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Unit4

निम्नलिखित बिंदु इस पाद्यपुस्तक में इस्तेमाल किपु गपु भारत के मानचिंत्रों के लिपु लाषू हैं

भुणील में प्रयोगात्मक कार्य

भाग 2

कक्षा 12 के लिए पाठ्यपुस्तक

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Textbook illustration

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्

NATIONAL COUNCIL OF EDUCATIONAL RESEARCH AND TRAINING

प्रथम संस्करण

फरवरी 2007 फाल्गुन 1928

पुनर्मुद्रण

नवंबर 2007, फरवरी 2009,

जनवरी 2010, दिसंबर 2010,

जनवरी 2014, फरवरी 2017,

दिसंबर 2017, जनवरी 2018,

सितंबर 2019, मार्च 2021

संशोधित संस्करण

अक्तूबर 2022 कार्तिक 1944

पुनर्मुद्रण

मार्च 2024 चैत्र 1946

दिसंबर 2024 अग्रहायण 1946

अप्रैल 2025, चौत्र 1947

जनवरी 2026, माध 1947

PD 5T BS

© राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, 2007, 2022

₹ 55.00

एन.सी.ई.आर.टी. वाटरमार्क 80 जी.एस.एम. पेपर पर मुद्रित।

प्रकाशन प्रभाग में सचिव, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, श्री अरविंद मार्ग, नयी दिल्ली 110 016 द्वारा प्रकाशित तथा एस.आर.जी. ट्रैंडर्स प्रा. लि., बी-41, सेक्टर-67, नोएडा - 201 301 (उ.प्र.) द्वारा मुद्रित।

सर्वाधिकार सुरक्षित

•
☐ प्रकाशक की पूर्व अनुमति के बिना इस प्रकाशन के किसी भाग को छापना तथा इलेक्ट्रीनिकी, मशीनी, फोटोप्रतिलिग, रिकॉर्डिंग अथवा किसी अन्य विधि से पुनः: प्रयोग पढ़ति द्वारा उसका संग्रहण अथवा प्रसारण वर्जित है।
•
☐ इस पुस्तक की बिक्री इस शर्त के साथ की गई है कि प्रकाशक की पूर्व अनुमति के बिना यह पुस्तक अपने मूल आवरण अथवा जिल्द के अलावा किसी अन्य प्रकार से व्यापार द्वारा उधारी पर, पुनर्विक्रय या किराए पर न दी जाएगी, न बेची जाएगी।
•
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एन.सी.ई.आर.टी. के प्रकाशन प्रभाग के

कार्यालय

एन.सी.ई.आर.टी. कैंपस

श्री अरविंद मार्ग

नयी दिल्ली 110 016 फोन : 011-26562708

108, 100 फीट रोड

हेली एक्सटेंशन, होस्डेकरे

बनाशंकरी III इस्टेज

बेंगलुरु 560 085 फोन : 080-26725740

नवजीवन ट्रस्ट भवन

डाकघर नवजीवन

अहमदाबाद 380 014 फोन : 079-27541446

सी.डब्ल्यू.सी. कैंपस

निकटः धनकल बस स्टॉप पनिहटी

कोलकाता 700 114 फोन : 033-25530454

सी.डब्ल्यू.सी. कॉम्प्लैक्स

मालीगाँव

गुवाहाटी 781 021 फोन : 0361-2674869

प्रकाशन सहयोग

अध्यक्ष, प्रकाशन प्रभाग : एम.वी. श्रीनिवासन

मुख्य संपादक : बिज्ञान सुतार

मुख्य व्यापार प्रबंधक : अमिताभ कुमार

मुख्य उत्पादन अधिकारी (प्रभारी): दीपक जैसवाल

संपादक : रेखा अग्रवाल

उत्पादन सहायक : मनोज कुमार

आवरण एवं सज्जा काटोंग्राफ़ी

ब्लूफिश कार्टोग्राफिक डिजाइन

एजेंसी, नयी दिल्ली

आमुख

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) सुझाती है कि बच्चों के स्कूली जीवन को बाहर के जीवन से जोड़ा जाना चाहिए। यह सिद्धांत किताबी ज्ञान की उस विरासत के विपरीत है जिसके प्रभाव बश हमारी व्यवस्था आज तक स्कूल और घर के बीच अंतराल बनाए हुए है। नयी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पर आधारित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें इस बुनियादी विचार पर अमल करने का प्रयास है। इस प्रयास में हर विषय को एक मजबूत दीवार से घेर देने और जानकारी को रटा देने की प्रवृत्ति का विरोध शामिल है। आशा है कि ये कदम हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) में वर्णित बाल-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में काफ्री दूर तक ले जाएँगे।

