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यूरोप के देशों में क्यों हो रहे विरोध प्रदर्शन ?

Understand why protests are taking place in France, Spain and Portugal, the EU’s role in Europe’s housing crisis, rising living costs, economic inequality.

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Written by Dilip Kumar
Published: 21 October 2026•10 min read
यूरोप के देशों में क्यों हो रहे विरोध प्रदर्शन ?
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यूरोप के देशों में क्यों हो रहे विरोध प्रदर्शन ?

यह लेख UPSC एवं BPSC मुख्य परीक्षा में क्रमशः GS Paper-2 और GS Paper-2 के खंड ख में अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं से जुड़े समसामयिक पहलू को महत्त्व देता है.

यूरोप में विरोध प्रदर्शनों को समझने के लिए केवल सड़कों पर हो रहे प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनके पीछे मौजूद आर्थिक असमानता, महँगाई, आवास संकट, युवाओं की समस्याएँ और सरकारों की नीतियों को भी समझना होगा।

चर्चा में क्यों ?

यूरोप के कई देशों में अक्टूबर 2026 के दौरान विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल में इनका स्वरूप अलग-अलग दिखा है, लेकिन इनके पीछे एक जैसी समस्या दिखाई देती है और वह है आम लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए सम्मानजनक जीवन जीना और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना कठिन होता जा रहा है

क्या हैं प्रमुख मुद्दे ?

  • जीवनयापन पर महंगाई का असर और ईंधन की बढ़ती कीमतें।
  • शिक्षा व्यवस्था में कमियाँ और लोक सेवाओं की गिरती गुणवत्ता।
  • घर खरीदने और किराए पर रहने की बढ़ती लागत।
  • वेतन और जीवनयापन के खर्च के बीच बढ़ता अंतर।
  • सरकारों की नीतियों और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति असंतोष।

दोस्तों, यूरोप के अलग-अलग देशों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बारे में एक-एक कर समझते हैं.

फ्रांस में विरोध प्रदर्शन की वजहें

फ्रांस में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत मुख्य रूप से स्कूली शिक्षा की खराब स्थिति को लेकर हुई। बाद में इसमें महँगाई, ईंधन की कीमतों और सरकारी सेवाओं से नाराज लोग भी शामिल हो गए।

(क) शिक्षा व्यवस्था की समस्याएँ

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की प्रमुख शिकायतें हैं:

  • स्कूलों में शिक्षकों की कमी।
  • शिक्षकों की अनुपस्थिति में उनकी जगह दूसरे शिक्षक उपलब्ध न होना।
  • पुरानी और जर्जर स्कूल इमारतें।
  • पढ़ाई के लंबे घंटे और पढ़ाई से जुड़ा दबाव।
  • विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की कमी।

इन समस्याओं का असर गरीब और पिछड़े इलाकों के विद्यार्थियों पर अधिक पड़ सकता है। जब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सबको समान रूप से नहीं मिलती, तो सामाजिक और आर्थिक असमानता बढ़ती है।

(ख) महँगाई और ईंधन की कीमतें

शिक्षा से शुरू हुआ आंदोलन व्यापक आर्थिक असंतोष से जुड़ गया। ईंधन महँगा होने से

परिवहन, माल ढुलाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत भी बढ़ सकती है।

होर्मुज जलसंधि से जुड़ा भू-राजनीतिक तनाव और ईरान पर अमेरिकी बमबारी के बाद तेल

आपूर्ति पर पड़े प्रभाव ने ईंधन कीमतों की चिंता को और बढ़ाया।

(ग) मजदूर संगठनों की भूमिका

फ्रांस के प्रमुख श्रमिक संगठन CGT ने भी आंदोलन का समर्थन किया। इसकी प्रमुख माँगों में शामिल हैं:

  • वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें कम करना।
  • मजदूरी में वृद्धि।
  • पेंशन में सुधार।
  • लोक सेवाओं के लिए पर्याप्त सरकारी खर्च।

इससे स्पष्ट है कि आंदोलन केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक सामाजिक-आर्थिक असंतोष का रूप ले चुका है।

(घ) फ्रांसीसी सरकार की प्रतिक्रिया

फ्रांसीसी सरकार ने 3,000 अतिरिक्त स्थानापन्न शिक्षकों(substitute teachers) की व्यवस्था करने और स्कूलों के निर्णयों में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही है। विश्वविद्यालयों की कुछ प्रस्तावित फीस वृद्धि भी वापस ली गई है।

स्पेन में आवास संकट क्यों बड़ा मुद्दा बना?

