भारत का संविधान
मानव भूगील के मूल सिद्धांत
कक्षा 12

मानव भूगील के मूल सिख्रांत
कक्षा 12

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्
NATIONAL COUNCIL OF EDUCATIONAL RESEARCH AND TRAINING
प्रथम संस्करण
फ़रवरी 2007 फाल्गुन 1928
पुनमुद्रण
अक्तूबर 2007, फ्रवरी 2009
जनवरी 2010, दिसंबर 2010
मार्च 2013, जनवरी 2014
दिसंबर 2015, फ़रवरी 2017
फ़रवरी 2018, जनवरी 2019
जनवरी 2020, जनवरी 2021
दिसंबर 2021
संशोधित संस्करण
अक्तूबर 2022 अश्विन 1944
पुनर्मुद्रण
मार्च 2024 चैत्र 1946
दिसंबर 2024 अग्रहायण 1946
PD 10T BS
© राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, 2007, 2022
₹ 60.00
एन.सी.ई.आर.टी. वाटरमार्क 80 जी.एस.एम. पेपर पर मुद्रित।
प्रकाशन प्रभाग में सचिव, राष्ट्रीय शौक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषदु, श्री अरविंद मार्ग, नयी दिल्ली 110 016 द्वारा प्रकाशित तथा गोयल ऑफसेट वकर्स प्रा. लिमिटेड, प्लॉट नंबर 370-371, 374-375, फेज-ट, सेक्टर-56, कुंडली, सोनीपत (हरियाणा) द्वारा मुद्रित।
सर्वाधिकार सुरक्षित
एन.सी.ई.आर.टी. के प्रकाशन प्रभाग के कार्यालय
न.सी.ई.आर.टी. कैंपस
श्री अरविंद मार्ग
नयी दिल्ली 110 016 फोन : 011-26562708
108, 100 फीट रोड
हेली एक्सटेंशन, होस्डेकरे
बनाशंकरी III इस्टेज
बेंगलुरु 560 085 फोन : 080-26725740
नवजीवन ट्रस्ट भवन
डाकघर नवजीवन
अहमदाबाद 380 014 फोन : 079-27541446
सी.डब्ल्यू.सी. कैंपस
निकटः धनकल बस स्टॉप पनिहटी
कोलकाता 700 114 फोन : 033-25530454
सी.डब्ल्यू.सी. कॉम्प्लैक्स
मालीगांव
गुवाहाटी 781021 फोन : 0361-2674869
प्रकाशन सहयोग
अध्यक्ष, प्रकाशन प्रभाग : एम.वी. श्रीनिवासन
मुख्य संपादक : बिज्ञान सुतार
मुख्य उत्पादन अधिकारी (प्रभारी): जहान लाल
मुख्य व्यापार प्रबंधक : अमिताभ कुमार
संपादक : रेखा अग्रवाल
सहायक उत्पादन सहायक : दीपक कुमार
काटौंग्राफ़ी
काटोंग्राफ्किक
डिज्ञाइन एजंसी
आवरण एवं सज्जा
जोएल गिल
चित्रांकन
अनिल शर्मा, वरुनी सिन्हा
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) सुझाती है कि बच्चों के स्कूली जीवन को बाहर के जीवन से जोड़ा जाना चाहिए। यह सिद्धांत किताबी ज्ञान की उस विरासत के विपरीत है जिसके प्रभाववश हमारी व्यवस्था आज तक स्कूल और घर के बीच अंतराल बनाए हुए है। नयी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पर आधारित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें इस बुनियादी विचार पर अमल करने का प्रयास है। इस प्रयास में हर विषय को एक मजबृत दीवार से घेर देने और जानकारी को रटा देने की प्रवृत्ति का विरोध शामिल है। आशा है कि ये कदम हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) में वर्णित बाल-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में काफ़ी दूर तक ले जाएँगे।
इस प्रयत्न की सफलता अब इस बात पर निर्भर है कि स्कूलों के प्राचार्य और अध्यापक बच्चों को कल्पनाशील गतिविधियों और सवालों की मदद से सीखने और सीखने के दौरान अपने अनुभवों पर विचार करने का अवसर देते हैं। हमें यह मानना होगा कि यदि जगह, समय और आज्ञादी दी जाए तो बच्चे बड़ों ढ्वारा सौंपी गई सूचना-सामग्री से जुड़कर और जूझकर नए ज्ञान का सूजन करते हैं। शिक्षा के विविध साधनों एवं स्रोतों की अनदेखी किए जाने का प्रमुख कारण पाठ्यपुस्तक को परीक्षा का एकमात्र आधार बनाने की प्रवृत्ति है। सर्जना और पहल को विकसित करने के लिए जरूरी है कि हम बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में पूरा भागीदार मानें और बनाएँ, उन्हें ज्ञान की निर्थारित खुराक का ग्राहक मानना छोड़ दें।
ये उद्देश्य स्कूल की दैनिक जिंदगी और कार्यशैली में काफ़ी फेरबदल की माँंग करते हैं। दैनिक समय-सारणी में लचीलापन उतना ही जरुरी है जितनी वार्षिक केलॉंडर के अमल में चुस्ती, जिससे शिक्षण के लिए नियत दिनों की संख्या हकीकत बन सके। शिक्षण और मूल्यांकन की विधियाँँ भी इस बात को तय करंगी कि यह पाठ्यपुस्तक स्कूल में बच्चों के जीवन को मानसिक दबाव तथा बोरियत की जगह खुशी का अनुभव बनाने में कितनी प्रभावी सिद्ध होती है। बोझ की समस्या से निपटने के लिए पाठ्यक्रम निर्माताओं ने विभिन्न चरणों में ज्ञान का पुनर्निर्थारण करते समय बच्चों के मनोविज्ञान एवं अध्यापन के लिए उपलब्ध समय का ध्यान रखने की पहले से अधिक सचेत कोशिश की है। इस कोशिश को और गहराने के यत्न में यह पाठ्यपुस्तक सोच-विचार और विस्मय, छोटे समूहों में बातचीत एवं बहस और हाथ से की जाने वाली गतिविधियों को प्राथमिकता देती है।
एन.सी.ई.आर.टी. इस पुस्तक की रचना के लिए बनाई गई पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के परिश्रम के लिए कृतज्जता व्यक्त करती है। परिषद् सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर हरि वासुदेवन और इस पाठ्यपुस्तक समिति के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर एम. एच. कुरैशी की विशेष आभारी है। इस पाठ्यपुस्तक के विकास में कई शिक्षकों ने योगदान किया, इस योगदान को संभव बनाने के लिए हम उनके प्राचार्यों के आभारी है। हम उन सभी संस्थाओं और संगठनों के प्रति कृतज्ज हैं जिन्होंने अपने संसाधनों, सामग्री और सहयोगियों की मदद लेने में हमें उदारतापूर्वक सहयोग दिया। हम माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रोफेसर मृणाल मीरी एवं प्रोफेसर जी.पी. देशपांडे की अध्यक्षता में गठित निगरानी समिति (मॉनिटरिंग कमेटी) के सदस्यों को अपना मूल्यवान समय और सहयोग देने के लिए धन्यवाद देते है। व्यवस्थागत सुधारों और अपने प्रकाशनों में निरंतर निखार लाने के प्रति समर्पित एन.सी.ई.आर.टी. टिप्पणियों एवं सुझावों का स्वागत करेगी जिनसे भावी संशोधनों में मदद ली जा सके।
निदेशक
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान
और प्रशिक्षण परिषद्
नयी दिल्ली
20 नवंबर 2006

कोविड-19 महामारी को देखते हुए, विद्यार्थियों के ऊपर से पाठ्य सामग्री का बोझ कम करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भी विद्यार्थियों के लिए पाठ्य सामग्री का बोझ कम करने और रचनात्मक नज़रिए से अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करने पर जोर दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् ने सभी कक्षाओं में पाठ्यपुस्तकों को पुनर्सयोजित करने की शुरुआत की है। इस प्रक्रिया में रा.शै.अ.प्र.प. द्वारा पहले से ही विकसित कक्षावार सीखने के प्रतिफलों को ध्यान में रखा गया है।