इस प्रयत्न की सफलता अब इस बात पर निर्भर है कि स्कूलों के प्राचार्य और अध्यापक बच्चों को कल्पनाशील गतिविधियों और सवालों की मदद से सीखने और सीखने के दौरान अपने अनुभवों पर विचार करने का अवसर देते हैं। हमें यह मानना होगा कि यदि जगह, समय और आज्ञादी दी जाए तो बच्चे बड़ों ढ्वारा सौपी गई सूचना-सामग्री से जुड़कर और जूझकर नए ज्ञान का सृजन करते हैं। शिक्षा के विविध साधनों एवं स्रोतों की अनदेखी किए जाने का प्रमुख कारण पाठ्यपुस्तक को परीक्षा का एकमात्र आधार बनाने की प्रवृत्ति है। सर्जना और पहल को विकसित करने के लिए जरूरी है कि हम बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में पूरा भागीदार मानें और बनाएँ, उन्हें ज्ञान की निर्धारित खुराक का ग्राहक मानना छोड़ दें।

ये उद्देश्य स्कूल की दैनिक जिंदगी और कार्यशैली में काफ्री फेरबदल की माँंग करते हैं। दैनिक समय-सारणी में लचीलापन उतना ही जरुरी है जितनी वार्षिक कैलंडर के अमल में चुस्ती, जिससे शिक्षण के लिए नियत दिनों की संख्या हकीकत बन सके। शिक्षण और मूल्यांकन की विधियाँ भी इस बात को तय करेंगी कि यह पाठ्यपुस्तक स्कूल में बच्चों के जीवन को मानसिक द्बाव तथा बोरियत की जगह खुशी का अनुभव बनाने में कितनी प्रभावी सिद्ध होती है। बोझ की समस्या से निपटने के लिए पाठ्यक्रम निर्माताओं ने विभिन्न चरणों में ज्ञान का पुनर्निर्धारण करते समय बच्चों के मनोविज्ञान एवं अध्यापन के लिए उपलब्ध समय का ध्यान रखने की पहले से अधिक सचेत कोशिश की है। इस कोशिश को और गहराने के यत्न में यह पाठ्यपुस्तक सोच-विचार और विस्मय, छोटे समूहों में बातचीत एवं बहस और हाथ से की जाने वाली गतिविधियों को प्राथमिकता दैती है।

एन.सी.ई.आर.टी. इस पुस्तक की रचना के लिए बनाई गई पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के परिश्रम के लिए कृतज्जता व्यक्त करती है। परिषद् सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर हरि वासुदेवन और इस पाठ्यपुस्तक समिति के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर एम. एच. कुरैशी की विशेष आभारी है। इस पाठ्यपुस्तक के विकास में कई शिक्षकों ने योगदान किया, इस योगदान को संभव बनाने के लिए हम उनके प्राचायों के आभारी हैं। हम उन सभी संस्थाओं और संगठनों के प्रति कृतज्ज हैं जिन्होंने अपने संसाधनों, सामग्री और सहयोगियों की मदद लेने में हमें उदारतापूर्वक सहयोग दिया। हम माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रोफेसर मृणाल मीरी एवं प्रोफेसर जी.पी. देशपांडे की अध्यक्षता में गठित निगरानी समिति (मॉनिटरिंग कमेटी) के सदस्यों को अपना मूल्यवान समय और सहयोग देने के लिए धन्यवाद देते हैं। व्यवस्थागत सुधारों और अपने प्रकाशनों में निरंतर निखार लाने के प्रति समर्पित एन.सी.ई.आर.टी. टिप्पणियों एवं सुझावों का स्वागत करेगी जिनसे भावी संशोधनों में मदद ली जा सके।

निदेशक

नयी दिल्ली

20 नवंबर 2006

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान

और प्रशिक्षण परिषद्

पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन

कोविड-19 महामारी को देखते हुए, विद्यार्थियों के ऊपर से पाठ्य सामग्री का बोझ कम करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भी विद्यार्थियों के लिए पाठ्य सामग्री का बोझ कम करने और रचनात्मक नज़रिए से अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करने पर जौर दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् ने सभी कक्षाओं में पाठ्यपुस्तकों को पुनर्सयोजित करने की शुरुआत की है। इस प्रक्रिया में रा.शै.अ.प्र.प. ढ्वारा पहले से ही विकसित कक्षावार सीखने के प्रतिफलों को ध्यान में रखा गया है।

पाठ्य सामग्रियों के पुनर्स्योजन में निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है-

•
एक ही कक्षा में अलग-अलग विषयों के अंतर्गत समान पाठ्य सामग्री का होना;
•
एक कक्षा के किसी विषय में उससे निचली कक्षा या ऊपर की कक्षा में समान पाठ्य सामग्री का होना;
•
कठिनाई स्तर;
•
विद्यार्थियों के लिए सहज रूप से सुलभ पाठ्य सामग्री का होना, जिसे शिक्षकों के अधिक हस्तक्षेप के बिना, वे खुद से या सहपाठ्यों के साथ पारस्परिक रूप से सीख सकते हों;
•
वर्तमान संदर्भ में अप्रासंगिक सामग्री का होना।

वर्तमान संस्करण, ऊपर दिए गए परिवर्तनों को शामिल करते हुए तैयार किया गया पुनर्स्योजित संस्करण है।

पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति

अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहकार समिति

हरि वासुदेवन, ग्रोफेसर, इतिहास विभाग, कलकता विश्वविद्यालय, कोलकाता

मुख्य सलाहकार

एम.एच. कुरैशी, प्रोफेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली

सलाहकार

एस.एम. राशिद, प्रोफेसर, जामिया मिल्लिया इसलामिया, नयी दिल्ली

सदस्य

आर. एन. व्यास, प्रोफेसर, सी.एस.एस.एच., मोहनलाल सुखाड़िा विश्वविद्यालय, उद्यपुर

एम. एच. कासमी, लेक्चरर, आई.ए.एस.ई., जामिया मिल्लिया इसलामिया, नयी दिल्ली

के.के. शर्मा, प्रिंसिपल (अवकाशप्राप्त), लोहिया महाविद्यालय, चुरु

शहाब फज्ञल, रीडर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़

सुचारिता सेन, एसोसिएट प्रोफेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली

हिंदी अनुवाद

अशोक दिवाकर, लेक्चरर, गवर्नमेंट पी. जी. कॉलेज, गुड़गाँव

के.के. शर्मा, प्रिंसिपल (अवकाशप्राप्त), लोहिया महाविद्यालय, चुरु

भावना मोहन, उत्तम नगर, नयी दिल्ली

सदस्य-समन्वयक

तनु मलिक, लेक्चरर, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, नयी दिल्ली

भारत का संविधान

उहेशिका

हम, भारत के लोग, भारत को एक ¹[संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य] बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को :

सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,

विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म

और उपासना की स्वतंत्रता ,

प्रतिष्ठा और अवसर की समता

प्राप्त कराने के लिए,

तथा उन सब में

व्यक्ति की गरिमा और ²[राष्ट्र की एकता

और अखंडता] सुनिश्चित करने वाली बंधुता

बढ़ाने के लिए

दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद्धारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

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आभार

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंघान तथा प्रशिक्षण परिषद् इस पुस्तक के विकास हेतु एच.रामाचंद्रन, प्रोफ्रेसर और अध्यक्ष, दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय, बी. एस. बुटोला, प्रोफ्रेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जे.एन.यू.; ओडिल्या कोटिनहो, रीडर, आर.पी.डी. कॉलेज, बेलगाम; अनुप सेकिया, रीडर, गौहाटी विश्वविद्यालय, गुवाहाटी; अब्दुल शाबान, असिस्टेंट प्रोफ्रेसर, टाटा इस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेस, मुंबई और रूपा दास, पी.जी.टी., डी. पी.एस. आर.के. पुरम, नयी दिल्ली के प्रति आभार व्यक्त करती है।

परिषद् सविता सिन्हा, प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग के प्रति भी अपनी कृतज्जता अर्पित करता हैं, जिन्होने प्रत्येक स्तर पर इस पाठ्य पुस्तक के निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग दिया।

परिषद् वीर सिंह आर्य, प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी (अवकाशप्राप्त), वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, भारत सरकार; नरेश कुमार बधमार, रीडर, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर; रंजन कुमार चौधरी, पी.जी.टी., गवर्नमेंट सहशिक्षा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खेड़ा डाबड़ा, नजफगढ़ का भी आभार व्यक्त करती है, जिन्होंने प्रत्येक स्तर पर इस पाठ्यपुस्तक के निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग दिया।

परिषद्, भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भी धन्यवाद देती है जिसने पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित मानचित्रों को प्रमाणित किया। परिषद् निम्न सभी व्यक्तियों एवं संगठनों का आभार व्यक्त करता है जिन्होंने इस पाठ्य-पुस्तक को सहज बनाने हेतु विभिन्न चित्र एवं अन्य पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाई-

एस. एम. राशिद, प्रोफेसर, जामिया मिल्लिया इसलामिया, नयी दिल्ली को चित्र 1.2, 1.3 एवं 1.4 के लिए; एम. एच. कासमी, लेक्चरर, आई.ए.एस.ई, जामिया मिल्लिया इसलामिया, नयी दिल्ली को चित्र 3.9, 3.10, 3.11 और 3.12 के लिए; शाहब फज़ल, रीडर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ को चित्र 4.8, 4.9, 4.10, 4.12 और 4.13 के लिए।

परिषद् अनिल शर्मा, नरगिस इस्लाम, गीता डी.टी.पी. ऑपरेटर; नेहाल अहमद, मनोज मोहन कॉपी एडीटर; उमेद सिंह गौड़ पूफ रीडर तथा दिनेश कुमार, कंप्यूटर इंचार्ज का भी पुस्तक को अंतिम रूप देने में सहायता करने के लिए आभार व्यक्त करती है। इसी संदर्भ में प्रकाशन प्रभाग, एन.सी.ई.आर.टी. का सहयोग भी प्रशंसनीय है।

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© भारत सरकार का प्रतिलिप्याधिकार, 2006
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आंतरिक विवरणों को सही दर्शने का दायित्व प्रकाशक का है।
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समुद्र में भारत का जलप्रदेश, उपयुक्त आधार-रेखा से मापे गए बारह समुद्री मील की दूरी तक है।
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चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के प्रशासी मुख्यालय चंडीगढ़ में है।
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इस मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के मध्य में दर्शाई गयी अंतरज्यीय सीमाएँ, उत्तरी पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम 1971 के निर्वाचनानुसार दर्शित है, परंतु अभी सत्यापित होनी है।
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भारत की बाहय सीमाएँ तथा समुद्र तटीय रेखाएँ भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा सत्यापित अभिलेख/प्रधान प्रति से मेल खाती है।
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इस मानचित्र में उत्तराखड एवं उत्तरप्रदेश, झारखंड एवं बिहार और छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के बीच की राज्य सीमाएँ संबंधित सरकारों द्वारा सत्यापित नहीं की गई है।
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इस मानचित्र में दर्शित नामों का अक्षरविन्यास विभिन्न सूत्रों द्वारा प्राप्त किया गया है।

विषय सुची

आमुख üü

पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन v

अध्याय 1

आंकड़े : स्त्रोत और संकलन 1 - 12

अध्याय 2

आंकडों का प्रक्रमण 13 - 22

अध्याय 3

आंकड़ों का आलेखी निरूपण 23-45

अध्याय 4

स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी 46 – 62

शब्दावली 63