स्पेन में विरोध का प्रमुख कारण आवास संकट (Housing Crisis) है। विशेष रूप से युवा वर्ग के लिए किराए पर घर लेना या अपना घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।

(क) 87 वर्षीय महिला का मामला

The Guardian नामक समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, मैड्रिड में 87 वर्षीय मारिकार्मेन

अबास्कल को उनके घर से बेदखल किए जाने के बाद, अस्पताल में भर्ती होने के लगभग दो

सप्ताह बाद उनकी मौत हो गई। बताया गया कि इन्वेस्टमेंट फण्ड द्वारा उनका किराया 230%

बढ़ा दिया गया था। इस घटना ने आवास संबंधी असुरक्षा और किरायेदारों के अधिकारों को लेकर

बड़े पैमाने पर गुस्सा पैदा किया। 

(ख) आवास महँगा होने के प्रमुख कारण

1. किराए में वृद्धि: आय की तुलना में किराए का तेजी से बढ़ना।

2. पर्यटन का दबाव: लोकप्रिय शहरों में अल्पकालिक पर्यटक किराए के लिए मकानों का इस्तेमाल।

3. निवेश के लिए संपत्ति खरीदना: कुछ निवेशक मकानों को रहने के बजाय मुनाफा कमाने की संपत्ति मानते हैं।

4. आय और आवास लागत में अंतर: युवाओं और कम वेतन वाले श्रमिकों की आय घर के खर्च के अनुरूप नहीं बढ़ती।

5. सस्ती आवासीय इकाइयों की कमी: किफायती घरों की उपलब्धता माँग के मुकाबले अपर्याप्त होने पर कीमतें बढ़ सकती हैं।

(ग) प्रदर्शनकारियों की माँगें

  • किराए को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कानून लागू हो ।
  • अनुचित बेदखली से किरायेदारों की सुरक्षा की जाए ।
  • इन्वेस्टमेंट फण्ड द्वारा आवासीय संपत्तियों की खरीद पर नियंत्रण हो।
  • अधिक किफायती घरों का निर्माण किया जाए ।
  • युवाओं के लिए स्वतंत्र रूप से रहने के बेहतर अवसर हों।

(घ) सरकार और राजनीति पर प्रभाव

स्पेन के प्रधानमंत्री ने किरायेदारों की सुरक्षा के लिए आपातकालीन आवास कानून पारित कराने

की कोशिश की। लेकिन संसद में प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने 29

नवंबर 2026 के लिए समयपूर्व चुनाव की घोषणा की।

पुर्तगाल में विरोध प्रदर्शन का कारण

  पुर्तगाल में भी मुख्य चिंता आवास की बढ़ती कीमतें और जीवन-यापन का खर्च है। राजधानी लिस्बन में लोग किफायती आवास और बेहतर जीवन-स्तर की माँग को लेकर सड़कों पर उतर आए।

पुर्तगाल में आवास की स्थिति

2015 से 2024 के बीच पुर्तगाल में आवास की कीमतों में लगभग 124% वृद्धि हुई। यह वृद्धि उसी अवधि में यूरोपीय संघ के औसत की लगभग दोगुनी बताई गई है। इसका मतलब यह है कि यदि किसी मकान की कीमत शुरुआती समय में 100 यूनिट थी, तो 124% वृद्धि के बाद वह 224 यू निटहो जाएगी।

इस तरह की तेज वृद्धि से:

  • पहली बार घर खरीदने वाले युवाओं की मुश्किलें बढ़ती हैं।
  • किराएदारों की आय का बड़ा हिस्सा आवास पर खर्च हो सकता है।
  • कम आय वाले परिवार महँगे शहरों से बाहर जाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
  • संपत्ति रखने वाले और संपत्ति न रखने वाले लोगों के बीच आर्थिक अंतर बढ़ सकता है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगें

  • किफायती मकानों की उपलब्धता बढ़ाना।
  • किराए और आवास की लागत पर प्रभावी नियंत्रण।
  • वेतन में सुधार।
  • आम परिवारों को महँगाई से राहत।

स्पेन और पुर्तगाल के उदाहरण बताते हैं कि यूरोप में आर्थिक विकास होने के बावजूद उसका लाभ सभी नागरिकों तक समान रूप से पहुँचना सुनिश्चित नहीं है।

यूरोप में विरोध प्रदर्शनों के पीछे व्यापक कारण

इन तीन देशों की घटनाओं को व्यापक यूरोपीय संदर्भ में देखने पर कुछ महत्त्वपूर्ण प्रवृत्तियाँ सामने आती हैं।

(क) Cost of Living Crisis : जीवन-यापन का संकट

जब भोजन, ईंधन, बिजली, परिवहन और आवास की लागत बढ़ती है, लेकिन वेतन उसी अनुपात में नहीं बढ़ता, तो परिवारों की वास्तविक क्रय शक्ति घट जाती है। इस स्थिति में नौकरी होने के बावजूद व्यक्ति के लिए बचत करना, घर खरीदना और परिवार की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल होता है।

(ख) Youth Discontent : युवाओं में असंतोष

युवाओं को अच्छी शिक्षा, स्थायी रोजगार और किफायती आवास की उम्मीद होती है। जब ये अवसर उपलब्ध नहीं होते, तो उनमें व्यवस्था के प्रति निराशा बढ़ सकती है। इसलिए वर्तमान विरोध प्रदर्शनों को केवल महँगाई के विरुद्ध आंदोलन नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक अवसरों की माँग के रूप में भी देखा जा  है।

