भारत का संविधान - नागरिकों के मूल कर्तव्य
भारत
भौतिक पर्यावरण
कक्षा 11 के लिए पाठ्यपुस्तक


राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्
NATIONAL COUNCIL OF EDUCATIONAL RESEARCH AND TRAINING
11095 – भारत भौतिक पर्यावरण
कक्षा 11 के लिए पाठ्यपुस्तक
ISBN 81-7450-559-8
प्रथम संस्करण
अप्रैल 2006 वैशाख 1928
पुनर्मुद्रण
जनवरी 2007, नवंबर 2007
मार्च 2009, जनवरी 2010
दिसंबर 2010, जनवरी 2011
जून 2012, जून 2013
दिसंबर 2013, दिसंबर 2014
फरवरी 2016, दिसंबर 2016
जनवरी 2018, जनवरी 2019
जनवरी 2020
संशोधित संस्करण
नवंबर 2022 अग्रहायण 1944
पुनमुद्रण
मार्च 2024, चैत्र 1946
जून 2024, ज्येष्ठ 1946
फरवरी 2025, माघ 1946
अप्रैल 2026, चौत्र 1948
PD 50T BS
© राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, 2006, 2022
₹ 55.00
एन.सी.ई.आर.टी. वाटरमार्क 80 जी.एस.एम. पेपर पर मुद्रित।
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प्रकाशन सहयोग
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मुख्य व्यापार प्रबंधक : अमिताभ कुमार
मुख्य उत्पादन अधिकारी (प्रभारी) : दीपक जैसवाल
संपादक : नरेश यादव
सहायक उत्पादन अधिकारी : सायुराज ए.आर.
आवरण
श्वेता राव
चित्रांकन
दिलीप कुमार
काटोंग्राफी
काटोंग्राफ्पिक डिज्ञाइन्स एजेंसी
आमुख
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (2005) सुझाती है कि बच्चों के स्कूली जीवन को बाहर के जीवन से जोड़ा जाना चाहिये। यह सिद्धान्त किताबी ज्ञान की उस विरासत के विपरीत है जिसके प्रभावश हमारी व्यवस्था आज तक स्कूल और घर के बीच अन्तराल बनाये हुए है। नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पर आधारित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें इस बुनियादी विचार पर अमल करने का प्रयास हैं। इस प्रयास में हर विषय को एक मजबूत दीवार से घेर देने और जानकारी को रटा देने की प्रवृत्ति का विरोध शामिल है। आशा है कि ये कदम हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) में वर्णित बाल-केन्द्रित व्यवस्था की दिशा में काफ़ी ढूर तक ले जाएँगे।
इस प्रयत्न की सफलता अब इस बात पर निर्भर है कि स्कूलों के प्राचार्य और अध्यापक बच्चों को कल्पनाशील गतिविधियों और सवालों की मदद से सीखने और सीखने के दौरान अपने अनुभव पर विचार करने का अवसर देते हैं। हमें यह मानना होगा कि यदि जगह, समय और आज्ञादी दी जाए तो बच्चों बड़ों द्वारा सौपी गई सूचना-सामग्री से जुड़कर और जूझकर नये ज्ञान का सृजन करते हैं। शिक्षा के विविध साथनों व स्रोतों की अनदेखी किये जाने का प्रमुख कारण पाठ्यपुस्तक को परीक्षा का एकमात्र आधार बनाने की प्रवृत्ति है। सर्जना और पहल को विकसित करने के लिये ज्ञरूरी है कि हम बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में पूरा भागीदार मानें और बनाएँ, उन्हें ज्ञान की निर्धीरित खुराक का ग्राहक मानना छोड़ दें।
ये उद्देश्य स्कूल की दैनिक जिन्दगी और कार्यशैली में काफ़ी फेरबदल की माँग करत हैं। दैनिक समय-सारणी में लचीलापन उतना ही जरुरी है जितनी वार्षिक कैलेण्डर के अमल में चुस्ती, जिससे शिक्षण के लिये नियत दिनों की संख्या हकीकत बन सके। शिक्षण और मूल्यांकन की विधियाँँ भी इस बात को तय करेंगी कि यह पाठ्यपुस्तक स्कूल में बच्चों के जीवन को मानसिक दबाव तथा बोरियत की जगह खुशी का अनुभव बनाने में कितनी प्रभावी सिझ्ट होती है। बोझ की समस्या से निपटने के लिये पाठ्यक्रम निर्माताओं ने विभिन्न चरणों में ज्ञान का पुनर्निधारण करते समय बच्चों के मनोविज्ञान व अध्यापन के लिये उपलब्ध समय का ध्यान रखने की पहले से अधिक सचेत कोशिश की है। इस कोशिश को और गहराने के यत्न में यह पाठ्यपुस्तक सोच-विचार और विस्मय, छोटे समूहों में बातचीत व बहस, और हाथ से की जाने वाली गतिविधियों को प्राथमिकता देती है।
