भारत का संविधान - मूल अधिकार
भूगोल में
प्रयोगात्मक कार्य
भाग 1
कक्षा 11 के लिए पाठ्यपुस्तक



राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्
NATIONAL COUNCIL OF EDUCATIONAL RESEARCH AND TRAINING
11097 - भूगोल में प्रयोगात्मक कार्य ( भाग 1 )
कक्षा 11 के लिए पाठ्यपुस्तक
ISBN 81-7450-594-6
प्रथम संस्करण
जून 2006 आषाढ़ 1928
पुनर्मुद्रण
दिसंबर 2006, अक्तूबर 2007,
जनवरी 2009, जनवरी 2010,
दिसंबर 2010, जनवरी 2011,
जनवरी 2014, मार्च 2017,
अक्तूबर 2017, नवंबर 2017,
नवंबर 2018, जनवरी 2019 और
सितंबर 2019
संशोधित संस्करण
नवंबर 2022 कार्तिक 1944
पुनमुद्रण
मार्च 2024 चैत्र 1946
दिसंबर 2024 अग्रहायण 1946
मार्च 2026, फाल्गुन 1947
PD 25T+25T M
© राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, 2006, 2022
₹80.00
एन.सी.ईआर.टी. वाटरमार्क 80 जी.एस.एम. पेपर पर मुद्रित।
प्रकाशन प्रभाग में सचिव, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, श्री अरविंद मार्ग, नई दिल्ली 110 016 द्वारा प्रकाशित तथा ??????
सर्वाधिकार सुरक्षित
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अध्यक्ष, प्रकाशन प्रभाग : एम.वी.श्रीनिवासन
मुख्य संपादक : बिज्ञान सुतार
मुख्य व्यापार प्रबंधक : अमिताभ कुमार
मुख्य उत्पादन अधिकारी (प्रभारी) : दीपक जैसवाल
संपादक : रेखा अग्रवाल
सहायक उत्पादन अधिकारी : सायुराज ए.आर.
आवरण एवं सज्जा
श्वेता राव
काटोंग्राफी
नरेन्द्र कुमार सैनी एवं
काटोंग्राफ्किक डिज्ञाइन
एजेंसी, नई दिल्ली
आमुख
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) सुझाती है कि बच्चों के स्कूली जीवन को बाहर के जीवन से जोड़ा जाना चाहिए। यह सिद्धान्त किताबी ज्ञान की उस विरासत के विपरीत है जिसके प्रभावश हमारी व्यवस्था आज तक स्कूल और घर के बीच अन्तराल बनाये हुए है। नयी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पर आधारित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें इस बुनियादी विचार पर अमल करने का प्रयास हैं। इस प्रयास में हर विषय को एक मजबूत दीवार से घेर देने और जानकारी को रटा देने की प्रवृत्ति का विरोध शामिल है। आशा है कि ये कदम हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) में वर्णित बाल-केन्द्रित व्यवस्था की दिशा में काफ्री दूर तक ले जाएँगे।
इस प्रयत्न की सफलता अब इस बात पर निर्भर है कि स्कूलों के प्राचार्य और अध्यापक बच्चों को कल्पनाशील गतिविधियों और सवालों की मदद से सीखने और सीखने के दौरान अपने अनुभव पर विचार करने का अवसर देते हैं। हमें यह मानना होगा कि यदि जगह, समय और आजादी दी जाए तो बच्चे बड़ों द्वारा सौपी गई सूचना-सामग्री से जुड़कर और जूझकर नये ज्ञान का सृजन करते हैं। शिक्षा के विविध साधनों व स्रोतों की अनदेखी किये जाने का प्रमुख कारण पाठ्यपुस्तक को परीक्षा का एकमात्र आधार बनाने की प्रवृत्ति है। सर्जना और पहल को विकसित करने के लिए ज़रुरी है कि हम बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में पूरा भागीदार मानें और बनाएँ, उन्हें ज्ञान की निर्धारित खुराक का ग्राहक मानना छोड़ दें।
ये उद्देश्य स्कूल की दैनिक जिन्दगी और कार्यशैली में काफ़ी फेरबदल की माँंग करते हैं। दैनिक समय-सारणी में लचीलापन उतना ही जरूरी है जितना वार्षिक कैलेण्डर के अमल में चुस्ती, जिससे शिक्षण के लिए नियत दिनों की संख्या हकीकत बन सके। शिक्षण और मूल्यांकन की विधियाँ भी इस बात को तय करेंगी कि यह पाठ्यपुस्तक स्कूल में बच्चों के जीवन को मानसिक दबाव तथा बोरियत की जगह खुशी का अनुभव बनाने में कितनी प्रभावी सिद्ध होती है। बोझ की समस्या से निपटने के लिए पाठ्यक्रम निर्माताओं ने विभिन्न चरणों में झान का पुनर्निर्धारण करते समय बच्चों के मनोविज्ञान व अध्यापन के लिए उपलब्ध समय का ध्यान रखने की पहले से अधिक सचेत कोशिश की है। इस कोशिश को और गहराने के यत्न में यह पाठ्यपुस्तक सोच-विचार और विस्मय, छोटे समूहां में बातचीत व बहस, और हाथ से की जाने वाली गतिविधियों को प्राथमिकता देती है।