पाठ्य सामग्रियों के पुनर्स्योजन में निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है -
वर्तमान संस्करण, ऊपर दिए गए परिवर्तनों को शामिल करते हुए तैयार किया गया पुनर्स्योजित संस्करण है। अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समिति
हरि वासुदेवन, प्रोफेसर, इतिहास विभाग, कलकता विश्वविद्यालय, कोलकाता
मुख्य सलाहकार
एम.एच. कुरैशी, प्रोफ्रेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली
सदस्य
अनिन्दिता दत्ता, लेकचरर, दिल्ली स्कूल ऑफ्र इकाँनोमिक्स, दिल्ली विशविद्यालय, दिल्ली
अनुप सेकिया, रीडर, गौहाटी विश्वविद्यालय, गुवाहाटी
अशोक दिवाकर, लेक्चरर, गवर्नमेंट पी. जी. कॉलेज, गुढ़गाँव
ओडिल्या कोटिनहो, रीडर, आर. पी. डी. कॉलेज, बेलगाम
एन. आर. दाश, रीडर, एम. एस. विश्वविद्यालय बड़ौदा, वडोदरा
एन. कार, रीडर, राजीव गाँधी विश्वविद्यालय, ईटानगर
एन. नागाभूषणम, प्रोफेसर, एस. वी. विश्वविद्यालय, तिरूपति
एस. जहीन आलम, लेक्चरर, द्याल सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
रंजना जसूजा, पी. जी. टी., आर्मी पब्लिक स्कूल, धौलाकुआँ, नयी दिल्ली
स्वागता बासु, लेक्चरर, एस. एस. वी. (पी. जी.) कॉलेज, हापुड़
हिंदी अनुवाद
अशोक दिवाकर, लेक्चरर, गवर्नमेंट पी. जी. कॉलेज, गुढ़गाँव
निसार अहमद शेख प्राचार्य (सेवानिवृत), महाविद्यालय शिक्षा निदेशालय, राजस्थान
मनीषा त्रिपाठी, लेक्चरर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल
सदस्य-समन्वयक
तनु मलिक, लेक्चरर, सामाजिक विज्ञान शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, नयी दिल्ली

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान तथा प्रशिक्षण परिषद्, इस पुस्तक के विकास में सहयोग देने हेतु रूपा दास, पी.जी.टी., डी.पी.एस., आर.के. पुरम, नयी दिल्ली का आभार व्यक्त करती है। परिषद्, सविता सिन्हा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग के प्रति भी अपनी कृतज्ञता अर्पित करती है, जिन्होंने प्रत्येक स्तर पर इस पाठ्यपुस्तक के निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग दिया।
परिषदु, वीर सिंह आर्य, प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी (अवकाश प्राप्त), वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, मानव संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार; दिनेश प्रताप सिंह, रीडर एवं विभागाध्यक्ष, डी.ए.वी.पी.जी. कॉलेज, देहरादून, नंद्र डबास, लेक्चरर, एस.सी.ई.आर.टी., हरियाणा; दीपावली बधवार, लेक्चरर, एस.सी.ई.आर.टी., हरियाणा; रंजन कुमार चौधरी, पी.जी.टी., गवर्नमेंट सहशिक्षा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खेड़ा डाबरा, दिल्ली एवं संगीता, पी.जी.टी., गवर्नमेंट सहशिक्षा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, काज्ञीपुर, दिल्ली का भी आभार व्यक्त करती है जिन्होने अनुवाद के पुनरीक्षण के हेतु कार्यशालाओं में भाग लिया और अपना बहुमूल्य योगदान दिया।
परिषद्, भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भी धन्यवाद देती हैं जिसने पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित मानचित्रों को प्रमाणित किया। परिषद् निम्न सभी व्यक्तियों एवं संगठनों का आभार व्यक्त करती हैं जिन्होंने इस पाठ्यपुस्तक को सहज बनाने हेतु विभिन्न चित्र एवं अन्य पाठ्य सामग्री उपलब्थ करवाई:-