(ग) आर्थिक असमानता

आर्थिक असमानता केवल अमीर और गरीब की आय में अंतर तक सीमित नहीं है। इसमें संपत्ति का स्वामित्व, शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच और सुरक्षित आवास की उपलब्धता भी शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, मकान के मालिक को संपत्ति की कीमत बढ़ने से लाभ हो सकता है, जबकि उसी शहर में रहने वाले किरायेदार को अधिक किराया देना पड़ सकता है।

(घ) सरकारों पर बढ़ता दबाव

जब जनता को लगता है कि सरकार उनकी बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं कर रही है, तो विरोध प्रदर्शन राजनीतिक जवाबदेही की माँग का माध्यम बनते हैं।

यह भी सवाल है कि यूरोपीय संघ(EU) ने सीधे हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? इसकी निम्नलिखित बड़ी वजहें हैं:

1. EU के अधिकार सीमित हैं

यूरोपीय संघ (European Union) एक साझा राजनीतिक और आर्थिक संगठन है, लेकिन उसके सभी सदस्य देशों की सरकारों की जगह वह हर नीति पर निर्णय नहीं ले सकता। आवास नीति, शहरी नियोजन और जमीन के इस्तेमाल की जिम्मेदारी मुख्यतः राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय सरकारों के पास है।

2. हर देश की समस्या अलग है

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और जीवन-यापन की लागत प्रमुख मुद्दे हैं, जबकि स्पेन और पुर्तगाल में आवास संकट विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। इसलिए एक ही कानून से तीनों देशों की समस्याओं का समाधान करना आसान नहीं है।

3. EU और राष्ट्रीय सरकारों की भूमिकाएँ अलग हैं

किराया नियंत्रण, मकान निर्माण की अनुमति, स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति और स्थानीय सार्वजनिक सेवाओं के संचालन जैसे फैसले मुख्यतः संबंधित देश की सरकारों और स्थानीय प्रशासन को लेने होते हैं। EU सहयोग, वित्तीय सहायता और साझा नियमों के माध्यम से मदद कर सकता है।

 EU ने आवास संकट पर क्या कदम उठाए?

यूरोपीय स्तर पर आवास योजना की पहल: अक्टूबर 2025 में EU नेताओं ने यूरोपीय आयोग से किफायती आवास के लिए व्यापक योजना तैयार करने को कहा।

2025–26: European Affordable Housing Plan: यूरोपीय आयोग ने किफायती मकानों की आपूर्ति बढ़ाने, सामाजिक आवास में निवेश और आवास निर्माण की प्रक्रिया बेहतर बनाने के लिए योजना प्रस्तुत की।

Affordable Housing Act का प्रस्ताव: आयोग ने आवास की उपलब्धता और सामर्थ्य की रक्षा के लिए प्रस्तावित कानून पेश किया। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में कार्रवाई के लिए साझा कानूनी ढाँचा बनाना है जहाँ आवास की गंभीर कमी है। यह प्रस्ताव था; इसे लागू हो चुका अंतिम कानून नहीं समझना चाहिए।

यूरोपीय परिषद के अनुसार, 2015 के बाद EU में घरों की कीमतों में औसतन लगभग 60% वृद्धि हुई है। इससे पता चलता है कि आवास संकट केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं है।

भारत के लिए इन घटनाओं से क्या सीख मिलती है?

यूरोप के प्रदर्शन और उसकी वजहों के मद्देनजर भारत में भी किफायती आवास को प्राथमिकता देना जरूरी है। शहरी नियोजन में किराए के घर, सार्वजनिक आवास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आवासीय सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा आज के समय की जरुरत है। शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्ति, विद्यालयों के बुनियादी ढाँचे में सुधार और शिक्षा की समान उपलब्धता सामाजिक गतिशीलता के लिए आवश्यक है। 

सरकार के स्तर पर रोजगार और वास्तविक आय का ध्यान रखना होगा । रोजगार की संख्या के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता, नियमितता और वेतन की क्रय शक्ति पर भी ध्यान देना चाहिए।

सरकार को शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संवाद को महत्त्व देना चाहिए। सरकार को नागरिकों की शिकायतें सुनने, पारदर्शी निर्णय लेने और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।

इसके अलावा विकास का समावेशी स्वरूप विकसित करना चाहिए। केवल GDP वृद्धि पर्याप्त नहीं है। विकास का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचना भी महत्त्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

यूरोप में अक्टूबर 2026 के विरोध प्रदर्शन इस व्यापक चुनौती की ओर संकेत करते हैं कि आर्थिक प्रगति के साथ आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, किफायती आवास और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।

फ्रांस में शिक्षा और जीवन-यापन का संकट, स्पेन में किरायेदारों की असुरक्षा और पुर्तगाल में आवास की बढ़ती कीमतें अलग-अलग समस्याएँ हैं, लेकिन तीनों में एक साझा चिंता दिखाई देती है कि क्या आम नागरिक, विशेषकर युवा पीढ़ी, आर्थिक रूप से सुरक्षित भविष्य बना सकती है?

Reference: The Guardian

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