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E-20 : माइलेज बनाम मेक इन इंडिया की नीति

E-20 Ethanol Blending Program explained for UPSC & BPSC. Discover benefits, mileage concerns, government policy, and key challenges for GS-3.

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Written by Akhilesh Anand
Published: 23 July 202610 min read
E-20 : माइलेज बनाम मेक इन इंडिया की नीति
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E-20 एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम

चर्चा में क्यों है?

पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने वाली सरकार की नीतियों की एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है, वहीं देश भर में इससे प्रभावित लोग एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं। पिछले महीने सर्वोच्च न्यायालय ने ऊर्जा सुरक्षा लाभों का हवाला देते हुए देश भर में 20% एथेनॉल-सम्मिश्रित पेट्रोल की बिक्री को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया था। न्यायालय ने यह कहते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था कि ऊर्जा परिवर्तन से संबंधित नीतिगत निर्णय कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

बढ़ते विवादों के बीच सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा कि एथेनॉल की कैलोरीफिक वैल्यू कम होने के कारण ज्यादा ब्लेंड वाले पेट्रोल से माइलेज में बहुत मामूली कमी (3-5%) आ सकती है, लेकिन उन्होंने इंजन के खराब होने के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

क्या है E20 ईंधन?

एथेनॉल एक नवीकरणीय जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का, और खराब हो चुके अनाजों (जैसे चावल और गेहूं) से तैयार किया जाता है। इसके अलावा मोलासेस, पराली और बांस से भी एथेनॉल बनाया जा रहा है।

  • फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल : फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठे ज्वार और मक्का से बनाया जाता है।
  • सेकेंड जनरेशन एथेनॉल : सेकेंड जनरेशन एथेनॉल सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटेरियल जैसे- चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, कॉर्नकॉब (भुट्टा), बांस और वुडी बायोमास से बनाया जाता है।
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E20 ईंधन पेट्रोल और एथेनॉल का एक विशेष मिश्रण है, जिसमें 20% एथेनॉल और 80% पारंपरिक पेट्रोल मिलाया जाता है। भारत सरकार ने कच्चे तेल के आयात को कम करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में E20 ईंधन की बिक्री को अनिवार्य कर दिया है। सरकार का मानना है कि वैकल्पिक ईंधन से देश का तेल आयात कम होगा, प्रदूषण घटेगा और किसानों की आय बढ़ेगी।

उल्लेखनीय है कि कच्चे तेल के आयात को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्यों के साथ एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम 2003 में शुरू किया गया था। सरकार का कहना है कि तकनीकी तैयारियों और हितधारकों के परामर्श के आधार पर इस कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है, जिसका अंतिम चरण 2023 से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का कार्यान्वयन है।

विवाद होने की मुख्य वजहें

इससे प्रभावित आम उपभोक्ताओं का कहना है कि E20 पेट्रोल के उपयोग से ईंधन की दक्षता में कमी आ सकती है, क्योंकि एथेनॉल की प्रति लीटर ऊर्जा-घनत्व पेट्रोल की तुलना में कम होता है। इसके परिणामस्वरूप वाहनों का माइलेज प्रभावित हो सकता है तथा वाहनों की परिचालन लागत बढ़ सकती है।

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की रिपोर्ट के अनुसार, जब सामान्य पेट्रोल (E10) की तुलना में एथेनॉल-मिश्रित (E20) ईंधन का उपयोग किया जाता है, तो गाड़ी का माइलेज लगभग 2% से 6% तक कम हो सकता है, जो अलग-अलग वाहनों के मॉडल पर निर्भर करता है।

दूसरी तरफ E20 पेट्रोल पर विवाद के बीच एक नई सर्वे रिपोर्ट आई है, जिसमें 10 में से 6 गाड़ियों के मालिकों ने माना कि E20 पेट्रोल के आने के बाद माइलेज में 10% से ज्यादा की कमी आई है। लोकल सर्कल्स नाम से हुए एक सर्वे के मुताबिक, साल 2023 से पहले बनी गाड़ियों के लगभग 60% मालिकों का कहना है कि अप्रैल 2025 में पूरे देश में E20 एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल लागू होने के बाद जब उन्होंने अपनी गाड़ियों में इसका इस्तेमाल किया, तो माइलेज 10% से अधिक गिर गया।

