EDU TERIA Logo
CartSign InSign UpEnroll Now

Heat Storm क्या है ?

What is a Heat Storm? Understand its causes, impacts, associated risks, and link with climate change in India, explained simply for UPSC and BPSC exam.

school
Written by Dilip Kumar
Published: 21 October 2026•7 min read
Heat Storm क्या है ?
Progress
0%
Aa

Heat Storm क्या है ?

यह विषय UPSC एवं BPSC प्रा.एवं मुख्य परीक्षाओं के आलोक में भूगोल तथा पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है।

चर्चा में क्यों? अक्टूबर 2026 में एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने बड़े क्षेत्र में फैलने वाली तथा लंबे समय तक बनी रहने वाली अत्यधिक गर्मी की घटनाओं को समझाने के लिए Heat Storm शब्द का उपयोग किया है। इस रिपोर्ट में Heat Storm को सामान्य Heatwave से अधिक व्यापक घटना के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

Heat Storm का सामान्य अर्थ है किसी क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी की तीव्र और गंभीर स्थिति, जो मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि तथा अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। यदि किसी शहर में कई दिनों तक तापमान बहुत अधिक रहे, रात में भी पर्याप्त ठंडक न मिले और लोगों को गर्मी से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाए, तो ऐसी गंभीर गर्मी की स्थिति को सामान्य भाषा में Heat Storm कहा जा सकता है।

Heat Storm, Heatwave और Heat Dome में अंतर

Heatwave : किसी क्षेत्र में निर्धारित मानदंडों के अनुसार असामान्य रूप से अधिक तापमान की स्थिति।
Heat Storm: अत्यधिक गर्मी की गंभीर स्थिति के लिए उपयोग में लाया गया शब्द
Heat Dome :वायुमंडल में उच्च दबाव की ऐसी स्थिति, जिसमें गर्म हवा नीचे की ओर दबती है और गर्मी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
Urban Heat Island : शहरों का आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म हो जाना।
Warm Night : ऐसी रात जिसमें तापमान पर्याप्त नीचे नहीं गिरता और शरीर को गर्मी से उबरने का कम अवसर मिलता है।
Heat Dome : एक संभावित मौसम संबंधी कारण है, जबकि Heatwave तापमान की स्थिति को दर्शाती है।

हालिया रिपोर्ट के प्रमुख तथ्य

1960 के दशक में सालाना लगभग 5 बड़ी Heat Storm घटनाओं की तुलना में वर्तमान दशक में लगभग 102 घटनाएँ रिपोर्ट की गईं। ऐसी घटना पृथ्वी की सतह के कम-से-कम 1% हिस्से को प्रभावित करती है।

ऐसी घटनाएँ कई सप्ताह या महीनों तक जारी रह सकती हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में गर्मी की घटनाएँ एक-दूसरे पर overlap हो सकती हैं।

Heat Storm कैसे बनता है?

Heat Storm के पीछे एक ही कारण नहीं होता। इसमें जलवायु परिवर्तन, वायुमंडलीय परिस्थितियाँ और भूमि की विशेषताएँ मिलकर भूमिका निभा सकती हैं।

1. जलवायु परिवर्तन (Climate Change)

ग्रीनहाउस गैसों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन के बढ़ने से पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ता है। इससे अत्यधिक गर्मी की घटनाओं के अधिक तीव्र होने की संभावना बढ़ती है।

2. उच्च वायुदाब और Heat Dome

जब किसी क्षेत्र में उच्च वायुदाब की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो नीचे उतरती हवा गर्म होती है। बादल और वर्षा कम हो सकते हैं तथा सूर्य की ऊर्जा से सतह लगातार गर्म होती रहती है।

3. सूखा और मिट्टी में नमी की कमी

जब मिट्टी में नमी कम होती है, तो सूर्य की ऊर्जा का कम हिस्सा पानी के वाष्पीकरण में खर्च होता है। अधिक ऊर्जा सतह को गर्म कर सकती है, जिससे गर्मी और बढ़ सकती है।

4. शहरीकरण और Urban Heat Island

कंक्रीट, डामर, कम हरियाली, वाहनों और एयर कंडीशनर से निकलने वाली ऊष्मा शहरों को आसपास के ग्रामीण इलाकों से अधिक गर्म बना सकती है।

5. महासागरीय परिस्थितियाँ और El Niño

El Niño जैसी घटनाएँ वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण और वर्षा के पैटर्न को बदल सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में इससे गर्म और शुष्क परिस्थितियाँ बन सकती हैं, हालाँकि प्रभाव हर जगह समान नहीं होता। जलवायु परिवर्तन और उच्च वायुदाब जैसी परिस्थितियों के बीच संबंध को समझना जरूरी है: जलवायु परिवर्तन गर्मी की पृष्ठभूमि को अधिक गर्म बना सकता है, जबकि मौसम संबंधी परिस्थितियाँ किसी विशेष क्षेत्र में गर्मी की अवधि और तीव्रता को प्रभावित करती हैं।

Heat Storm के प्रमुख प्रभाव

(क) मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव

Heatstroke (लू लगना): शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। Dehydration (निर्जलीकरण): शरीर से पानी और लवणों की कमी हो सकती है। हृदय और किडनी पर दबाव: अत्यधिक गर्मी शरीर पर अतिरिक्त शारीरिक तनाव डालती है। नींद में बाधा: रात में तापमान अधिक रहने से शरीर को ठंडा होने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। अधिक जोखिम वाले समूह: बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, खुले में काम करने वाले श्रमिक और पहले से बीमार लोग अधिक प्रभावित हो सकते हैं। WHO के अनुसार, लंबे समय तक दिन और रात का तापमान ऊँचा रहने से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव पड़ सकता है।

(ख) कृषि और खाद्य सुरक्षा

गेहूँ, धान, मक्का और सब्जियों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। मिट्टी की नमी घटने से सिंचाई की आवश्यकता बढ़ सकती है। पशुओं में गर्मी का तनाव बढ़ता है और दूध उत्पादन कम हो सकता है। फसलों की पैदावार घटने पर खाद्य कीमतों में वृद्धि का जोखिम होता है।

(ग) जल संसाधनों पर प्रभाव

जलाशयों और मिट्टी की नमी में कमी आ सकती है। वाष्पीकरण बढ़ने से पानी की माँग बढ़ सकती है। भूजल पर निर्भरता बढ़ सकती है। पेयजल की कमी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समस्या बन सकती है।

(घ) अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचा

एयर कंडीशनिंग और कूलिंग की माँग बढ़ने से बिजली की खपत बढ़ती है। बिजली की अधिक माँग से ग्रिड पर दबाव पड़ सकता है। निर्माण, कृषि और अन्य बाहरी कामों में श्रमिकों की उत्पादकता घट सकती है। सड़कें, रेल पटरियाँ और अन्य बुनियादी ढाँचे अत्यधिक गर्मी से प्रभावित हो सकते हैं। इन प्रभावों के कारण Heat Storm केवल पर्यावरण की समस्या नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास से जुड़ी चुनौती है।

Heat Storm और भारत

भारत में मार्च से जून के बीच Heatwave की घटनाएँ सामान्यतः अधिक देखी जाती हैं। कुछ वर्षों में इनका प्रभाव जुलाई तक भी रह सकता है। भारत में अत्यधिक गर्मी से प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्र हैं: उत्तर-पश्चिम भारत: राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली। मध्य भारत: मध्य प्रदेश तथा आसपास के क्षेत्र। पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्से। दक्षिणी और तटीय क्षेत्र: यहाँ गर्मी के साथ अधिक आर्द्रता होने पर शरीर पर गर्मी का प्रभाव और गंभीर हो सकता है।

WHO के अनुसार, भारत में गर्मी की घटनाएँ स्वास्थ्य, श्रम उत्पादकता और आवश्यक सेवाओं को प्रभावित कर सकती हैं।

Heat Storm Vera

Heat Storm Vera को रिकॉर्ड की गई सबसे बड़ी घटनाओं में से एक बताया गया है। अवधि: 2023–2024 में कुल 367 दिन। इस अवधि में पृथ्वी के लगभग 85% क्षेत्र को किसी न किसी समय प्रभावित किया। 5 जनवरी 2024 को इसका एक समय में अधिकतम विस्तार पृथ्वी के लगभग 31.3% हिस्से तक था। 2026 में Heat Storm Raimundo ने अपने अधिकतम विस्तार में Vera के रिकॉर्ड को पार किया।

Heat Storm से निपटने के उपाय

1. Heat Action Plans : स्थानीय मौसम चेतावनी, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी, सार्वजनिक पेयजल, राहत केंद्र और गर्मी के जोखिम वाले लोगों तक सूचना पहुँचाना।

2. हरित शहर और Cool Roofs पेड़ लगाना, हरित क्षेत्र बढ़ाना, छतों पर परावर्तक या शीतलनकारी सामग्री का उपयोग और गर्मी रोकने वाली शहरी संरचनाओं में सुधार।

3. जलवायु परिवर्तन को सीमित करना नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ परिवहन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी।

4. कृषि और जल सुरक्षा सूखा-सहिष्णु फसलें, सूक्ष्म सिंचाई, वर्षा जल संचयन, जलाशयों का संरक्षण और कृषि मौसम सलाह। भारत में इन उपायों के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण , भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, स्वास्थ्य विभागों, स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय आवश्यक है।

निष्कर्ष:

कुल मिलाकर, Heat Storm की अवधारणा बताती है कि अत्यधिक गर्मी को केवल किसी एक शहर के अधिकतम तापमान से नहीं समझा जा सकता। इसके भौगोलिक विस्तार, अवधि, रात के तापमान, प्रभावित आबादी और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को भी समझना आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में भारत को जलवायु अनुकूलन, आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, टिकाऊ शहरी नियोजन और उत्सर्जन में कमी को एक साथ आगे बढ़ाना होगा।

Reference: The Hindu

Comments

Loading comments...

Related Articles

Suggested Courses

Trending
Titan Plus Batch 2
BPSC CCE

Titan Plus Batch 2

Trending
Titan Batch 2
BPSC CCE

Titan Batch 2