एन.सी.ई.आर.टी. इस पुस्तक की रचना के लिए बनाई गई पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के परिश्रम के लिए कृतज्ञता व्यक्त करती है। परिषद् सामाजिक विज्ञान सलाहकार समूह
iv
के अध्यक्ष प्रोफ्रेसर हरि वासुदेवन और इस पुस्तक के मुख्य सलाहकार प्रोफ्रेसर एम.एच. कुरैशी की विशेष आभारी है। इस पाठ्यपुस्तक के विकास में कई शिक्षकों ने योगदान दिया; इस योगदान को संभव बनाने के लिए हम उनके प्राचार्यों के आभारी हैं। हम उन सभी संस्थाओं और संगठनों के प्रति कृतज्ञ हैं जिन्होंने अपने संसाधनों, सामग्री और सहयोगियों की मदद लेने में हमें उदारतापूर्वक सहयोग दिया। हम माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ढ्वारा प्रोफ्रेसर मृणाल मीरी एवं प्रोफ्रेसर जी.पी. देशपांडे की अध्यक्षता में गठित निगरानी समिति (मॉनिटरिंग कमेटी) के सदस्यों को अपना मूल्यवान समय और सहयोग देने के लिए धन्यवाद देते हैं। व्यवस्थागत सुधारों और अपने प्रकाशनों में निरन्तर निखार लाने के प्रति समर्पित एन.सी.ई.आर.टी. टिप्पणियों एवं सुझावों का स्वागत करेगी जिनसे भावी संशोधनों में मदद ली जा सके।
नई दिल्ली
20 दिसंबर 2005
निदेशक
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान
और प्रशिक्षण परिषद्
पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्म्योजन
कोविड-19 महामारी को देखते हुए, विद्यार्थियों के ऊपर से पाठ्य सामग्री का बोझ कम करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भी विद्यार्थियों के लिए पाठ्य सामग्री का बोझ कम करने और रचनात्मक नज़रिए से अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करने पर जौर दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् ने सभी कक्षाओं में पाठ्यपुस्तकों को पुनर्स्योजित करने की शुरुआत की है। इस प्रक्रिया में रा.शै.अ.प्र.प. द्वारा पहले से ही विकसित कक्षावार सीखने के प्रतिफलों को ध्यान में रखा गया है।
पाठ्य सामग्रियों के पुनर्स्योजन में निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है -
वर्तमान संस्करण, ऊपर दिए गए परिवर्तनों को शामिल करते हुए तैयार किया गया पुनर्स्योजित संस्करण है।

पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति
अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहाकार समिति
हरि वासुदेवन, ग्रोफ्रेसर, इतिहास विभाग, कलकता विश्वविद्यालय, कोलकाता
मुख्य सलाहकार
एम.एच. कुरैशी, प्रोफ्रेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली
सदस्य
एस.एम. राशिद, प्रोक्रेसर, जामिया मिल्लिया इसलामिया, नयी दिल्ली
रूपा दास, पी.जी.टी., डी.पी.एस., आर. के. पुरम, नयी दिल्ली
बॉय. श्रीकांत, लैकचरर, शैक्षिक मापन एवं मूल्यांकन विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, नयी दिल्ली
सुचारिता सेन, असिस्टेंट प्रोफ्रेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली
हिन्दी अनुवाद
राजेश्वरी जागलान, लैक्चरर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र
स्पैक्ट्रम कम्यूनिकेशन्स, नयी दिल्ली
सदस्य-समन्वयक
तनु मलिक, लैक्चरर, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, नयी दिल्ली
भारत का संविधान उद्देशिका
हम, भारत के लोग, भारत को एक ¹[संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य] बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म
और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता
प्राप्त कराने के लिए,
तथा उन सब में
व्यक्ति की गरिमा और ²[राष्ट्र की एकता
और अखंडता] सुनिश्चित करने वाली बंधुता
बढ़ाने के लिए
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख
26 नवंबर, 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को
अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
आभार
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् इस पुस्तक के निर्माण में सहयोग देने हेतु मिलाप चंद शर्मा, रीडर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय; मुजम्मिल हुसैन क्रासमी, लैक्चरर, आई.ए.एस.ई., जामिया मिल्लिया इसलामिया; अरुणा गोर्डन, पी.जी.टी., सेंट थॉमस स्कूल, नयी दिल्ली एवं सी. पारगी, पी.जी.टी., केंद्रीय विद्यालय, नीमच के प्रति आभार व्यक्त करती है।