एम.एच. कुरैशी, प्रोफेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को चित्र 7.2 के लिए; सीमा माथुर, रीडर, श्री अरबिंदे कॉलेज (सांध्यकालीन), नयी दिल्ली को चित्र 4.15 (क), 6.5 एवं पृष्ठ 1 पर चित्र के लिए; कृष्ण श्योराण को चित्र 4.13, 7.1 7.4, 7.15 के लिए; अर्जुन सिंह, छात्र, हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय को चित्र 6.3 के लिए; नित्यानंद शर्मा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज, रोहतक को पृष्ठ 44 पर चित्र के लिए; स्वागता बासु, लेक्चरर, एस.एस.वी. (पी.जी) कॉलेज, हापुड़ को चित्र 7.17, 8.2 के लिए; ओडिल्या कोटिनहो, रीडर, आर.पी.डी. कॉलेज, बेलगाम को चित्र 6.4 के लिए; अभिमयु अब्रोल को चित्र 4.10 के लिए; समीरन बरुआ को चित्र 8.1 के लिए; श्वेता उप्पल, एन.सी.ई.आर.टी. को चित्र 5.2 (ख), 5.3 एवं 7.12 के लिए; बॉय.के. गुप्ता तथा आर.सी. दाश, एन.सी.ई.आर.टी. को चित्र 4.17 (क), 4.17 (ख) एवं पृष्ठ 54 पर चित्र के लिए; एन.सी.ई.आर.टी. के पुराने चित्रों के संकलन को चित्र 4.5, 4.9, 5.11, 5.15(ख), 5.18, 6.4, 6.5, 6.6, 8.8, 8.13, 9.5, 9.6 एवं पृष्ठ 1, 22, 39 एवं 70 पर चित्रों के लिए; आई.टी.डी.सी./पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार को चित्र 4.1 एवं 5.2(ख) के लिए; भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को चित्र 7.3 के लिए; विस्तार निदेशालय, कृषि मंत्रालय को चित्र 4.3 एवं 6.2 के लिए; टाइम्स ऑफ़ इंडिया, नयी दिल्ली को पृष्ठ 57 पर समाचार के लिए; बिज्नस स्टैंडर्ड को पृष्ठ 19 एवं 63 पर दिए गए समाचारों के लिए।
परिषद्, अनिल शर्मा एवं नरगिस इस्लाम डीटीपी ऑपरेटर; नेहाल अहमद, मनोज मोहन कॉपी एडीटर; उमेद सिंह गौड़, पूफ रीडर तथा दिनेश कुमार, कंप्यूटर इंचार्ज का भी पुस्तक को अंतिम रूप देने में सहायता करने के लिए आभार व्यक्त करती है। प्रकाशन विभाग एन.सी.ई.आर.टी. को पुस्तक के निर्माण में सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करती है।
निम्नलिखित बिंदु इस पाठ्यपुस्तक में इस्तेमाल किए गए भारत के मानचित्रों के लिए लागू हैं
आमुख ν
पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन vii
इकाई-1
अध्याय 1
मानव भूगोल
प्रकृति एवं विषय क्षेत्र 1-6
इकाई-2
अध्याय 2
विश्व जनसंख्या
वितरण, घनत्व और वृद्धि 7-12
अध्याय 3
मानव विकास 13-20
इकाई-3
अध्याय 4
प्राथमिक क्रियाएँ 21-34
अध्याय 5
द्वितीयक क्रियाएँ 35-43
अध्याय 6
तृतीयक और चतुर्थ क्रियाकलाप 44-52
अध्याय 7
परिवहन एवं संचार 53-69
अध्याय 8
अंतर्गष्ट्रीय व्यापार 70-77
परिशिष्ट 78-80
शब्दावली 81-84
उद्देशिका
हम, भारत के लोग, भारत को एक ¹[संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य] बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म
और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता
प्राप्त कराने के लिए,
तथा उन सब में
व्यक्ति की गरिमा और ²[राष्ट्र की एकता
और अखंडता] सुनिश्चित करने वाली बंधुता
बढ़ाने के लिए
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद्धारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