सर्वे के नतीजों से एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि माइलेज की यह समस्या सिर्फ पुरानी गाड़ियों तक ही सीमित नहीं है। 2023-2024 में खरीदी गई नई गाड़ियों के 59% (10 में से 6) मालिकों का भी यही कहना है कि इसमें भी माइलेज में 10% से ज्यादा की गिरावट आई है। कुछ ने तो माइलेज में 20% तक गिरावट आने की भी बात कही है। इससे पता चलता है कि समस्या सिर्फ पुरानी गाड़ियों में ही नहीं, बल्कि नई गाड़ियों में भी एक जैसी ही है।

विवाद से जुड़े अन्य पक्ष

एथेनॉल की आर्द्रताग्राही प्रकृति के कारण वह वातावरण से नमी को अवशोषित कर लेता है। इससे विशेषकर पुराने वाहनों में संक्षारण का खतरा बढ़ जाता है तथा रबर, प्लास्टिक एवं धातु के पुर्ज़ों, ईंधन पंप, वाल्व तथा ईंधन प्रणाली के अन्य घटकों को क्षति पहुँचने की संभावना रहती है।

भारत में अधिकांश पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को E10, E20 अथवा शुद्ध पेट्रोल में से अपनी आवश्यकता के अनुसार चयन करने का विकल्प उपलब्ध नहीं है। इसके विपरीत, ब्राज़ील जैसे देशों में विभिन्न एथेनॉल सम्मिश्रण वाले ईंधन अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे उपभोक्ता अपने वाहन के अनुरूप ईंधन का चयन कर सकते हैं। यद्यपि एथेनॉल सम्मिश्रित पेट्रोल आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करता है, फिर भी उपभोक्ताओं को इसका प्रत्यक्ष मूल्य लाभ प्राप्त नहीं होता।

एथेनॉल पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की 5% दर लागू है, जबकि पेट्रोल GST के दायरे से बाहर है तथा उस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं राज्य मूल्य वर्धित कर लगाया जाता है। परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं के लिए शुद्ध पेट्रोल एवं एथेनॉल सम्मिश्रित पेट्रोल के मूल्य में कोई स्पष्ट अंतर दिखाई नहीं देता। इससे उन्हें लागत में भी कमी नहीं हो रही है।

E20 से आगे बढ़ने की चुनौतियाँ

E25, E30 या E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रणों की तरफ जाने से पहले नए और पुराने दोनों तरह के वाहनों की विस्तृत वैज्ञानिक जांच जरूरी होगी। इसमें इंजन की ट्यूनिंग, जंगरोधी क्षमता, इस्तेमाल होने वाली सामग्री की उपयुक्तता, प्रमाणन और होमोलोगेशन (विशेष संस्करण) से जुड़े सभी परीक्षण शामिल होने चाहिए।

एथेनॉल उत्पादन को लेकर आलोचना अक्सर इसके अधिक पानी के उपयोग और कृषि आधारित कच्चे माल पर निर्भरता को लेकर होती है। हालांकि आज के आधुनिक इथेनॉल प्लांट एक लीटर इथेनॉल बनाने में करीब 3–5 लीटर उपचारित पानी का इस्तेमाल करते हैं और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम अपनाते हैं, फिर भी जल संसाधनों के इस्तेमाल, फसल के चुनाव और पर्यावरणीय स्थिरता को लेकर सवाल बने हुए हैं।

भारत में एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम को अधिक प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक कदम

ईंधन के विकल्प उपलब्ध हों-: पेट्रोल पंपों पर E10, E20 तथा अन्य एथेनॉल मिश्रित ईंधनों के विकल्प दिए जाएँ, ताकि उपभोक्ता अपने वाहन की क्षमता के अनुसार ईंधन चुन सकें।

वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य हो-: E20 से अधिक एथेनॉल वाले ईंधनों को लागू करने से पहले विभिन्न प्रकार के इंजनों, ईंधन प्रणालियों और वाहन के पुर्ज़ों पर उनके दीर्घकालिक प्रभावों की गहन वैज्ञानिक जांच की जाए।

2G और 3G इथेनॉल को बढ़ावा-: द्वितीय पीढ़ी (2G) और तृतीय पीढ़ी (3G) एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे खाद्य सुरक्षा, भूमि उपयोग और जल संसाधनों पर पड़ने वाला दबाव कम हो।

जल संरक्षण पर फोकस-: एथेनॉल संयंत्रों में जल पुनर्चक्रण, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज और अन्य जल-बचत तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए।

पारदर्शी मूल्य निर्धारण-: एथेनॉल मिश्रित ईंधनों की कीमत तय करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को स्वच्छ ईंधन अपनाने का सीधा आर्थिक फायदा मिल सके।

जन-जागरूकता अभियान-: एथेनॉल सम्मिश्रण से होने वाले पर्यावरणीय, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा संबंधी लाभों को लेकर देशभर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।

