EDU TERIA Logo
CartSign InSign UpEnroll Now

बिहार में बढ़ रही नशे की लत : क्या है मामला?

Explore how drugs are spreading across Bihar, the causes of rising drug addiction among youth, drug trafficking networks, its social impact.

school
Written by Dilip Kumar
Published: 22 October 2026•6 min read
बिहार में बढ़ रही नशे की लत : क्या है मामला?
Progress
0%
Aa

बिहार में बढ़ रही नशे की लत : क्या है मामला?

दोस्तों, बिहार में मद्यपान निषेध के लागू हुए दस से भी अधिक वर्ष हो गए हैं लेकिन यह अफ़सोस की बात है कि आज बिहार एक अलग और कहीं गंभीर नशे की लत में जकड़ता दिख रहा है| बीते दिनों , द इंडियन एक्सप्रेस समाचार-पत्र ने इस संबंध में विशेष पड़ताल की थी. आज के इस लेख में हमलोग इसी के आधार पर इस मुद्दे को समझने की कोशिश करेंगे. समझेंगे कि इस राज्य में नशे की बढ़ती लत का आधार क्या है, कैसे बिहार इसकी जद में आ गया , यहाँ नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर सक्रियता क्यों देखी गई और इससे निपटने के लिए क्या कदम उठाये गये हैं?

पृष्ठभूमि

मद्यनिषेध कानून लागू होने के बाद राज्य में नशे की लत में शामिल लोगों ने विकल्पों को बड़े पैमाने पर आजमाना शुरू किया. इसी संदर्भ में अन्य प्रकार के मादक/नशीले पदार्थों का सेवन बढ़ने लगा. और धीरे-धीरे बिहार और यहाँ का एक बड़ा वर्ग इसकी जद में आने लगा. जानकारी मिलती है कि नाबालिग यानी दस से सत्रह साल तक के बच्चों में लगभग एक लाख बच्चे गांजा-भांग के सेवन का शिकार हैं. वहीं लगभग तीस हजार बच्चे सूंघकर ली जाने वाली नशीली दवाओं की लत से जूझ रहे हैं.

5 अप्रैल, 2016 से पूरे बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद अवैध शराब की खरीद-बिक्री में बढ़ोतरी हुई. हालांकि इसकी कीमत भी तुलनात्मक रूप से ज्यादा होती है. ऐसे में विकल्प के तौर पर गांजा, भांग,सेडेटिव(नींद लेन वाली दवाएँ), हेरोइन, कोटा(Kota : कच्चे हेरोइन के लिए इस्तेमाल ) , सेमी-सिंथेटिक ड्रग का लगभग उतने ही खर्च से अधिक मात्रा में उपभोग शुरू हुआ.

kota शब्द का इस्तेमाल नशे की लत में शामिल लोग खुराक के अभिप्राय से करते हैं.

कैसे बिहार इसकी जद में आ गया ?

इन नशीले पदार्थों के सेवन में तब तेजी देखी गई जब कोविड काल में बड़ी संख्या में दिल्ली-NCR, हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों से प्रवासी बिहारी कामगार वापस अपने गाँव-घर आने लगे. इनमें से एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी था जिसे पहले से ही नशे की लत थी और उसे नशीले पदार्थों के सप्लाई नेटवर्क और इनके इस्तेमाल से जुड़ा अनुभव भी था.

बिहार भौगोलिक रूप से एक तरफ नेपाल से जुड़ा है तो दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत के लिए सड़क और रेल लिंक भी बिहार से जुड़ता है. ऐसे में जहाँ नेपाल से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ की तस्करी शुरू हुई वहीं डेथ ट्रैंगल माने जाने वाले लाओस, वियतनाम और म्यांमार में से म्यांमार से होते हुए नशीले पदार्थों की खेप बिहार पहुंचनी शुरू हुई और बिहार से होते हुए म्यांमार पहुंचनी. झारखंड, ओडिशा और आन्ध्रप्रदेश जैसे राज्यों से भी बिहार में और बिहार से होते हुए नशीले पदार्थों का जाल-सा बिछ गया.

नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर सक्रियता क्यों ?

बेरोजगारी और भविष्य को लेकर तनाव
  • रोजगार की कमी या अस्थिर काम से आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और भविष्य की अनिश्चितता से कुछ युवा तनाव महसूस कर सकते हैं।
  • कुछ लोग तनाव से अस्थायी राहत पाने के लिए नशीले पदार्थों का सहारा लेते हैं। समय के साथ निर्भरता विकसित हो सकती है।
दोस्तों का दबाव और सामाजिक माहौल

कुछ युवा दोस्तों के साथ प्रयोग करने, समूह में स्वीकार्यता पाने या जिज्ञासा के कारण पहली बार नशा करते हैं। यदि आसपास नशे को सामान्य व्यवहार समझा जाता है, तो इसे छोड़ने की प्रेरणा कम हो सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य और परिवार का सहयोग

अवसाद, चिंता, अकेलापन, घरेलू तनाव या पुराने मानसिक आघात से जूझ रहे कुछ लोग नशे का सहारा लेने लगते हैं। दूसरी ओर, नशे की निर्भरता स्वयं मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों को बिगाड़ सकती है। इसलिए समस्या को केवल अनुशासन या इच्छाशक्ति की कमी मानना उचित नहीं है।

सस्ता नशा होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और नाबालिग बच्चे भी इसके शिकार हो रहे हैं

सामाजिक नुकसान

किशोर बच्चे नशे की लत में पड़कर आपराधिक गतिविधियों में भी लिप्त हो जाते हैं. इसके अलावा जिस पारिवारिक ताने-बाने को बचाने के मौलिक मकसद से मद्यपान निषेध लागू किया गया था , आज नशीले पदार्थों के सेवन और इसके प्रसार ने इस ताने-बाने को नुकसान ही पहुँचाया है.

निपटने के लिए क्या कदम उठाये गये हैं ?

बिहार सरकार के स्तर पर बिहार पुलिस के स्पेशल टास्क फाॅर्स का नार्कोटिक्स सेल ऐसे संगठित नार्कोटिक्स तस्करी के नियंत्रण में भूमिका निभा रहा है. वहीं साल 2025 में गठित निषेध एवं राज्य नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने भी केंद्र सरकार के फ्लैगशिप नशा मुक्त भारत अभियान 2029 के आलोक में बिहार में नशे की लत में शामिल लोगों की पहचान करने और नशा मुक्ति केंद्र में इनकी पहुँच सुनिश्चित करने , नशीले पदार्थों के नेटवर्क को समाप्त करने की दिशा में सक्रियता दिखाई है.

साथ ही इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि सामाजिक स्तर पर सहभागिता भी जरूरी है ताकि सही समय और सही जगह पर ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों को पकड़ा जाए. क्योंकि कई बार नशीले पदार्थों की लेन-देन के बहुत सामान्य से उपाय अपना लिए जाते हैं जैसे कुछ महिलाएँ छोटे बच्चे को लेकर इस कारोबार में लेन-देन करती हैं, इससे उनपर शक करना मुश्किल हो जाता है. छोटी शीशियों, इंजेक्शन आदि का इस्तेमाल भी किया जाता है.

बिहार में नशे की समस्या को कम करने के लिए निम्नलिखित पक्षों पर भी ध्यान देना चाहिए:

  • रोजगार और कौशल विकास: युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और सकारात्मक गतिविधियों के अवसर देना।
  • तस्करी पर रोक: नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क पर लक्षित कार्रवाई।
  • नशा मुक्ति सुविधाओं का विस्तार: जिला स्तर पर परामर्श, उपचार और पुनर्वास उपलब्ध कराना।
  • स्कूल-कॉलेज में रोकथाम: किशोरों को नशे के नुकसान और साथियों के दबाव से निपटने की शिक्षा देना।
  • परिवार और समाज की भागीदारी: नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को कलंकित करने के बजाय उपचार के लिए प्रोत्साहित करना।

केंद्र सरकार के स्तर पर की गईं पहलें

  1. NDPS अधिनियम: मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ अधिनियम, 1985 (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985) के तहत जुर्माना और सजा का प्रावधान
  2. केन्द्रीय गृह मंत्रालय के सौजन्य से MANAS (मादक पदार्थ निषेध आसूचना केंद्र) हेल्पलाइन व्यवस्था

Reference: Indian Express

Comments

Loading comments...

Related Articles

Suggested Courses

Trending
Titan Plus Batch 2
BPSC CCE

Titan Plus Batch 2

Trending
Titan Batch 2
BPSC CCE

Titan Batch 2