एन.सी.ई.आर.टी. इस पुस्तक की रचना के लिये बनाई गई पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के परिश्रम के लिए कृतज्जता व्यक्त करती है। परिषद् सामाजिक विज्ञान सलाहकार समूह के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर हरि वासुदेवन और इस पुस्तक की मुख्य सलाहकार प्रोफ़ेसर एम.एच. कुरेशी की विशेष आभारी है। इस पाठ्यपुस्तक के विकास में कई शिक्षकों ने योगदान दिया; इस योगदान को संभव बनाने के लिये हम उनके प्राचायों के आभारी हैं। हम उन सभी संस्थाओं और संगठनों के प्रति कृतज्ञ हैं जिन्होंने अपने संसाधनों, सामग्री और सहयोगियों की मदद लेने में हमें उदारतापूर्वक सहयोग दिया। हम माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रोफेसर मृणाल मीरी एवं प्रोफेसर जी.पी. देशपांडे की अध्यक्षता में गठित निगरानी समिति (माँनिटरिंग कमेटी) के सदस्यों को अपना मूल्यवान समय और सहयोग देने के लिए धन्यवाद देते हैं। व्यवस्थागत सुधारों और अपने प्रकाशनों में निरन्तर निखार लाने के प्रति समर्पित एन.सी.ई.आर.टी. टिप्पणियों व सुझावों का स्वागत करेगी जिनसे भावी संशोधनों में मदद ली जा सके।
नई दिल्ली
20 दिसंबर 2005
निदेशक
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान
और प्रशिक्षण परिषद
पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन
कोविड-19 महामारी को देखते हुए, विद्यार्थियों के ऊपर से पाठ्य सामग्री का बोझ कम करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भी विद्यार्थियों के लिए पाठ्य सामग्री का बोझ कम करने और रचनात्मक नज़रिए से अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करने पर जौर दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् ने सभी कक्षाओं में पाठ्यपुस्तकों को पुनर्स्योजित करने की शुरुआत की है। इस प्रक्रिया में रा.शै.अ.प्र.प. द्वारा पहले से ही विकसित कक्षावार सीखने के प्रतिफलों को ध्यान में रखा गया है।
पाठ्य सामग्रियों के पुनर्स्योजन में निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है -
वर्तमान संस्करण, ऊपर दिए गए परिवर्तनों को शामिल करते हुए तैयार किया गया पुनर्स्योजित संस्करण है।
पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति
अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सलाहाकार समिति
हरि वासुदेवन, प्रोफेसर, इतिहास विभाग, कलक्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता।
मुख्य सलाहकार
एम.एच. कुरेशी, प्रोफ्रेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली।
समिति
अपर्णा पांडे, लेक्चरर, सामाजिक विज्ञान शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, नयी दिल्ली। अशोक दिवाकर, लेक्चरर, गारमेन्ट कॉलेज, सेक्टर-9, गुडगाँव, हरियाणा।
बी. एस. बूटोला, प्रोफेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली।
बीना श्रीकुमार, पी.जी.टी., सीआरपीएफ पब्लिक स्कूल, नयी दिल्ली।
नूर मोहम्मद, प्रोफ़ेसर, दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली।
अनुवादक
अशोक दिवाकर, लेक्चरर, गारमेन्ट कॉलेज, सेक्टर-9, गुडगाँव।
महावीर सिंह जॉंगलान, रीडर, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र।
सदस्य समन्वयक
तनु मलिक, लेक्चरर, सामाजिक विज्ञान शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, नयी दिल्ली।
भारत का संविधान
उहेशिका
हम, भारत के लोग, भारत को एक ¹[संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य] बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म
और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता
प्राप्त कराने के लिए,
तथा उन सब में
व्यक्ति की गरिमा और ²[राष्ट्र की एकता
और अखंडता] सुनिश्चित करने वाली बंधुता
बढ़ाने के लिए
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
आभार
