सिविल सेवा परीक्षा में, चाहे वह संघ लोक सेवा आयोग हो या फिर राज्य स्तरीय प्रशासनिक सेवाएं, भूगोल विषय का क्रेज हमेशा बना रहा है। प्रारंभिक परीक्षा (PT) हो या फिर मुख्य परीक्षा (लिखित) दोनों में भूगोल की भूमिका "परिणामोन्मुखी" रही है। कालांतर में पहले से निर्धारित ऑप्शल विषयों को हटाकर मुख्य परीक्षा के सिलेबस में आमूलचुल बदलाव किए गए हैं, लेकिन सामान्य अध्ययन पेपर के अंतर्गत भूगोल विषय का दबदबा बना हुआ है।
72वीं प्रारंभिक परीक्षा(PT) स्ट्रैटजी की अगली कड़ी में आज भूगोल विषय को केन्द्र में रखते हुए संबंधित विभिन्न आयामों की विवेचना करेंगे। इसके लिए अपनाए जाने वाले ठोस रणनीतियों पर भी चर्चा भी करेंगे।
उल्लेखनीय है कि बीपीएसएसी प्रारंभिक परीक्षा के लिए आवश्यक कट ऑफ की जादूई आंकड़ा पार करने में भूगोल विषय की भूमिका काफी अहम है या फिर यूं कहें कि एक तरह से यह गेम चेंजर भी है। इस विषय में यदि 90 फीसदी स्कोर कर लिया जाए तो प्रीलिम्स के जादूई आंकड़े को आसानी पार किया जा सकता है।
पिछले वर्षों के ट्रेंड बेहद ही प्रेरित करने वाले हैं। भूगोल के तीनों सेक्शन मिलाकर औसतन 15 प्रश्न पूछे जाने की परंपरा रही है लेकिन कभी-कभी इसकी संख्या 20 और 21 प्रश्नों तक का रहा है। उदाहरण के लिए 70वीं BPSC में भूगोल के 20 प्रश्न, वहीं 70वीं BPSC री-एग्जाम में 21 प्रश्न तक पूछे गए हैं। 69वीं बीपीएससी में 18 प्रश्न भूगोल से आए हैं। हालांकि 71वीं में 17 प्रश्न पूछे गए हैं लेकिन 72वीं प्रीलिम्स में इसके प्रश्नों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है।
दरअसल इकोनॉमी के जैसे ही भूगोल विषय का दायरा थोड़ा विस्तृत हो जाता है, क्योंकि इसमें विश्व भूगोल, भारतीय भूगोल और बिहार स्पेशल में समाहित बिहार के भूगोल भी शामिल हैं। 63वीं में जहां 9 प्रश्न केवल बिहार के भूगोल से थे। वहीं 71वीं में भी 8 प्रश्न केवल बिहार के भूगोल से थे। आंकड़ों से पता चलता है कि भूगोल के कूल प्रश्नों की संख्या में आधे प्रश्न बिहार के भूगोल से जुड़े रहते हैं। इसलिए बिहार स्पेशल में बिहार के भूगोल के महत्व को डिकोड किया जा सकता है।
पिछले वर्षों के ट्रेंड से पता चलता है कि अधिकांश तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। 69वीं, 67वीं और 65वीं में दो या दो से अधिक कंसेप्ट और कथन आधारित प्रश्नों को देखा गया है। हालांकि इन प्रश्नों की प्रकृति भी तथ्य आधारित ही होते हैं। इनमें बिहार भूगोल से जुड़े प्रश्व भी तथ्यों पर ही आधारित होते हैं। बदलते हुए ट्रेंड को देखते हुए बेहतर यही होगा कि कंसेप्ट और कथन आधारित दोनों टाईप के प्रश्नों के लिए भी पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। इसके लिए डेटा को याद करना, बार-बार रिवीजन करना और मैप आधारित प्रश्नों को समझना अत्यंत आवश्यक है।
भारत एवं बिहार के भूगोल के वैसे टॉपिक्स जिससे बार बार प्रश्न पूछे जा रहे हैं और ये हॉट केक बने हुए हैं-:
बिहार के भूगोल
इसके अंतर्गत जनगणना, जनजाति, बिहार की नदियां जैसे गंगा, गंडक, सोन, पुनपुन, कोसी, अजय, किउल और गंगेटिक डॉल्फिन पर लगातार प्रश्न पूछे गए हैं। बिहार में पाए जाने वाले प्रमुख मृदा, प्रमुख खनिज, उधोग, परिवहन, कृषि (रबी, खरीफ और जायद) और फसलों के उत्पादन और उत्पादकता से लगातार प्रश्नों को देखा गया है। बिहार के एक मात्र वन्यजीव अभ्यारण्य, भीमबांध, वेटलैंट (6 रामसर साइट्स), वन रिपोर्ट, राज्यों की सीमा, गंगा किनारे स्थित जिले आदि हॉट केक बने हुए हैं।

भारत का भूगोल
कर्क रेखा, पर्वतीय श्रेणी जैसे पीरपंजाल, दर्रे जैसे जोजीला और नाथुला दर्रे से प्रश्न कई बार बार दिख ही जाते हैं। बंदरगाह में प्राकृतिक और कृत्रिम बंदरगाह से, कश्मीर घाटी, पूर्वोत्तर के राज्यों, वन्यजीव अभ्यारण्य, प्रोजेक्ट टाईगर, झीलें, विभिन्न नदियों पर स्थित जलविधुत परियोजनाएं, राज्यों की सीमाएं, पहाड़ों में गिरनार, कार्डमम, अभ्रक और कोयले के भंडार, घने पतझड़ और उष्णकटिबंधीन सदाबहार वन, पश्चिमी घाट, हिमालय और कश्मीर हिमालय, वन रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्तर के डेटा और बिहार से संबंधित, विभिन्न फसलों एवं अन्य उत्पादों से जुड़े क्रांतियां (ग्रे क्रांति-ऊर्वरक उत्पादन), नदी (गंगा, अलकनंदा, भागीरथी, देवप्रयाग आदि), वैश्विक एवं राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर विभिन्न खनिजों एवं अयस्क आदि से संबंधित सूचनाएं सीधी तौर पर पूछने का एक ट्रेंड सा बना हुआ है।
- उल्लेखनीय है कि भारत और बिहार के भूगोल के अधिकांश टॉपिक्स एक जैसे दिखते हैं लेकिन उनकी भौगोलिक विशेषताएं अलग-अलग हैं। इसलिए अक्षांशीय, देशांतरीय विस्तार और ग्रीनविच से दूरी आदि के डेटा अलग अलग सावधानीपूर्वक याद करना होगा। नदियां, मृदा, उद्योग, खनिज, परिवहन, कृषि, जनगणना, जनजातियों का अध्ययन करते समय देश के साथ-साथ बिहार के स्थानीय डेटा को याद करना नितांत आवश्यक है क्योंकि भूगोल के कूल प्रश्नों में से करीब आधे प्रश्न बिहार के भूगोल से ही पूछे जाने की परंपरा देखी गई है।

विश्व भूगोल
विश्व भूगोल में कुछ खास सेक्शन से प्रश्न बार बार पूछे जा रहे हैं। वायुमंडल की परतों जैसे क्षोभमंडल, समताप मंडल, विश्व की प्रमुख पवनें (चिनुक, हरमट्टन, लू)। इसके अलावा दक्षिणी गोलार्द्ध में ‘गरजने वाली चालीसा,प्रचंड पचासा और चीखती साठा और मिस्ट्रल जैसी स्थानीय पवनों के बारे में पूछा जा चुका हैं। सौरमंडल में उपग्रहों से, और ग्रहों और उससे जुड़े विभिन्न मिशनों के मिलान करने वाले प्रश्न, सौरमंडल में प्रधान अकाशीय पिंड सूर्य के बारे में सीधी तौर पर प्रश्व पूछ लिया गया है ।
