझाकरण |
COP 17 में भारत के लिए महत्व
भारत जैव विविधता के लिहाज से अत्यंत समृद्ध देश है। यहाँ हिमालय, पश्चिमी घाट, जंगल, घास के मैदान, आर्द्रभूमियाँ, मैंग्रोव, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और अनेक प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं।
भारत के लिए COP 17 कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
- जैव विविधता संरक्षण: बाघ, हाथी, गंगा डॉल्फिन और अनेक संकटग्रस्त प्रजातियों तथा उनके आवासों की सुरक्षा।
- वित्तीय सहायता: विकासशील देशों में संरक्षण योजनाओं के लिए पर्याप्त और सुलभ वित्त की आवश्यकता।
- स्थानीय समुदाय: वन-आश्रित समुदायों और पारंपरिक ज्ञान रखने वाले लोगों की भूमिका।
- सतत कृषि: मिट्टी, परागण करने वाले जीवों और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा।
- समुद्री संरक्षण: मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियों और तटीय जैव विविधता की सुरक्षा।
- राष्ट्रीय योजनाओं की समीक्षा: भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्ययोजना को वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप लागू करने की आवश्यकता।
भारत के लिए मुख्य चुनौती
भारत को विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है। सड़क, रेल, ऊर्जा, खनन और शहरीकरण जैसी विकास गतिविधियों के साथ प्राकृतिक आवासों का नुकसान कम करना भी आवश्यक है।
COP 17 के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
1. वित्त की कमी
विकासशील देशों को जैव विविधता के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए धन और तकनीकी सहायता की आवश्यकता है।
2. लक्ष्यों और वास्तविक कार्रवाई में अंतर
लक्ष्य घोषित करना आसान है, लेकिन उन्हें लागू करना, परिणाम मापना और नियमित रिपोर्ट देना अधिक कठिन है।
3. आर्थिक गतिविधियों का दबाव
भूमि उपयोग में बदलाव, प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन और हानिकारक आर्थिक प्रोत्साहन जैव विविधता को प्रभावित कर सकते हैं।
4. अंतरराष्ट्रीय सहयोग
देशों की आर्थिक क्षमताएँ और प्राथमिकताएँ अलग-अलग हैं। संरक्षण की जिम्मेदारियों और वित्तीय सहायता पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भारत की प्रतिबद्धता: National Biodiversity Strategy and Action Plan (NBSAP)
भारत ने वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों को अपने देश की परिस्थितियों के अनुसार लागू करने के लिए National Biodiversity Strategy and Action Plan (NBSAP) 2024–2030 को अद्यतन किया है। यह KMGBF से जुड़ी भारत की प्रमुख राष्ट्रीय योजना है।
इसका उद्देश्य है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय, वैज्ञानिक संस्थान, निजी क्षेत्र और समुदाय मिलकर जैव विविधता की रक्षा करें।
भारत की प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं:
- जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्रों का संरक्षण।
- संकटग्रस्त प्रजातियों और उनके आवासों की रक्षा।
- खराब हो चुके पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली।
- प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को कम करना।
- जैव विविधता के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी।
- जैव विविधता से जुड़े लाभों का उचित बँटवारा।
भारत की प्रमुख पहलें और KMGBF के लक्ष्यों से उनका संबंध
भारत में पहले से चल रही कई योजनाएँ इस वैश्विक रूपरेखा के उद्देश्यों को पूरा करने में मदद करती हैं। इन्हें उदाहरणों के साथ समझिए।
1. प्रोजेक्ट टाइगर (1973)
उद्देश्य: बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना।
KMGBF से संबंध: Target 3 और Target 4 — संरक्षण क्षेत्र और संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा।
उदाहरण: बाघ अभयारण्यों का प्रबंधन, शिकार पर रोक, कैमरा ट्रैप से निगरानी और वन्यजीव गलियारों की रक्षा।
2. प्रोजेक्ट एलीफेंट (1992)
उद्देश्य: हाथियों, उनके आवासों और आवागमन के रास्तों की रक्षा करना।
KMGBF से संबंध: Target 4 और Target 5 — प्रजातियों का संरक्षण तथा वन्यजीवों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देना।
उदाहरण: हाथी गलियारों की पहचान और मानव–हाथी संघर्ष को कम करने के उपाय।
3. MISHTI योजना (2023)
पूरा नाम: Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes।
उद्देश्य: मैंग्रोव वनों का संरक्षण और पुनर्स्थापन।
KMGBF से संबंध: Target 2, Target 3 और Target 8 — पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना।
उदाहरण: तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव बहाल करने से मछलियों और अन्य जीवों को आवास मिलता है तथा तटीय कटाव और तूफानी लहरों के प्रभाव कम करने में मदद मिल सकती है।
4. अमृत धरोहर योजना (Amrit Dharohar)
उद्देश्य: रामसर स्थलों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और प्रकृति-अनुकूल आजीविका को बढ़ावा देना।
KMGBF से संबंध: Target 2, Target 3 और Target 10।
उदाहरण: आर्द्रभूमियों की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखते हुए पक्षियों, मछलियों और स्थानीय आजीविका का संरक्षण।
5. जैव विविधता अधिनियम, 2002 और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA)
उद्देश्य: जैव विविधता का संरक्षण, संसाधनों का सतत उपयोग और उनसे मिलने वाले लाभों का उचित बँटवारा।
KMGBF से संबंध: Target 13
उदाहरण: जैविक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों के बँटवारे और पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा के लिए कानूनी एवं संस्थागत व्यवस्था।
6. People's Biodiversity Registers (PBRs)
उद्देश्य: स्थानीय स्तर पर पाए जाने वाले पौधों, जीवों, कृषि किस्मों और पारंपरिक जैविक ज्ञान का दस्तावेजीकरण।
KMGBF से संबंध: Target 21 और Target 22 — जैव विविधता से जुड़ी जानकारी तक पहुँच तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी।
उदाहरण: ग्राम स्तर पर स्थानीय औषधीय पौधों, बीजों और पारंपरिक उपयोगों की जानकारी दर्ज करना।
7. ग्रीन इंडिया मिशन (Green India Mission)
उद्देश्य: वन और वृक्षावरण बढ़ाना तथा वन पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता में सुधार करना।
KMGBF से संबंध: Target 2 और Target 3।
उदाहरण: स्थानीय प्रजातियों के साथ वन बहाली, जिससे मिट्टी, जल और वन्यजीवों को लाभ मिल सकता है।
भारत की उपलब्धियाँ और आगे की चुनौतियाँ
भारत ने बाघ संरक्षण, संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार, मैंग्रोव बहाली और जैव विविधता के लिए संस्थागत व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में पहल की है। उदाहरण के लिए, सरकारी जानकारी के अनुसार 2025 में भारत के बाघ अभयारण्यों की संख्या 58 तक पहुँच गई थी।
फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं:
- विकास परियोजनाओं के कारण प्राकृतिक आवासों का विखंडन।
- मानव–वन्यजीव संघर्ष।
- प्रदूषण, आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ और जलवायु परिवर्तन।
- संरक्षण के लिए पर्याप्त वित्त और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत।
- स्थानीय समुदायों के अधिकारों और आजीविका के साथ संरक्षण का संतुलन।
- योजनाओं के परिणामों की पारदर्शी निगरानी और नियमित रिपोर्टिंग।
इसलिए केवल संरक्षित क्षेत्रों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; उनके बीच प्राकृतिक गलियारों को सुरक्षित रखना और पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता सुधारना भी जरूरी है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, Kunming–Montreal Global Biodiversity Framework दुनिया को जैव विविधता के नुकसान को रोकने और प्रकृति के साथ संतुलित संबंध स्थापित करने की दिशा देता है।