परिषद्, सविता सिन्हा, प्रोफ़ेसर एवं विभागाध्यक्ष (सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग) के प्रति भी अपनी कृतज्ञता अर्पित करती है, जिन्होंने प्रत्येक स्तर पर इस पाठ्यपुस्तक के निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग दिया।
परिषद् वीर सिंह आर्य, प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी (अवकाश प्राप्त), वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, भारत सरकार; के. के. शर्मा, प्रिसिपल (अवकाश प्राप्त), अजमेर; नरेश कुमार बघमार, रीडर, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर; डी.डी. चौनियाल, रीडर, एच.एन.वी. गढ़वाल वि. वि., श्रीनगर का भी आभार व्यक्त करती है, जिन्होंने प्रत्येक स्तर पर इस पाठ्यपुस्तक के निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग दिया।
परिषद् भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भी धन्यवाद देती है जिसने पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित मानचित्रों को प्रमाणित किया। परिषद् निम्न सभी व्यक्तियों एवं संगठनों का आभार व्यक्त करती है जिन्होंने इस पाठ्यपुस्तक को सहज बनाने हेतु विभिन्न आकृतियाँ एवं पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाई-
मिलाप चंद शर्मा, रीडर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को अध्याय 5 में मंद ढाल, खड़ा ढाल, अवतल ढाल, उत्तल ढाल, शंक्वाकार पहाड़ी, पठार, V-आकार की घाटी, U-आकार की घाटी, महाखड्ड, पर्वतस्कं, भृगु एवं जलप्रपात के चित्रों के लिए; नरेन्द्र कुमार सैनी, जामिया मिल्लिया इसलामिया को चित्र 1.1, 1.15 तथा 6.1 के लिए; कॉन्सेप्ट पब्लिशिंग कम्पनी (पुस्तक : फन्डामेन्टल्स ऑफ काटोंग्राफी; लेखक : आर.पी.मिश्रा एवं ए. रमेश) नयी दिल्ली को चित्र 1.4, 1.5 एवं 1.6 के लिए; एन.सी.ई.आर.टी. की पाठ्यपुस्तक (रिमोट सेन्सिंग; लेखक मीनाक्षी कुमार) को चित्र 6.3 एवं 6.6 के लिए; भारतीय सर्वेक्षण विभाग को चित्र 1.2 एवं 1.3 तथा पृष्ठ संख्या 62 एवं 64 पर स्थलाकृतिक शीट के भागों के लिए; राष्ट्रीय एटलस एवं थिर्मैटिक मानचित्रण संगठन को चित्र 1.7, 1.8 1.9, 1.10, 1.11, 1.12 एवं 1.12 के लिए; रीजनल रिमोट सेन्सिंग सर्विस सेन्टर, जोधपुर को चित्र 6.4 के लिए; नेशनल रिमोट सेन्सिंग एजेन्सी, हैदराबाद को चित्र 6.9, 6.11, 6.13, 6.14, 6.15, 6.16, 6.17 एवं पृष्ठ 87 पर बिम्ब के लिए; डिजिटल ग्लोब ऐजेन्सी को चित्र 6.10 के लिए।
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परिषद् पाठ्यपुस्तक के निर्माण में उल्लेखनीय सहयोग देने हेतु अनिल शर्मा, डी.पी.टी. ऑपरेटर; अरविन्द सारस्वत एवं सतीश झा, कॉपी एडिटर; आनन्द बिहारी वर्मा, प्रूफ रीडर; दिनेश कुमार, कंप्यूटर स्टेशन प्रभारी का भी हार्दिक आभार व्यक्त करती है। इसी संदर्भ में प्रकाशन विभाग, एन.सी.ई.आर.टी. का सहयोग भी प्रशंसनीय है।
निम्नलिखित बिंदु इस पुस्तक में इस्तेमाल करे गए भारत के मानचित्रों के लिए लागू हैं
© भारत सरकार का प्रतिलिप्याधिकार, 2006
विषय-सूची
आमुख iii
पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन v
अध्याय 1
मानचित्र का परिचय 1-15
अध्याय 2
मानचित्र मापनी 16-23
अध्याच 3
अक्षांश, देशांतर और समय 24-30
अध्याय 4
मानचित्र प्रक्षेप 31-44
अध्याय 5
स्थलाकृतिक मानचित्र 45-64
अध्याय 6
सुदूर संवेदन का परिचय 65-88
भारत का संविधान
भाग-3 (अनुच्छेद 12-35)
(अनिवार्य शर्तों, कुछ अपवादों और युक्तियुक्त निर्बंधन के अधीन)
ढ़वारा प्रदत्त
मूल अधिकार
समता का अधिकार
स्वातंत्र्य-अधिकार
शोषण के विरुद्ध अधिकार
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार
सांविधानिक उपचारों का अधिकार
- उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के निर्देश या आदेश या रिट द्ववारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित कराने का उपचार।