पृथ्वी की आंतरिक संरचना में नीफे जैसी परत, क्रस्ट, मेंटल, कोर के आलावा मुख्य चट्टानों में आग्नेय, अवसादी और कायांतरित परीक्षा की दष्टिकोण से महत्पूर्ण हैं। इससे सेक्शन से पहले भी प्रश्न आए हैं। भूकंप, ज्वालामुखी (सक्रिय), भूकंप तरंगों में S वेब और P वेब के बारे में और भूकंप से जुड़े रिंग ऑफ फायर भी अतिमहत्वपूर्ण हैं।
स्थलाकृतियों में विश्व के प्रमुख पर्वत जैसे एंडीज, पठार मरूस्थल जैसे सबसे शुष्क मरूस्थल आटाकामा और ग्रेट विक्टोरिया के बारे में पूछा गया है। प्रमुख घास के मैदानों से प्रश्न हर साल आते हैं और ये एक तरह से हॉट केक बने हुए हैं जैसे प्रेयरी, पम्पास, सवाना, वेल्ड और स्टेपी आदि।
जलमंडल में महासागरीय धाराओं के बारे में हर साल कमोवेश प्रश्न दिख ही जाते हैं जैसे बैंगुएला ठंडी महासागरीय जलधाराओं और दक्षिण अमेरिका के नियाग्रा जलप्रपात से जुड़े प्रश्न आ चुके हैं। इसके अलावा ग्रेट बैरियर रिफ प्रवाल भित्ति, सैंटोस-विश्व का कहवा पत्तन, इंडोनेशिया में द्वीपों की अधिकतम संख्या जुड़े प्रश्न भी शामिल हैं। भारत और अन्य देशों की सीमाओं जैसे मौकमोहन रेखा आदि भी पूछे गए हैं।
विश्व मानचित्रण के अतंर्गत प्रमुख जलसंधियां, देश की सीमाएं(भूमध्यसागर, कैस्पियन सागर और लाल सागर से सटे देशों के नाम), लैंडलॉक्ड अर्थात भू-आबद्ध देश महत्वपूर्ण हैं। हाल के खबरों में रहने वाले स्थान जैसे हॉर्मूज स्ट्रेट एवं उसकी भौगोलिक स्थिति वर्तमान में प्रासंगिक हैं। इसके अलावा पर्यावरण के मुद्दे भी शामिल हैं।
- प्रतियोगी छात्रों में वैसे छात्र जिनकी रूचि पूरी तरह भूगोल में नहीं भी रही है, यदि वे पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्नों एवं उसकी उत्तर व्याख्या को बार बार रिवीजन करेंगे तो भी स्कोर को बेहतर कर सकेंगे। सामान्य तौर पर भूगोल विषय के लिए बेहतर और सटीक रणनीति PYQ के साथ-साथ क्लास नोट्स का बार-बार रिवीजन करना ही रामबाण साबित होगा और अंतत: प्रीलिम्स के लिए कट-ऑफ को पार करना थोड़ा आसान हो जाएगा।

भारत एवं विश्व भूगोल के वैसे टॉपिक्स जिससे बार बार प्रश्न पूछे जा रहे हैं।
| जलवायु, मिट्टी | वायुमंडल की संरचना (सौर्यतप, दाब पेटियां, पवनें, चक्रवात आदि) | पठार, पर्वत, मैदान, दर्रा | |
| नदी, नगर, बांध, झील | कृषि | खनिज संसाधन | |
| वन संसाधन / वन्यजीव | द्वीप, महाद्वीप, महासागर, मरूस्थल, जलडमरूमध्य, स्थलडमरूमध्य, महासागरीय धाराएं, ज्वार-भाटा, प्रवाल भित्ति, महासागरीय उच्चावच | जनगणना | |
| जनजाति | देश / राजधानी | भू-आकृति / भौगोलिक संरचना (महाद्वीपीय विस्थापन, वेगनर का सिद्धांत, प्लेट टेक्टोनिक, भूकंपीय एवं ज्वालामुखी) | |
| अवसंरचना / ऊर्जा संसाधन | उद्योग | बंदरगाह / परिवहन | |
| सौरमंडल | पर्यावरण |