गौरतलब है कि एथेनॉल मिश्रण एक विश्व स्तर पर स्वीकृत प्रक्रिया है और इसे संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील और जापान सहित कई देशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। ब्राजील ने लंबे समय से उच्च स्तर की एथेनॉल ब्लेंडिंग को अपनाया है, जिसमें E27 मानक पेट्रोल मिश्रण के रूप में कार्य करता है। लेकिन भारत जैसे विकासशील देश में इसे लागू करने से पहले सरकार को वैज्ञानिक प्रमाणों और हितधारकों के साथ निरंतर संवाद के जरिए उन्हें विश्वास में लेना चाहिए।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती ऊर्जा सुरक्षा को देखते हुए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम भारत के लिए निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर एक क्रांतिकारी कदम है। हालांकि, इसकी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ईंधन दक्षता, वाहनों की तकनीकी अनुकूलता, जल संसाधनों का सतत उपयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान और उपभोक्ताओं के लिए ईंधन विकल्पों की उपलब्धता जैसी चुनौतियों का समाधान कैसे किया जाता है। संतुलित नीतियों, तकनीकी नवाचार और मजबूत नियामकीय ढांचे के जरिए भारत इस कार्यक्रम को अधिक प्रभावी, समावेशी और टिकाऊ बना सकता है।

नोट:- यह टॉपिक संघ लोकसेवा आयोग(UPSC) की परीक्षा में सामान्य अध्ययन पेपर-2 के अंतर्गत सरकारी नीतियां और हस्क्षेप, वहीं सामान्य अध्ययन पेपर - 3 में निर्धारित पर्यावरण-प्रदूषण नियंत्रण के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। बीपीएससी (BPSC) मुख्य परीक्षा के संदर्भ में यह टॉपिक सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2 के अंतर्गत आता है।

Reference Links:

https://www.aninews.in/news/business/vehicles-on-e20-fuel-show-2-6-drop-in-fuel-consumption-in-controlled-tests-arai-director20260704193313/

https://www.abplive.com/business/e20-petrol-survey-ethanol-increases-or-decrease-vehicle-mileage-car-owners-opinion-on-it-3160685

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2281084&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2283118&reg=3&lang=1

When did the Supreme Court rule on the E20 ethanol blended petrol policy?

Last month, the Supreme Court dismissed a petition challenging the nationwide sale of 20% ethanol blended petrol, citing energy security benefits and holding that energy transition policy decisions fall within the executive's domain.

What did Union Minister Nitin Gadkari say about E20 fuel's effect on mileage?

Gadkari said ethanol's lower calorific value could cause a minor mileage reduction of 3 to 5% with higher ethanol blends, but he rejected claims that it damages engines.

What raw materials are used to produce ethanol for E20 fuel?

Ethanol is mainly produced from sugarcane juice, corn, and spoiled grains like rice and wheat, and also from molasses, crop stubble and bamboo.

From when has E20 fuel sale been made mandatory across India?

The Indian government made the sale of E20 fuel mandatory nationwide from 1 April 2026, aiming to cut crude oil imports and reduce pollution.

When did India's Ethanol Blending Programme begin and when was the E20 target achieved?

The Ethanol Blending Programme was launched in 2003, with its final phase, implementing 20% ethanol blending (E20), completed from 2023.

What does ARAI's report say about the mileage impact of E20 fuel?

According to the Automotive Research Association of India (ARAI), mileage can drop by roughly 2% to 6% with E20 fuel compared to E10, depending on the vehicle model.

What did the LocalCircles survey find about E20's impact on vehicle mileage?

The survey found that 6 out of 10 vehicle owners reported a mileage drop of more than 10% after E20 was introduced, with similar drops reported by owners of pre-2023 vehicles (about 60%) and newer 2023-2024 vehicles (59%), some reporting drops of up to 20%.

Why is ethanol's hygroscopic nature a concern for vehicles?

Because ethanol absorbs moisture from the environment, it increases the risk of corrosion, particularly in older vehicles, and can damage rubber, plastic and metal parts, fuel pumps, valves and other fuel system components.

How does India's GST treatment of ethanol and petrol affect fuel prices for consumers?

Ethanol attracts a 5% GST while petrol is outside the GST regime and instead subject to central excise duty and state VAT, meaning there is no clear price advantage for consumers switching to ethanol blended fuel.

Is the E20 ethanol program part of the BPSC/UPSC syllabus?

Yes, this current affairs topic is relevant to UPSC GS Paper 2 (government policies) and GS Paper 3 (environmental pollution control), and to BPSC Mains GS Paper 2.

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