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, इस पुस्तक के विकास में सहयोग देने हेतु भगीरथी जिंगरान, अध्यापक, पाथवेज्ञ, वर्ल्ड स्कूल, गुड़गाँव; मृदा से संबंधित अध्याय में सूचनाएँ उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो ( आधीन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् ), भारत सरकार तथा सविता सिन्हा, प्रोफ्रेसर एवं विभागाध्यक्ष ( सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शिक्षा विभाग ) के प्रति भी अपनी कृतज्जता अर्पित करती है, जिन्होंने प्रत्येक स्तर पर इस पाठ्य पुस्तक के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया।
परिषद् बीर सिंह आर्य, प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी (अवकाश प्राप्त), वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार का भी आभार व्यक्त करती है जिन्होंने अनुवाद के पुनरीक्षण हेतु आयोजित कार्यशालाओं में भाग लिया और अपना बहुमूल्य योगदान दिया।
परिषद् भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भी धन्यवाद देती है जिसने पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित मानचित्रों को प्रमाणित किया। परिषद् निम्न सभी व्यक्तियों एवं संगठनों का आभार व्यक्त करती हैं जिन्होंने इस पाठ्यपुस्तक को सहज बनाने हेतु विभिन्न चित्र एवं अन्य पाठ्य सामाग्री उपलब्ध करवाई :- एम.एच. कुरैशी, प्रोफेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली को आकृति 5.4, 5.5 के लिए; बी. एस. भूटोला, प्रोफेसर, क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली को चित्र 6.1, 6.5, 6.7 एवं 6.9 के लिए; एम. बी. श्रीनवासन, लेक्चरर, डी.ई.एस.एस.एच, एन.सी.ई.आर.टी. को चित्र 6.3 के लिए; आई.टी.डी.सी/पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार को चित्र 2.1, 2.3, 2.5, 2.6, 2.7, 2.8, 3.1, 3.3, 4.4, 5.7 के लिए; वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार को चित्र 2.9, 5.1 एवं 5.6 के लिए; सामाजिक विज्ञान, पाठ्यपुस्तक, कक्षा-7, भाग-2, एन.सी.ई.आर.टी, 2005 को चित्र 5.3 के लिए एवं सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक, कक्षा-8, भाग-2, एन.सी.ई.आर.टी., 2005 को आकृति 2.10 के लिए।
परिषद् पाठ्यपुस्तक के निर्माण में उल्लेखनीय सहयोग देने हेतु अनिल शर्मा एंव गीता डी.टी.पी. ऑफरेटर; अरविन्द सारस्वत, कॉपी एडिटर; आनन्द बिहारी वर्मा, पूफ रीडर; दिनेश कुमार, कंप्यूटर स्टेशन प्रभारी का भी हार्दिक आभार व्यक्त करती है। इसी संदर्भ में प्रकाशन विभाग, एन.सी.ई.आर.टी. का सहयोग भी प्रशंसनीय है।
निम्नलिखित बिंदु इस पुस्तक में इस्तेमाल करे गए भारत के मानचित्रों के लिए लागू हैं
© भारत सरकार का प्रतिलिप्याधिकार, 2006
भारत का संविधान
भाग-3 (अनुच्छेद 12-35)
(अनिवार्य शर्तों, कुछ अपवादों और युक्तियुक्त निर्बंधन के अधीन)
द्वारा प्रदत्त
मूल अधिकार
समता का अधिकार
स्वातंत्र्य - अधिकार
शोषण के विरुद्ध अधिकार
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार
सांविधानिक उपचारों का अधिकार
- उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के निर्देश या आदेश या रिट द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित कराने का उपचार।
विषय सूची
आमुख iii
पाठ्यपुस्तकों में पाठ्य सामग्री का पुनर्स्योजन v
खंड I : प्रस्तावना 1-6
1. भारत - स्थिति 2
खंड II : भूआकृति विज्ञान 7-26
खंड III : जलवायु, वनस्पति एवं मृदा 27-51
खंड IV : प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ : 52-69
कारण, परिणाम तथा प्रबंध
6. प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ 53
शब्दावली 70-72
भारत का संविधान
भाग 4क
नागरिकों के मूल कर्तव्य
अनुच्छेद 51 क
मूल कर्तव्य - भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह -
